इलाहाबाद हाईकोट

भले ही कामगार के लिखित बयान का खंडन न किया गया हो, श्रम न्यायालय को निर्णय देने से पहले साक्ष्य पर विचार करना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भले ही कामगार के लिखित बयान का खंडन न किया गया हो, श्रम न्यायालय को निर्णय देने से पहले साक्ष्य पर विचार करना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही कामगार के लिखित बयान का खंडन न किया गया हो, श्रम न्यायालय को साक्ष्यों पर विचार करना चाहिए और आदेश पारित करते समय अपनी न्यायिक बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए।न्यायालय ने कहा कि केवल उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद नियम, 1957 के नियम 12 (9) के आधार पर साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। केवल कामगार द्वारा दिए गए कथनों के आधार पर निर्णय नहीं दिया जा सकता।जस्टिस प्रकाश पाडिया ने कहा,“यद्यपि उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद नियम, 1957 के नियम 12 (9) में यह प्रावधान है...

राज्य चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी भर्ती के लिए योग्यता की समतुल्यता स्पष्ट कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
राज्य चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी भर्ती के लिए 'योग्यता की समतुल्यता' स्पष्ट कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सरकार चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी किसी पद पर भर्ती के लिए 'योग्यता की समतुल्यता' के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सक्षम है।इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के स्वायत्तशासी संस्थान इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, इलाहाबाद द्वारा जारी कंप्यूटर एप्लीकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PGDCA) की योग्यता की स्थिति के मुद्दे पर विचार करते हुए जस्टिस अजीत कुमार ने कहा,"यह सच है कि विज्ञापन द्वारा चयन प्रक्रिया प्रभावी होने के बाद खेल के नियम नहीं बदले जा सकते। ऐसी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने पिछले सप्ताह भारत संघ और उत्तर प्रदेश सरकार को 2013 की जनहित याचिका (पीआईएल) पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें राजनीतिक दलों द्वारा जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट किया गया।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने एडवोकेट मोती लाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।जनहित याचिका में जाति-आधारित रैलियां आयोजित करने वाली सभी राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगाने और भारत के चुनाव आयोग (ECI) को ऐसी...

बलात्कार पीड़िता और उसके बच्चे का DNA टेस्ट नियमित रूप से नहीं कराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बलात्कार पीड़िता और उसके बच्चे का DNA टेस्ट नियमित रूप से नहीं कराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीड़िता और उसके बच्चे का DNA टेस्ट सामान्य तौर पर कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इसका गहरा सामाजिक प्रभाव पड़ता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं मामलों में जब अनिवार्य और अपरिहार्य परिस्थितियां रिकॉर्ड पर सामने आएं और DNA टेस्ट कराने की ठोस आवश्यकता सिद्ध हो तभी ऐसा आदेश पारित किया जा सकता है।जस्टिस राजीव मिश्रा की पीठ एक मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें अभियुक्त ने ट्रायल कोर्ट द्वारा DNA टेस्ट की अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।संबंधित...

बृजभूषण शरण सिंह के सीएम को लिखे पत्र पर वकील की मानहानि शिकायत में पत्रकारों को तलब करने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया रद्द
बृजभूषण शरण सिंह के सीएम को लिखे पत्र पर वकील की मानहानि शिकायत में पत्रकारों को तलब करने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) ने हाल ही में एक अहम आदेश पारित करते हुए लखनऊ की विशेष सीजेएम अदालत द्वारा पारित उस आदेश को निरस्त किया जिसके तहत दो पत्रकारों को मानहानि के मामले में तलब किया गया था। यह शिकायत एडवोकेट डॉ. मोहम्मद कमरान ने दायर की थी जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के आधार पर प्रकाशित समाचार से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।मामला संडे व्यूज़ अख़बार की रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसके मालिक दिव्या श्रीवास्तव और संपादक...

22 साल बाद दूसरी FIR दर्ज करना उचित नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के सहयोगी को उसरी छट्टी हत्याकांड में दी ज़मानत
22 साल बाद दूसरी FIR दर्ज करना उचित नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के सहयोगी को उसरी छट्टी हत्याकांड में दी ज़मानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह 2001 के चर्चित उसरी छट्टी हत्याकांड मामले में मुख्तार अंसारी के कथित सहयोगी सरफ़राज़ अंसारी उर्फ मुन्‍नी को ज़मानत दी। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि एक ही घटना को लेकर 22 साल बाद दूसरी FIR दर्ज किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता।अदालत ने कहा कि वर्ष 2001 में ही घटना की FIR दर्ज की जा चुकी थी, जिसकी जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल कर दी गई> उस पर मुकदमा लंबित है। ऐसे में 22 साल बाद उसी घटना को लेकर दूसरी FIR दर्ज करना विधिसम्मत नहीं कहा जा...

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका BCI की मंजूरी के बिना कानूनी शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त ढांचे की मांग
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका BCI की मंजूरी के बिना कानूनी शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त ढांचे की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य प्राधिकारियों को सख्त तंत्र बनाने और लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उत्तर प्रदेश राज्य के किसी भी लॉ कॉलेज या यूनिवर्सिटी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की वैध मान्यता के बिना स्टूडेंट्स को प्रवेश देने की अनुमति न हो।आजमगढ़ के 26 वर्षीय वकील सौरभ सिंह द्वारा दायर इस याचिका में राज्य भर में ऐसे संस्थानों के निरीक्षण और पहचान के लिए भी निर्देश देने की मांग की गई, जो...

65 वर्षीय बरेली निवासी अवैध हिरासत में नहीं, धर्मांतरण मामले में हुई है गिरफ्तारी: यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में कहा
65 वर्षीय बरेली निवासी अवैध हिरासत में नहीं, धर्मांतरण मामले में हुई है गिरफ्तारी: यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें बरेली की एक महिला ने दावा किया था कि उसके 65 वर्षीय पति को 20 अगस्त से पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा है।कोर्ट के पहले के आदेश पर अधिकारियों ने व्यक्ति (बेग) को पेश किया।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस जफीर अहमद की बेंच को राज्य की ओर से बताया गया कि बेग को अवैध धर्मांतरण मामले में हिरासत में लिया गया है। 7 सितंबर को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया, जब पीड़िता के बयान में उसका नाम सामने आया।याचिकाकर्ता पत्नी का...

रिट याचिका प्रतिवादियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हो तो उसे मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 के अंतर्गत अपील में परिवर्तित किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
रिट याचिका प्रतिवादियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हो तो उसे मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 के अंतर्गत अपील में परिवर्तित किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

जस्टिस मनीष कुमार निगम की इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 227 (COI) के अंतर्गत रिट याचिका को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम (ACA) की धारा 37 के अंतर्गत अपील में परिवर्तित करने की अनुमति दी। पीठ ने यह भी कहा कि जहां किसी विशेष प्रकार की कार्यवाही स्वीकार्य नहीं है। उसके संबंध में न्यायालय के समक्ष अलग प्रकार की कार्यवाही लंबित है, वहां न्यायालय को सीमा अवधि और कोर्ट फीस से संबंधित कानून के अधीन रिट याचिका को अन्य रिट याचिका में परिवर्तित करने का अधिकार है।तथ्ययह याचिका जिला जज...

राजस्थान हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा, आदेश और गिरफ्तारी वारंट के बावजूद पेश न होने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​का मामला क्यों न चलाया जाए?
राजस्थान हाईकोर्ट ने डीजीपी से पूछा, आदेश और गिरफ्तारी वारंट के बावजूद पेश न होने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​का मामला क्यों न चलाया जाए?

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद गवाह के रूप में पेश न होने पर राज्य के पुलिस महानिदेशक से स्पष्टीकरण तलब किया है कि उनके अधीनस्थ अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में लगातार विफल क्यों रहे हैं। डीजीपी को हलफनामा दाखिल करने का आदेश देते हुए अदालत ने वरिष्ठ अधिकारी से पूछा कि "न्यायालय के आदेशों की घोर अवज्ञा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों" के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।इस स्थिति को अत्यंत दुखद और...

राहुल गांधी की याचिका पर आदेश सुरक्षित, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिख टिप्पणी मामले में कार्यवाही रोकी
राहुल गांधी की याचिका पर आदेश सुरक्षित, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'सिख टिप्पणी' मामले में कार्यवाही रोकी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिखों पर उनकी कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर फिर से सुनवाई करने के वाराणसी की अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी पुनरीक्षण याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने यह भी कहा कि उसे उम्मीद है कि मजिस्ट्रेट अदालत फैसला सुनाए जाने तक मामले में आगे नहीं बढ़ेगी। संक्षेप में, जुलाई में वाराणसी में एक अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सितंबर 2024 में...

यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में कहा: राहुल गांधी ने विदेश में की सिखों पर टिप्पणी, मजिस्ट्रेट तय करेंगे कि अपराध बनता है या नहीं
यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में कहा: राहुल गांधी ने विदेश में की सिखों पर टिप्पणी, मजिस्ट्रेट तय करेंगे कि अपराध बनता है या नहीं

सिखों पर कथित टिप्पणी से संबंधित विपक्ष के नेता राहुल गांधी की याचिका का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दलील दी कि मजिस्ट्रेट को यह आकलन करने के लिए अपने 'स्वतंत्र विचार' का प्रयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं।जस्टिस समीर जैन की पीठ के समक्ष राज्य सरकार ने दलील दी कि पुनर्विचार क्षेत्राधिकार में अदालतों को बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने की अनुमति नहीं है। यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि संज्ञेय अपराध बनता है तो...

तलाक की कार्यवाही स्थगित होने पर भी पति की गुज़ारा भत्ता देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तलाक की कार्यवाही स्थगित होने पर भी पति की गुज़ारा भत्ता देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक की कार्यवाही पर रोक लग जाने से पति की पत्नी को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 24 के तहत मिलने वाले गुज़ारा भत्ते की ज़िम्मेदारी समाप्त नहीं होती।जस्टिस मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने कहा कि पति की देनदारी तब तक बनी रहती है, जब तक कि गुज़ारा भत्ते का आदेश निरस्त या वापस नहीं ले लिया जाता। यह ज़िम्मेदारी अपील पुनर्विचार या पुनर्स्थापन कार्यवाही के दौरान भी जारी रहती है।मामलायाचिकाकर्ता अंकित सुमन ने 2018 में तलाक याचिका दायर की थी।...

बेहद गंभीर मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैध दावे की अनदेखी कर जल्दबाजी में मकान ढहाने के लिए रायबरेली कलेक्टर पर कठोर जुर्माना लगाने पर विचार किया
'बेहद गंभीर मामला': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैध दावे की अनदेखी कर जल्दबाजी में मकान ढहाने के लिए रायबरेली कलेक्टर पर कठोर जुर्माना लगाने पर विचार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में रायबरेली ज़िला अधिकारियों, विशेष रूप से संबंधित कलेक्टर को एक वैध पट्टा धारक के मकान को ध्वस्त करने के लिए कड़ी फटकार लगाई, जबकि उसका दावा राजस्व रिकॉर्डों में विधिवत दर्ज था। अदालत ने कलेक्टर और राजस्व प्रविष्टियों में बदलाव करने वाले अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अपनी कार्रवाई का स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। जस्टिस आलोक माथुर की पीठ ने जल्दबाजी में कार्रवाई करने के लिए उन पर अनुकरणीय जुर्माना लगाने पर भी विचार किया।संक्षेप में, पीठ बाबू लाल द्वारा दायर एक...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैधानिक अपील लंबित होने के बावजूद अलीगढ़ डीसी द्वारा सील की गई संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करने पर आश्चर्य व्यक्त किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैधानिक अपील लंबित होने के बावजूद अलीगढ़ डीसी द्वारा सील की गई संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करने पर आश्चर्य व्यक्त किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह अलीगढ़ के संभागीय आयुक्त के आचरण पर आश्चर्य व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर एक निजी शिकायत पर विचार किया और एक सीलबंद संपत्ति के संबंध में प्रतिकूल आदेश (हटाने का) पारित किया, जबकि याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक वैधानिक अपील अभी भी उनके समक्ष लंबित थी। जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की पीठ ने डीसी और अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) के उपाध्यक्ष से जवाब मांगते हुए कहा, "...हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि अपीलीय प्राधिकारी ने निजी शिकायत...