नाइजीरियन नेशनल ने उसके बच्चों को एग्जिट परमिट जारी करने के लिए फीस लेने का आरोप लगाया; सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार

Brij Nandan

6 Jun 2022 1:45 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक नाइजीरियाई नागरिक की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें गृह मंत्रालय और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय, बैंगलोर द्वारा उसके तीन बच्चों को एग्जिट परमिट जारी करने के लिए 4,34,000 रुपये की फीस वसूलने का आरोप लगाया गया था।

    जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है। नाइजीरियाई नागरिक ने फीस लेने को रद्द करने/छूट देने के आधार पर सभी चार बच्चों को तत्काल आधार पर एक्जिट परमिट जारी करने की मांग की थी।

    जब मामले को सुनवाई के लिए बुलाया गया तो याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एक नाइजीरियाई नागरिक है जो 2014 में वैध अध्ययन वीजा के तहत भारत आया था और उसने एक नाइजीरियाई से शादी की थी। वकील ने आगे तर्क दिया कि इस तरह के जुर्माना लगाने के लिए कोई कारण बताए बिना एमएचए द्वारा जुर्माना लगाया गया था।

    पीठ ने याचिका पर विचार नहीं करने से इनकार करते हुए कहा,

    "ये सभी नीतिगत निर्णय हैं। आपको हाईकोर्ट जाना चाहिए।"

    याचिका में यह तर्क दिया गया कि कार्रवाई व्यावहारिक रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता से इनकार करती है।

    फॉरेनर्स ऑर्डर, 1957 के पंजीकरण की धारा 2 का उल्लेख करते हुए, जिसमें प्रावधान है कि विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939, 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर लागू नहीं होगा।

    याचिका में कहा गया,

    "यहां विचाराधीन बच्चे, जो सभी 12 वर्ष से कम आयु के हैं, पर एग्जिट परमिट जारी करने के लिए फीस नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि उन्हें छूट के लिए पहले स्थान पर पंजीकृत नहीं किया गया था। इसलिए, पंजीकरण की अनुपस्थिति और छूट में, वहां किसी वास्तविक शुल्क और/या दंड शुल्क का कोई सवाल ही नहीं है।"

    याचिका में आगे कहा गया है कि कोई वैधानिक प्रावधान / अध्यादेश / सरकारी आदेश / कार्यालय ज्ञापन मौजूद नहीं है जो एग्जिट परमिट जारी करने के लिए वास्तविक और / या जुर्माना शुल्क लगाने का तरीका निर्धारित करता है।

    याचिका एओआर ए सेल्विन राजा के जरिए दायर की गई है।

    केस टाइटल: चियोमा मोनिका ऑस्टिन बनाम भारत संघ एंड अन्य

    Next Story