सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : मई, 2026

Update: 2026-06-08 06:20 GMT

सुप्रीम कोर्ट में मई, 2026 में क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप। मई महीने के सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

रेलवे, बिजली अधिनियम के तहत 'उपभोक्ता', 'डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी' नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (8 मई) को फैसला सुनाया कि रेलवे, बिजली अधिनियम, 2003 के अर्थ के तहत एक 'उपभोक्ता' है। इस फैसले के साथ ही रेलवे का वह दावा खारिज हो गया, जिसमें वह 'डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी' (माना गया वितरण लाइसेंसी) का दर्जा मांग रहा था, ताकि वह वितरण कंपनियों को क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त सरचार्ज का भुगतान करने से बच सके।

कोर्ट ने कहा कि भारतीय रेलवे एक बंद और आत्मनिर्भर बिजली नेटवर्क चलाता है, जिसका एकमात्र उद्देश्य उसकी अपनी आंतरिक परिचालन ज़रूरतों को पूरा करना है—जिसमें ट्रैक्शन, सिग्नलिंग और स्टेशन की सुविधाएं शामिल हैं। इसलिए इसे "वितरण लाइसेंसी" नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह अपने नेटवर्क के बाहर के बाहरी उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति नहीं करता है।

Cause Title: INDIAN RAILWAYS VERSUS WEST BENGAL STATE ELECTRICITY DISTRIBUTION COMPANY LIMITED & ORS. (with connected matter)

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'राजस्व रिकॉर्ड से मालिकाना हक साबित नहीं होता': सुप्रीम कोर्ट ने भूमि स्वामित्व पर कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किए

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 मई) को कहा कि राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Entries) केवल कब्जे का प्रमाण हो सकते हैं, लेकिन वैध स्वामित्व दस्तावेजों के अभाव में उन्हें जमीन के मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि केवल जमाबंदी, पहानी या अन्य राजस्व प्रविष्टियों के आधार पर भूमि पर मालिकाना दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि प्राथमिक शीर्षक दस्तावेज (Title Documents) पेश न किए जाएं।

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एसिड हमले के पीड़ितों की परिभाषा का दायरा बढ़ाया: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए कहा कि जबरन एसिड पिलाए गए लोग और वे पीड़ित जिनके शरीर पर बाहरी विकृति नहीं दिखती लेकिन आंतरिक चोटें हैं, उन्हें भी 'एसिड अटैक पीड़ित' माना जाएगा। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह व्याख्या वर्ष 2016 से प्रभावी मानी जाएगी।

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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मेडिकल लापरवाही के लिए डॉक्टर के कानूनी वारिस भी जवाबदेह: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को फैसला सुनाया कि किसी डॉक्टर की मृत्यु होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत चल रही कार्यवाही में उसके कानूनी वारिसों को उसकी जगह शामिल किया जा सकता है। हालांकि, डॉक्टर की कथित लापरवाही से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की उनकी जवाबदेही, मृतक से विरासत में मिली संपत्ति तक ही सीमित होगी।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने कहा, "पिछली चर्चा और 1986 के अधिनियम के साथ-साथ 2019 के अधिनियम में दिए गए कानूनी ढांचे को देखते हुए हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि कथित तौर पर मेडिकल लापरवाही करने वाले डॉक्टर की मृत्यु होने पर उसके कानूनी वारिसों को कार्यवाही में पक्षकार बनाया जा सकता है और रिकॉर्ड में शामिल किया जा सकता है।"

Cause Title: Kumud Lall VERSUS Suresh Chandra Roy (Dead) Through LRs and Others (with connected matter)

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मोटर दुर्घटना मुआवज़े से मेडिक्लेम रीइम्बर्समेंट नहीं काटा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी दुर्घटना पीड़ित को मेडिक्लेम या मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मिली रकम को मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए गए मुआवज़े से नहीं काटा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ये दोनों फ़ायदे अलग-अलग कानूनी दायरे में आते हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज की। इस अपील में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों (MACTs) द्वारा दिए गए मुआवज़े से मेडिक्लेम रीइम्बर्समेंट की रकम नहीं काटी जा सकती।

Case : New India Assurance Company v Dolly Satish Gandhi and another

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Land Acquisition | आवासीय प्लॉट की सेल डीड का उपयोग औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राजमार्ग विस्तार के लिए अधिग्रहित औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए पास के किसी गांव के आवासीय बिक्री विलेख का उपयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' की धारा 26(1)(b) के तहत 'समान प्रकार की भूमि' की शर्त अनिवार्य है और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को निर्धारित करने के लिए इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

Cause Title: Project Director, National Highways Authority of India versus Alfa Remidis Ltd. and others

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ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन के बिना पब्लिक सर्विस गाड़ियों को कोई फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि किसी भी पब्लिक सर्विस गाड़ी को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं दिया जाएगा, जब तक उसमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTDs) और इमरजेंसी पैनिक बटन लगे न हों, उनकी जांच न हो गई हो, और वे 'वाहन' डेटाबेस में दर्ज न हों।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 'एस राजशेखरन बनाम भारत संघ' मामले की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। यह मामला पूरे देश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के उपायों को लागू करने से जुड़ा है।

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Article 19(1)(a) के तहत बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार बताते हुए राजस्थान सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शुरू करने और बच्चों को राजस्थानी में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यह अधिकार भी शामिल है कि बच्चा ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करे जिसे वह समझ सके और जिसमें वह सहज हो।

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कथित जातिगत गाली-गलौज किसी निजी घर के अंदर किए जाने पर SC/ST Act के तहत कोई अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामला रद्द किया। इस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने एक घर की चारदीवारी के अंदर, अनुसूचित जाति श्रेणी से ताल्लुक रखने वाले शिकायतकर्ता के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज की थी।

चूंकि FIR में यह ज़िक्र नहीं था कि अपीलकर्ता नंबर 1 और अन्य अपीलकर्ताओं द्वारा गाली-गलौज और धमकाने की कथित घटना किसी ऐसी जगह पर हुई, जहां आम लोगों की नज़र पड़ सकती हो, इसलिए कोर्ट ने यह माना कि SC/ST Act के तहत अपराध का एक ज़रूरी तत्व—यानी कि यह घटना "आम लोगों की नज़र में आने वाली किसी जगह" पर होनी चाहिए—यहाँ पूरी तरह से नदारद था। इस वजह से अपीलकर्ताओं के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को जारी रखना सही

Cause Title: GUNJAN @ GIRIJA KUMARI AND OTHERS VERSUS STATE (NCT OF DELHI) AND ANOTHER

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S. 25 Hindu Succession Act | हत्या का आरोपी, मारे गए व्यक्ति की संपत्ति पर उत्तराधिकार का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वादी को किसी मृतक द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर संपत्ति का उत्तराधिकार पाने से अयोग्य घोषित किया। कोर्ट ने यह पाया कि वह वादी, उस मृतक की हत्या के मामले में आरोपी के तौर पर नामजद है।

कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) की धारा 25 के तहत मिली शक्ति का इस्तेमाल करते हुए वादी को अयोग्य घोषित किया। यह धारा यह प्रावधान करती है कि जो व्यक्ति किसी की हत्या करता है, या हत्या करने में किसी की मदद करता है, वह मारे गए व्यक्ति की संपत्ति का उत्तराधिकार पाने से अयोग्य हो जाएगा।

Cause Title: MANJULA AND OTHERS VERSUS D.A. SRINIVAS

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समान आरोपों में सह-आरोपी डिस्चार्ज हो चुके हों तो एक आरोपी पर अकेले मुकदमा नहीं चल सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपियों (Co-Accused) को पहले ही डिस्चार्ज किया जा चुका है, तो केवल एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा जारी नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य अन्य आरोपियों की तुलना में अधिक मजबूत न हों। अदालत ने कहा कि समान आरोपों वाले व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाना आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) का मूल सिद्धांत है।

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सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों में बदलाव से किया इनकार, कहा- 'कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है'

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार किया। इन निर्देशों में कहा गया कि अस्पतालों, बस स्टैंडों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को वैक्सीनेशन/नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उन कई अर्जियों को खारिज किया, जिनमें पिछले साल नवंबर में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों में बदलाव की मांग की गई। दूसरे शब्दों में, सार्वजनिक जगहों के परिसर से अधिकारियों द्वारा पकड़े गए आवारा कुत्तों को शेल्टर में ही रखा जाना चाहिए।

Case Title: In Re : 'City Hounded By Strays, Kids Pay Price', SMW(C) No. 5/2025 (and connected cases)

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सुप्रीम कोर्ट ने पागल और खतरनाक कुत्तों को मारने की इजाज़त दी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिए गए एक अहम आदेश में अधिकारियों को इंसानी ज़िंदगी पर मंडराते खतरे को रोकने के लिए पागल और खतरनाक कुत्तों को मारने की इजाज़त दी।

कोर्ट ने आदेश दिया, "अधिकारी, पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों और दूसरे लागू कानूनी प्रोटोकॉल के मुताबिक, कानूनी तौर पर मंज़ूर उपाय कर सकते हैं। इनमें ऐसे मामलों में कुत्तों को मारना भी शामिल है, जो लाइलाज रूप से बीमार हैं, पागल हैं, या साफ तौर पर खतरनाक/आक्रामक हैं, ताकि इंसानी ज़िंदगी और सुरक्षा पर मंडराते खतरे को असरदार तरीके से खत्म किया जा सके।"

Case Title: In Re : 'City Hounded By Strays, Kids Pay Price', SMW(C) No. 5/2025 (and connected cases)

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UAPA में भी जमानत नियम, जेल अपवाद: सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बताया सर्वोपरि

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे कठोर कानूनों में भी जमानत नियम है और जेल अपवाद। अदालत ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं।

जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर के व्यक्ति को नार्को-टेरर मामले में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही थी।

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Hindu Succession Act | 2005 का संशोधन बेटियों के पहले से मौजूद विरासत के अधिकारों को सीमित नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम पर एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को कहा कि 2005 का संशोधन, जो बेटियों को जन्म से ही सह-दायिक (coparcenary) अधिकार देता है, उनके मृत पिता की संपत्ति में 'प्रथम श्रेणी के वारिस' (Class I heirs) के तौर पर विरासत पाने के स्वतंत्र अधिकार को न तो छीनता है और न ही सीमित करता है - खासकर तब, जब पिता की मृत्यु बिना वसीयत किए हुई हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बेटों के बीच किया गया संपत्ति का बंटवारा, पिता के हिस्से की संपत्ति में बेटियों के उत्तराधिकार के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता।

Cause Title: B.S. LALITHA AND OTHERS VERSUS BHUVANESH AND OTHERS

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एशियन गेम्स ट्रायल्स में हिस्सा लेंगी विनेश फोगाट: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पहलवान विनेश फोगाट को 30 मई से शुरू होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने Wrestling Federation of India (WFI) की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाएगा, हालांकि WFI की याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी।

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पूर्व राजघरानों की निजी संपत्ति पर लागू नहीं होगा ज्येष्ठाधिकार का नियम : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पूर्व रियासतों के शासकों की निजी संपत्तियों के उत्तराधिकार पर ज्येष्ठाधिकार यानी केवल सबसे बड़े पुरुष उत्तराधिकारी को संपत्ति मिलने का नियम लागू नहीं होगा। ऐसी संपत्तियों का बंटवारा संबंधित परिवार के व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून के अनुसार किया जाएगा।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कपूरथला राजघराने की निजी संपत्तियों पर ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह को एकमात्र उत्तराधिकारी माना गया था।

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पुलिस को आगे की जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि मजिस्ट्रेट से स्पष्ट अनुमति के बिना, क्लोजर रिपोर्ट (जांच बंद करने की रिपोर्ट) दाखिल करने के बाद पुलिस आगे की जांच नहीं कर सकती।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा, "भले ही कानून में स्पष्ट अनुमति की ज़रूरत न हो, लेकिन कानून जिस तरह से विकसित हुआ है, उससे यह बिल्कुल साफ हो गया है कि संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अब एक ज़रूरी शर्त बन गया है।"

Cause Title: PALINISWAMY VEERARAJA & ORS. VERSUS THE STATE OF KARNATAKA & ANR.

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ECI को अपनी शक्तियों के तहत वोटर लिस्ट का SIR करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा की गई मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की वैधता को सही ठहराया और टिप्पणी की कि मतदाता SIR, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है।

कोर्ट ने फैसला दिया कि चुनाव आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत SIR करने की शक्ति है, जिसे 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' और उसके तहत बनाए गए नियमों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

Case Title: ASSOCIATION FOR DEMOCRATIC REFORMS AND ORS. Versus ELECTION COMMISSION OF INDIA, W.P.(C) No. 640/2025 (and connected cases)

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