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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया- किसी विदेशी नागरिक को उसके देश की मंज़ूरी के बिना वापस नहीं भेजा जा सकता
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया- किसी विदेशी नागरिक को उसके देश की मंज़ूरी के बिना वापस नहीं भेजा जा सकता

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिस विदेशी नागरिक की नागरिकता की पुष्टि नहीं हुई, उसे तब तक वापस नहीं भेजा जा सकता, जब तक कि उसका देश उसकी नागरिकता की पुष्टि न कर दे और उसे स्वीकार करने के लिए सहमत न हो जाए। सरकार ने कहा कि नागरिकता की पुष्टि के बिना वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू भी नहीं की जा सकती।यह जानकारी गृह मंत्रालय (MHA) ने राजुबाला दास की लंबित रिट याचिका के जवाब में दाखिल एक हलफनामे में दी। यह याचिका उन लोगों से संबंधित है, जिन्हें विदेशी घोषित किया गया लेकिन जिनकी नागरिकता का...

NEET-UG विरोध प्रदर्शन में घायल छात्रा ने पुलिस के लिए नेम बैज और भीड़ को काबू करने के एक जैसे नियमों (SOP) के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश की मांग की
NEET-UG विरोध प्रदर्शन में घायल छात्रा ने पुलिस के लिए नेम बैज और भीड़ को काबू करने के एक जैसे नियमों (SOP) के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश की मांग की

IIT पटना की एक छात्रा, जिसका दावा है कि वह 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुए "संसद चलो" विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में घायल हो गई थी, उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। वह भीड़ को काबू करने के लिए एक जैसे प्रोटोकॉल और विरोध प्रदर्शनों में तैनात पुलिसकर्मियों की पहचान अनिवार्य करने के निर्देश चाहती है।याचिका में कहा गया,"नागरिकों के खिलाफ ज़बरदस्ती बल प्रयोग में बिना पहचान वाले लोगों की मौजूदगी और भागीदारी पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत ज़िम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाती है, खासकर...

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के निर्देश के बावजूद हेल्थकेयर प्रोफेशन एक्ट लागू न करने पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई, सितंबर की डेडलाइन तय की
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के निर्देश के बावजूद हेल्थकेयर प्रोफेशन एक्ट लागू न करने पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई, सितंबर की डेडलाइन तय की

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ-साथ 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स' को निर्देश दिया कि वे 'नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स एक्ट, 2021' के प्रावधानों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) दाखिल करें।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पाया कि इस एक्ट को लागू करने के लिए लगभग दो साल पहले जारी किए गए निर्देशों - जिनमें काउंसिल की...

सुप्रीम कोर्ट ने दिया प्राइवेट डिटेक्टिव्स को रेगुलेट करने के लिए कानून बनाने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने दिया प्राइवेट डिटेक्टिव्स को रेगुलेट करने के लिए कानून बनाने का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को केंद्र सरकार और भारत के विधि आयोग से प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों के कामकाज को रेगुलेट करने के लिए कानूनी ढांचा बनाने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि कानूनी सुरक्षा उपायों की कमी से प्राइवेसी के उल्लंघन और जांच की शक्तियों के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि ऐसे सिस्टम की तत्काल आवश्यकता है, जो प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर्स के लिए प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स तय करे। साथ ही उन लोगों के लिए...

S. 125 CrPC | पति शुरुआती में ही पत्नी का एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर साबित कर दे तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
S. 125 CrPC | पति शुरुआती में ही पत्नी का एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर साबित कर दे तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है, अगर पति शुरुआती स्तर पर ही पत्नी के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (व्यभिचार) को साबित कर देता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा,"...हमारा मानना ​​है कि अगर पति धारा 125(4) के तहत अर्ज़ी दाखिल करता है और पहली ही बार में सबूतों के ज़रिए आरोप को साबित कर देता है, तभी अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने पर रोक लगाई जा सकती है।" बेंच ने एक पति की अपील को...

CrPC की धारा 299 के तहत आदेश के बिना दर्ज गवाह की गवाही का इस्तेमाल बाद में फरार आरोपी के खिलाफ नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
CrPC की धारा 299 के तहत आदेश के बिना दर्ज गवाह की गवाही का इस्तेमाल बाद में फरार आरोपी के खिलाफ नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को कहा कि आरोपी के खिलाफ मुकदमे में दर्ज सबूतों का इस्तेमाल बाद में किसी फरार आरोपी के खिलाफ तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक कि CrPC की धारा 299 / BNSS की धारा 335 के तहत कोई आदेश पारित न किया गया हो। इस आदेश में दो अधिकार-क्षेत्र संबंधी तथ्यों को स्थापित करना ज़रूरी है: पहला, आरोपी फरार था और दूसरा, उसे तुरंत गिरफ्तार करने की कोई संभावना नहीं थी।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने अपीलकर्ता की हत्या की सजा रद्द की। अपीलकर्ता 1999 में...

रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीय: सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को परिवारों की मदद करने, शव वापस लाने और मुआवज़ा दिलाने का निर्देश दिया
रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीय: सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को परिवारों की मदद करने, शव वापस लाने और मुआवज़ा दिलाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन भारतीय नागरिकों के शवों की DNA प्रोफ़ाइलिंग करे जो रूसी सेना की तरफ़ से यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए मारे गए, ताकि उन्हें वापस लाकर संबंधित परिवारों को सौंपा जा सके।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच 26 भारतीयों के परिवारों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन लोगों को कथित तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वे नौकरी की तलाश में रूस गए।आरोपों के...

सड़कों पर आवारा पशु प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर नहीं, हादसों के पीड़ितों को मुआवजा दें राज्य: सुप्रीम कोर्ट
सड़कों पर आवारा पशु 'प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर' नहीं, हादसों के पीड़ितों को मुआवजा दें राज्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सड़कों और राजमार्गों पर घूम रहे आवारा मवेशियों से होने वाले हादसों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।अदालत ने केंद्र और राज्यों से मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यापक तंत्र विकसित करने का भी आग्रह किया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा,"आवारा मवेशी राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और गलियों में मनमाने ढंग से...

हमने अलग होने का फैसला कर लिया है: आपसी सहमति से तलाक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उमर अब्दुल्ला
हमने अलग होने का फैसला कर लिया है: आपसी सहमति से तलाक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का फैसला किया। दोनों ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त आवेदन दाखिल कर विवाह विच्छेद की मांग की।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्ष अब अलग होने पर सहमत हैं।सिब्बल ने अदालत से कहा,"दोनों ने आजादी को स्वीकार कर लिया। अनुच्छेद 142 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है कृपया तलाक की डिक्री...

जेलों की निगरानी के लिए हर जिले में बोर्ड ऑफ विजिटर्स गठित करें: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश
जेलों की निगरानी के लिए हर जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' गठित करें: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016 के अनुसार प्रत्येक जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' (BoV) का गठन करें, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District Judge) करेंगे।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई कर रही थी, जो सुकन्या शांता फैसले के अनुपालन से संबंधित...

हल्द्वानी हिंसा: भीड़ ने थाना जला दिया तो क्या हर मामले में UAPA लग जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से पूछा, जमानत बरकरार
हल्द्वानी हिंसा: 'भीड़ ने थाना जला दिया तो क्या हर मामले में UAPA लग जाएगा?' सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से पूछा, जमानत बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी हिंसा मामले के आरोपी अब्दुल मलिक को मिली जमानत के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज करते हुए मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि केवल भीड़ द्वारा पुलिस थाना जलाने से अपने आप यूएपीए लागू नहीं हो जाता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट के आदेश में विस्तृत कारण न हों, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामले में केवल इसी आधार...

ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटकर सेशंस कोर्ट दोषसिद्धि दे तो हाईकोर्ट में अपील नहीं, केवल रिवीजन ही उपाय: सुप्रीम कोर्ट
ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटकर सेशंस कोर्ट दोषसिद्धि दे तो हाईकोर्ट में अपील नहीं, केवल रिवीजन ही उपाय: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि सेशंस कोर्ट अपीलीय अधिकार का प्रयोग करते हुए ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश को पलटकर किसी आरोपी को दोषी ठहराता है, तो उसके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 374 (अब BNSS की धारा 415) के तहत हाईकोर्ट में वैधानिक अपील दायर नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में आरोपी के पास केवल रिवीजन याचिका दाखिल करने का ही उपाय उपलब्ध होगा।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने कहा कि धारा 374 केवल उस अदालत के फैसले पर लागू होती है जिसने स्वयं...

RTI एक्टिविस्ट्स की सुप्रीम कोर्ट से मांग: कोर्ट क्लिप्स शेयर करने पर लगी पूरी रोक पर फिर से विचार करें
RTI एक्टिविस्ट्स की सुप्रीम कोर्ट से मांग: कोर्ट क्लिप्स शेयर करने पर लगी पूरी रोक पर फिर से विचार करें

'नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इंफॉर्मेशन' (NCPRI) की को-कन्वीनर अंजलि भारद्वाज और ट्रांसपेरेंसी एक्टिविस्ट अमृता जौहरी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की। वह कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग और उसे फैलाने के नियमन से जुड़े लंबित मामले में दखल देना चाहती हैं। उनका तर्क है कि आधिकारिक कोर्ट रिकॉर्डिंग शेयर करने पर लगाई गई पाबंदियां बहुत सोच-समझकर और सीमित होनी चाहिए, और इनसे खुले न्याय, बोलने की आज़ादी और सूचना के अधिकार जैसे संवैधानिक सिद्धांतों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।इस दखल की...

सिर्फ़ इसलिए कि कोई प्रशासनिक कार्रवाई औपचारिक आदेश के तौर पर जारी नहीं की गई, उसे रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सिर्फ़ इसलिए कि कोई प्रशासनिक कार्रवाई औपचारिक आदेश के तौर पर जारी नहीं की गई, उसे रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को कहा कि जब किसी अथॉरिटी के पास संबंधित कानून के तहत कार्रवाई करने की शक्ति होती है तो सिर्फ़ इस बात से कि कार्रवाई को औपचारिक "आदेश" के बजाय "सर्कुलर" या "कम्युनिकेशन" कहा गया है, वह अमान्य नहीं हो जाती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा,"एक बार जब शक्ति मौजूद होती है और यह स्पष्ट होता है कि इस विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया गया है तो जिस तरीके से इसका इस्तेमाल किया गया, वह उस शक्ति का इस्तेमाल करने वाली अथॉरिटी की शक्ति को कमज़ोर या...

सुप्रीम कोर्ट ने एक्सपायर हो चुके लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाने के नतीजों पर दिया ज़ोर, केंद्र से जागरूकता फैलाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने एक्सपायर हो चुके लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाने के नतीजों पर दिया ज़ोर, केंद्र से जागरूकता फैलाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को कहा कि अगर दुर्घटना के समय ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो बीमा कंपनी को इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से आग्रह किया कि वे वैध ड्राइविंग लाइसेंस के महत्व को समझाने और लाइसेंस जारी करने व रिन्यू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"हमारा सुझाव है कि भारत सरकार के सड़क...

Indian Succession Act | पत्नी की मौत के बाद उसकी संपत्ति का मालिकाना हक किसे मिलता है? सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई उत्तराधिकार कानून समझाया
Indian Succession Act | पत्नी की मौत के बाद उसकी संपत्ति का मालिकाना हक किसे मिलता है? सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई उत्तराधिकार कानून समझाया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को साफ़ किया कि ईसाई उत्तराधिकार कानून के तहत पति द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी गई संपत्ति पत्नी की ही संपत्ति मानी जाती है। इसलिए उसकी मौत के बाद ऐसी संपत्ति का उत्तराधिकार उसकी अपनी मिल्कियत के आधार पर तय किया जाना चाहिए। इसे इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 33 लागू करने के मकसद से पति की संपत्ति नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई की। उस फैसले में...