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[बच्चे की कस्टडी पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका] सबसे महत्वपूर्ण विचार बच्चे की भलाई है, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
नाबालिग बच्चे की कस्टडी के मामले के संबंध में बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट जारी करते समय सबसे महत्वपूर्ण विचार, बच्चे की भलाई, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है। शीर्ष अदालत एक पिता द्वारा हाईकोर्ट की लगाई गईं शर्तों के खिलाफ अपील पर विचार कर रही थी जो उसे बच्चे को वापस संयुक्त राज्य अमेरिका ले जाने की अनुमति देते समय लगाई गई थीं। शर्त (ए) के लिए उसे बेंगलुरु के जिला स्वास्थ्य अधिकारी के रैंक के एक अधिकारी से एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता है जो यह प्रमाणित करे कि "यह देश", भारत COVID -19...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
पिछले सप्ताह (28 सितंबर 2020 से 1 अक्टूबर 2020) तक सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र.....अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बार और भाषण की स्वतंत्रता पर मौलिक हमला है: प्रशांत भूषण ने बीसीडी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया"मैं प्रस्तुत करता हूं कि बार काउंसिल को कानूनी पेशे के सदस्यों के अधिकारों के साथ एकजुटता में खड़ा होना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संज्ञान नहीं लेना चाहिए, जिसने बार सदस्यों और सामान्य नागरिकों की स्वतंत्रता, अधिकारों...
कोर्ट अभियुक्त के वादे से मुकर जाने के कारण मेरिट के आधार पर उसकी जमानत याचिका सुनने से इनकार नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई कोर्ट एक अभियुक्त की जमानत याचिका मेरिट के आधार पर सुनने से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं कर सकता कि वह वाद निपटारे के लिए पूर्व में किये गये प्रस्ताव पर अमल करने में विफल रहा था। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को दरकिनार कर दिया, जिसमें अभियुक्त की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी गयी थी कि वह वाद निपटारे के लिए किया गया अपना वायदा पूरा करने में विफल रहा था।यह मामला (जी. सेल्वकुमार बनाम...
2 करोड़ रुपये तक के एमएसएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋणों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफ किया जा सकता है : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को छह महीने की अधिस्थगन अवधि के दौरान 2 करोड़ रुपये तक के एमएसएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋणों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने के अपने फैसले से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया। भारत संघ ने प्रस्तुत किया कि "छोटे उधारकर्ताओं को संभालने की परंपरा" को जारी रखने का निर्णय लिया गया है और इसलिए, उसने "उधारकर्ताओं की सबसे कमजोर श्रेणी" के लिए उक्त अवधि के लिए ब्याज माफ कर दिया है ...• 2 करोड़रुपये तक का एमएसएमई ऋण• 2 करोड़ रुपये तक के शिक्षा ऋण• 2 करोड़ रुपये तक के आवास ऋण।• 2 करोड़...
'सतर्क प्रहरी' का सुप्रीम कोर्ट का मुहावरा जीर्ण हुआ हो सकता है, लेकिन जजों को सदैव इसका मूल्य खुद याद रखना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
"बदलते समय के बीच यह मुहावरा आलेखों, संगोष्ठियों और अब वेबिनारों की भरमार में जीर्ण हुआ हो सकता है।"इस कोर्ट का 'सतर्क प्रहरी' का मुहावरा जीर्ण हुआ हो सकता है, लेकिन यदि संवैधानिक चेतना को सार्थक बनाये रखना है, तो न्यायाधीशों को अपने पूर्ण कार्यकाल में खुद ही इसके मूल्य को सदैव याद रखना चाहिए। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को दिये गये एक फैसले में यह टिप्पणी की।न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह टिप्पणी अपने उस फैसले में की जिसके माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के श्रम एवं नियोजन...
हाथरस केस: बलात्कार को साबित करने के लिए पीड़िता के शरीर में वीर्य की मौजूदगी आवश्यक नहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा कानून के विपरीत
उत्तर प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि हाथरस की 19 वर्षीय दलित युवती के साथ बलात्कार नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि वारदात में आई चोटों के कारण युवती की हाल ही मौत हो गई थी।उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के परिणाम में मृतक युवती के शरीर पर वीर्य के नमूनों की मौजूदगी नहीं दिखी है।एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा, "एफएसएल की रिपोर्ट भी आ चुकी है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नमूनों में वीर्य नहीं थे। यह स्पष्ट करता है कि कोई बलात्कार या...
आईपीसी 306 के तहत दुराशय के होने का अनुमान नहीं बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए, SC ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोषी करार पति को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आत्महत्या के लिए उकसाने [धारा 306 आईपीसी] की सामग्री को जाहिर तौर पर होने के अनुमान के तहत नहीं माना जा सकता बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने एक ऐसे पति की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है, जिस पर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था।गुरचरण सिंह को अपनी पत्नी की आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया था। सिंह पर उनके माता-पिता के साथ आईपीसी की धारा 34 के तहत पढ़ी गई धारा 304 बी और 498 ए...
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नया रोस्टर, 5 अक्टूबर से होगा प्रभावी
नए रोस्टर के अनुसार, जनहित याचिकाओं और पत्र याचिकाओं को CJI, जस्टिस रमाना, जस्टिस नरीमन, जस्टिस ललित, जस्टिस खानविलकर, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस नागेश राव की अध्यक्षता वाली बेंचों द्वारा निपटाया जाना है। चुनाव के मामले, सामाजिक न्याय के मामले और हैबियस कॉर्पस को सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा ही निपटाया जाएगा।CJI और न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ अदालती मामलों को देखेगी।जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की...
सरकारी वकील का विवरण पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने आतंक-निरोधक कानून यूएपीए के तहत अभियुक्त की जमानत मंजूर की
सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत ट्रायल का सामना कर रहे जोधपुर निवासी एक अभियुक्त की विशेष अनुमति याचिका बुधवार को मंजूर कर ली। उस पर संदिग्ध आतंकी को भागने में मदद करने के आरोप है। न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की खंडपीठ ने यह कहते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के ब्योरे पर भरोसा करके त्रुटि की है।बेंच ने कहा, "हम संतुष्ट हैं कि हाईकोर्ट का यह फैसला कि...
(हाथरस क्रूरता) "कानून के शासन में विश्वास को आश्वस्त कीजिये": महिला वकीलों ने सीजेआई को पत्र लिखकर आरोपी को सख्त और तेजी से संभव सजा सुनिश्चित करने की मांग की
महिला अधिवक्ताओं के एक समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हाथरस बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपी को सख्त और त्वरित संभव सजा सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय की निगरानी वाली जांच और मुकदमे का गठन करने की मांग की है। समूह ने इस मामले में तथ्यों और सबूतों में हेरफेर करने की कोशिश करने वाले सभी दोषी पुलिस, प्रशासनिक और यहां तक कि चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ तत्काल जांच और निलंबन या कोई दंडात्मक कार्रवाई करने की मांगा की है।साथ ही पत्र में मांग की गई है कि:- पर्याप्त संस्थागत...
अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बार और भाषण की स्वतंत्रता पर मौलिक हमला है: प्रशांत भूषण ने बीसीडी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया
"मैं प्रस्तुत करता हूं कि बार काउंसिल को कानूनी पेशे के सदस्यों के अधिकारों के साथ एकजुटता में खड़ा होना चाहिए, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संज्ञान नहीं लेना चाहिए, जिसने बार सदस्यों और सामान्य नागरिकों की स्वतंत्रता, अधिकारों और गरिमा को गंभीर रूप से बाधित और निरस्त किया है।"उक्त टिप्पणी एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दिल्ली बार काउंसिल की ओर से भेजे गए पत्र के जवाब में की है। पत्र में पूछा गया था कि स्वतः संज्ञान अवमानना मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद प्रशांत भूषण के खिलाफ कार्यवाही क्यों न...
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा स्थगित नहीं की जा सकती, सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को दिया निर्देश लास्ट चांस वाले कैंडिडेट को एक अतिरिक्त मौका देने पर विचार करें
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है,जिसमें COVID19 महामारी के मद्देनजर संघ लोक सेवा परीक्षा (यूपीएससी) 2020 को स्थगित करने की मांग की गई थी।यह परीक्षा 4 अक्टूबर, 2020 आयोजित की जानी है। जस्टिस एएम खानविल्कर, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने परीक्षा को स्थगित करने से इनकार कर दिया है। वहीं यूपीएससी के साथ-साथ केंद्र को भी निर्देश जारी किया है कि जिन उम्मीदवारों का यूपीएससी की परीक्षा देने का यह लास्ट चांस या अंतिम प्रयास है,उनको वे ऊपरी आयु-सीमा का विस्तार...
[ब्रेकिंग] COVID-19 सार्वजनिक आपातकाल नहीं : SC ने बिना ओवरटाइम फैक्टरी एक्ट के तहत श्रमिकों के काम के घंटे बढ़ाने की अधिसूचना रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात श्रम और रोजगार विभाग द्वारा गुजरात में सभी कारखानों को फैक्ट्रियों अधिनियम, 1948 की धारा 59 के प्रावधानों से छूट प्रदान करने से संबंधित उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें दैनिक कामकाज के घंटे, साप्ताहिक काम के घंटे, आराम के लिए अंतराल और वयस्क श्रमिकों के विस्तार के अलावा दोगुनी दरों पर ओवरटाइम मज़दूरी के भुगतान से छूट दी गई थी। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा है कि महामारी की स्थिति वैधानिक प्रावधानों को दूर...
सामान्य इरादे के आधार पर दोषी ठहराने के लिए अभियुक्त को हमले की शारीरिक गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल होना आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह आवश्यक नहीं है कि सामान्य इरादे के आधार पर दोषी ठहराने के लिए एक अभियुक्त को हमले की शारीरिक गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। एक विशेष परिणाम को लाने के लिए एक सामान्य इरादा भी किसी विशेष मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से अलग-अलग व्यक्तियों के बीच मौके पर विकसित हो सकता है, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की तीन न्यायाधीशों वाली बेंच ने कहा।अदालत हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए तीन आरोपियों द्वारा दायर अपील पर विचार कर...
सजा की अवधि या मूल अपराध की गंभीरता, समय से पहले रिहाई से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट
सजा की अवधि या मूल अपराध की गंभीरता, समय से पहले रिहाई से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने दो दोषियों की प्रोबेशन यानी परिवीक्षा पर रिहाई का निर्देश देते हुए टिप्पणी की। न्यायमूर्ति एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि रिहाई पर अपराध करने की पूर्वधारणा के बारे में कोई भी आकलन जेल में रहते हुए कैदियों के आचरण के साथ-साथ पृष्ठभूमि पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल उनकी उम्र या पीड़ितों और गवाहों की आशंकाओं पर। विकी और सतीश फिरौती के लिए अपहरण के...
[CrPC 406] साक्ष्य देने से पहले ही न्यायिक अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर आपराधिक मामले को ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दिया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 406 के तहत साक्ष्य देने से पहले ही न्यायिक अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर आपराधिक मामले को ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन ने कहा (i) कि न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा "अपराध" या "अपराधी" के साथ-साथ ट्रायल के क्षेत्राधिकार का मुद्दा साक्ष्य के माध्यम से स्थापित तथ्यों पर निर्भर करता है, (ii) यदि एक मुद्दा प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के अनुसार है, संहिता की 177 से 184 की धारा में उल्लिखित...
हाथरस गैंगरेप केस : सुप्रीम कोर्ट में CBI/SIT से जांच की याचिका, केस को हाथरस से ट्रांसफर करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है जिसमें कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के हाथरस में उच्च-जाति के चार पुरुषों द्वारा 19 वर्षीय दलित लड़की के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो या एक विशेष जांच दल द्वारा की मांग की गई है। याचिका में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने में राज्य सरकार की विफलता आरोप लगाया गया है और केस को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, 14 सितंबर को, एक 19 वर्षीय दलित लड़की का अपहरण कर लिया...
हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामला: पुलिस ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ जारी किया नोटिस, घर में रहने का दिया आदेश
भीम आर्मी प्रमुख चंद्र शेखर आजाद को पुलिस ने नोटिस जारी किया है और उन्हें अपने घर में रहने की आदेश दिया गया है।सहारनपुर स्थित फतेहपुर थाना की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है, "जनपद में धार 144 लागू है। विश्वसनीय सूत्रों से संज्ञान में आया है कि आपके भ्रमण तथा आचरण से भीड़ एकत्र हो रही है, जिससे जनसामान्य में शांतिभंग का खतरा है। किसी अप्रिय घटना की आशंका है। अतः आपको अवगत कराना है कि वर्तमान में आप आने घर में ही मौजूद रहेंगे।"उल्लेखनीय है कि हाथरस में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई दलित युवती...

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