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आईपीसी की धारा 323 के तहत अपराध स्थापित करने के लिए चोट की रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य शर्त नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
आईपीसी की धारा 323 के तहत अपराध स्थापित करने के लिए चोट की रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य शर्त नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत अपराध के लिए मामला स्थापित करने के लिए चोट की रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य शर्त नहीं है।इस मामले में आरोपियों को आईपीसी की धारा 323 और 147 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। आरोपी ने कथित तौर पर "मतदाताओं की सूची छीनने और फर्जी मतदान करने के लिए" एक गैरकानूनी जमावड़े का गठन किया था और चुनाव के दौरान कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमला किया था।अभियुक्तों द्वारा उठाए गए तर्कों में से एक यह...

हम अभिजात्य दृष्टिकोण नहीं लेंगे,कोई मर्जी से भीख नहीं मांगता : सुप्रीम कोर्ट ने COVID के दौरान सड़कों पर भीख मांगने पर रोक लगाने की प्रार्थना नामंजूर की
"हम अभिजात्य दृष्टिकोण नहीं लेंगे,कोई मर्जी से भीख नहीं मांगता" : सुप्रीम कोर्ट ने COVID के दौरान सड़कों पर भीख मांगने पर रोक लगाने की प्रार्थना नामंजूर की

यह कहते हुए कि भीख मांगना गरीबी का एक कार्य और एक सामाजिक-आर्थिक मुद्दा है, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को COVID-19 महामारी के बीच सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर भीख मांगने पर रोक लगाने की प्रार्थना को ठुकरा दिया।जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ कुश कालरा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें भारत में भिखारियों और आवारा लोगों या बेघर लोगों को ट्रैफिक जंक्शनों पर, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने वालों को COVID-19 महामारी के प्रसार से बचाने और उनका...

बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति के लिए फैसले में संक्षिप्त कारण दिए जाने चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति के लिए फैसले में संक्षिप्त कारण दिए जाने चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि बरी करने के आदेश के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 378 के तहत अपील करने की अनुमति के लिए एक आवेदन का निपटान करने वाले आदेश में संक्षिप्त कारण दिए जाने चाहिए।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा,केवल यह देखते हुए कि ट्रायल न्यायाधीश के आदेश ने साक्ष्य के लिए विवेक के आवेदन के बिना एक संभावित दृष्टिकोण लिया है और निष्कर्ष उस कर्तव्य के अनुरूप नहीं है जो उच्च न्यायालय को यह निर्धारित करते समय दिया जाता है कि क्या बरी होने के किसी आदेश के...

वकीलों की हड़ताल पर स्वत: संज्ञान केस : बीसीआई, राज्य बार काउंसिल से कोई प्रतिक्रिया नहीं, सुप्रीम कोर्ट का सहयोग के लिए बीसीआई अध्यक्ष से आग्रह
वकीलों की हड़ताल पर स्वत: संज्ञान केस : बीसीआई, राज्य बार काउंसिल से कोई प्रतिक्रिया नहीं, सुप्रीम कोर्ट का सहयोग के लिए बीसीआई अध्यक्ष से आग्रह

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा हड़ताल और काम से दूर रहने की समस्या के संबंध में, सोमवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष से कोर्ट को सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है।कोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए कि न्यायालय के लगातार निर्णयों के बावजूद, अभी भी वकील/बार एसोसिएशन हड़ताल पर हैं, 28 फरवरी, 2020 को स्वत: संज्ञान लिया था और बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सभी राज्य बार काउंसिलों को आगे की कार्रवाई का सुझाव देने और वकीलों द्वारा हड़ताल/काम से दूर रहने की समस्या से निपटने के लिए ठोस...

जब तक संदेह करने का कोई कारण न हो, आंखों से संबंधित साक्ष्य सर्वश्रेष्ठ साक्ष्य हैः सुप्रीम कोर्ट
जब तक संदेह करने का कोई कारण न हो, आंखों से संबंधित साक्ष्य सर्वश्रेष्ठ साक्ष्य हैः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में एक आरोपी को बरी करने के हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि जब तक संदेह करने के कारण न हों, तब तक आंखों से संबंधित साक्ष्य को सबसे अच्छा सबूत माना जाता है।न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि आंखों से संबंधित साक्ष्य पर तभी विश्वास नहीं किया जा सकता है जब चिकित्सा साक्ष्य और मौखिक साक्ष्य के बीच एक बड़ा विरोधाभास है और चिकित्सा साक्ष्य मौखिक गवाही को असंभव बना देता है और आंखों से संबंधित साक्ष्य के सत्य...

जब तक ऐसा इरादा इसकी शर्तों से स्पष्ट नहीं होता है, तब तक कोई आशय पत्र एक बाध्यकारी अनुबंध नहीं है : सुप्रीम कोर्ट 
जब तक ऐसा इरादा इसकी शर्तों से स्पष्ट नहीं होता है, तब तक कोई आशय पत्र एक बाध्यकारी अनुबंध नहीं है : सुप्रीम कोर्ट 

एक सरकारी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा दायर एक अपील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक ऐसा इरादा इसकी शर्तों से स्पष्ट नहीं होता है, तब तक कोई आशय पत्र एक बाध्यकारी अनुबंध नहीं है।न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस तरह का इरादा स्पष्ट और जाहिर होना चाहिए क्योंकि एलओआई आमतौर पर भविष्य में दूसरे पक्ष के साथ अनुबंध करने के लिए एक पक्ष के इरादे को इंगित करता है।यह मामला कंपनी द्वारा प्रतिवादी फर्म को 387.40 लाख रुपये के कुल काम के...

दूसरी लहर के दौरान लोग दवाओं की खरीद के लिए दौड़- धूप कर रहे थे : सुप्रीम कोर्ट ने COVID दवा जमाखोरी की जांच के खिलाफ गौतम गंभीर की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
दूसरी लहर के दौरान लोग दवाओं की खरीद के लिए दौड़- धूप कर रहे थे' : सुप्रीम कोर्ट ने COVID दवा जमाखोरी की जांच के खिलाफ गौतम गंभीर की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गौतम गंभीर फाउंडेशन द्वारा दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर और दिल्ली से वर्तमान भाजपा सांसद गौतम गंभीर की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट द्वारा COVID ​​​​-19 दवाओं की कथित जमाखोरी की जांच के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर किया गया था।न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने एक व्यक्ति द्वारा आवश्यक COVID दवाओं के वितरण को अस्वीकार करते हुए मौखिक टिप्पणियां कीं कि जब लोग इस साल...

इसरो जासूसी मामला :  जस्टिस डीके जैन रिपोर्ट आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती, सीबीआई स्वतंत्र रूप से सामग्री जुटाए  : सुप्रीम कोर्ट
इसरो जासूसी मामला : " जस्टिस डीके जैन रिपोर्ट आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती, सीबीआई स्वतंत्र रूप से सामग्री जुटाए " : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि कुख्यात जासूसी मामले में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन के खिलाफ साजिश के कोण पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डीके जैन द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आगे बढ़ने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है।न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो को आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र रूप से सामग्री एकत्र करनी चाहिए और केवल न्यायमूर्ति डीके जैन समिति की रिपोर्ट पर...

क्या हम इंसान नहीं हैं? क्या हमने मानवता का पूरा स्पर्श खो दिया है? क्या हम एक पुलिस राज्य में रह रहे हैं? जस्टिस दीपक गुप्ता ने फादर स्टेन स्वामी की मौत  और UAPA पर सवाल उठाए
''क्या हम इंसान नहीं हैं? क्या हमने मानवता का पूरा स्पर्श खो दिया है? क्या हम एक पुलिस राज्य में रह रहे हैं?'' जस्टिस दीपक गुप्ता ने फादर स्टेन स्वामी की मौत और UAPA पर सवाल उठाए

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने शनिवार को कहा, ''समय आ गया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (देशद्रोह) को असंवैधानिक करार दिया जाए।'' उन्होंने यह भी कहा कि यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) जैसा कानून वर्तमान स्वरूप में कानून की किताब में नहीं रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीजेएआर के एक वेबिनार में बोल रहे थे,जिसका विषय था-''लोकतंत्र, असहमति और कठोर कानून पर चर्चा- क्या यूएपीए और राजद्रोह को हमारी कानून की किताबों में जगह मिलनी चाहिए?''। सीजेआई एनवी रमना की मौखिक...

यूएपीए मामलों में प्रक्रिया ही सजा, बिना मुकदमे के फादर स्टेन स्वामी की मौत का मामला हमें डराता है: जस्टिस आफ्ताब आलम
यूएपीए मामलों में प्रक्रिया ही सजा, बिना मुकदमे के फादर स्टेन स्वामी की मौत का मामला हमें डराता है: जस्टिस आफ्ताब आलम

जस्टिस आफ्ताब आलम ने शनिवार को कहा की, "यूएपीए दिखाता है कि हम किसी भी अन्य देश की तुलना में अपने लोगों की आजादी को बिना किसी जवाबदेही के लूटने के लिए तैयार हैं!"सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सीजेएआर की ओर से आयोजित एक वेबिनार में बोल रहे थे, जिसका विषय था, "लोकतंत्र, असहमति और कठोर कानून पर चर्चा- क्या यूएपीए और राजद्रोह को हमारी कानून की किताबों में जगह मिलनी चाहिए?"जस्टिस आलम ने यूएपीए के पफॉर्मेंस ऑडिट की - संवैधानिक गारंटी और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से- यह देखने के लिए व्याख्या की कि...

ट्र्स्ट ने हर साल वकीलों और क्लर्कों को फ्री मेडिकल बीमा उपलब्ध करवाया : सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड वेलफेयर ट्र्स्ट ने SCAORA के प्रस्ताव पर जवाब दिया
"ट्र्स्ट ने हर साल वकीलों और क्लर्कों को फ्री मेडिकल बीमा उपलब्ध करवाया" : सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड वेलफेयर ट्र्स्ट ने SCAORA के प्रस्ताव पर जवाब दिया

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड वेलफेयर ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के हालिया प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें ट्रस्ट को अपने संचालन और गतिविधियों में SCAORA के पते के साथ SCAOR के नाम का उपयोग करने से रोकने का आह्वान किया गया है। ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा है कि ट्रस्ट ने अपने गठन के बाद से वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अन्य लोगों से धन जुटाया है और वकीलों, क्लर्कों और उनके परिवारों को हर साल मुफ्त चिकित्सा बीमा दे रहा है।लूथरा, जो...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
यदि कथित कृत्य आधिकारिक कर्तव्य से संबंधित तो सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमे के लिए धारा 197 CrPC के तहत मंजूरी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत सार्वजनिक कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए, यदि उनका कथित कृत्य आधिकारिक कर्तव्य से संबंधित है, तो सक्षम प्राधिकरणों की मंजूरी आवश्यक होगी।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा, उक्त कानून के अनुपालन का पैमाना यह होगा कि प्राध‌िकरण का प्रथम दृष्‍टया यह राय कायम करनी होगी कि चूक का कार्य, जिसके लिए कर्मचारी को आरोपित किया गया है, उनके कर्तव्यों के निर्वहन के साथ उचित रूप से जुड़ा था।पीठ ने यह टिप्पणी...

सुप्रीम कोर्ट ने मैट्रिक्स सेल्युलर के जब्त ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स को रिलीज करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने मैट्रिक्स सेल्युलर के जब्त ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स को रिलीज करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मैट्रिक्स सेल्युलर लिमिटेड द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को स्थगित कर दिया। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा जब्त किए गए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को तत्काल रिलीज करने की मांग वाली याचिका में राहत देने से इनकार कर दिया गया था।न्यायमूर्ति नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने एएसजी राजू द्वारा अनुरोध किए जाने के बाद जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए दिल्ली पुलिस को तीन सप्ताह का समय दिया है।बेंच ने कहा कि,"तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल...

समझौते की शक्ति स्पष्ट रूप से उस क़ानून द्वारा प्रदान की जानी चाहिए जो अपराध पैदा करता है : सुप्रीम कोर्ट
समझौते की शक्ति स्पष्ट रूप से उस क़ानून द्वारा प्रदान की जानी चाहिए जो अपराध पैदा करता है : सुप्रीम कोर्ट

समझौते की शक्ति स्पष्ट रूप से उस क़ानून द्वारा प्रदान की जानी चाहिए जो अपराध पैदा करता है, सुप्रीम कोर्ट ने पारित एक फैसले में कहा।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के बाहर के अपराधों के संबंध में, समझौते की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब इस तरह के अपराध मे समझौते करने से पहले अपराध बनाने वाले क़ानून में समझौते के लिए एक स्पष्ट प्रावधान हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि सीआरपीसी की धारा 320 केवल आईपीसी के तहत अपराधों में समझौते का प्रावधान करती है।भारतीय...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
बूथ पर कब्जा और फर्जी मतदान कानून के शासन और लोकतंत्र को प्रभावित करता है; सख्ती से निपटा जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को एक फैसले में कहा कि बूथ कैप्चरिंग और फर्जी वोटिंग के मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए क्योंकि यह अंततः कानून के शासन और लोकतंत्र को प्रभावित करता है।जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि मतदान की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक हिस्सा है और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोट डालने की गोपनीयता आवश्यक है।पीठ ने कहा कि चुनावी प्रणाली का सार मतदाताओं को अपनी स्वतंत्र पसंद का प्रयोग करने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना होना...

सुप्रीम कोर्ट ने अपील दायर करने में देरी के लिए सीबीआई को फटकार लगाई; नए निदेशक से समय पर फाइलिंग सुनिश्चित करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपील दायर करने में देरी के लिए सीबीआई को फटकार लगाई; नए निदेशक से समय पर फाइलिंग सुनिश्चित करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया कि भविष्य में अपील दायर करने और कानून के अन्य कदमों को उठाने में देरी न हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश यह देखते हुए दिया कि उसके अधिकारियों की ओर से निर्धारित समय के भीतर ऐसा करने में देरी हो रही है।इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देरी के कारणों के संबंध में "गंभीर संदेह" को जन्म देता है।न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की पीठ ने सीबीआई निदेशक को यह सुनिश्चित करने के लिए...

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली- एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता  खराब होने पर पटाखों पर बैन के आदेश को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली- एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता ' खराब' होने पर पटाखों पर बैन के आदेश को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया, जिसमें एनसीआर और भारत के अन्य शहरों में COVID​​​​-19 महामारी के दौरान सभी पटाखों की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब था।यह कहते हुए कि अधिकारी एक्यूआई की श्रेणी के अनुसार पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दे सकते हैं, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने आदेश दिया कि इसे एनजीटी के आदेश में संबोधित किया गया था और आगे...

मणिपुर हाईकोर्ट ने COVID के इलाज के लिए गोबर इस्तेमाल करने पर फेसबुक पोस्ट करने वाले NSA के तहत हिरासत में लिए गए पत्रकार की रिहाई का आदेश दिया
मणिपुर हाईकोर्ट ने COVID के इलाज के लिए गोबर इस्तेमाल करने पर फेसबुक पोस्ट करने वाले NSA के तहत हिरासत में लिए गए पत्रकार की रिहाई का आदेश दिया

मणिपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा को अंतरिम रिहाई का निर्देश दिया। पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा ने COVID​​​​-19 के कारण भाजपा नेता की मौत पर अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया था। अपनी इस फेसबुक पोस्ट में उन्होंने COVID-19 के इलाज को लेकर लिखा था- 'गोबर, गोमूत्र ने काम नहीं किया।'किशोरचंद्र की पत्नी द्वारा दायर एक पत्र-याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश पी वी संजय कुमार और न्यायमूर्ति ख. नोबिन सिंह ने आज (शुक्रवार) शाम पाँच बजे तक एक्टिविस्ट...