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जमानत देने पर न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चेतावनी देना पर्याप्त होता
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के रिटायर न्यायिक अधिकारी के खिलाफ जमानत देने के मामले में शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रद्द की।बता दें, अधिकारी ने दो आरोपियों को उस समय जमानत दी थी, जब उनकी पिछली जमानत याचिकाएं राजस्थान हाईकोर्ट खारिज कर चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की विशिष्ट परिस्थितियों में अनुशासनात्मक जांच शुरू करने की जरूरत नहीं थी। अधिकारी को भविष्य में सावधानी बरतने की सलाह देना या चेतावनी देना पर्याप्त होता। जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस देवेंद्र कुमार...

दिल्ली प्रदर्शन मामले में सरकार की माफी पर 'भ्रामक' खबरों से SG तुषार मेहता नाराज, सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई
दिल्ली में प्रदर्शनों से जुड़े मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में उन मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई, जिनमें दावा किया गया कि सरकार ने अपने आचरण के लिए अदालत से माफी मांग ली है और अब उसके पास कहने के लिए कुछ नहीं है।मेहता ने कहा कि सरकार के हलफनामों में बिना शर्त माफी का उल्लेख कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया, लेकिन रिपोर्टों में इस संदर्भ को नजरअंदाज कर दिया गया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान मेहता ने...

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत, SC/ST मामले में दंडात्मक कार्रवाई पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज SC/ST Act के मामले में अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान एसीपी ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया और उसे धक्का दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया, जिन्हें पत्रकार...

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले में अधिकारियों ने विवेक का इस्तेमाल किया या नहीं: सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच, नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और दिल्ली में प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान अधिसूचित करने के दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।कोर्ट ने कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का निर्णय लेते समय संबंधित अधिकारियों ने सभी पहलुओं पर विचार किया या नहीं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने 11 अक्टूबर के दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर...

महाराष्ट्र SIR को चुनौती देने वाली याचिका राहुल गांधी की याचिका के साथ सूचीबद्ध करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- राज्यवार मुद्दों पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिका को राहुल गांधी की याचिका के साथ सूचीबद्ध करने से इनकार किया।गुरुवार, 15 अक्टूबर को मामले का उल्लेख चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष किया गया। इस दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि वह SIR से जुड़े मुद्दों पर सामान्य रूप से नहीं, बल्कि प्रत्येक राज्य के संदर्भ में अलग-अलग विचार करना चाहता है। महाराष्ट्र में SIR को चुनौती देने वाली याचिका में आरोप...

राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए भेजा विवाद, 2 करोड़ रुपये जमा करने के बाद पासपोर्ट जारी करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों में विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया।एक्टर ने इन मामलों में अपनी दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को चुनौती दी। कोर्ट ने यह कदम तब उठाया, जब उसने पाया कि राजपाल यादव कोर्ट की रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा करा चुके हैं। पीठ ने दोनों पक्षों से आपसी सहमति के आधार पर विवाद सुलझाने की संभावनाएं तलाशने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने शिकायतकर्ता कंपनी से कहा कि अब विवाद का समाधान करने की कोशिश...

भर्ती विज्ञापन में योग्यता की शर्त अस्पष्ट हो तो उम्मीदवार के पक्ष में होगा उसका अर्थ: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में निर्धारित पात्रता या योग्यता की शर्तों में अस्पष्टता होने पर उसका अर्थ ऐसे उम्मीदवार के पक्ष में लगाया जाना चाहिए, जो प्रथम दृष्टया आवश्यक योग्यता रखता हो।कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसमें भर्ती विज्ञापन में अनुभव संबंधी शर्तों की अस्पष्टता के बावजूद एक उम्मीदवार को लाइब्रेरियन के पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्य ठहराया गया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ ने...

NEET-PG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों को वास्तविक प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर उपलब्ध कराने की मांग पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG 2026 की उत्तर कुंजी और उम्मीदवारों के जवाबों के खुलासे के तरीके को चुनौती देने वाली याचिका पर 15 अक्टूबर को नोटिस जारी किया।याचिका में मांग की गई है कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) प्रत्येक उम्मीदवार को परीक्षा में वास्तव में पूछे गए प्रश्न, विकल्पों का पूरा विवरण, उम्मीदवार के दर्ज जवाब और अंतिम उत्तर कुंजी के अनुसार सही उत्तर उपलब्ध कराए, ताकि वह अपने अंकों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर सके। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने...

प्रदर्शन पर पाबंदियों के बचाव में दिल्ली पुलिस ने गिनाए CJP के पुराने उल्लंघन, कहा- कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए जरूरी है कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम राजधानी में कानून-व्यवस्था का गंभीर संकट रोकने के लिए जरूरी है।पुलिस ने प्रदर्शन आयोजक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पुराने प्रदर्शनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पहले भी अनुमति की शर्तों का उल्लंघन किया गया था और संसद मार्च के लिए भीड़ जुटाई गई, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। दिल्ली पुलिस ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट...

राज्य को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाए बिना उस पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाए बिना उस पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा,"अगर सरकारी खजाने से कोई राहत मांगी जा रही है तो संविधान के अनुच्छेद 300 के तहत राज्य को एक कानूनी इकाई (Juristic Entity) के रूप में पक्षकार बनाए बिना केवल किसी अधिकारी या विभाग को शामिल करने से याचिका में बुनियादी कमी आ जाती है।" बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार को पक्षकार बनाए बिना ही, एक 'बिना...

क्या 'इंट्रा-कोर्ट' अवमानना अपीलों पर रोक लगाने से न्याय तक पहुंच सीमित होती है? सुप्रीम कोर्ट ने 'राम किशन फौजी' मामले का फैसला बड़ी बेंच को भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है कि क्या 'राम किशन फौजी बनाम हरियाणा राज्य' (2017) मामले में उसका फैसला—जिसने आपराधिक मामलों से जुड़ी कुछ रिट कार्यवाहियों में 'इंट्रा-कोर्ट' (हाई कोर्ट के भीतर ही होने वाली) अपीलों को सीमित कर दिया था—मुकदमेबाजों पर अनावश्यक बोझ डालता है? यह बोझ इसलिए पड़ता है, क्योंकि वे अवमानना मामले में सिंगल जज (एकल न्यायाधीश) द्वारा दिए गए फैसले को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (खंडपीठ) के सामने चुनौती नहीं दे पाते।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि सुप्रीम...

CEC प्रदर्शनों पर कार्रवाई और SIR प्रक्रिया के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका पर आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट आज (गुरुवार) दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इनमें प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों के आरोप, सार्वजनिक परिवहन पर लगी पाबंदियों को लेकर अवमानना का मामला और 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं शामिल हैं।इसके अलावा, राहुल गांधी की वह याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को चुनौती दी। साथ...

CEC के खिलाफ प्रदर्शन वाले दिन दिल्ली में इंटरनेट बंद करने को सही ठहराते हुए केंद्रीय सचिव ने कहा, 'यह कदम उचित था'
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने अवमानना नोटिस (Contempt Notice) रद्द करने की मांग की और कहा कि स्थिति को देखते हुए 9 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं, और यह कदम "उचित" (Proportionate) था।यह हलफनामा वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका के जवाब में दिया गया। उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन (IAS), दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार...

सुप्रीम कोर्ट ने MEA से कहा- रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों के परिवारों से मुआवजे के दावे मंगाने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करे
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) से कहा कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों से मुआवजे के दावे मंगाने के लिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी करे। कोर्ट ने गौर किया कि 51 लोगों की मौत की खबर होने के बावजूद, अब तक केवल छह परिवारों ने ही मुआवजे की मांग की।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह प्रभावित परिवारों को रूसी अधिकारियों से मुआवजा दिलाने में मदद करे। कोर्ट...

कानून की कोई समझ नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की अपील को लापरवाही से संभालने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कड़ी आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उसे भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 304 पार्ट I (अपराधपूर्ण मानव वध जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन जिसमें दोषी इरादा हो) और धारा 304 पार्ट II (अपराधपूर्ण मानव वध जो हत्या की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन जिसमें दोषी जानकारी हो, पर खास इरादा न हो) के बीच के अंतर की कोई समझ नहीं है।ये कड़ी टिप्पणियां जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने एक दोषी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं। दोषी ने हाई कोर्ट के...

मौत की सज़ा का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से उन सभी मामलों में सज़ा कम या ज़्यादा करने वाले कारकों की जानकारी मांगने वाला निर्देश हटाया
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को जारी उस निर्देश को हटा दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट को मौत की सज़ा वाले अपराधों के हर मामले में सज़ा को कम या ज़्यादा करने वाली परिस्थितियों (Aggravating and Mitigating Circumstances) पर रिपोर्ट मांगने के लिए कहा गया। कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (NALSA) की इस बात को मान लिया कि इस ज़रूरत से मुश्किलें पैदा होंगी।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की बेंच ने 7 अक्टूबर को यह आदेश दिया। उन्होंने NALSA की उस अर्ज़ी को मंज़ूरी दी...

सुप्रीम कोर्ट ने SCBA, दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के लिए एक ही तारीख पर चुनाव कराने का सुझाव दिया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और दिल्ली की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन से इस बारे में राय मांगी कि क्या उनके चुनाव एक ही तारीख पर कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था से सदस्यों द्वारा कई जगहों पर वोट देने की समस्या हल हो सकती है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने संबंधित बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने सदस्यों से सलाह लें और इस प्रस्ताव पर विचार करने में कोर्ट की मदद करें।CJI ने कहा...

S. 62 IBC | अपील दायर करने की समय-सीमा NCLAT के आदेश सुनाए जाने की तारीख से शुरू होती है, न कि सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को कहा कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 62 के तहत अपील दायर करने की समय-सीमा उस तारीख से शुरू होती है, जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) अपना आदेश सुनाता है, न कि उस तारीख से जब अपील करने वाले को सर्टिफाइड कॉपी मिलती है।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करने और उसे प्राप्त करने में वादी द्वारा बिताए गए समय को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 12(2) के तहत हटाया जा सकता है, लेकिन...

PMLA | ED का गिरफ्तारी का आदेश एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को भेजने में देरी से गिरफ्तारी अपने-आप गैर-कानूनी नहीं हो जाती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के कथित अपराध में गिरफ्तारी के समय, अगर गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी गिरफ्तारी का आदेश और उससे जुड़े कागजात एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को तुरंत नहीं भेज पाता है तो भी देरी की वाजिब वजह होने पर गिरफ्तारी गैर-कानूनी नहीं मानी जाएगी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि जब मनमानी गिरफ्तारी से बचाने वाले मुख्य नियमों का पालन किया गया हो - जैसे कि अधिकृत अधिकारी के पास सबूत हों, विश्वास करने के कारण लिखित में दर्ज हों, गिरफ्तारी के आधार बताए...

सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने को चुनौती
एक रिट याचिका दायर करके 11 अक्टूबर के उस स्टैंडिंग ऑर्डर को चुनौती दी गई, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया और तीन वैकल्पिक जगहों को नोटिफाई किया गया।यह याचिका वकील स्वाति सिंह ने दायर की। उनका तर्क है कि विरोध-प्रदर्शनों को दूर-दराज के इलाकों में ले जाने से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मौलिक अधिकार बेअसर हो सकते हैं।याचिका में कहा गया,"विरोध-प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ़ किसी तय जगह पर इकट्ठा होने का अधिकार नहीं है; यह...
