नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द किया
Amir Ahmad
12 March 2026 12:47 PM IST

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस आधार पर जनपद पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम रद्द किया।
जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने वार्ड नंबर-1 के जनपद सदस्य के चुनाव को निरस्त करते हुए कहा कि उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्र और हलफनामे में गलत जानकारी देना गंभीर अनियमितता है, जिसका चुनाव परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
अदालत ने कहा,
“नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण है। यह मतगणना से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि ऐसा मामला है जिसमें प्रत्याशी द्वारा गलत जानकारी दी गई।”
मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें 29 जुलाई 2024 के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई। उस आदेश में याचिकाकर्ता की चुनाव याचिका खारिज कर दी गई।
याचिका के अनुसार वर्ष 2022 में पूरे राज्य में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की गई, जिसमें सीधी जिले के जनपद पंचायत रामपुर नैकिन के लिए भी चुनाव हुए। इस चुनाव में याचिकाकर्ता सहित छह प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किए।
जांच के बाद सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए और मतदान कराया गया। 14 जुलाई, 2022 को परिणाम घोषित हुआ जिसमें प्रतिवादी नंबर-1 को सबसे अधिक मत मिले और वह विजयी घोषित हुआ जबकि याचिकाकर्ता दूसरे स्थान पर रहा।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 122 के तहत चुनाव याचिका दायर कर परिणाम को रद्द करने की मांग की। उसका आरोप था कि विजयी प्रत्याशी ने नामांकन पत्र और हलफनामे में गलत जानकारी दी थी।
प्रतिवादियों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि नामांकन दाखिल करते समय उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं था, इसलिए उसका उल्लेख करना आवश्यक नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि याचिका केवल चुनाव हारने के बाद दुर्भावना से दायर की गई।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने नामांकन पत्रों की जांच के समय कोई आपत्ति नहीं उठाई। हालांकि अदालत ने यह पाया कि विजयी प्रत्याशी ने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी थी।
पीठ ने कहा कि यदि नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी जाती है तो उसे उसी समय अस्वीकार किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता और नामांकन स्वीकार कर लिया जाता है तो इससे चुनाव परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश रद्द करते हुए विजयी घोषित किए गए प्रत्याशी का चुनाव निरस्त किया।

