इलाहाबाद हाईकोट

यूपी की ट्रायल अदालतें फैसले हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकती हैं, लेकिन दोनों भाषाओं का मिश्रित जजमेंट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी की ट्रायल अदालतें फैसले हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकती हैं, लेकिन दोनों भाषाओं का मिश्रित जजमेंट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की ट्रायल अदालतें अपने फैसले या तो पूरी तरह हिंदी में लिखें या पूरी तरह अंग्रेजी में, लेकिन दोनों भाषाओं को मिलाकर लिखा गया जजमेंट स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने आगरा की सत्र अदालत द्वारा दिए गए एक बरी करने के फैसले को “क्लासिक उदाहरण” बताते हुए इसकी प्रति मुख्य न्यायाधीश और पूरे राज्य के न्यायिक अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि विवादित फैसला 54 पन्नों का था, जिसमें 63 पैराग्राफ अंग्रेजी में, 125 हिंदी में और 11 पैराग्राफ दोनों...

क्या माफ़ी स्वीकार करना अवमानना ​​के दोष को दूर करने के लिए पर्याप्त है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया, सज़ा क्यों दी जा सकती है?
क्या माफ़ी स्वीकार करना अवमानना ​​के दोष को दूर करने के लिए पर्याप्त है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया, सज़ा क्यों दी जा सकती है?

न्यायालय अवमानना ​​अधिनियम 1971 की धारा 12 की व्याख्या करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवमाननाकर्ता द्वारा की गई माफ़ी को न्यायालय स्वीकार तो कर सकता है लेकिन इससे अवमानना ​​स्वतः ही समाप्त नहीं हो जाती या अवमाननाकर्ता को दोषमुक्त नहीं कर देता।न्यायालय के विरुद्ध अपमानजनक आरोप लगाने के कारण आपराधिक अवमानना ​​का सामना कर रहे एक वकील की वापसी और माफ़ी की याचिका पर विचार करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ की पीठ ने कहा कि माफ़ी स्वीकार करना दोषमुक्ति के समान नहीं है।पीठ ने आगे कहा कि अवमानना...

मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारी का मामला: दुराचार के आरोप लंबित होने पर भी विभाग VRS आवेदन निपटाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारी का मामला: दुराचार के आरोप लंबित होने पर भी विभाग VRS आवेदन निपटाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी कर्मचारी की मेडिकल स्थिति ऐसी हो कि वह विभागीय जांच का सामना करने में असमर्थ हो तो लंबित दुराचार के आरोपों के बावजूद उसके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन पर विचार किया जाना चाहिए।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि जब कोई कर्मचारी चिकित्सकीय रूप से जांच में भाग लेने योग्य न हो तो विभागीय कार्रवाई का औचित्य समाप्त हो जाता है।मामले की पृष्ठभूमिमामला दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम...

वैधानिक नियमों के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी दो महीने के अनिवार्य नोटिस के बिना इस्तीफ़ा नहीं दे सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
वैधानिक नियमों के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी दो महीने के अनिवार्य नोटिस के बिना इस्तीफ़ा नहीं दे सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी इस्तीफ़ा मांगता है तो उसे पुलिस अधिनियम, 1961 के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली के विनियम 505 के तहत विभाग को अनिवार्य दो महीने की नोटिस अवधि प्रदान करनी होगी।जस्टिस विकास बुधवार ने कहा कि उपर्युक्त प्रावधानों का पालन न करने पर इस्तीफ़ा दोषपूर्ण हो जाएगा।याचिकाकर्ता को 2010 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल और बाद में 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस में फिर से शामिल होने के...

अपीलों की सुनवाई करते समय अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी करते समय संयम बरतना आवश्यक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अपीलों की सुनवाई करते समय अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी करते समय संयम बरतना आवश्यक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलीय शक्तियों का प्रयोग करते हुए न्यायालयों को अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध तीखी टिप्पणियाँ दर्ज करते समय सावधानी और संयम बरतना आवश्यक है।जस्टिस प्रकाश पाडिया ने कहा,"हम मानते हैं कि न्यायालय को अपने समक्ष आने वाले किसी भी मामले पर अपनी स्वयं की धारणा के आधार पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अंतर्निहित शक्ति प्राप्त है, लेकिन न्याय के समुचित प्रशासन के लिए यह सर्वोच्च महत्व का एक सामान्य सिद्धांत है कि ऐसे व्यक्तियों या प्राधिकारियों के विरुद्ध...

सतेंद्र कुमार अंतिल फैसले की गलत व्याख्या से जमानत में भ्रम: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई चिंता
सतेंद्र कुमार अंतिल फैसले की गलत व्याख्या से जमानत में भ्रम: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई चिंता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि ज़िला कोर्ट और एडवोकेट कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध निर्णय सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (2021) की गलत व्याख्या कर देते हैं जिससे जमानत संबंधी कार्यवाही में भ्रम पैदा होता है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि सतेंद्र कुमार अंतिल मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश केवल उन परिस्थितियों में लागू होते हैं, जब पुलिस द्वारा आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका हो। अदालत ने कहा कि यह आदेश उन...

IOs को समय पर विसरा रिपोर्ट मिलनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FSL से समय पर संवाद सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
'IOs को समय पर विसरा रिपोर्ट मिलनी चाहिए': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FSL से समय पर संवाद सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) से जांच एजेंसियों को विसरा रिपोर्ट भेजने में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की और इस चूक को 'चिंताजनक' बताया।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने मुख्य सचिव, मेडिकल स्वास्थ्य महानिदेशक और पुलिस महानिदेशक को स्थिति की जांच करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विसरा रिपोर्ट बिना किसी समय की बर्बादी के शीघ्रता से प्रेषित की जाए ताकि जांच के दौरान पूर्ण, उचित और प्रभावी मूल्यांकन संभव हो सके।कोर्ट की यह टिप्पणी दहेज हत्या के एक आरोपी की...

जज पर बेईमानी और प्रोबिटी की कमी के आरोप लगाने वाले वकील को हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
जज पर बेईमानी और 'प्रोबिटी की कमी' के आरोप लगाने वाले वकील को हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वकील की अर्जी खारिज की, जिसमें उसने अदालत पर पक्षपात, बेईमानी और प्रोबिटी की कमी जैसे गंभीर आरोप लगाने के बाद शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही को वापस लेने और आदेश को रद्द करने की मांग की थी।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही वकील की बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली गई लेकिन इससे उसकी अवमानना समाप्त नहीं होती और मामला अब भी डिवीजन बेंच के पास विचाराधीन रहेगा।जस्टिस सिद्धार्थ की एकल पीठ ने कहा कि यदि इस प्रकार के वापस बुलाने की याचिका आवेदन स्वीकार किए गए तो अत्यंत गलत परंपरा...

टेंडरों में तकनीकी आधार पर दखल से राज्य को भारी नुकसान: इलाहाबाद हाईकोर्ट
टेंडरों में तकनीकी आधार पर दखल से राज्य को भारी नुकसान: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े टेंडरों में केवल तकनीकी आधारों पर दखल देने से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप केवल तभी किया जाना चाहिए जब मनमानी या गंभीर अनियमितताओं का स्पष्ट संकेत मिले।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता, जो सड़क निर्माण के व्यवसाय से जुड़ा है, टेंडर प्रक्रिया में अपनी असफलता को लेकर काल्पनिक शिकायतें और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के आधार पर मुद्दा...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश- जेंडर-चेंज सर्जरी के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्ति के नाम और जेंडर के साथ नई शैक्षिक प्रमाणपत्र जारी करने का दिया निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश- जेंडर-चेंज सर्जरी के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्ति के नाम और जेंडर के साथ नई शैक्षिक प्रमाणपत्र जारी करने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में माध्यमिक शिक्षा परिषद बरेली के उस आदेश को निरस्त कर दिया ,जिसमें एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के शैक्षिक दस्तावेज़ों में नाम और जेंडर संशोधन करने से इनकार कर दिया गया था।अदालत ने कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 एक विशेष कानून है और इसकी धाराएं अन्य मौजूदा कानूनों के अतिरिक्त लागू होती हैं न कि उनके विपरीत। इसलिए परिषद द्वारा संशोधन से इनकार करना विधि-विरुद्ध है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने यह आदेश शरद रोशन सिंह की याचिका पर...

पासपोर्ट में देरी यात्रा के अधिकार में बाधा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को 4 हफ्तों में सत्यापन पूरा करने का निर्देश दिया
पासपोर्ट में देरी यात्रा के अधिकार में बाधा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को 4 हफ्तों में सत्यापन पूरा करने का निर्देश दिया

पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में देरी को लेकर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि पुलिस को पासपोर्ट आवेदनों से संबंधित सत्यापन रिपोर्ट चार हफ्तों के भीतर पूरी कर के प्रस्तुत करनी होगी।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह निर्देश एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें पासपोर्ट नवीनीकरण को लेकर देरी का मुद्दा उठा था। अदालत ने कहा कि पुलिस सत्यापन में देरी, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहाँ किसी आरोपी को केवल एक वर्ष की अवधि के लिए पासपोर्ट...

धारा 104 के तहत अपील में पारित आदेशों के खिलाफ सीपीसी की धारा 100 के तहत दूसरी अपील स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
धारा 104 के तहत अपील में पारित आदेशों के खिलाफ सीपीसी की धारा 100 के तहत दूसरी अपील स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (CPC) की धारा 100 के तहत कोई भी सेकंड अपील उन आदेशों के खिलाफ दायर नहीं की जा सकती जो धारा 104 के तहत पारित किए गए हों।जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि धारा 104(2) स्पष्ट शब्दों में एक पूर्ण और निरपेक्ष रोक प्रदान करती है।उन्होंने कहा,“इस धारा के तहत अपील में पारित किसी आदेश से कोई दूसरी अपील नहीं चलेगी।”CPC की धारा 100 के अनुसार सेकंड अपील केवल उस स्थिति में संभव है, जब कोई अधीनस्थ...

अब कोई राजा नहीं: परिवारिक विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के बोर्ड के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा
अब कोई राजा नहीं: परिवारिक विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के बोर्ड के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा

दिवंगत राजा बलवंत सिंह (अवागढ़) के परिवार के सदस्यों के बीच राजा बलवंत सिंह कॉलेज और उससे जुड़े बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के प्रबंधन को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बोर्ड के पुनर्गठन के लिए संतुलित व्यवस्था का प्रस्ताव रखा।जस्टिस सौरभ श्याम शंश्यरी ने कहा कि किसी भी पक्ष को राजा होने का दावा मान्य नहीं है लेकिन दोनों भाई बोर्ड के सदस्य बन सकते हैं और सोसाइटी के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किए जा सकते हैं। अदालत ने सुझाव दिया कि भाइयों के बीच उम्र (जन्मतिथि) के अनुसार...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी एमएलए की पत्नी के खिलाफ मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी अधिनियम के तहत मामला खारिज किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी एमएलए की पत्नी के खिलाफ मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी अधिनियम के तहत मामला खारिज किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह समाजवादी पार्टी के निवर्तमान विधायक की पत्नी के खिलाफ आरोपपत्र, संज्ञान आदेश और पूरी कार्यवाही रद्द की। उन पर मानव तस्करी के आरोप थे। साथ ही उन पर किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के साथ-साथ बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने विधायक ज़ैद बेग की पत्नी सीमा बेग को राहत देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष की सामग्री को अगर उसके मूल स्वरूप में भी लिया जाए तो भी किसी भी लागू प्रावधान के तहत प्रथम दृष्टया कोई...

Indian Succession Act | धारा 57(क)(ख) के दायरे से बाहर की संपत्तियों से संबंधित हिंदू वसीयतों के लिए प्रोबेट की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Indian Succession Act | धारा 57(क)(ख) के दायरे से बाहर की संपत्तियों से संबंधित हिंदू वसीयतों के लिए प्रोबेट की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी हिंदू के वसीयतनामा उत्तराधिकार में यदि कोई संपत्ति भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 57 (क) और (ख) द्वारा निर्दिष्ट क्षेत्रों में नहीं आती है तो अधिनियम की धारा 213 के तहत प्रोबेट प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 57 वसीयत संबंधी अधिनियम के प्रावधानों को सीमित रूप से हिंदुओं, बौद्धों, सिखों और जैनियों तक विस्तारित करती है। इसमें प्रावधान है कि ये नियम पहले बंगाल, मद्रास और बंबई के पुराने प्रेसीडेंसी शहरों में या उनसे...

घरेलू सहायिका आत्महत्या मामले में SP MLA और पत्नी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, ट्रायल पर लगी रोक
घरेलू सहायिका आत्महत्या मामले में SP MLA और पत्नी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, ट्रायल पर लगी रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में भदोही से समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक ज़ाहिद बेग @ ज़ाहिद जमाल बेग और उनकी पत्नी सीमा बेग के खिलाफ चल रहे सेशन ट्रायल की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। विधायक और उनकी पत्नी पर उनकी घरेलू सहायिका की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने विधायक और उनकी पत्नी द्वारा दायर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया। यह याचिका दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग कर रही थी।आवेदकों की ओर से...

पढ़ाई पर ध्यान दो: LLB में 499/500 अंकों की मांग करने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट पर लगाया 20 हजार का जुर्माना
पढ़ाई पर ध्यान दो: LLB में 499/500 अंकों की मांग करने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट पर लगाया 20 हजार का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में लॉ स्टूडेंट द्वारा दायर याचिका को 20,000 के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया। छात्रा ने छत्रपति साहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपनी पहले सेमेस्टर की LLB परीक्षा में 500 में से 499 अंक देने की मांग की थी।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने याचिकाकर्ता को पुरानी मुकदमेबाज बताया यह देखते हुए कि उसने 2021 और 2022 के बीच कम से कम दस याचिकाएँ जिनमें रिट, समीक्षा और विशेष अपीलें शामिल हैं, दायर की थीं।पांच वर्षीय LLB पाठ्यक्रम की स्टूडेंट ने...

बार एसोसिएश नें खुद भरें बिजली का बिल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- वकील कोर्ट के अधिकारी हैं, लेकिन निजी व्यवसायी भी हैं
बार एसोसिएश नें खुद भरें बिजली का बिल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- वकील कोर्ट के अधिकारी हैं, लेकिन निजी व्यवसायी भी हैं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि राज्य सरकार को बार एसोसिएशनों के बिजली बिलों का भुगतान करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि यद्यपि वकील न्यायालय के अधिकारी होते हैं लेकिन वे निजी डॉक्टरों का एक निकाय भी हैं। उन्हें उन सुविधाओं की लागत स्वयं वहन करनी चाहिए जिनका वे उपयोग करते हैं।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने सिविल बार एसोसिएशन, बस्ती द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया।याचिका में जिला न्यायालय परिसर के भीतर स्थित बार एसोसिएशन भवन के बिजली...

ST/ST Act का दुरुपयोग, राज्य के साथ धोखाधड़ी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता को प्रभावित करने के लिए आरोपी पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया
ST/ST Act का दुरुपयोग, राज्य के साथ धोखाधड़ी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता को प्रभावित करने के लिए आरोपी पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक कड़े आदेश में SC/ST Act, 1989 के तहत दर्ज एक मामले में तीन पीड़ितों और 19 आरोपियों दोनों को कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने कानून की प्रक्रिया के 'गंभीर दुरुपयोग' और अधिनियम के कल्याणकारी प्रावधानों के 'घोर दुरुपयोग' का खुलासा किया।1989 के SC/ST Act की धारा 14-ए (1) के तहत 19 आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए जस्टिस शेखर कुमार यादव की पीठ ने कथित पीड़ितों, एक दलित महिला और उसकी दो बहुओं को राज्य सरकार से प्राप्त ₹4.5 लाख की पूरी मुआवज़ा राशि वापस करने का...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा – नियुक्ति के समय उम्र कम थी, पर धोखाधड़ी नहीं हुई; फॉरेस्टर की नौकरी बहाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा – नियुक्ति के समय उम्र कम थी, पर धोखाधड़ी नहीं हुई; फॉरेस्टर की नौकरी बहाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी वन मंडल के वन संरक्षक का 2003 का आदेश रद्द कर दिया, जिसके तहत 1991 में नियुक्त एक फॉरेस्टर का नियमितीकरण यह कहते हुए रद्द कर दिया गया था कि नियुक्ति के समय वह नाबालिग था।जस्टिस विकास बुधवार की पीठ ने कहा कि यह मामला धोखाधड़ी या गलत जानकारी का नहीं है और याचिकाकर्ता 1991 से सेवा में कार्यरत है। अदालत ने कहा कि उसकी नियुक्ति में यदि कोई गलती हुई भी, तो वह “अनियमितता” थी, “अवैधता” नहीं। मामले में याचिकाकर्ता को 1991 में वन दरोगा के रूप में नियुक्त किया गया था। 26 मार्च...