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जस्टिस सुधांशु धूलिया को धन्यवाद का एक खुला पत्र
प्रिय जज महोदय, आज आपकी औपचारिक पीठ पर बोलने का मौका चूक गया, लेकिन मैं यह कहे बिना पर्दा नहीं गिरा सकता। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में आपके कार्यकाल के बाद से, मुझे आपके समक्ष कई बार उपस्थित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।असम मदरसा मामले के दौरान, मैंने उस व्यक्ति को देखा, जो जज के लिबास में था। जब मेरी मां का मुकदमे के बीच में ही निधन हो गया, तो आपने चुपचाप बैठकों का क्रम बदल दिया ताकि मैं बिना किसी कष्ट के शोक की रस्में पूरी कर सकूं। यह उस तरह का कार्य नहीं है जो किसी कानूनी...
रजिस्टर्ड सोसाइटी के खिलाफ 'कंस्ट्रक्टिव ट्रस्ट' के रूप में S. 92 CPC का मुकदमा कब चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांतों की व्याख्या की
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक फैसले (ऑपरेशन आशा बनाम शैली बत्रा एवं अन्य) में सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 से संबंधित सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया और उन परिस्थितियों की व्याख्या की जिनमें किसी पंजीकृत सोसाइटी को 'कंस्ट्रक्टिव ट्रस्ट' माना जा सकता है ताकि उसके खिलाफ धारा 92 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सके। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ की ओर से दिए गए निर्णय में निष्कर्षों का सारांश इस प्रकार है:i. CPC की धारा 92 के अंतर्गत दायर किया गया मुकदमा एक विशेष...
अगर कोई संविधान से धर्मनिरपेक्षता को हटाने की कोशिश करता है तो यह बहुत बड़ी शरारत करना होगा: जस्टिस केएम जोसेफ
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि अगर कोई संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्षता शब्द को हटाने की कोशिश करता है तो यह शरारत होगी। उन्होंने आगे कहा कि संविधान के तहत भारत वैसे भी एक धर्मनिरपेक्ष देश है।एर्नाकुलम के सरकारी लॉ कॉलेज में लेक्चर सीरीज के तहत बोलते हुए जस्टिस जोसेफ ने कहा कि समस्याएं धर्मों से नहीं, बल्कि राजनेताओं द्वारा सत्ता हासिल करने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति से उत्पन्न होती हैं।जस्टिस जोसेफ ने कहा,"असली समस्या यह है कि राजनेता धर्म का...
CPC की धारा 80 का नोटिस न देने पर डिक्री रद्द हो जाती है, निष्पादन न्यायालय शून्यता की दलील पर विचार करने के लिए बाध्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि डिक्री के 'शून्य' होने का तर्क निष्पादन के चरण में उठाया जा सकता है और निष्पादन न्यायालय गुण-दोष के आधार पर उस पर निर्णय लेने के लिए बाध्य है।न्यायालय ने कहा,"CPC की धारा 47 के अनुसार, निष्पादन न्यायालय को डिक्री के निष्पादन, निर्वहन या संतुष्टि से संबंधित प्रश्नों की जाँच करने का अधिकार है। वह डिक्री से आगे नहीं जा सकता; लेकिन साथ ही, जब यह दलील दी जाती है कि डिक्री शून्य है। इसलिए लागू नहीं की जा सकती तो निष्पादन न्यायालय ऐसे आवेदन की जांच करने और उसके...
सत्ताधारी दल के क़रीबी होने की आलोचना को लेकर जस्टिस अभय एस ओक ने न्यायपालिका और मीडिया की स्वतंत्रता पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभय ओक ने शुक्रवार को कहा कि इस आलोचना से बचने के लिए कि आजकल मीडिया और न्यायपालिका सत्ताधारी दल के प्रति झुकाव रखते हैं, लोकतंत्र के दोनों स्तंभों को निडर और स्वतंत्र होना होगा।जज ने मुंबई प्रेस क्लब में "सरकार को जवाबदेह ठहराना: एक स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस की भूमिका" विषय पर अपने व्याख्यान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में मीडिया और अदालतों की भूमिका के बारे में बात की और प्रेस के गिरते मानकों और न्यायपालिका की आलोचना पर भी बात की।जस्टिस ओक...
न्यायपालिका में आम आदमी का विश्वास बनाए रखने के लिए हमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए: जस्टिस सुधांशु धूलिया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित अपने विदाई समारोह में जस्टिस सुधांशु धूलिया ने आज कहा कि आम आदमी के विश्वास ने ही न्यायपालिका को जीवित रखा है और जजों के साथ-साथ वकीलों को भी उस विश्वास को बनाए रखने के लिए अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।उन्होंने कहा,"आम आदमी के विश्वास ने न्यायपालिका को जीवित रखा। वकील स्वतंत्रता संग्राम में सबसे आगे थे। वकीलों को साहस के साथ बोलना चाहिए, निडर होना चाहिए। इस देश के लोग हमारी ओर आशा भरी नज़रों से देखते हैं। हमें अपना विश्वास बनाए रखने के लिए अपना...
सुप्रीम कोर्ट ने SCLSC अध्यक्ष से SCLSC के स्थायी कर्मचारियों द्वारा एससी रजिस्ट्री कर्मचारियों के समान वेतन-समानता की मांग पर विचार करने का अनुरोध किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक रिट याचिका का निपटारा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति (SCLSC) के स्थायी कर्मचारियों ने अन्य कर्मचारियों के समान वेतन-समानता की मांग की थी। इस याचिका का निपटारा SCLSC के अध्यक्ष, जस्टिस विक्रम नाथ से अनुरोध के साथ किया गया कि वह ऐसे कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व पर विचार करें और इस मामले में उचित निर्णय लें।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष SCLSC के स्थायी कर्मचारी याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें अन्य आउटसोर्स या संविदा...
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से JSW-BPSL के फैसले में की गई टिप्पणी बरकरार रखने का अनुरोध किया
भूषण पावर एंड स्टील दिवाला मामले की सुनवाई के दौरान, BPSL के लेनदारों की समिति की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से 5 मई के फैसले में की गई इस टिप्पणी को बरकरार रखने का अनुरोध किया कि NCLAT/NCLT को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा करने का कोई अधिकार नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (BPSL) के लिए JSW स्टील की समाधान...
सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया की सुरक्षा जांच की मांग वाली याचिका खारिज की, पूछा – सिर्फ एयर इंडिया ही क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एयर इंडिया की सुरक्षा जांच, रखरखाव प्रक्रियाओं और संचालन संबंधी नियमों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह याचिका अहमदाबाद विमान दुर्घटना के बाद दायर की गई थी, जिसमें 270 लोगों की जान चली गई थी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिका को "वापस ली गई" के रूप में खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को उचित समय पर उपयुक्त रिट याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी।जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,"थोड़ा इंतज़ार...
सैफ अली खान भोपाल नवाब वारिस मामला: सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता सैफ अली खान के पूर्वज और भोपाल के अंतिम शासक नवाब हमीदुल्ला खान की निजी संपत्ति से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद को नये सिरे से सुनवाई के लिये वापस निचली अदालत में भेजने के मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंदुरकर की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30 जून, 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली दिवंगत नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान के बड़े भाई के उत्तराधिकारियों उमर और राशिद अली द्वारा दायर याचिका पर...
'औपनिवेशिक राजद्रोह कानून की वापसी': सुप्रीम कोर्ट में धारा 152 BNS की संवैधानिकता को चुनौती
सुप्रीम कोर्ट ने आज (8 अगस्त) BNS की धारा 152 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की।चीफ़ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की खंडपीठ ने याचिका में नोटिस जारी किया और इसे एक लंबित मामले के साथ जोड़ दिया, जिसमें इसी प्रावधान को चुनौती दी गई है। यह रिट याचिका एस.जी. वोंबटकेरे (सेवानिवृत्त मेजर जनरल, भारतीय सेना) द्वारा दायर की गई है, जिन्होंने इससे पहले एस.जी. वोंबटकेरे बनाम भारत संघ, WP (Civil) No. 682/2021 में IPC की धारा...
'हाईकोर्ट ने समय से पहले दखल दिया': PMLA मामले में कार्ती चिदंबरम के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई टालने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने चीनी वीजा और एयरसेल मैक्सिस मामलों से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम की कार्यवाही में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम् बरम के खिलाफ आरोपों पर दलीलें स् थगित करने के दिल्ली हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ ED की याचिका पर आज नोटिस जारी किया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने ED के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया , जिन्होंने सवाल किया कि पीएमएलए मुकदमे को विधेय अपराध में आरोप तय किए जाने का इंतजार क्यों करना चाहिए। सबसे पहले,...
सुप्रीम कोर्ट असली हिंदुस्तान है, जहां वकील देश के हर कोने से आते हैं: जस्टिस सुधांशु धूलिया का विदाई संबोधन
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया 9 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने अपने विदाई समारोह में कहा कि सुप्रीम कोर्ट असल में हिंदुस्तान है, जहां की विविधता और समावेशिता पूरे देश की पहचान को दर्शाती है।जस्टिस धूलिया ने कहा,"सुबह मेरी पत्नी ने पूछा कि आपको सबसे ज्यादा किस चीज़ की कमी महसूस होगी। मैंने कहा 'हिंदुस्तान' की। वह सोचने लगी कि शायद मैं अपनी समझ खो रहा हूं। मेरे कहने का मतलब था सुप्रीम कोर्ट बार। यह शायद दुनिया की एकमात्र अदालत है, जहां देश के हर कोने से हर राज्य से वकील आते हैं। यही...
सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र गाडलिंग की ज़मानत याचिका पर जल्द सुनवाई पर सहमति जताई
सुप्रीम कोर्ट ने दलित सोशल एक्टिविस्ट और एडवोकेट सुरेंद्र गाडलिंग की 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में UAPA के तहत कथित माओवादी संबंधों के आरोप में ज़मानत याचिका पर जल्द सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।गाडलिंग की ओर से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया।उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका 2023 से लंबित है और गाडलिंग 6 साल से ज़्यादा समय से...
Banke Bihari Temple | अध्यादेश की वैधता पर हाईकोर्ट के निर्णय लिए जाने तक समिति को निलंबित करने का आदेश पारित किया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 के तहत समिति के संचालन को निलंबित करने का आदेश पारित करेगा, जिसे मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन सौंपा गया है।न्यायालय ने कहा कि वह अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में भेजेगा और जब तक हाईकोर्ट इस मामले का निर्णय नहीं ले लेता, समिति को स्थगित रखा जाएगा। न्यायालय ने कहा कि इस बीच मंदिर के सुचारू प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए वह एक अन्य समिति का...
BREAKING| चीफ जस्टिस के अनुरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जज को आपराधिक क्षेत्राधिकार से हटाने का निर्देश वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट ने एक असामान्य घटनाक्रम में शुक्रवार (8 अगस्त) को 4 अगस्त को पारित अपने अभूतपूर्व आदेश को वापस ले लिया। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज को उनकी रिटायरमेंट तक आपराधिक क्षेत्राधिकार से हटा दिया जाना चाहिए और उन्हें एक अनुभवी सीनियर जज के साथ बैठाया जाना चाहिए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार द्वारा पारित आदेश पर आपत्ति जताते हुए यह असामान्य आदेश पारित किया था, जिसमें आपराधिक शिकायत को इस आधार...
सुप्रीम कोर्ट ने 'रितु छाबरिया' मामले में CBI की पुनर्विचार याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने रितु छाबरिया बनाम भारत संघ व अन्य मामले में 2023 के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले में कहा गया था कि अधूरी चार्जशीट दाखिल करने से अभियुक्त के डिफ़ॉल्ट ज़मानत मांगने का अधिकार समाप्त नहीं होगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस एमएम सुंदरेश की खंडपीठ ने चैंबर में पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा,"हमें पुनर्विचार याचिका पर विचार करने का कोई उचित कारण नहीं दिखता।"रितु छाबरिया मामले में 26 अप्रैल,...
क्या केवल एक उम्मीदवार वाले चुनावों में मतदाताओं को NOTA का विकल्प नहीं दिया जा सकता? सुप्रीम कोर्ट ने ECI से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने कल निर्विरोध चुनावों (अर्थात बिना मतदान के) में उम्मीदवारों के प्रत्यक्ष निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सवाल करते हुए पूछा, "यदि एक ही उम्मीदवार है, लेकिन मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा NOTA (इनमें से कोई नहीं) के माध्यम से उसे निर्वाचित नहीं देखना चाहता तो क्या उनकी 'अदृश्य इच्छा' को पराजित होने दिया जाना चाहिए?"जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53(2) और चुनाव संचालन नियम, 1961 के...
'माँ' का जैविक माँ होना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने IAF से सौतेली माताओं को पारिवारिक पेंशन से बाहर रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया
भारतीय वायुसेना (IAF) द्वारा सौतेली माँ को पेंशन लाभ देने से इनकार करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा कि पेंशन योजना जैसे कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए 'माँ' शब्द एक स्थिर शब्द नहीं होना चाहिए। बता दें, उक्त याचिकाकर्ता ने अपने मृतक अधिकारी पुत्र का 6 साल की उम्र से पालन-पोषण किया थान्यायालय ने कहा कि किसी मामले को उसके विशिष्ट तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वास्तव में बच्चे के जीवन में माँ की भूमिका किसने निभाई और लाभ को केवल जैविक माताओं तक सीमित नहीं...
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ एकजुट हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, चीफ जस्टिस से की यह मांग
एक सशक्त और अभूतपूर्व कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के कम-से-कम 13 जजों ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर उनसे फुल कोर्ट बुलाने का आग्रह किया ताकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 4 अगस्त को जारी किए गए कुछ निर्देशों को लागू न करने पर विचार किया जा सके, जिसमें जस्टिस प्रशांत कुमार की रिटायरमेंट तक उनकी आपराधिक सूची हटा दी गई थी।पत्र में निम्नलिखित प्रस्ताव पर विचार करने का अनुरोध किया गया:"फुल कोर्ट यह प्रस्ताव पारित करे कि 4 अगस्त, 2025 के विषयगत आदेश के अनुच्छेद 24 से 26 में दिए गए निर्देशों का...


















