हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (09 मार्च, 2026 से 13 मार्च, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
CrPC की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन की तारीख से ही दिया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से दोहराया कि CrPC की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन दाखिल करने की तारीख से ही दिया जाना चाहिए, न कि किसी बाद की तारीख से; सिवाय इसके कि कोर्ट इस सामान्य नियम से हटकर कोई ठोस कारण दर्ज करे।
जस्टिस डॉ. स्वर्ण कांता शर्मा ने टिप्पणी की, "जहां कोई पत्नी और नाबालिग बच्चे कोर्ट में यह आरोप लगाते हुए आते हैं कि उनके पति/पिता ने उनकी उपेक्षा की है और उनका भरण-पोषण करने से इनकार किया। कोर्ट अंततः उन्हें भरण-पोषण का हकदार पाता है तो सामान्य नियम – जिसे अब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी लगातार दोहराया है – यह है कि ऐसा भरण-पोषण आवेदन की तारीख से ही लागू होना चाहिए। भरण-पोषण की कार्यवाही के निपटारे में होने वाली देरी आमतौर पर व्यवस्थागत होती है और इसका दोष आश्रित पत्नी या बच्चों पर नहीं मढ़ा जा सकता। बिना किसी उचित कारण के इस बीच की अवधि के लिए उन्हें भरण-पोषण से वंचित करना, इस कानून के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देगा।"
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फर्जी दावों को रोकने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया, जिनमें राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पिछले पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से दिव्यांग (PwD) कोटे में नियुक्त कर्मचारियों की 'बेंचमार्क डिसेबिलिटी' का अनिवार्य पुनर्मूल्यांकन (reassessment) कराने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने कहा कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह आरक्षण नीतियों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से लागू करे, ताकि समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। अदालत ने कहा कि व्यवस्था समावेशी है, लेकिन समावेशिता तभी संभव है जब नीतियों को सही तरीके से लागू किया जाए और धोखाधड़ी या फर्जी दावों को हर हाल में रोका जाए।
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नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द किया
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस आधार पर जनपद पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम रद्द किया।
जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने वार्ड नंबर-1 के जनपद सदस्य के चुनाव को निरस्त करते हुए कहा कि उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्र और हलफनामे में गलत जानकारी देना गंभीर अनियमितता है, जिसका चुनाव परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
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प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा, शादी के आधार पर हुआ ट्रांसफर इसे खत्म नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी कर्मचारी का प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा है, जिसे सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जा सकता कि किसी दूसरे कर्मचारी का ट्रांसफर शादी के आधार पर उस पद पर कर दिया गया। कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि प्रशासनिक ट्रांसफर का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसी कर्मचारी की करियर में आगे बढ़ने की वैध अपेक्षा खत्म हो जाए।
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कोर्ट्स, SC/ST समुदाय से पीड़ित होने के आधार पर ही BNSS की धारा 173(4) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कोई स्पेशल कोर्ट या मजिस्ट्रेट, BNSS की धारा 173(4) के तहत दायर किसी आवेदन पर FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए अपने आप बाध्य नहीं है, सिर्फ इसलिए कि आवेदक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित है।
जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने आगे कहा कि कोर्ट को सबसे पहले अपने सामने रखे गए आरोपों का मूल्यांकन करना होगा और उसके बाद यह तय करना होगा कि पुलिस द्वारा जांच का निर्देश देना उचित है या मामले को शिकायत मामले के तौर पर आगे बढ़ाना।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस नियम | पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत की रिपोर्ट ज़िला मजिस्ट्रेट को न देने से कार्यवाही रद्द हो जाती है: हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख के हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस नियमों के नियम 349 में दिए गए प्रावधान अनिवार्य हैं, और जब तक किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत का सार - जिस पर अपनी ड्यूटी के दौरान रणबीर दंड संहिता के तहत अपराध करने का आरोप है - ज़िला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट नहीं किया जाता, तब तक पुलिस या मजिस्ट्रेट द्वारा शुरू की गई कार्यवाही अमान्य हो जाएगी।
कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें किश्तवाड़ के सेशन जज द्वारा पारित आदेश रद्द करने की मांग की गई। इस आदेश के तहत पुनर्विचार कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ताओं - जो पुलिस अधिकारी थे - को आपराधिक कार्यवाही से बरी कर दिया गया।
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तकनीकी आधार पर सांप के काटने से मौत का मुआवजा नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सांप के काटने से हुई मृत्यु के मामलों में राज्य आपदा राहत कोष से मिलने वाला अनुग्रह (ex-gratia) मुआवजा केवल तकनीकी कारणों जैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट का निष्कर्षहीन होना के आधार पर नहीं रोका जा सकता।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार की 2 अगस्त, 2018 की अधिसूचना स्पष्ट रूप से सांप के काटने से हुई मौत को उन परिस्थितियों में शामिल करती है जिनमें मृतक के आश्रितों को अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है।
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बिना प्राथमिक साक्ष्य के बैंक अकाउंट फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के बैंक अकाउंट बिना ठोस कारण और बिना यह दिखाए कि उसका कथित अपराध से कोई प्राथमिक संबंध है, फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ग) के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों को बैंक अकाउंट फ्रीज करने की शक्ति जरूर है लेकिन इसका प्रयोग अत्यंत सावधानी और कानून के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। बिना कारण बताए और बिना यह स्पष्ट किए कि खाते का कथित अपराध से क्या संबंध है अकाउंट को अनिश्चित काल तक फ्रीज रखना उचित नहीं है।
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आत्महत्या के लिए उकसाने का इरादा न होने पर "ज़हर खाकर मर जाओ" जैसी कोई बात कहना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महिला को बरी किया, जिसे अपनी सौतेली बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने कहा कि शक सबूत की जगह नहीं ले सकता और अगर आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई इरादा न हो तो कही गई छोटी-मोटी बातें कानून के तहत आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं मानी जाएंगी।
जस्टिस रूपिंदरजीत चहल ने कहा, "अगर बहस के लिए यह मान भी लिया जाए कि मौत आत्महत्या थी तो भी अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि IPC की धारा 107 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने की बात साबित होती है।"
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आपराधिक मामलों का खुलासा न करने पर Congress MLA का चुनाव रद्द, हाईकोर्ट ने BJP उम्मीदवार को किया विजयी घोषित
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों का खुलासा न करने के आधार पर कांग्रेस विधायक (Congress MLA) मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द किया। कोर्ट ने माना कि आपराधिक पृष्ठभूमि को छिपाना या उसका अधूरा खुलासा करना एक महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने के बराबर है और इससे चुनाव रद्द हो जाता है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने से चुनावी अधिकारों के स्वतंत्र प्रयोग में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे मतदाताओं को सोच-समझकर चुनाव करने के अवसर से वंचित होना पड़ता है और मतदाताओं के मतदान के अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग में हस्तक्षेप होता है।
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Liquor Policy Case: केजरीवाल और अन्य को बरी करते समय गवाहों पर ट्रायल कोर्ट के नतीजे 'पहली नज़र में गलत': दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि शराब पॉलिसी केस में AAP नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दूसरे सभी आरोपियों को बरी करते समय, चार्ज स्टेज पर गवाहों और अप्रूवर के बयानों के बारे में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां "पहली नज़र में गलत हैं और उन पर विचार करने की ज़रूरत है।"
बता दें, उक्त आरोपियों को बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट ने पाया था कि केजरीवाल के खिलाफ आरोप सह-आरोपियों या गवाहों के बयानों पर आधारित हैं, लेकिन उन्हें किसी भी क्रिमिनल साज़िश से जोड़ने के लिए कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।