कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'द बंगाल फाइल्स' में स्वतंत्रता सेनानी गोपाल पाठा की आपत्तिजनक छवि को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को स्वतंत्रता सेनानी गोपाल चंद्र मुखर्जी उर्फ़ गोपाल पाठा के पोते द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' में उनके दादा की कथित रूप से अपमानजनक छवि दिखाए जाने का आरोप लगाया गया था।जस्टिस अमृता सिन्हा ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने RTI Act के तहत कुछ सूचनाएं मांगी थीं, लेकिन निर्धारित समय सीमा में उत्तर न मिलने पर उचित उपाय अपनाने की बजाय सीधे रिट याचिका दायर कर दी।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आधार पर दायर...
रिट कोर्ट को अनुच्छेद 12 के तहत स्वीकृत बकाया राशि जारी करने का निर्देश देने का अधिकार: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध रॉय की पीठ ने कहा कि एक बार कार्य आदेश जारी हो जाने और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत आने वाले प्राधिकरण की संतुष्टि के अनुसार कार्य पूरा हो जाने पर प्राधिकरण के लिए भुगतान जारी करना अनिवार्य हो जाता है। ऐसा न होने पर न्यायालय, संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ता के अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए प्राधिकरण को राशि जारी करने का निर्देश दे सकता है।याचिकाकर्ता को एक कार्य आदेश दिया गया, जो नगरपालिका की...
S.94 BNSS न्याय की विफलता को रोकने के लिए जांच के दरमियान दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग करने का 'पूरक उपकरण' है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 का उद्देश्य जांच के लिए प्रासंगिक माने जाने वाले साक्ष्य प्रस्तुत करने की मांग करने का अधिकार प्रदान करना है, जो पहले से रिकॉर्ड में नहीं हैं। जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा,"BNSS की धारा 94 का अंतिम उद्देश्य न्यायालय को या लंबित जांच, पूछताछ, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के मामले में, ऐसे दस्तावेज़ या अन्य वस्तुएं प्रस्तुत करने का अधिकार प्रदान करना है जिन्हें न्यायालय या पुलिस अधिकारी जांच, पूछताछ, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के...
शिक्षित और कमाने वाली पत्नी से घर के खर्चों में सहयोग करने की उम्मीद क्रूरता नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक पत्नी द्वारा अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए, और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC/ST Act) तथा किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की विभिन्न धाराओं के तहत क्रूरता का आरोप लगाते हुए दायर किए गए मामलों को खारिज कर दिया।जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने कहा:"प्रतिवादी नंबर 2 एक शिक्षित और कमाने वाली महिला है। घर के खर्चों में योगदान देने, COVID-19 लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन खरीदारी करने, या सास द्वारा बच्चे को खिलाने के लिए कहे जाने की नियमित...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने SSC पुन: परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र रद्द करने को चुनौती देने वाली 'दागी' उम्मीदवारों की याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एसएससी भर्ती प्रक्रिया में 'दागी उम्मीदवारों' की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जो 'नौकरी के बदले नकदी' घोटाले में उलझे हुए हैं। इन उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशित पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए अपने प्रवेश पत्र रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा राज्य को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने और निर्धारित समय-सीमा का पालन करने का निर्देश दिए जाने के बाद, दागी उम्मीदवारों को नई भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के...
कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति की आत्महत्या मामले में पत्नी को अग्रिम ज़मानत
कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस महिला को अग्रिम ज़मानत दी, जिस पर अपने अलग रह रहे पति की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। यह आरोप पति की मां ने लगाया, जब उनके बेटे ने पत्नी के वैवाहिक घर न लौटने पर फांसी लगाकर जान दे दी थी।जस्टिस जय सेनगुप्ता ने आदेश देते हुए कहा,“अंततः यह अदालत पर निर्भर करेगा कि इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसावे का कोई तत्व है या नहीं। लेकिन केस डायरी में उपलब्ध सामग्री और याचिकाकर्ता पर लगाए गए कथित आरोपों को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ की...
मेडिकल कॉलेज में छात्रा की आत्महत्या से जुड़े यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेल के आरोपों की जांच करे पुलिस:कोलकाता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस को मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के 23 वर्षीय एक छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करने का निर्देश दिया है।पीड़िता के पिता, जो एक पुलिस अधिकारी भी हैं और वर्तमान में चंडीगढ़ में तैनात हैं, ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर अपनी बेटी की अप्राकृतिक मौत की गहन जांच की मांग की। यह कहा गया कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई घटना ने पिता को 03/07/2023 को IPC की धारा 306 के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, बार-बार फॉलो-अप के बावजूद,...
S. 91 CrPC | अभियुक्त को अपने खिलाफ अपराध सिद्ध करने वाले साक्ष्य पेश करने के लिए समन नहीं किया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि किसी अभियुक्त को CrPC की धारा 91 के तहत अपने विरुद्ध कोई भी आपत्तिजनक सामग्री प्रस्तुत करने के लिए समन नहीं किया जा सकता, जिसका इस्तेमाल मुकदमे में उसके विरुद्ध किया जा सकता है। जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने कहा,"इस न्यायालय को ऐसा प्रतीत होता है कि बार से उद्धृत कई कथित निर्णयों से यह पता चलता है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 को अधिनियमित करते समय विधायी मंशा कभी यह नहीं थी कि न्यायालय किसी अभियुक्त को कोई भी आपत्तिजनक सामग्री प्रस्तुत करने के लिए समन कर सके जिसका...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा, जमानत के बावजूद पहल के अपराधों के लिए कारावास में रखने पर निवारक निरोध असंवैधानिक हो जाता है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि निवारक निरोध का आदेश तब असंवैधानिक हो जाता है जब इसका इस्तेमाल पहले के अपराधों के लिए दंडित करने और अदालतों द्वारा जमानत दिए जाने के बाद भी अभियुक्त की हिरासत जारी रखने के लिए किया जाता है। जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीतोब्रतो कुमार मित्रा की खंडपीठ ने कहा, "निवारक और दंडात्मक निरोध के बीच कानूनी अंतर सुस्थापित है। निवारक निरोध का उद्देश्य भविष्य में होने वाले पूर्वाग्रही कृत्यों को रोकना है, जबकि दंडात्मक निरोध का उद्देश्य अतीत में किए गए अपराधों को दंडित...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2021 के चुनाव बाद हिंसा में मौत के मामले में आरोपी टीएमसी नेताओं को अग्रिम जमानत दी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में हुई मौत के एक मामले में आरोपी 79 वर्षीय विधायक परेश पॉल और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के दो अन्य लोगों को अग्रिम ज़मानत दे दी है। आरोप है कि 02.05.2021 की दोपहर 7-8 अज्ञात व्यक्ति मूल शिकायतकर्ता के घर आए और उसके मृतक बेटे का पता पूछा। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित ने रेलवे के कई कमरों पर कब्ज़ा कर रखा था। इस पर विवाद हुआ और बदमाशों ने शिकायतकर्ता पर हमला करना शुरू कर दिया। शिकायतकर्ता के छोटे बेटे पर बेरहमी से हमला किया गया और उसकी...
कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी की मांग वाली PIL पर राज्य से जवाब तलब: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शहर भर में आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी की मांग करने वाली याचिका पर राज्य से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में सामूहिक टीकाकरण और नसबंदी कार्यक्रमों के माध्यम से आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की गई है।जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस स्मिता दास डे की खंडपीठ ने संबंधित नगर निगमों से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। याचिका में कुत्ते के काटने के मामलों और रेबीज से संबंधित मौतों में खतरनाक वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है, जैसा कि केंद्र सरकार की...
पुलिस की केस डायरी से अहम दस्तावेज़ गायब होना दुर्भाग्यपूर्ण, हाईकोर्ट ने DGP को जांच पर विचार करने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस अधिकारी पर सख्त टिप्पणी की, क्योंकि अदालत में भेजी गई केस डायरी की प्रति से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ गायब पाए गए। यह तथ्य राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष रखा।जस्टिस जय सेंगुप्ता ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसे पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) के संज्ञान में लाने का आदेश दिया।उन्होंने कहा,“यह वास्तव में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी भी कारणवश राज्य के वकील को जो केस डायरी की प्रति दी गई, उसमें ऐसे...
अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप बनाई गई नीति के तहत दिव्यांगजन पदोन्नति के बाद भी उसी स्थान पर तैनाती के हकदार: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस स्मिता दास डे की पीठ ने कहा है कि विकलांग व्यक्तियों को पदोन्नति के बाद भी उसी पद पर बने रहने के लिए अनिवार्य बनाने वाली नीति बाध्यकारी है, खासकर जब इसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के तहत बनाया गया हो। किसी विकलांग व्यक्ति को ऐसी नीति का लाभ देने से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही वह बाध्यकारी परिस्थितियों में अपनी सेवा वापस लेने की मांग करे। वर्तमान अंतर-न्यायालयीय अपीलें एकल न्यायाधीश के उस आदेश के विरुद्ध दायर की गई हैं, जिसमें याचिकाकर्ता की याचिका...
मृत्युदंड अपरिवर्तनीय कदम, जजों को कभी भी 'खून का प्यासा' नहीं होना चाहिए: कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में मौत की सजा को उम्रकैद में बदला
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या और डकैती के लिए याचिकाकर्ता को सुनाई गई मृत्युदंड की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया है और कहा है कि ऐसे मामलों में जजों को 'रक्तपिपासु' नहीं होना चाहिए क्योंकि किसी को मृत्युदंड देना एक अपरिवर्तनीय कदम होगा जिसे नए सबूत सामने आने पर भी वापस नहीं लिया जा सकता। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और उदय कुमार की खंडपीठ ने कहा,"जजों को कभी भी रक्तपिपासु नहीं होना चाहिए। हत्यारों को फांसी देना उनके लिए कभी भी अच्छा नहीं रहा है... अगर किसी व्यक्ति को मृत्युदंड के कारण फांसी दी...
धारा 509 आईपीसी | कार्यस्थल पर केवल उत्पीड़न या दुर्व्यवहार शील भंग करने का अपराध नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना है कि कार्यस्थल पर केवल उत्पीड़न और दुर्व्यवहार भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं माना जाएगा। जस्टिस डॉ. अजय कुमार मुखर्जी ने कहा,"बार-बार दोहराए जाने के बावजूद, मैं यह कहने के लिए बाध्य हूं कि शिकायत में भी यह नहीं बताया गया है कि याचिकाकर्ता ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि केवल उत्पीड़न शब्द का उल्लेख किया गया है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज बयान में, वास्तविक शिकायत में केवल उसके साथ दुर्व्यवहार...
लाइसेंसिंग प्राधिकरण ही ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित, निरस्त या ज़ब्त कर सकता है; पुलिस को ज़ब्ती का बेलगाम हक़ नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस किसी नागरिक का ड्राइविंग लाइसेंस ज़ब्त, निलंबित या रद्द नहीं कर सकती। न्यायालय ने कहा कि लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में पुलिस किसी चालक का लाइसेंस ज़ब्त तो कर सकती है, लेकिन उसे संज्ञान के लिए अदालत को भेजना होगा। दोषी पाए जाने पर, लाइसेंस रद्दीकरण या निलंबन के लिए लाइसेंसिंग प्राधिकारी को भेजा जा सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति आरोपों से अपना बचाव करना चाहता है, तो पुलिस उसे जबरन अपराध कम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।जस्टिस पार्थ...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'डायन' होने के संदेह में महिला का सिर काटने के दोषी व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा कम की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा कम की, जिसे 'डायन' होने के संदेह में एक महिला का सिर काटने के आरोप में दोषी ठहराया गया था।जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने कहा,"सुधार गृह में उसका समग्र आचरण अच्छा पाया गया। उसकी उम्र भी सुनवाई योग्य है। इसके अलावा वह बस की छत से गिर गया, जिसके कारण उसकी मानसिक बीमारी हो गई, जो अक्सर हिंसक हो जाती थी। इसके कारण परिवार को उसे हिरासत में रखना पड़ा। हमारा मानना है कि वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड...
मां का उपनाम अपनाने की इच्छा पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बच्चे को नया जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह अपने पिता का उपनाम छोड़कर अपनी मां का उपनाम अपनाने के लिए नाबालिग को एक नया जन्म प्रमाण पत्र जारी करे।जस्टिस गौरांग कंठ ने कहा, "एक बच्चे की पहचान, उसके उपनाम सहित, उसके व्यक्तिगत विकास और स्वायत्तता का एक अभिन्न अंग है। न्यायालयों ने लगातार माना है कि जब नाम या उपनाम में परिवर्तन किसी तीसरे पक्ष के किसी भी कानूनी या वैधानिक अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता है और बच्चे के सर्वोत्तम हित को आगे बढ़ाने की मांग की जाती है, तो इस...
धारा 125 CrPC | भरण-पोषण अब केवल जीविका चलाने के लिए नहीं, बल्कि जीवनशैली को बनाए रखने के एक साधन के रूप में दिया जाता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि भरण-पोषण देने के संबंध में न्यायशास्त्र में हुए विकास के कारण, अब इसे जीवन-यापन के लिए भुगतान के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति की जीवनशैली की स्थिरता बनाए रखने के लिए दिया जाता है। जस्टिस बिभास रंजन डे की एकल पीठ ने कहा,"वर्तमान समय और युग में वैवाहिक दायित्वों के संबंध में समाज में भारी बदलाव आया है। इसलिए, यह तीव्र उतार-चढ़ाव भरण-पोषण देने के प्रति न्यायिक दृष्टिकोण में भी बदलाव की मांग करता है, क्योंकि भरण-पोषण अब केवल जीविका चलाने के लिए दिया जाने वाला अनुदान नहीं...
BNSS की धारा 223(1) के तहत पूर्व-संज्ञान सुनवाई न होने पर कार्यवाही शून्य मानी जाएगी: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण (PMLA) अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्यवाही का संज्ञान लेते हुए एक आदेश को रद्द कर दिया है, यह देखते हुए कि विशेष अदालत द्वारा BNSS की धारा 223 (1) के तहत पूर्व-संज्ञान सुनवाई आयोजित करने की अनिवार्य आवश्यकता का अनुपालन किए बिना संज्ञान लिया गया था।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने कहा, "उपरोक्त निष्कर्षों के मद्देनजर, पीएमएलए के तहत याचिकाकर्ताओं के खिलाफ शिकायतों में किए गए अपराधों का संज्ञान लेते हुए 15 फरवरी, 2025 का आक्षेपित आदेश, BNSS की धारा 223 (1) के पहले...


















