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दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट में पुलिस ने की फायरिंग, वकील हुए घायल, बीसीआई ने किया कड़ा विरोध

LiveLaw News Network
2 Nov 2019 3:54 PM GMT
दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट में पुलिस ने की फायरिंग, वकील हुए घायल, बीसीआई ने किया कड़ा विरोध
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दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच शनिवार को जमकर विवाद हुआ और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस की गोलीबारी से वकील घायल हो गए। इस झड़प का कारण अदालत परिसर के भीतर पार्किंग विवाद को बताया जा रहा है। पुलिस ने वकीलों पर गोलियां चलाईं, जिसमें वकील घायल हुए।

इस घटना में कई वकील घायल हुए हैं और बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मामले का संज्ञान लिया है और अपने एक दल को अदालत में भेजने और उसमें मौजूद स्थिति का आकलन करने का फैसला किया है। बीसीआई ने दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस आयुक्त से भी अनुरोध किया है कि वे इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करें और दोषी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करें।

बीसीआई द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई :

"अधिवक्ताओं के खिलाफ तीस हजारी कोर्ट में पुलिस की क्रूर कार्रवाई पूरी तरह से बार के बर्दाश्त से बाहर है। हम दिल्ली पुलिस के उच्च पुलिस अधिकारियों से मांग करते हैं कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, उन्हें निलंबन के तहत रखा जाए। बार काउंसिल ऑफ इंडिया वकीलों के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है, जिसके परिणामस्वरूप वकीलों कार-पार्किंग के मुद्दे पर पुलिस द्वारा गोली चलाने से गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये और आपराधिक व्यवहार को साबित करता है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया स्थिति का जायजा लेने और आगे की कार्रवाई तय करने के लिए अपनी टीम भेज रही है। इस बीच, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने अधिवक्ताओं से शांति बनाए रखने और कानून को अपने हाथ में न लेने की अपील की है क्योंकि उनके प्रतिनिधि निकाय ने खुद इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया है।"

इस मामले को देखने के आश्वासन के साथ, परिषद ने अधिकारियों से घायल वकीलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का भी अनुरोध किया है

जय बिसवाल, तीस हजारी बार एसोसिएशन के पदाधिकारी ने कहा,

"एक पुलिस वाहन ने एक वकील के वाहन को टक्कर मार दी, जब वह अदालत में आ रहा था। जब वकील ने उनका सामना किया, तो उसका मजाक उड़ाया गया और छह पुलिस कर्मियों उसे अंदर ले गए और उसकी पिटाई की। लोग इसे देखा और पुलिस को बुलाया।"

जय बिस्वाल ने आगे कहा,

"एसएचओ और स्थानीय पुलिस आए लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। हमने उच्च न्यायालय को सूचित किया और छह न्यायाधीशों के साथ एक टीम वहां भेजी गई, लेकिन यहां तक ​​कि उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।" जब वकील वहां से जाने लगे तो तो पुलिस ने गोलियां चलाईं।"




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