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न्यायिक सेवा - मौखिक परीक्षा से पहले मुख्य परीक्षा के अंकों के खुलासे से बचा जाना चाहिए, उम्मीदवारों बहुविकल्पीय प्रश्न पत्र की अनुमति दी जाए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि साक्षात्कार/ मौखिक परीक्षा आयोजित करने से पहले मुख्य परीक्षा के अंकों के खुलासे से बचा जा सकता है। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने अवलोकन किया, "जहां लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार / मौखिक परीक्षा होती है और साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों को लिखित परीक्षा में उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों के बारे में अवगत कराया जाता है, जो मौखिक परीक्षा के उम्मीदवारों के निष्पक्ष मूल्यांकन को प्रभावित करने वाला पूर्वाग्रह कर सकते हैं।" इस मामले में सुप्रीम...
ईदगाह मैदान: सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने राय में अंतर के कारण सीजेआई को मामला भेजा; जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस अभय ओका और जस्टिस एमएम सुंदरेश अब मामले की सुनवाई करेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने गणेश चतुर्थी के लिए बेंगलुरु के चामराजपेट में ईदगाह मैदान के उपयोग की अनुमति देने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 3-जजों की पीठ के पास भेज दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस एएस ओका और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ का गठन किया, जिसे आज शाम से इस मामले की सुनवाई करनी है।यह त्योहार कल मनाया जाएगा। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की रोस्टर बेंच के बीच "मतभेद" के बाद संदर्भ दिया गया था।वक्फ बोर्ड की ओर से पेश सीनियर...
सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी खातों में जमा काला धन की वसूली के लिए कदम उठाने की मांग वाली राम जेठमलानी और अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दिवंगत सीनियर एडवोकेट और राजनेता राम जेठमलानी (Ram Jethmalani) और अन्य द्वारा दायर एक याचिका को स्थगित कर दिया, जिसमें विदेशी खातों में जमा काले धन (Black Money) की वसूली के लिए कदम उठाने की मांग की गई थी।याचिका 2009 में दायर की गई थी, पर आखिरी बार 2016 में सुनवाई हुई थी।जेठमलानी के अलावा, इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल सहित 5 अन्य याचिकाकर्ता हैं।पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो एफ रिबेरियो और इसी मुद्दे को उठाने वाले 15 अन्य पूर्व सिविल सेवकों द्वारा...
मध्यस्थ अपनी फीस एकतरफा तय नहीं कर सकते क्योंकि यह पार्टी की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मध्यस्थों के पास पार्टियों की सहमति के बिना एकतरफा अपनी फीस तय करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 की चौथी अनुसूची के तहत निर्धारित शुल्क मान अनिवार्य नहीं है।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने फैसले के ऑपरेटिव पार्ट को इस प्रकार पढ़ा:1. अधिनियम की चौथी अनुसूची अनिवार्य नहीं है।2. मध्यस्थों के पास अपनी फीस को नियंत्रित करने वाले एकतरफा बाध्यकारी आदेश जारी करने की शक्ति नहीं है।फीस का एकतरफा निर्धारण पार्टी...
क्या परिसीमा विस्तार अवधि में दाखिल चेक बाउंस मामलों की शिकायतें सुनवाई योग्य हैं? सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन की स्पष्टीकरण याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें अदालत के आदेशों की व्याख्या के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गई थी, जिसमे नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के प्रावधान (बी) और (सी) की परिसीमा को निलंबित कर दिया था।मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश ललित और जस्टिस रवींद्र भट की पीठ ने की। तदनुसार याचिकाकर्ता द्वारा मामला वापस ले लिया गया था।याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए।...
सीजेआई ललित के रिफॉर्म : सुप्रीम कोर्ट ने नए मामलों की समय पर लिस्टिंग सुनिश्चित करने के लिए परिवर्तनों को अधिसूचित किया
भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित द्वारा किए गए वादे के अनुरूप, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने नए मामलों की सूची (Listing Of New Cases) में महत्वपूर्ण बदलावों को अधिसूचित किया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि लिस्टिंग समयबद्ध तरीके से हो रही है।शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से निर्देश दिया है कि शनिवार, सोमवार और मंगलवार को वैरिफाइड सभी नए मामलों को अगले सप्ताह सोमवार को सूचीबद्ध किया जाएगा। बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को वैरिफाइड उन मामलों को अगले सप्ताह शुक्रवार को...
सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस पर यूपी सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद की
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 1992 में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के विध्वंस के संबंध में लंबित अवमानना कार्यवाही (Contempt Case) को बंद किया।1992 में उत्तर प्रदेश राज्य के खिलाफ अवमानना याचिका मोहम्मद असलम भूरे द्वारा दायर की गई थी। यह याचिका अदालत को क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में दिए गए अंडरटेकिंग के उल्लंघन के लिए दायर की गई थी।जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने समय बीतने और सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले को ध्यान में रखते हुए...
नोटिस जारी करने के बाद ट्रांसफर याचिकाओं को सिंगल जजों के बजाय डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए: सुप्रीम कोर्ट ने सर्कुलर जारी किया
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें कहा गया है कि संबंधित मामलों में नोटिस जारी करने के बाद ट्रांसफर याचिकाओं को अब सिंगल जजों के बजाय डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।हालांकि, नई ट्रांसफर याचिकाएं एकल न्यायाधीशों के समक्ष सूचीबद्ध होती रहेंगी।इस संबंध में 29 अगस्त का सर्कुलर इस प्रकार है,"अब से, नोटिस के बाद ट्रांसफर याचिकाओं को अगले आदेश तक सिंगल जज पीठ के बजाय खंडपीठों के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। हालांकि, नई ट्रांसफर याचिकाओं को सिंगल जजों के समक्ष...
सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहुविवाह और निकाह हलाला की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अक्टूबर में सुनवाई करेगा; NHRC, NCW और NCM को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ दशहरा की छुट्टियों (अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में) के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law) द्वारा अनुमत बहुविवाह (Polygamy) और निकाह हलाला (Nikah Halala) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी।इन प्रथाओं को चुनौती देने वाली आठ याचिकाओं को जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सुधांशु धूलिया की 5 जजों की पीठ के समक्ष मंगलवार को सूचीबद्ध किया गया था।पीठ ने राष्ट्रीय...
सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के गुजरात दंगों से जुड़े सभी केस बंद किए, कोर्ट ने कहा- अब इन याचिकाओं पर विचार करने की आवश्यकता नहीं
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा दायर दस याचिकाओं सहित दस याचिकाओं का निपटारा किया, जिसमें 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हिंसा के मामलों में उचित जांच की मांग की गई थी।इन मामलों में एनएचआरसी द्वारा दायर ट्रांसफर याचिकाएं, दंगा पीड़ितों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाएं, 2003-2004 के दौरान एनजीओ सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस द्वारा दायर रिट याचिका, फरवरी 2002 के गोधरा नरसंहार के बाद गुजरात में गुजरात पुलिस से सीबीआई को हिंसा के मामलों में जांच स्थानांतरित करने...
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण और तरुण तेजपाल के खिलाफ 2009 का अवमानना मामला बंद किया
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को एडवोकेट प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ 2009 में तहलका पत्रिका को दिए गए उनके इंटरव्यू में अवमानना के मामले को बंद कर दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भारत के 16 पूर्व मुख्य न्यायाधीश भ्रष्ट हैं।जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ ने अवमानना करने वालों की माफी के मद्देनजर अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी।भूषण की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि वह पहले ही माफी मांग चुके हैं।...
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ EWS कोटा और मुस्लिम एसईबीसी आरक्षण की वैधता को चुनौती देने वाले मामलों की सुनवाई 13 सितंबर से शुरू करेगी
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण (EWS) की संवैधानिक वैधता और आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के रूप में दिए गए आरक्षण की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामलों में 13 और 14 सितंबर को सुनवाई शुरू करेगी।भारत के चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस जेबी पारदीवाला की 5 जजों की पीठ ने मंगलवार को इन मामलों को अगले मंगलवार यानी 6 सितंबर की...
कुछ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई टालने का अनुरोध किया, केंद्र ने कहा- कई राज्यों के जवाब का इंतजार है
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हलफनामा दायर कर हिंदुओं को अल्पसंख्यक (Hindu Minority) का दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर उन राज्यों के लिए और समय मांगा है जहां उनकी संख्या कम है।29 अगस्त को दायर हलफनामे में कहा गया है कि केंद्र सरकार पहले ही नागालैंड, पंजाब, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू- कश्मीर और लद्दाख गृह मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग, शिक्षा...
' शिक्षकों के साथ हुए भेदभाव का उपाय' : सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेच्युटी अधिनियम में शिक्षकों को शामिल करने के संशोधन को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को ग्रेच्युटी का लाभ देने के लिए ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 में संशोधन को बरकरार रखा है। जस्टिस संजीव खन्ना और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2009 की धारा 2 (ई) में संशोधन और 3 अप्रैल 1997 से पूर्वव्यापी प्रभाव से के द्वारा ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम में धारा 13ए का समावेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली अपील / रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ संशोधन एक विधायी गलती के कारण शिक्षकों के साथ...
सीजेआई के रिफॉर्म : नियमित सुनवाई के मामले नॉन मिसलेनिअस दिनों में सबसे पहले उठाये जाएंगे
भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने नॉन मिसलेनिअस (गैर-विविध) दिन जैसे मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को मामलों की सुनवाई के क्रम में बदलाव की शुरुआत की है। संभवत: फाइनल हियरिंग के मामलों को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया है। 30 अगस्त को प्रकाशित कॉज लिस्ट के अनुसार नियमित सुनवाई के मामलों की सुनवाई सुबह ही की जाएगी। दोपहर के भोजन के बाद के सत्र के दौरान नोटिस के बाद वाले मामले और विविध मामलों को सुनवाई के लिए लिया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट में सोमवार और शुक्रवार को नई याचिकाओं को सुनवाई के...
NDPS Act: सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से नशीले पदार्थों के सेवन को अपराध घोषित करने वाले प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
भारत के चीफ जस्टिस यू.यू. ललित और जस्टिस रवींद्र भट ने सोमवार को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस अधिनियम (NDPS Act),1985 के कुछ प्रावधानों को अमान्य घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की।मामले में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि एनडीपीएस अधिनियम के अनुसार ड्रग्स का व्यक्तिगत सेवन एक आपराधिक अपराध है। उन्होंने कहा कि इस अपराधीकरण ने कलंक को और बढ़ा दिया और नशीली दवाओं के उपयोग से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार को रोका।याचिकाकर्ता के तर्कों का सार यह था कि ड्रग्स की आपूर्ति करने...
सुप्रीम कोर्ट में एनसीपीसीआर ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें माना गया कि 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की वैध विवाह में प्रवेश कर सकती है
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की वैध विवाह में प्रवेश कर सकती है। इस फैसले को एनसीपीसीआर ने शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है। एडवोकेट स्वरूपमा चतुर्वेदी के माध्यम से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है।पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस फैसले में मुस्लिम लड़की (16 वर्ष की उम्र) को सुरक्षा प्रदान की थी, जिसने अपनी...
विशेष विवाह अधिनियम: सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम सूचना और व्यक्तिगत विवरण के प्रकाशन के प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के कुछ प्रावधानों खिलाफ दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। उक्त प्रावधानों के तहत विवाह के लिए इच्छित पक्षकारों को विवाह से 30 दिनों पहले अपने निजी विवरण प्रकाशित करना अनिवार्य है, ताकि तथ्यों की सार्वजनिक रूप से जांच हो सके।याचिका में विशेष रूप से धारा 6(2), 6(3) [दोनों प्रावधान इच्छित विवाह की सूचना के संबंध में हैं], 7 [विवाह पर आपत्ति], 8 [आपत्ति प्राप्त होने की प्रक्रिया], 9 [एसएमए की धारा 8 के तहत जांच से जिस सीमा तक यह...
"यह अभी तक अधिनियम नहीं बना है": सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह के पंजीकरण की अनुमति देने वाले राजस्थान कानून को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 की धारा 8 को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता "यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया" ने कानून को चुनौती दी क्योंकि यह बाल विवाह के पंजीकरण की अनुमति देता है।2021 में राजस्थान राज्य विधानसभा ने 2009 के अधिनियम [राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम] में संशोधन करने के लिए विधेयक पारित किया था, जो बाल विवाह सहित विवाह के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान करता है।याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट...
तलाक-ए-हसन को चुनौती देने वाली याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने पति को पक्षकार बनाया, समझौता करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए नोटिस जारी किया
एक मुस्लिम महिला द्वारा तलाक-ए-हसन (Talaq-E-Hasan) के माध्यम से तलाक की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका में, इस आधार पर कि यह महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण है, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पति को पक्षकार बनाया और समझौता करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए नोटिस जारी किया।सुनवाई की आखिरी तारीख पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था,"याचिकाकर्ता के वकील ने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा है। हमने प्रतिवादी के शादी टूटने के आरोप के मद्देनजर भी वकील रखा है, क्या याचिकाकर्ता मेहर के ऊपर भुगतान की...

















