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आप अदालत को निर्देश नहीं दे सकते: सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC मामले में पश्चिम बंगाल की स्थगन मांग ठुकराई
आप अदालत को निर्देश नहीं दे सकते: सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC मामले में पश्चिम बंगाल की स्थगन मांग ठुकराई

सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की सुनवाई टालने की मांग खारिज की।अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पक्षकार अदालत को यह नहीं बता सकते कि वह कैसे कार्यवाही करे।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें ED ने पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ याचिका दायर की।बता दें, ED का आरोप है कि आई-पैक कार्यालय पर छापे के दौरान राज्य सरकार की ओर से हस्तक्षेप किया गया।सुनवाई की...

शीना बोरा हत्याकांड: ट्रायल पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतिम 9 महीने की मोहलत
शीना बोरा हत्याकांड: ट्रायल पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतिम 9 महीने की मोहलत

चर्चित शीना बोरा हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पूरा करने के लिए अंतिम रूप से 9 महीने का अतिरिक्त समय दिया। साथ ही अदालत ने साफ किया कि इसके बाद समय बढ़ाने की कोई भी मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने 16 मार्च को यह आदेश पारित किया। यह फैसला विशेष सीबीआई अदालत, मुंबई द्वारा मांगे गए अतिरिक्त समय को ध्यान में रखते हुए लिया गया।अदालत ने कहा,“मामले को देखते हुए ट्रायल पूरा करने के लिए 9 महीने का समय बढ़ाया जाता है लेकिन इसके बाद समय...

डाइंग डिक्लेरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: डॉक्टर की राय पुलिस से अधिक विश्वसनीय
डाइंग डिक्लेरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: डॉक्टर की राय पुलिस से अधिक विश्वसनीय

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्व दिए गए बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) की विश्वसनीयता तय करते समय डॉक्टर की राय को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि पुलिस अधिकारी के आकलन को।अदालत ने इसी आधार पर एक पति की हत्या के मामले में सजा को बरकरार रखा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी पति की अपील खारिज कर दी।आरोपी को अपनी पत्नी की हत्या (धारा 302) और क्रूरता (धारा 498ए) के अपराध में दोषी ठहराया गया।मामले...

गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मातृत्व केवल जैविक नहीं
गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मातृत्व केवल जैविक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गोद लेना (अडॉप्शन) भी व्यक्ति के प्रजनन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का हिस्सा है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि परिवार बनाने का अधिकार केवल जैविक तरीके तक सीमित नहीं है, बल्कि गोद लेना भी उसी अधिकार का समान और वैध रूप है।अदालत ने कहा,“प्रजनन स्वतंत्रता केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी परिवार बनाने और माता-पिता बनने के अधिकार का समान रूप से महत्वपूर्ण...

दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा तय नहीं कर सकता राज्य: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, 90% दिव्यांग वकील की नियुक्ति का आदेश
दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा तय नहीं कर सकता राज्य: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, 90% दिव्यांग वकील की नियुक्ति का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 केवल न्यूनतम पात्रता (फ्लोर) तय करता है लेकिन राज्य को यह अधिकार नहीं देता कि वह अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को बाहर करने के लिए कोई ऊपरी सीमा (सीलिंग) तय करे।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि 90% दिव्यांग वकील को सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) के पद पर नियुक्त किया जाए।मामला उस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें दिव्यांग...

जज खुद ही अलग-अलग जवाब दें तो लॉ स्टूडेंट से सही जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट ने लॉ ऑफिसर परीक्षा में राहत दी
जज खुद ही अलग-अलग जवाब दें तो लॉ स्टूडेंट से सही जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट ने लॉ ऑफिसर परीक्षा में राहत दी

लॉ ऑफिसर की भर्ती के लिए हुई परीक्षा के एक सवाल के सही जवाब में अस्पष्टता के कारण सुप्रीम कोर्ट ने दो उम्मीदवारों के प्रतिस्पर्धी दावों को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने दोनों उम्मीदवारों को राहत देते हुए निर्देश दिया कि एक अतिरिक्त पद (Supernumerary Post) बनाकर दोनों को समायोजित किया जाए।यह मामला चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा 2021 में लॉ ऑफिसर के एक पद के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा था। इसमें चरण प्रीत सिंह का चयन हुआ। उनकी नियुक्ति को एक अन्य उम्मीदवार अमित कुमार शर्मा ने इस आधार पर चुनौती दी थी कि...

बच्चों के मन से डर निकालने के लिए फ़ैमिली कोर्ट में काले चोगे पहनना बंद करें जज और वकील: CJI सूर्यकांत
बच्चों के मन से डर निकालने के लिए फ़ैमिली कोर्ट में काले चोगे पहनना बंद करें जज और वकील: CJI सूर्यकांत

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने हाल ही में सुझाव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट में जज और वकील अपने पारंपरिक काले चोगे पहनना छोड़ दें, ताकि बच्चों को डर न लगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट का नाम बदलकर 'फ़ैमिली रिज़ॉल्यूशन सेंटर' (पारिवारिक समाधान केंद्र) कर दिया जाए।नई दिल्ली के रोहिणी में नए फ़ैमिली कोर्ट कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखने के समारोह में बोलते हुए CJI ने पूछा,"क्या फ़ैमिली कोर्ट में ये काले चोगे होने चाहिए? क्या इससे बच्चे के मन में डर पैदा नहीं होगा?" चीफ जस्टिस ने...

बैंक ग्राहक के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है: सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी को गलत तरीके से पैसे भेजने के लिए बैंक को ज़िम्मेदार ठहराया
'बैंक ग्राहक के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है': सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी को गलत तरीके से पैसे भेजने के लिए बैंक को ज़िम्मेदार ठहराया

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बैंकों को ग्राहक के निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि कोई भी बैंक अपने ग्राहक द्वारा दिए गए आदेश के विपरीत एकतरफ़ा रूप से पैसे कहीं और नहीं भेज सकता। कोर्ट ने केनरा बैंक की उस ज़िम्मेदारी को भी सही ठहराया, जिसके तहत उसने गलती से किसी तीसरे पक्ष को 100,000 अमेरिकी डॉलर भेज दिए।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने बैंक की अपील खारिज की। बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट का फ़ैसला बरकरार रखा, जिसमें बैंक को इस गलत ट्रांसफर...

कल्याणकारी राज्य के कार्यों, धर्मार्थ कृत्यों को उद्योग नहीं माना जा सकता हैः केंद्र ने 9-जजों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया
कल्याणकारी राज्य के कार्यों, धर्मार्थ कृत्यों को 'उद्योग' नहीं माना जा सकता हैः केंद्र ने 9-जजों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया

केंद्र सरकार ने मंगलवार (17 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में निर्धारित परीक्षण के व्यापक आवेदन के खिलाफ चेतावनी देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य द्वारा की गई कल्याणकारी गतिविधियों और धर्मार्थ कार्यों को श्रम कानून के तहत "उद्योग" के रूप में नहीं माना जा सकता है।नौ जजों की संविधान पीठ के समक्ष पेश हुए, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने प्रस्तुत किया कि जबकि 1978 के फैसले में विकसित "ट्रिपल टेस्ट" तार्किक रूप से ध्वनि हो सकता है, इसके अंधाधुंध...

फैसले सुरक्षित रखने के बाद देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिशानिर्देशों पर फैसला सुरक्षित
फैसले सुरक्षित रखने के बाद देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिशानिर्देशों पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 मई) को हाईकोर्ट्स द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले सुनाने में हो रही देरी को लेकर प्रस्तावित दिशानिर्देशों पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि न्यायपालिका में जवाबदेही बढ़ाना और व्यवस्था को मजबूत करना है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले में एमिकस क्यूरी अधिवक्ता फौजिया शकील द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट दिशानिर्देशों की सराहना की और हाईकोर्ट्स से इस पर...

Bilkis Bano Case : सुप्रीम कोर्ट ने हत्या और गैंगरेप के लिए उम्रकैद की सज़ा पाए 2 दोषियों की अपील पर जारी किया नोटिस
Bilkis Bano Case : सुप्रीम कोर्ट ने हत्या और गैंगरेप के लिए उम्रकैद की सज़ा पाए 2 दोषियों की अपील पर जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस के दो दोषियों - बिपिनचंद कनैलाल जोशी और प्रदीप रमनलाल मोधिया - की याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट के 4 मई, 2017 के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी, जिसमें हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सज़ा को सही ठहराया था।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों को नोटिस जारी किया और इस SLP (विशेष अनुमति याचिका) की सुनवाई के लिए 5 मई, 2026 की तारीख़ तय की।बॉम्बे हाईकोर्ट ने जोशी और मोधिया समेत 11 आरोपियों की दोषसिद्धि और...

मृत व्यक्तियों के बिना दावे वाले बैंक अकाउंट्स की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI से पूछा
मृत व्यक्तियों के बिना दावे वाले बैंक अकाउंट्स की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से पूछा कि मृत व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती, ताकि वे उन खातों में जमा बिना दावे वाली रकम (Unclaimed Funds) को हासिल कर सकें।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच 2022 में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वित्तीय पत्रकार और 'मनी लाइफ' की मैनेजिंग एडिटर सुचेता दलाल ने दायर की थी। इस याचिका का विषय निवेशकों और जमाकर्ताओं की वह बिना दावे वाली रकम थी, जिस तक उनके...

कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के ज़रिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल उन मकसदों के अलावा किसी और मकसद के लिए करना, जिनका खुलासा निवेशकों के सामने किया गया, सिक्योरिटीज़ कानून के तहत धोखाधड़ी माना जाएगा। साथ ही इसे बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से भी ठीक नहीं किया जा सकता।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा दायर अपीलों को मंज़ूर करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सिक्योरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) का आदेश रद्द किया,...

गुरु गोबिंद जयंती को राष्ट्रीय अवकाश बनाने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और छुट्टियां न बढ़ाएं
गुरु गोबिंद जयंती को राष्ट्रीय अवकाश बनाने की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और छुट्टियां न बढ़ाएं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरु गोबिंद जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।अदालत ने स्पष्ट कहा कि देश में पहले से ही पर्याप्त छुट्टियां हैं और इसमें और वृद्धि की जरूरत नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की भारत पहले ही छुट्टियों का देश है। इसमें और इजाफा न करें।यह याचिका ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा द्वारा दायर की गई, जिसमें गुरु गोबिंद सिंह की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग की गई।याचिकाकर्ता का तर्क था कि...

BREAKING| पैनटरनिटी लीव को मान्यता देने वाला कानून बनाया जाए: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से आग्रह
BREAKING| पैनटरनिटी लीव को मान्यता देने वाला कानून बनाया जाए: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार से आग्रह

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून लाए। कोर्ट ने कहा कि इस अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो माता-पिता और बच्चे, दोनों की ज़रूरतों के हिसाब से तय की जाए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह सिफ़ारिश एक ऐसे मामले में की, जिसमें उस प्रावधान की संवैधानिकता पर विचार किया जा रहा, जो गोद लेने वाली माताओं को मैटरनिटी लीव तभी देता है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने...

BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को फैसला सुनाया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4), जो किसी गोद लेने वाली माँ को मातृत्व लाभ तभी देती है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो, असंवैधानिक है।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गोद लेने वाली माँ 12 हफ़्ते की मातृत्व छुट्टी की हकदार होनी चाहिए, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कुछ भी हो।कोर्ट ने इस प्रावधान की व्याख्या इस तरह की: "कोई भी महिला जो कानूनी तौर पर किसी बच्चे को गोद लेती है, या कोई कमीशनिंग माँ, उस तारीख से 12 हफ़्ते की अवधि...