बिना प्राथमिक साक्ष्य के बैंक अकाउंट फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट

Amir Ahmad

10 March 2026 12:23 PM IST

  • बिना प्राथमिक साक्ष्य के बैंक अकाउंट फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट

    राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के बैंक अकाउंट बिना ठोस कारण और बिना यह दिखाए कि उसका कथित अपराध से कोई प्राथमिक संबंध है, फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ग) के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

    अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों को बैंक अकाउंट फ्रीज करने की शक्ति जरूर है लेकिन इसका प्रयोग अत्यंत सावधानी और कानून के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। बिना कारण बताए और बिना यह स्पष्ट किए कि खाते का कथित अपराध से क्या संबंध है अकाउंट को अनिश्चित काल तक फ्रीज रखना उचित नहीं है।

    अदालत ने कहा,

    “बैंक अकांउट के संचालन को रोकने की शक्ति असाधारण है और इसका उपयोग बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। यह तभी किया जा सकता है, जब अकाउंट और कथित आपराधिक गतिविधि के बीच स्पष्ट और निकट संबंध दर्शाने वाले कारण दर्ज किए गए हों।”

    मामला

    मामला उस व्यक्ति की याचिका से जुड़ा है जिसका बैंक अकाउंट कथित धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन के संदेह में फ्रीज कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से अकाउंट को डी-फ्रीज करने की मांग की थी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जांच के नाम पर पूरे बैंक अकाउंट को बिना किसी सीमा या अवधि तय किए फ्रीज कर दिया गया। इससे याचिकाकर्ता की दैनिक आर्थिक गतिविधियों और व्यापार पर गंभीर असर पड़ा।

    अदालत का फैसला

    हाइकोर्ट ने कहा कि इस तरह पूरे अकांउट को फ्रीज कर देना व्यक्ति की आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा को काटने जैसा है। इससे उसके व्यापार तथा जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

    अदालत ने निर्देश दिया कि केवल विवादित राशि तक ही अकाउंट में डेबिट लेनदेन पर रोक लगाई जा सकती है, जबकि बाकी अकाउंट के संचालन पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए।

    इसके साथ ही बैंक को निर्देश दिया गया कि विवादित राशि तक ही प्रतिबंध रखा जाए और पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि शेष राशि के लिए अकाउंट को डी-फ्रीज किया जाए।

    इसी के साथ हाइकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।

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