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सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
जब कानून के तहत उपाय उपलब्ध हों तो हाईकोर्ट को रिट को हतोत्साहित करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब कानून के तहत उपचार उपलब्ध हों तो हाईकोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने को हतोत्साहित करना है। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने सरफेसी मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेशों की आलोचना करते हुए ‌सिक्योर्ड क्रे‌डिटर द्वारा दायर एसएलपी पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की।तथ्यसरफेसी, 2002 के तहत प्रतिवादी/उधारकर्ता के खिलाफ कार्यवाही तब शुरू की गई थी, जब उसने डिफॉल्ट किया था और उसके खाते को एनपीए घोषित किया गया था। धारा 14 के...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने "लक्जरी मुकदमेबाजी" की निंदा की; याचिकाकर्ता पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि वह "लक्जरी मुकदमेबाजी" (अपने ईगो को संतुष्ट करने के इरादे से दायर किया गया वाद) दायर करने का विरोध करता है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने हालांकि शुरुआत में 18 लाख का जुर्माना लगाने की इच्छा जताई, लेकिन याचिका को खारिज करते हुए दो लाख का जर्माना लगाने का फैसला किया।पीठ ने कहा,"हमारा विचार है कि मौजूदा कार्यवाही ट्रस्ट के प्रबंधन पर नियंत्रण हासिल करने के लिए युद्धरत समूहों...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी और पीड़ित की बहन के बीच शादी का संज्ञान लेते हुए हत्या के प्रयास के दोषी की सज़ा कम की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के अपराध से जुड़े एक मामले में आरोपी की सज़ा इस तथ्य पर ध्यान देते हुए कम कर दी कि आरोपी और पीड़ित की बहन ने शादी कर ली। आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आवेदन दायर कर अपराध के कंपाउंडिंग की मांग की थी।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने अपराध की सज़ा कम करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल किया।आरोपी को आईपीसी की धारा 307 सहपठित धारा 149 के तहत अपराध के लिए सजा सुनाई गई...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना राज्य को टीचिंग पोस्ट में 100% एसटी आरक्षण रद्द करते समय लगाए गए 2.5 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तेलंगाना राज्य को 2,50,000 रुपये का जुर्माना जमा करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया। कोर्ट ने अनुसूचित क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों के पोस्ट के लिए अनुसूचित जनजाति को 100% आरक्षण प्रदान करने के लिए तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य के फैसले को असंवैधानिक करार देतेत हुए रद्द कर दिया था।तेलंगाना राज्य को इसे जमा करने के लिए 2 सप्ताह का निर्देश देते हुए, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने अपने आदेश में कहा,"तेलंगाना राज्य के लिए आकांक्षा मेहरा ने कहा...

फैसले को पूरी तरह से गलत तरीके से पढ़ा है : सुप्रीम कोर्ट ने निविदा मामले में  एन जी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड फैसले का हवाला देते हुए रिट खारिज करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया
'फैसले को पूरी तरह से गलत तरीके से पढ़ा है' : सुप्रीम कोर्ट ने निविदा मामले में ' एन जी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड' फैसले का हवाला देते हुए रिट खारिज करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें मेसर्स एन जी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड बनाम मेसर्स विनोद कुमार जैन और अन्य, 2022 लाइव लॉ (SC) 302 में की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए एक रिट याचिका को खारिज कर दिया गया था।जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, हम पाते हैं कि हाईकोर्ट ने इस न्यायालय के फैसले को पूरी तरह से गलत तरीके से पढ़ा है। पृष्ठभूमिप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इवालेश्वर, तालुका माहूर, जिला नांदेड़ के स्टाफ क्वार्टर के निर्माण के लिए...

सुप्रीम कोर्ट ने डिसकैलकुलिया से पीड़ित छात्रा को राहत दी, अनुच्छेद 142 को तहत मास्टर्स ऑफ डिज़ाइन पास घोषित किया
सुप्रीम कोर्ट ने डिसकैलकुलिया से पीड़ित छात्रा को राहत दी, अनुच्छेद 142 को तहत मास्टर्स ऑफ डिज़ाइन पास घोषित किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में "डिसकैलकुलिया" नामक सीखने की दिव्यांगता से पीड़ित एक छात्रा को यह घोषणा करते हुए राहत दी कि उसने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में मास्टर्स ऑफ डिज़ाइन पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है।जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने उम्मीदवार को राहत देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया।उम्मीदवार ने इससे पहले 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और उसे आईआईटी में मास्टर्स ऑफ डिज़ाइन पाठ्यक्रम में...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
नाइजीरियन नेशनल ने उसके बच्चों को एग्जिट परमिट जारी करने के लिए फीस लेने का आरोप लगाया; सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक नाइजीरियाई नागरिक की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें गृह मंत्रालय और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय, बैंगलोर द्वारा उसके तीन बच्चों को एग्जिट परमिट जारी करने के लिए 4,34,000 रुपये की फीस वसूलने का आरोप लगाया गया था।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है। नाइजीरियाई नागरिक ने फीस लेने को रद्द करने/छूट देने के आधार पर सभी चार बच्चों को तत्काल आधार पर एक्जिट परमिट जारी करने की मांग...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीसी परीक्षा में सी सर्टिफिकेट पेश करने में विफल रहने पर एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन रद्द करने के कॉलेज के संचार से पीड़ित लड़की को राहत दी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाल ही में एमएलएन कॉलेज, प्रयागराज में 3 साल का एमबीबीएस कोर्स पूरा करने वाली एक लड़की को राहत दी है, जो इस आधार पर एडमिशन रद्द नहीं करने की मांग कर रही थी कि उसके पास एनसीसी परीक्षा में सी सर्टिफिकेट नहीं है।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 मई, 2022 के आदेश पर एसएलपी पर विचार करते हुए राहत प्रदान की।आदेश में हाईकोर्ट ने उसकी रिट को खारिज कर दिया था जिसमें उसने एनईईटी यूजी काउंसलिंग 2019 ब्रोशर में प्रदान किए...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक घोषित करने की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जिला स्तर पर पहचान की मांग

संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत लाभ देने के उद्देश्य से जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार द्वारा मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक घोषित करने की 1993 की अधिसूचना को मनमानी, तर्कहीन और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 और 30 के विपरीत घोषित करने की मांग की गई है।23 अक्टूबर 1993 की अधिसूचना के अनुसार, भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग...

संरक्षित स्मारक के निषिद्ध क्षेत्र के भीतर शौचालय, पानी की आपूर्ति आदि जैसी आवश्यक सुविधाओं के निर्माण की अनुमति है: सुप्रीम कोर्ट
संरक्षित स्मारक के निषिद्ध क्षेत्र के भीतर शौचालय, पानी की आपूर्ति आदि जैसी आवश्यक सुविधाओं के निर्माण की अनुमति है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक पुरी जगन्नाथ मंदिर के पास ओडिशा सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों की अनुमति देते हुए माना कि संरक्षित स्मारक के पास निषिद्ध क्षेत्र के भीतर शौचालय, पानी की आपूर्ति आदि जैसी आवश्यक सुविधाओं के निर्माण की अनुमति है।न्यायालय ने माना कि प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम (एएमएएसआर अधिनियम), 1958 एक संरक्षित स्मारक (अर्धेंदु कुमार दास बनाम ओडिशा राज्य) से 100 मीटर निषिद्ध क्षेत्र के भीतर ऐसी निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं करता है।अधिनियम की...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
तुच्छ जनहित याचिकाओं को जड़ से खत्म कर देना चाहिए; वे न्यायिक समय का अतिक्रमण करती हैं, विकास गतिविधियों को रोकती हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने तुच्छ जनहित याचिकाओं के "कुकुरमुत्ते की तरह" फैलते जाने की घटना पर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह याचिकाएं मूल्यवान न्यायिक समय का अतिक्रमण करती हैं।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस हिमा कोहली की एक अवकाश पीठ ने इस तरह की प्रथा की निंदा करते हुए कहा कि शुरुआत में ही इस तरह के मामले बड़े पैमाने पर जनहित में विकासात्मक गतिविधियों को रोक देंगे।पीठ ने भक्तों के लाभ के लिए पुरी जगन्नाथ मंदिर परिसर में ओडिशा सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
'यह कानून मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 और 30 के विपरीत': सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2 (C) की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया है कि यह कानून न केवल केंद्र को बेलगाम शक्ति देता है बल्कि स्पष्ट रूप से मनमाना और तर्कहीन है।यह याचिका देवकीनंदन ठाकुर जी ने दायर की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 29 और 30 के विपरीत है।याचिका में कहा गया है,"17.05.1992 को अधिनियम के प्रभाव में आने पर कार्रवाई का कारण बनने वाले तथ्य और धारा 2 (सी) के तहत...

पंजाब में सरकारी मशीनरी पूरी तरह से विफल: सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस में सीबीआई जांच की मांग करते हुए बीजेपी नेता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
'पंजाब में सरकारी मशीनरी पूरी तरह से विफल': सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस में सीबीआई जांच की मांग करते हुए बीजेपी नेता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

बीजेपी नेता जगजीत सिंह ने पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है।प्राथमिकी 103/2022 में जांच की मांग की गई है जो 29 मई, 2022 को पीएस सिटी 1 मनसा, जिला मानसा में भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 302, 307, 341, 148, 149, 427 और 120-बी और आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 25 और 27 के तहत दर्ज की गई थी।सिंह ने याचिका में तर्क दिया है कि सिद्धू मूसेवाला की उनके गांव में उनके घर के पास नृशंस हत्या ने पंजाब राज्य...

केरल हाईकोर्ट
केरल अभिनेता यौन उत्पीड़न मामला: केरल हाईकोर्ट ने मामले में आगे की जांच को समाप्त करने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अभियोजन पक्ष को 2017 के यौन उत्पीड़न मामले (Sexual Assault Case) में आगे की जांच समाप्त करने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने अपराध शाखा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया।अभियोजन पक्ष ने 8 अप्रैल को अदालत का दरवाजा खटखटाया था और जांच को समाप्त करने के लिए विस्तार की मांग करते हुए दावा किया था कि आगे की जांच को पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की आवश्यकता के लिए कोर्ट को संतुष्ट करने के लिए मामले के उचित निर्णय के लिए कुछ वॉयस क्लिप बेहद...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई सिटी डिस्ट्रिक्ट जिम एसोसिएशन की चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को मुंबई सिटी डिस्ट्रिक्ट जिम एसोसिएशन द्वारा 29 अप्रैल, 2022 को अधिसूचित चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बी.वी. नागरत्न की अवकाशकालीन पीठ ने कहा,"आप बॉम्बे हाईकोर्ट में विफल कर चुके हैं और अब आप सुप्रीम कोर्ट में आ गए हैं? आप लोग खेलों का राजनीतिकरण कर रहे हैं। हम चुनावी मामलों के खिलाफ याचिका दायर करने की सराहना नहीं करते हैं?"पीठ ने आगे टिप्पणी की,"जब एचसी ने आपकी याचिका पर...

भक्तों के लाभ के लिए: सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार द्वारा पुरी जगन्नाथ मंदिर में निर्माण गतिविधियों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की
"भक्तों के लाभ के लिए": सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार द्वारा पुरी जगन्नाथ मंदिर में निर्माण गतिविधियों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पुरी में प्रतिष्ठित श्री जगन्नाथ मंदिर (Puri Jagannath Temple) परिसर में ओडिशा सरकार द्वारा अवैध उत्खनन और निर्माण कार्य का आरोप लगाते हुए दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया।याचिकाओं को तुच्छ और जनहित के विपरीत बताते हुए अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। पीठ ने कहा, "हाल के दिनों में यह देखा गया है कि जनहित याचिकाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसी कई याचिकाएं या तो प्रचार हित याचिका या व्यक्तिगत हित याचिका हैं। हम इस तरह की...