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बेंच बदलने से कानून नहीं बदल सकता कोऑर्डिनेट बेंच का फैसला बाध्यकारी : सुप्रीम कोर्ट
गुजरात SEZ से बिजली पर अडानी पावर को कस्टम ड्यूटी में छूट देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट को स्टेयर डेसिसिस के सिद्धांत का उल्लंघन करने के लिए यह कहते हुए गलत ठहराया कि उसने गलत तरीके से एक बाध्यकारी कोऑर्डिनेट बेंच के फैसले को नज़रअंदाज़ किया और दोहराया कि बेंच बदलने से कानून नहीं बदल सकता।कहा गया,“मिसाल का अनुशासन व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं है; यह एक संस्थागत ज़रूरत है। स्टेयर डेसिसिस एट नॉन क्विएटा मूवेरे जिसका मतलब है कि जो तय हो गया, उस पर कायम रहना और जो तय हो गया, उसे परेशान न...
समान वेतन की मांग करने वाले पश्चिम बंगाल के पार्ट-टाइम शिक्षकों को नई प्रतिनिधित्व याचिका दाखिल करने की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल के कुछ अंशकालिक (पार्ट-टाइम) शिक्षकों को राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष पूर्णकालिक शिक्षकों के समान वेतन (पे-पैरिटी) की मांग को लेकर नई अभ्यावेदन/प्रतिनिधित्व (representation) दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी उनके अभ्यावेदन पर चार महीने के भीतर कारणयुक्त (reasoned) आदेश पारित करे।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट में आदेश का ऑपरेटिव भाग पढ़ते हुए न्यायमूर्ति मेहता ने कहा...
वादी अपनी मर्ज़ी से तय करता है किसे पक्ष बनाना है, किसी को ज़बरदस्ती जोड़ नहीं सकते : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें याची ने स्वयं को एक वाद (सूट) में प्रतिवादी के रूप में शामिल किए जाने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि वादी (plaintiff) वाद का “डोमिनस लिटिस” होता है और उसे यह अधिकार है कि वह किनके विरुद्ध राहत मांगना चाहता है। ऐसे में किसी ऐसे पक्ष को शामिल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जिसके खिलाफ कोई राहत ही दावा नहीं की गई हो।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने कहा —“वादी अपने प्रतिद्वंद्वी स्वयं चुनते हैं। यदि...
क्या प्रोफ़ेसर अली खान महमूदबाद के खिलाफ़ केस बंद किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि हरियाणा राज्य एक बार की दरियादिली दिखाते हुए ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उनके सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक मामले में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अली खान महमूदबाद पर मुकदमा चलाने की मंज़ूरी न दे।कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राज्य ऐसी नरमी दिखाने को तैयार है तो यह ज़रूरी है कि महमूदबाद भी भविष्य में 'ज़िम्मेदारी से पेश आएं'।चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।चीफ़ जस्टिस ने शुरुआत में टिप्पणी...
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Amtek Group के प्रमोटर अरविंद धाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने कथित रूप से करीब 27,000 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Amtek Group के प्रमोटर अरविंद धाम को जमानत दी।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए यह राहत प्रदान की, जिसमें धाम को नियमित जमानत देने से इनकार किया गया था।प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दिसंबर, 2022 की FIR पर आधारित है।ये FIR बैंक ऑफ महाराष्ट्र और आईडीबीआई बैंक की...
UAPA के तहत जमानत सुनवाई बचाव पक्ष का मूल्यांकन करने या सबूतों का वजन करने का मंच नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत सुनवाई बचाव पक्ष का मूल्यांकन करने या सबूतों का वजन करने का मंच नहीं है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि उसकी भूमिका सिर्फ यह तय करने तक सीमित है कि क्या अभियोजन पक्ष की सामग्री, जिसे पहली नज़र में देखा जाए, कथित अपराध के ज़रूरी तत्वों को प्रथम दृष्टया दिखाती है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजानिया की बेंच ने जमानत याचिकाओं पर...
UAPA | 'आतंकवादी कृत्य' सिर्फ़ पारंपरिक हिंसा तक सीमित नहीं, इसमें किसी भी माध्यम से ज़रूरी सप्लाई को बाधित करने की साज़िश भी शामिल: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को इस आधार पर ज़मानत देने से इनकार किया कि पहली नज़र में वे कथित साज़िश के मुख्य सूत्रधार थे। कोर्ट ने अन्य पांच आरोपियों - गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को यह तर्क देते हुए ज़मानत दी कि उनकी भूमिका केवल मदद करने वाली प्रकृति की थी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच द्वारा दिए गए अपने फैसले में कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA)...
क्या FIR में शुरू में सिर्फ़ IPC अपराधों का ज़िक्र होने पर PC Act की धारा 17A की मंज़ूरी ज़रूरी है? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि क्या सिर्फ़ IPC अपराधों के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ़ दर्ज मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A के तहत पहले से मंज़ूरी लेना ज़रूरी है, जब बाद में पता चलता है कि उनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।यह मामला तब सामने आया, जब जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कर्नाटक सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें एक आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में पूर्व-MLC डी.एस. वीरैया के खिलाफ़ एक आपराधिक मामला रद्द कर दिया गया। वीरैया...
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ झूठी और बेबुनियाद शिकायतों पर रोक लगाने के लिए जारी किए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर निर्देश जारी किए कि हाईकोर्ट को जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायतों से कैसे निपटना चाहिए, जिसमें झूठी और बेबुनियाद शिकायतों और पहली नज़र में सच पाई गई शिकायतों के बीच अंतर बताया गया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि जिला न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ झूठी और बेबुनियाद शिकायतें दर्ज करने या करवाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्रवाई में उचित मामलों में कोर्ट की अवमानना...
Delhi Riots UAPA Case : सुप्रीम कोर्ट की जमानत शर्तें- आरोपियों के डिजिटल रूप से पोस्ट शेयर करने और सभाओं में शामिल पर लगाई रोक
दिल्ली दंगों के "बड़ी साजिश" मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी शर्तें लगाईं, जिसमें रैलियों या सार्वजनिक सभाओं में शामिल होने और किसी भी रूप में पोस्टर, बैनर या अन्य प्रचार सामग्री बांटने पर रोक शामिल है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने विशेष रूप से आरोपियों को किसी भी सार्वजनिक सभा या समारोह में भाग लेने और शारीरिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से...
UAPA मामलों में ट्रायल में देरी अपने आप जमानत मिलने का 'ट्रम्प कार्ड' नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की बेल याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल में देरी का आधार गैरकानूनी (गतिविधियां) रोकथाम अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए अपने आप बेल देने के लिए ट्रम्प कार्ड के रूप में काम नहीं करेगा।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा,"ऐसे मुकदमों में जिनमें राज्य की संप्रभुता, अखंडता या सुरक्षा से जुड़े अपराधों का आरोप है, देरी एक ट्रम्प कार्ड के रूप में काम नहीं...
'पहले हमें वनीकरण के निर्देशों का पालन दिखाएं': दिल्ली रिज में पेड़ काटने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने DDA से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को रिज इलाके में और पेड़ काटने की इजाज़त तभी देगा, जब वह इस बात से संतुष्ट हो जाएगा कि वनीकरण और बहाली पर पिछले निर्देशों का पालन किया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच DDA द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें CAPFIMS अस्पताल को जोड़ने वाली सड़क चौड़ीकरण परियोजना को पूरा करने के लिए 473 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई। DDA ने 2519 पेड़ों और झाड़ियों के पौधों को दूसरी जगह लगाने और सड़क निर्माण...
सुप्रीम कोर्ट में याचिका में CLAT 2026 में पेपर लीक का आरोप, जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें 2026 कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के प्रश्न पत्र और आंसर-की के कथित लीक मामले में कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की गई। बता दें, परीक्षा 7 दिसंबर को हुई थी।याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो दोबारा परीक्षा कराई जाए।अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के CLAT उम्मीदवारों के एक समूह द्वारा दायर की गई इस याचिका में भेदभाव की आशंका जताई गई। यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्कुलेट हो रहे...
'कथित साज़िश के वैचारिक संचालक': सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत क्यों नहीं दी?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी भूमिकाएं सिर्फ़ छोटी-मोटी नहीं थीं, बल्कि "मुख्य" थीं, जो उन्हें कथित साज़िश की कमान श्रृंखला में सबसे ऊपर रखती हैं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने उन्हें और अन्य सह-आरोपियों को सौंपी गई भूमिकाओं के बीच अंतर बताया। इसमें कहा गया कि खालिद और इमाम के खिलाफ़ आरोप फरवरी, 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की कथित बड़ी साज़िश को "सोचने,...
2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण फैसले - पार्ट 4 [76-100]
हर साल की इस तरह इस साल भी लाइव लॉ आपने अंत की ओर बढ़ते वर्ष, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण निर्णयों की सूची लेकर आया है। आइये जानते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने इस बीते वर्ष में किन अहम मुद्दों पर परिवर्तनकारी, रोचक और समाज-सुधार के क्षेत्र में अहम फ़ैसले दिए। प्रस्तुत है इन 100 फैसलों की दूसरी सूची- पार्ट-41.सशस्त्र बल न्यायाधिकरण को कोर्ट-मार्शल दोषसिद्धि को संशोधित करने और कम दंड लगाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को कहा कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम,...
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत खारिज, पांच अन्य की जमानत मंजूर
सुप्रीम कोर्ट ने आज (5 जनवरी) दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से उनके खिलाफ यूएपीए, 1967 के तहत प्रथमदृष्टया मामला बनता है। साथ ही, कोर्ट ने मामले के अन्य पाँच आरोपियों — गुलफिशा फ़ातिमा, मीरा हैदर, शिफ़ा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को जमानत दे दी है।कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम एक वर्ष बाद या संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अपनी जमानत याचिका दोबारा दायर कर सकते हैं।...
अनुशासनात्मक कार्रवाई के भय से जमानत देने में हिचक रहे हैं ट्रायल कोर्ट जज: सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जजों द्वारा जमानत देने में बढ़ती हिचक पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के भय के कारण वे अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करने से कतराते हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा माहौल न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करता है। इसी कारण हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जमानत याचिकाओं से भरे पड़े हैं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर या विवेकाधिकार के कथित गलत प्रयोग को लेकर न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ विभागीय...
अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती दी गई थी। याचिका में केंद्र सरकार और उसकी संस्थाओं द्वारा सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और अजमेर दरगाह को दिए जा रहे राज्य-प्रायोजित सम्मान और प्रतीकात्मक मान्यता पर भी आपत्ति जताई गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि इसमें मांगी गई राहत न्यायिक विचार योग्य (जस्टिसिएबल) नहीं...
गुजरात SEZ से ली गई बिजली पर कस्टम ड्यूटी छूट — सुप्रीम कोर्ट ने अडाणी पावर के पक्ष में फैसला दिया
सुप्रीम कोर्ट ने आज (5 जनवरी) अडाणी पावर लिमिटेड द्वारा गुजरात हाईकोर्ट के वर्ष 2019 के आदेश के खिलाफ दायर अपील स्वीकार करते हुए कंपनी को राहत दी। गुजरात हाईकोर्ट ने 2019 में यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था कि कंपनी ने कस्टम ड्यूटी लगाने वाली बाद की अधिसूचनाओं को चुनौती नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को गलत ठहराते हुए कहा कि 2015 का निर्णय सिद्धांत रूप से बाद की अवधि पर भी लागू होता है।अडाणी पावर लिमिटेड मुंद्रा पोर्ट स्थित अपने कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांट से विशेष आर्थिक...
हत्या के शिकार BSP नेता आर्मस्ट्रांग की पत्नी ने CBI जांच याचिका को मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की
बहुजन समाज पार्टी (BSP) नेता व प्रमुख दलित कार्यकर्ता के. आर्मस्ट्रांग की पत्नी पोरकोडी ने अपने पति की हत्या की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को हस्तांतरित कराने संबंधी अपनी याचिका को मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।याचिका में कहा गया है कि इसी मामले से संबंधित एक समान मुद्दा — अर्थात जांच को CBI को सौंपने का प्रश्न — पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है, जहां राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश को...














![2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण फैसले - पार्ट 4 [76-100] 2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण फैसले - पार्ट 4 [76-100]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2026/01/05/500x300_644685-100importantjudgmentsof2025part-4.jpg)




