इलाहाबाद हाईकोट

RTI Act | सुनवाई का अवसर दिए बिना सूचना अधिकारी पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 की धारा 20 के तहत सूचना देने में देरी पर लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना लगाने से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि केवल बिना आधार के राय बनाकर दंड नहीं लगाया जा सकता, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत राय बनाना आवश्यक है।यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सुनाया।मामले में याचिकाकर्ता एक खंड शिक्षा अधिकारी होने के...

संशोधन की अर्ज़ी खारिज होने पर भी पार्टी मौजूदा दलीलों के आधार पर कानूनी तर्क दे सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VI नियम 17 के तहत दलीलों (pleadings) में संशोधन की अर्ज़ी खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि कोई पार्टी अंतिम सुनवाई के चरण में पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद दलीलों से उत्पन्न कानूनी सवालों को नहीं उठा सकती।कोर्ट ने कहा कि अगर प्रस्तावित संशोधन केवल उन कानूनी दलीलों को दोहराता है, जो पहले से ही दलीलों और अपील के मेमोरेंडम से स्पष्ट हैं, तो उसे खारिज करने से कोई कानूनी नुकसान नहीं होता है।CPC का ऑर्डर VI नियम 17 कोर्ट को दलीलों में संशोधन...

जहां आर्बिट्रेशन क्लॉज़ मौजूद हो, वहां विवादित तथ्यों वाले कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत रिट याचिका ऐसे कॉन्ट्रैक्ट विवाद में स्वीकार्य नहीं है, जहां विवाद में तथ्यों से जुड़े सवाल शामिल हों और एग्रीमेंट के तहत पीड़ित पक्ष के पास आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) का उपाय उपलब्ध हो।कोर्ट ने मछली पकड़ने के लीज़ को खत्म करने और सिक्योरिटी ज़ब्त करने के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि लीज़ वाली जगह और कॉन्ट्रैक्ट के तहत बकाया रकम पर विरोधी दावों का समाधान तभी हो सकता है, जब पार्टियाँ तय फोरम के सामने सबूत पेश...

सही बोली लगाने वाले को हटाने पर तुले: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे को फटकार लगाई, कोंकण रेलवे की बोली खारिज करने का फैसला रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ्ते नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (NER) अधिकारियों के 'मनमाने' और "बदनीयती भरे" कामों पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने एक सरकारी सहयोगी कंपनी, कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL) की फाइनेंशियल बोली को बार-बार कमजोर आधारों पर खारिज किया।NER के कामों को "परेशान करने जैसा" बताते हुए जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने 8 जून, 2026 का पत्र रद्द किया, जिसमें बैंक गारंटी में लाभार्थी का नाम गलत होने की बात कहकर KRCL की बोली खारिज कर दी गई।कोर्ट ने...

पहले पति को तलाक दिए बिन शादी करने वाले दूसरे पुरुष से महिला भरण-पोषण कर सकती है? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि अगर कोई महिला अपने पहले पति को तलाक दिए बिना किसी पुरुष के साथ रहने लगती है, तो उसे "कानूनी रूप से विवाहित पत्नी" नहीं माना जाएगा, इसलिए वह CrPC की धारा 125 के तहत अपने साथी से गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है।जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें महिला को उसके साथी (जिससे उसने कथित तौर पर पहले पति से तलाक लिए बिना शादी की थी) से गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।हालांकि, सिंगल जज ने उनकी नाबालिग बेटी को दिए गए...

Sunday Sitting | 150 साल पुराने मेथोडिस्ट स्कूल पर गिराए जाने का खतरा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित नज़ूल ज़मीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

रविवार को बुलाई गई विशेष सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने विवादित ज़मीन के मामले में दखल देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। यह ज़मीन कथित तौर पर एक ऐसे शिक्षण संस्थान की, जो 150 से ज़्यादा सालों से चल रहा है, लेकिन अब उस पर "गिराए जाने का खतरा" मंडरा रहा है।सीतापुर के सिविल लाइन्स स्थित मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विवादित संपत्ति का...

एलिबी की दलील को ट्रायल के दौरान साबित करना ज़रूरी; IO इसे सच मानकर अकेले ही फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाकोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि किसी आरोपी की "एलिबी की दलील" (यानी घटना के समय कहीं और होने का दावा) को आपराधिक ट्रायल के दौरान सबूत पेश करके साबित करना ज़रूरी है। इन्वेस्टिगेटिंग ऑफ़िसर (IO) इसे सच मानकर अकेले ही फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सकता।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि अगर IO उन गवाहों के बयानों के आधार पर फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल करता है, जो आरोपियों की एलिबी की दलील का समर्थन करते हैं तो यह "बहुत बड़ी गैर-कानूनी बात" होगी।कोर्ट ने ये बातें तब कहीं जब उसने दो आरोपियों...

S.8 Evidence Act | झूठी NCR से लेकर फरार होने तक: पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति के आचरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने बुधवार को पत्नी की हत्या के दोषी व्यक्ति की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी। कोर्ट ने उसके धोखेबाज़ कामों—जैसे झूठा भरोसा दिलाना, झूठी पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराना और अंत में फरार हो जाना—को भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 8 के तहत "प्रासंगिक आचरण" माना।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने दोषी (पवन कुमार) की जेल अपील खारिज की। उसने हरदोई सेशंस कोर्ट के 2016 के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उसे IPC की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराया...

मेडिकल सबूत से पुष्टि न होने पर भी पीड़िता की विश्वसनीय गवाही बलात्कार में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त:इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलादाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के एक बलात्कार मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए कहा है कि यदि पीड़िता (Prosecutrix) की गवाही विश्वसनीय, सुसंगत और किसी मूलभूत खामी से मुक्त हो, तो केवल इस आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती कि मेडिकल साक्ष्य अभियोजन के मामले की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते।जस्टिस संजीव कुमार की पीठ ने वीर सिंह द्वारा दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए कहा कि बलात्कार कोई चिकित्सीय स्थिति नहीं, बल्कि एक कानूनी अपराध है।...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाटा प्रोजेक्ट्स का ₹940 करोड़ का हाईवे कॉन्ट्रैक्ट बहाल किया, कहा- NHAI का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का फैसला पहले से तय

टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI), जो संविधान के आर्टिकल 12 के तहत "राज्य" (State) है, मनमाने ढंग से हाईवे बनाने का कॉन्ट्रैक्ट बीच में ही खत्म नहीं कर सकती और न ही देरी के लिए कॉन्ट्रैक्टर को जिम्मेदार ठहरा सकती है, जब देरी खुद अथॉरिटी की गलती से हुई हो—जैसे कि कॉन्ट्रैक्ट के तहत बिना किसी रुकावट वाली ज़मीन और साफ़ रास्ता (clear right of way) न सौंप पाना।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी ने कहा,"इस मामले में...

पति-पत्नी की तरह साथ रहने पर वैध विवाह का कड़ा सबूत मांगकर भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हों और उनका वैवाहिक संबंध अन्य परिस्थितियों से स्थापित होता हो, तो भरण-पोषण (Maintenance) के दावे को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वैध विवाह का सख्त दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।जस्टिस अचल सचदेव ने यह टिप्पणी महाराजगंज फैमिली कोर्ट के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए की, जिसमें महिला की भरण-पोषण याचिका केवल इसलिए खारिज कर दी गई थी क्योंकि वह स्वयं को विधिक रूप से विवाहित...

भगवा रंग में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त आतंकवादी वाली फेसबुक पोस्ट मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेसबुक पर कथित रूप से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट साझा करने के आरोपी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। आरोपी का दावा है कि संबंधित पोस्ट उसने नहीं की थी, बल्कि उसका सोशल मीडिया खाता हैक कर लिया गया था।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता मुशाहिद गड़ा को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।मामला सहारनपुर में पिछले वर्ष जुलाई में दर्ज FIR से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा...

माँ के साथ रहने से बिगड़ जाएगी बच्ची: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिता को सौंपी 5 साल की बच्ची की अस्थायी कस्टडी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को 5 साल की बच्ची की कस्टडी अस्थायी रूप से उसके पिता को सौंप दी। कोर्ट ने माना कि अगर बच्ची अपनी माँ की कस्टडी में रहती है तो निश्चित रूप से वह 'बिगड़' जाएगी।कोर्ट ने पाया कि बच्ची का इस्तेमाल वैवाहिक विवाद में एक 'मोहरे' की तरह किया जा रहा था और माँ ने उसे पिता पर यौन शोषण के आरोप लगाने के लिए "पूरी तरह से सिखा-पढ़ा" दिया था।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा,"बच्ची से बातचीत करने के बाद इस कोर्ट की राय है कि उसे बहुत-सी नकारात्मक बातें सिखाई गईं और अगर वह रेस्पॉन्डेंट...

डिविज़न बेंच के फ़ैसले के ख़िलाफ़: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से ग्राम प्रधानों को 5 साल के कार्यकाल के बाद एडमिनिस्ट्रेटर बनाने पर सवाल पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश सरकार से ग्राम प्रधानों को उनके संवैधानिक 5 साल के कार्यकाल के बाद पंचायतों का 'एडमिनिस्ट्रेटर' नियुक्त करने के फ़ैसले पर कड़ा सवाल किया।यूपी पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 12(3-A) के तहत राज्य के कामों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा कि सरकार के आदेश डिविज़न बेंच के पहले के फ़ैसले (प्रेम लाल पटेल बनाम यूपी राज्य 2000) का सीधे तौर पर उल्लंघन करते हुए जारी किए गए लगते हैं, जिसमें ऐसे प्रावधानों को...

राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग पर दो और याचिकाओं पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित

राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग पर दो और याचिकाओं पर सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों की जांच की मांग वाली दो और जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि यही मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए समान विषय पर समानांतर कार्यवाही शुरू करने का कोई औचित्य नहीं है।जस्टिस राजन राय और...

अली ख़ामेनेई के पोस्टर हटाने के आरोपों पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- आरोप सामान्य और अस्पष्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर ईरान के धार्मिक नेताओं के चित्र मनमाने ढंग से हटाने का आरोप लगाते हुए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि याचिका में पुलिस के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं तथा किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया गया।जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मजलिस उलेमा-ए-हिंद की ओर से उसके महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए राहत देने से इनकार किया।याचिका में...

ISI एजेंट को पनाह देने और सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने के आरोपी को जमानत से इनकार, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के कथित एजेंट को पनाह देने और भारतीय सेना व वायुसेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने में मदद करने के आरोपी मोहम्मद अशफाक अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर रखा जाना चाहिए।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 437(6) के तहत 60 दिन में ट्रायल पूरा न होने पर जमानत देने का प्रावधान अनिवार्य (Mandatory)...

Roblox और अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बैन की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा- नाबालिगों को सेक्शुअल ग्रूमिंग के संपर्क में लाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म 'ROBLOX' और इसी तरह के दूसरे वर्चुअल प्लेटफॉर्म तक नाबालिगों की पहुंच पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने यह आदेश हाईकोर्ट की वकील रानी सिंह की याचिका पर दिया, जो खुद कोर्ट में पेश हुईं।PIL याचिका में 'मेंडेमस' (Mandamus) रिट की मांग की गई, ताकि संबंधित अधिकारियों (जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय - MeitY भी...

वोटर किसी सीट को डी-रिज़र्व की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

डिलिमिटेशन एक्ट, 2002 की धारा 9(1)(c) की वैधता बरकरार रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई वोटर किसी निर्वाचन क्षेत्र (सीट) को 'डी-रिज़र्व' करने की मांग करके सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार नहीं मांग सकता।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा,"वोट देने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि वोटर किसी सीट के आवंटन की शर्तें तय कर सकता है या इस बात पर ज़ोर दे सकता है कि कोई सीट किसी खास श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ही आवंटित की जाए।"डिलिमिटेशन एक्ट, 2002 की...

यूपी गुंडा एक्ट का इस्तेमाल दमन के हथियार के तौर पर नहीं होना चाहिए: हाईकोर्ट ने 2 आपराधिक मामलों के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही रद्द की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जिला अधिकारियों के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें एक व्यक्ति को यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970 के तहत 'गुंडा' घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट का इस्तेमाल बेगुनाह लोगों को 'दबाने के हथियार' के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने कहा कि यह एक्ट 'गुंडों' को नियंत्रित करने और दबाने का "शक्तिशाली हथियार" है। इसका इस्तेमाल "बहुत स्पष्ट मामलों में, जैसे 'सार्वजनिक अव्यवस्था' या 'सार्वजनिक व्यवस्था' बनाए रखने के लिए बहुत सोच-समझकर"...