ताज़ा खबरें

अल-कायदा लिंक का मामला: UAPA मामले में आरोपी मौलाना के ट्रायल को 3 महीने में पूरा करने का निर्देश
अल-कायदा लिंक का मामला: UAPA मामले में आरोपी मौलाना के ट्रायल को 3 महीने में पूरा करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपों का सामना कर रहे इस्लामिक धर्मगुरु Md. अब्दुर रहमान की जमानत याचिका को मेरिट पर खारिज करते हुए मामले के शीघ्र निपटारे के लिए समयबद्ध ट्रायल का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कटक की ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह सप्ताह में कम से कम दो बार सुनवाई करे और तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करे।अदालत ने अभियोजन पक्ष को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि हर सुनवाई पर...

जज को कॉल करने के आरोपी BJP MLA पर अवमानना मामला: सुप्रीम कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर को हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
जज को कॉल करने के आरोपी BJP MLA पर अवमानना मामला: सुप्रीम कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर को हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक व्हिसलब्लोअर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेम्प्ट) कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की अनुमति दे दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अशुतोष दीक्षित को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि वह हाईकोर्ट में जाकर कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति मांग सकते हैं।यह मामला उस समय सामने आया जब दीक्षित ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर कथित अवैध खनन का आरोप लगाया था, जो कथित रूप...

पश्चिम बंगाल SIR मामला: फॉर्म-6 से 7 लाख नए मतदाताओं को जोड़ने के खिलाफ मौखिक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
पश्चिम बंगाल SIR मामला: फॉर्म-6 से 7 लाख नए मतदाताओं को जोड़ने के खिलाफ मौखिक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद लगभग 7 लाख नए मतदाताओं को फॉर्म-6 के जरिए जोड़े जाने के खिलाफ की गई मौखिक मांग पर सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना औपचारिक याचिका के इस तरह के मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता।सीनियर एडवोकेट मेनेका गुरुस्वामी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से मौखिक उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ा जाना सुप्रीम...

MCOCA मामले में पूर्व AAP MLA नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग किया
MCOCA मामले में पूर्व AAP MLA नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग किया

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया। यह याचिका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत दर्ज एक मामले में दायर की गई थी, जो कथित संगठित अपराध से जुड़ा है। न्यायमूर्ति शर्मा ने बिना कोई कारण बताए मामले से स्वयं को अलग किया और अब यह याचिका 23 अप्रैल को किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।इससे पहले, जनवरी में एक समन्वय पीठ ने बाल्यान को कस्टडी...

एग्जीक्यूटिंग कोर्ट व्यावहारिक मुश्किलों के आधार पर समझौते वाली डिक्री की शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
एग्जीक्यूटिंग कोर्ट व्यावहारिक मुश्किलों के आधार पर समझौते वाली डिक्री की शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट डिक्री के पीछे जाकर उसकी जांच नहीं कर सकता, बल्कि उसे डिक्री को वैसे का वैसा ही लागू करना होता है।कोर्ट ने कहा,"(एग्जीक्यूटिंग कोर्ट) को डिक्री को बिना किसी बदलाव के, वैसे का वैसा ही लागू करना होता है। कानून में यह बात तय है कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सिर्फ़ पारित की गई डिक्री को प्रभावी बनाने तक ही सीमित है। उसे ट्रायल कोर्ट की भूमिका नहीं निभानी चाहिए, ताकि वह डिक्री में व्यक्त किए गए विचारों की जगह अपने खुद के विचार थोप...

लगातार सेवा में छोटे-मोटे ब्रेक से एड-हॉक कर्मचारी रेगुलराइजेशन के लिए अयोग्य नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
लगातार सेवा में छोटे-मोटे ब्रेक से एड-हॉक कर्मचारी रेगुलराइजेशन के लिए अयोग्य नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एड-हॉक सेवा में सिर्फ़ छोटे-मोटे ब्रेक से सेवा की निरंतरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिससे कोई कर्मचारी सेवा के रेगुलराइजेशन के फ़ायदे के लिए अयोग्य हो जाए।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया, जिसमें अपील करने वालों को रेगुलराइजेशन देने से मना कर दिया गया था। इन लोगों को 1995-96 में पंजाब सरकार के वित्त विभाग में चपरासी और क्लर्क के तौर पर एड-हॉक आधार पर नियुक्त किया गया। उन्हें रेगुलराइजेशन से सिर्फ़ इस...

“हैरान करने वाला: पढ़े-लिखे लोग भी डिजिटल अरेस्ट घोटालों का शिकार हो रहे हैं” — CJI सूर्यकांत
“हैरान करने वाला: पढ़े-लिखे लोग भी 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों का शिकार हो रहे हैं” — CJI सूर्यकांत

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) घोटालों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे साइबर अपराधों का शिकार हो रहे हैं, जहां ठग खुद को पुलिस अधिकारी या जज बताकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों से पैसे वसूलते हैं। सुनवाई के दौरान CJI ने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि उनके संज्ञान में आई एक महिला, जिन्हें वह आधिकारिक रूप से जानते हैं, इस तरह के घोटाले में अपनी पूरी रिटायरमेंट बचत गंवा चुकी हैं। उन्होंने कहा, “वह रो रही थीं, उन्होंने...

“सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बंद कर देंगे”: नेताजी को लेकर बार-बार PIL दाखिल करने पर SC की चेतावनी
“सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बंद कर देंगे”: नेताजी को लेकर बार-बार PIL दाखिल करने पर SC की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी (INA) ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने याचिका को पब्लिसिटी पाने का प्रयास बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि इसी तरह की याचिका पहले भी खारिज की जा चुकी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता पिनाकपाणि मोहंती को चेतावनी देते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बंद कर देंगे।” याचिका में मांग की...

जज के मानवीय अनुभव की जगह नहीं ले सकता AI, फैसला सुनाना एक मानवीय ज़िम्मेदारी: जस्टिस विक्रम नाथ
जज के मानवीय अनुभव की जगह नहीं ले सकता AI, फैसला सुनाना एक मानवीय ज़िम्मेदारी: जस्टिस विक्रम नाथ

सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि भले ही AI अब हमेशा हमारे साथ रहेगा, लेकिन यह किसी जज के मानवीय अनुभव की जगह नहीं ले सकता, जो फैसले लेने में बहुत ज़रूरी होता है।जस्टिस नाथ कर्नाटक राज्य न्यायिक अधिकारी संघों के 22वें दो-सालाना राज्य स्तरीय सम्मेलन के समापन समारोह में बोल रहे थे।जस्टिस नाथ ने साफ तौर पर कहा कि हमें यह मानना ​​होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब हमेशा हमारे साथ रहेगा और न्यायपालिका भी AI के असर से अछूती नहीं रह सकती।फिर उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया: "सवाल यह नहीं...

ज़िला न्यायपालिका कानून में जान डालती है: CJI सूर्यकांत ने मदुरै एडिशनल ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया
'ज़िला न्यायपालिका कानून में जान डालती है': CJI सूर्यकांत ने मदुरै एडिशनल ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि ज़िला न्यायपालिका को कानूनी व्यवस्था के "जीवन-रक्त, उसके महत्वपूर्ण अंगों और उसकी नसों" के रूप में देखा जाना चाहिए। ज़मीनी स्तर पर एक अच्छा बुनियादी ढांचा होने से "न्याय की एक अधिक संवेदनशील और अधिक गरिमापूर्ण व्यवस्था की नींव रखी जाती है।"CJI मदुरै ज़िला न्यायालय परिसर में एडिशनल कोर्ट कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे, जिसका आयोजन मद्रास हाईकोर्ट की देखरेख में किया गया।CJI ने कहा कि नागरिकों के विशाल बहुमत के लिए ज़िला कोर्ट ही न्याय...

सबरीमाला रेफरेंस: एसेन्शियल रिलिजियस प्रैक्टिस टेस्ट खतरनाक, बोनाफाइड विश्वास ही सही कसौटी- राजीव धवन
सबरीमाला रेफरेंस: 'एसेन्शियल रिलिजियस प्रैक्टिस' टेस्ट खतरनाक, बोनाफाइड विश्वास ही सही कसौटी- राजीव धवन

सबरीमला रेफरेंस की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट राजीव धवन ने तर्क दिया कि “एसेन्शियल रिलिजियस प्रैक्टिस” (Essential Religious Practice) का सिद्धांत खतरनाक है, क्योंकि इससे अदालतों को यह तय करना पड़ता है कि कोई धार्मिक प्रथा आवश्यक है या नहीं।उन्होंने स्पष्ट किया कि वे धार्मिक स्वतंत्रता की न्यायिक समीक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनके अनुसार अनुच्छेद 25 और 26 के तहत सही कसौटी यह होनी चाहिए कि किसी विश्वास की बोनाफाइड (ईमानदारी से मानी गई) प्रकृति क्या है, न कि वह “आवश्यक” है या नहीं।धवन ने...

बिना भर्ती विज्ञापन या इंटरव्यू के नियुक्त एड-हॉक कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
बिना भर्ती विज्ञापन या इंटरव्यू के नियुक्त एड-हॉक कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला आंशिक रूप से रद्द किया। इस फैसले में हरियाणा सरकार की उन नीतियों के एक समूह को रद्द कर दिया गया था, जिनका मकसद कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले एड-हॉक और दिहाड़ी मज़दूरी वाले कर्मचारियों को पक्का करना था। कोर्ट ने 16 जून, 2014 और 18 जून, 2014 को जारी दो नोटिफिकेशन की वैधता को बरकरार रखा, लेकिन 7 जुलाई, 2014 को जारी दो नोटिफिकेशन रद्द किए।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने पाया कि जुलाई 2014 के नोटिफिकेशन उन एड-हॉक...

Highway Safety | भारी वाहनों की पार्किंग नहीं, कोई भी गैर-कानूनी ढाबा नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए
Highway Safety | भारी वाहनों की पार्किंग नहीं, कोई भी गैर-कानूनी ढाबा नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत "गरिमा के साथ जीने के अधिकार" के एक ज़रूरी पहलू के तौर पर "यात्री की सुरक्षा" को मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर मौजूद सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए कई निर्देश जारी किए।कोर्ट ने, अन्य बातों के साथ-साथ यह आदेश दिया कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के 'राइट ऑफ़ वे' (सड़क के अधिकार क्षेत्र) में आने वाले सभी गैर-कानूनी कब्ज़ों, जैसे कि ढाबे, खाने-पीने की दुकानें वगैरह को तुरंत हटाया जाए।...

जो जज अपनी आय के दायरे में नहीं रह पाते और लालच का शिकार हो जाते हैं, उन्हें सिस्टम से बाहर कर देना चाहिए: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना
जो जज अपनी आय के दायरे में नहीं रह पाते और लालच का शिकार हो जाते हैं, उन्हें सिस्टम से बाहर कर देना चाहिए: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के जजों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी के लिए दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिशों को मान लिया। उन्होंने आगे कहा कि अगर इसके बाद भी जज अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अपना गुज़ारा नहीं कर पाते और लालच और प्रलोभन का शिकार हो जाते हैं तो उन्हें सिस्टम से बाहर कर देना चाहिए।उन्होंने कहा,"जिला न्यायपालिका के जजों के वेतन और भत्तों में पर्याप्त बढ़ोतरी हुई है, जिसका श्रेय वेतन आयोग की उन सिफारिशों को जाता है...

ज़मानत की शर्त के तौर पर आरोपी की संपत्ति बेचने का आदेश नहीं दिया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
ज़मानत की शर्त के तौर पर आरोपी की संपत्ति बेचने का आदेश नहीं दिया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज़मानत की शर्तें दंडात्मक या निर्णायक प्रकृति की नहीं होनी चाहिए, और वे किसी आरोपी को ज़मानत की शर्त के तौर पर उसकी संपत्ति बेचने की मांग करके, उसकी संपत्ति का इस्तेमाल करने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकतीं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया। उस आदेश में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के मामले में ज़मानत देने की शर्त के तौर पर आरोपी की अचल संपत्तियों को बेचने की शर्त रखी गई।कोर्ट ने कहा,"...हमारी सुविचारित राय है...

संविधान केवल औपचारिक समानता नहीं, असमानता की जड़ों को खत्म करने का आह्वान करता है: पूर्व CJI बी.आर. गवई
संविधान केवल औपचारिक समानता नहीं, असमानता की जड़ों को खत्म करने का आह्वान करता है: पूर्व CJI बी.आर. गवई

हैदराबाद स्थित नालसर लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित डॉ. आंबेडकर स्मृति व्याख्यान में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई ने कहा कि भारतीय संविधान समानता को केवल कागज़ी अधिकार के रूप में नहीं देखता बल्कि समाज में मौजूद असमानता पैदा करने वाली संरचनाओं को समाप्त करने की जिम्मेदारी भी तय करता है।जस्टिस गवई ने अपने व्याख्यान में कहा,“संविधान केवल औपचारिक समानता की बात नहीं करता बल्कि यह मांग करता है कि हम उन ढांचों को पहचानें और खत्म करें, जो असमानता पैदा करते हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि...

पति का कर्ज नहीं घटा सकता भरण-पोषण की जिम्मेदारी: सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई गुजारा भत्ता राशि
पति का कर्ज नहीं घटा सकता भरण-पोषण की जिम्मेदारी: सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई गुजारा भत्ता राशि

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी प्राथमिक है और इसे कर्ज चुकाने जैसे निजी वित्तीय दायित्वों के आधार पर कम नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि कर्ज से संपत्ति बन रही है, तो उसे आवश्यक खर्च नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने पत्नी को मिलने वाले मासिक भरण-पोषण को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया।मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें पत्नी ने अलग रहने के बाद 50,000 रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। फैमिली कोर्ट ने...

गैंगस्टर कानूनों की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, कई राज्यों के कानून दायरे में
गैंगस्टर कानूनों की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, कई राज्यों के कानून दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने संगठित अपराध से जुड़े कानूनों की वैधता को लेकर अहम याचिका को तीन जजों की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत ने कहा कि इस मामले का असर उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर एक्ट के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों के समान कानूनों पर भी पड़ेगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने समाजवादी पार्टी नेता इरफान सोलंकी की याचिका पर यह आदेश पारित किया। मामले की अंतिम सुनवाई 21 मई को होगी।याचिका में उत्तर...