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घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत कार्रवाई में मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अधिकार हासिल नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
30 Oct 2019 10:06 AM GMT
घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत कार्रवाई में मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अधिकार हासिल नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
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घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत गुजारा राशि की मांग करने वाली याचिका को खारिज करने के बाद क्या कोई मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अधिकार हासिल करके भरण पोषण की राशि के भुगतान का आदेश दे सकता है?

पी राजकुमार बनाम योगा @योगलक्ष्मी मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यही मुद्दा विचारणीय था और अदालत ने इसका फैसला न में दिया है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 20 के तहत भरण पोषण की राशि के भुगतान की अपील खारिज कर दी थी। लेकिन इसी मामले में सीआरपीसी की धारा 125 के तहत लंबित एक अपील में भरण पोषण की राशि के भुगतान का आदेश सुना दिया, जबकि ऐसा करने का अधिकार उनके पास नहीं था।

मद्रास हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को सही बताया, जबकि पति की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की आलोचना की।

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इस एप्रोच को नकारते हुए न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और बीआर गवई की पीठ ने कहा,

"एक बार जब मजिस्ट्रेट ने भरण पोषण की राशि के भुगतान का आदेश देने से मना कर दिया, वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत इसके भुगतान का आदेश देने का अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता, जबकि यह मामला उसके समक्ष लंबित भी नहीं था और यह एक पूरी तरह स्वतंत्र कार्यवाही थी, जिसमें इसके ही तहत गुजारे की राशि की प्रत्यक्ष मांग की गई थी।


यह दोनों ही दो अलग-अलग कार्यवाही थी और मजिस्ट्रेट ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत जिस अधिकार का प्रयोग किया वह गलत था। प्रभावी रूप से, मजिस्ट्रेट ने जिस बात से प्रतिवादी को सीधे मना कर दिया, वही उन्होंने उसे अप्रत्यक्ष रूप से यह कहते हुए दे दिया की जब तक धारा 125 के तहत मामले का निर्णय नहीं हो जाता अपीलकर्ता प्रतिवादी को हर महीने 2000 रुपये का भुगतान करेगा। यह आदेश अधिकारक्षेत्र के बाहर है और इसीलिए अनुचित और टिकाऊ नहीं है।"

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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