तकनीकी आधार पर सांप के काटने से मौत का मुआवजा नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Amir Ahmad
10 March 2026 1:44 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सांप के काटने से हुई मृत्यु के मामलों में राज्य आपदा राहत कोष से मिलने वाला अनुग्रह (ex-gratia) मुआवजा केवल तकनीकी कारणों जैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट का निष्कर्षहीन होना के आधार पर नहीं रोका जा सकता।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार की 2 अगस्त, 2018 की अधिसूचना स्पष्ट रूप से सांप के काटने से हुई मौत को उन परिस्थितियों में शामिल करती है जिनमें मृतक के आश्रितों को अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है।
अदालत ने कहा कि यह अधिसूचना राज्य स्तर की नीति है, जिसका उद्देश्य ऐसी स्थानीय आपदाओं या दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ित परिवारों को सहायता देना है, जो अन्य योजनाओं में शामिल नहीं हैं।
कोर्ट ने 8 जुलाई, 2021 की एक और सरकारी अधिसूचना का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यदि किसी मामले में विसरा रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है तो केवल इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस अधिसूचना में जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में अनुग्रह राशि का भुगतान संभव हो तो सात दिनों के भीतर कर दिया जाए। अदालत ने कहा कि यह अधिसूचना 2018 की नीति को स्पष्ट करने के लिए जारी की गई थी, कोई नई नीति बनाने के लिए नहीं।
मामला
याचिकाकर्ता की पत्नी की मृत्यु खेत में काम करते समय सांप के काटने से हो गई। इस संबंध में गवाहों के बयान लिए गए, पंचनामा तैयार हुआ और पोस्टमार्टम भी कराया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया।
हालांकि लेखपाल की रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सांप का काटना दर्ज था, फिर भी उप-जिलाधिकारी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुआवजा देने से इनकार किया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि सांप के काटने से मृत्यु पर अनुग्रह राशि देने की योजना एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य संकट में पड़े परिवारों को तत्काल सहायता देना है।
अदालत ने कहा कि यदि योजना के उद्देश्य को ध्यान में रखा जाए तो केवल तकनीकी आधार पर दावे को खारिज करना उसकी भावना के विपरीत होगा।
कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान और घटनाक्रम में कोई विरोधाभास नहीं है तथा घटना की सूचना तुरंत लेखपाल को दे दी गई थी। इसलिए केवल निष्कर्षहीन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा रोकना उचित नहीं है।
अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट, जालौन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नियमानुसार अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाए।

