उत्तराखंड हाईकोर्ट

दावा करने वाले का लापरवाही से गाड़ी चलाने का अपराध स्वीकार करना लापरवाही की बात मानना ​​है, जिससे वह दुर्घटना के मुआवज़े का हकदार नहीं रहता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
दावा करने वाले का लापरवाही से गाड़ी चलाने का अपराध स्वीकार करना लापरवाही की बात मानना ​​है, जिससे वह दुर्घटना के मुआवज़े का हकदार नहीं रहता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी मोटर दुर्घटना से जुड़े आपराधिक मामले में दावा करने वाले ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है तो इसका मतलब यह है कि उसने मान लिया है कि दुर्घटना उसकी लापरवाही और तेज़ी से गाड़ी चलाने के कारण हुई थी। कोर्ट ने कहा कि भले ही आपराधिक मामले में दर्ज निष्कर्षों का असर अलग हो सकता है, लेकिन दावा करने वाले का खुद अपनी मर्ज़ी से अपराध स्वीकार करना उसे दुर्घटना के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराने का आधार बन सकता है।जस्टिस रवींद्र मैठाणी मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 140 और...

महा वैल्यू लिखना अपने आप में भ्रामक नहीं, बिना ठोस सबूत किसी उत्पाद को गलत ब्रांडिंग वाला नहीं कहा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
महा वैल्यू लिखना अपने आप में भ्रामक नहीं, बिना ठोस सबूत किसी उत्पाद को गलत ब्रांडिंग वाला नहीं कहा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी खाद्य उत्पाद के पैकेट पर "महा वैल्यू" लिख देना मात्र से उसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत गलत ब्रांडिंग वाला उत्पाद नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो जाए कि उक्त शब्द उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला, भ्रामक या धोखापूर्ण है, तब तक गलत ब्रांडिंग का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।जस्टिस रवींद्र मैठाणी ने यह फैसला पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर सुनाते हुए दिया। कंपनी ने उन...

10 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- त्वरित न्याय के लिए सभी पक्षों को निभानी होगी जिम्मेदारी
10 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- त्वरित न्याय के लिए सभी पक्षों को निभानी होगी जिम्मेदारी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लगभग दस वर्षों से न्यायिक हिरासत में बंद एक हत्या के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि त्वरित सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना न होने पर किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस आलोक महरा ने यह आदेश हत्या और शस्त्र अधिनियम से जुड़े एक मामले में नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले के अनुसार...

जिलाधिकारी के हस्ताक्षर बिना राशन दुकान लाइसेंस रद्द करने का आदेश अमान्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
जिलाधिकारी के हस्ताक्षर बिना राशन दुकान लाइसेंस रद्द करने का आदेश अमान्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि यदि उचित मूल्य दुकान (राशन दुकान) का लाइसेंस रद्द करने वाले आदेश पर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं तो ऐसा आदेश कानून की नजर में टिक नहीं सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी अन्य अधिकारी द्वारा आदेश की सूचना भेज देने से उसे जिलाधिकारी का वैध आदेश नहीं माना जा सकता। जस्टिस पंकज पुरोहित की पीठ एक राशन दुकान संचालक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता ने 19 नवंबर 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उसकी उचित मूल्य दुकान का...

सिर्फ हस्ताक्षर से इनकार करने भर से जालसाजी साबित नहीं हो सकती, विशेषज्ञ राय जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ हस्ताक्षर से इनकार करने भर से जालसाजी साबित नहीं हो सकती, विशेषज्ञ राय जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति द्वारा अपने हस्ताक्षरों से इनकार कर देने मात्र के आधार पर जालसाजी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जालसाजी का आरोप गंभीर नागरिक और आपराधिक परिणाम उत्पन्न करता है, इसलिए ऐसे निष्कर्ष केवल अनुमान या एकतरफा दावों के आधार पर नहीं दिए जा सकते। जस्टिस पंकज पुरोहित की पीठ एक उचित मूल्य दुकान संचालक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में ग्राम सभा के उस प्रस्ताव, जिला मजिस्ट्रेट के आदेश और अपीलीय...

DPC में देरी होने मात्र से पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
DPC में देरी होने मात्र से पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) का गठन देर से हुआ कोई कर्मचारी पूर्व प्रभाव से पदोन्नति का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी नियम या दिशा-निर्देश में काल्पनिक अथवा पूर्व निर्धारित तिथि से पदोन्नति देने का प्रावधान न हो, तब तक ऐसा दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी एम्स ऋषिकेश के नर्सिंग अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2017-18 में हुई...

आउटसोर्स कर्मचारी भी गोपनीय जानकारी लीक नहीं कर सकते, आधिकारिक गोपनीयता कानून लागू न होने पर भी जिम्मेदारी बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आउटसोर्स कर्मचारी भी गोपनीय जानकारी लीक नहीं कर सकते, आधिकारिक गोपनीयता कानून लागू न होने पर भी जिम्मेदारी बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही किसी आउटसोर्स कर्मचारी पर आधिकारिक गोपनीयता कानून के प्रावधान सीधे लागू न होते हों, फिर भी उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह विभाग की संवेदनशील और गोपनीय जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा न करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी सरकारी विभाग में कार्यरत नियमित और आउटसोर्स, दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होती है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड के...

आउटसोर्स कर्मचारियों को पदोन्नति का अधिकार नहीं, बिना अधिकार बदला गया पदनाम सुधारा जा सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आउटसोर्स कर्मचारियों को पदोन्नति का अधिकार नहीं, बिना अधिकार बदला गया पदनाम सुधारा जा सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि आउटसोर्स या संविदा कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारियों जैसी स्थिति स्वतः प्राप्त नहीं कर लेते। केवल लंबे समय तक सेवा में बने रहने से राज्य सरकार और कर्मचारी के बीच प्रत्यक्ष नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित नहीं माना जा सकता।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की पीठ ने यह टिप्पणी उन दो कर्मचारियों की याचिका खारिज करते हुए की, जिन्हें उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (UPNL) के माध्यम से संविदा पर स्टेनोग्राफर के रूप में नियुक्त किया गया।मामले में...

पहले दीवानी मुकदमों का निपटारा होने दें, फिर आपराधिक कार्रवाई करें: मसूरी के मोदी भवन मामले में हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
पहले दीवानी मुकदमों का निपटारा होने दें, फिर आपराधिक कार्रवाई करें: मसूरी के मोदी भवन मामले में हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी स्थित मोदी भवन संपत्ति से जुड़े कथित ध्वस्तीकरण, चोरी और अतिक्रमण के आरोपों पर दर्ज FIR रद्द करते हुए कहा कि जब दोनों पक्ष पहले ही दीवानी अदालतों का दरवाजा खटखटा चुके हैं, तब समान विवाद पर आपराधिक जांच जारी रखना उचित नहीं है।जस्टिस राकेश थपलियाल ने अपने आदेश में कहा कि जब एक ही संपत्ति को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दीवानी मुकदमे दायर कर चुके हैं तो ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रहने से लंबित मुकदमों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने कहा कि फिलहाल पक्षकारों को...

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, सुरेश राठौर के खिलाफ दो FIR रद्द, दो पर जांच जारी
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, सुरेश राठौर के खिलाफ दो FIR रद्द, दो पर जांच जारी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार FIR में से दो रद्द की, जबकि दो अन्य मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी छवि खराब करने का प्रयास गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।जस्टिस राकेश थपलियाल ने मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और ऑडियो सामग्री के प्रतिलेखों का अवलोकन किया।अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से...

हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की
हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की

उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने शुक्रवार को राज्य द्वारा दायर विशेष अपील को 'आगे न बढ़ाने' (not pressed) के आधार पर खारिज किया। इस अपील में सिंगल-जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें नैनीताल के मशहूर जिमखाना और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मैदान में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई थी।जब 29 मई को चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हुई तो राज्य की ओर से पेश हुए स्टैंडिंग काउंसिल BPS मेर ने बताया कि वे इस अपील...

कम अटेंडेंस वाले लॉ स्टूडेंट्स को परीक्षा देने की इजाज़त देने से कॉलेजों में अराजकता फैलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट
कम अटेंडेंस वाले लॉ स्टूडेंट्स को परीक्षा देने की इजाज़त देने से कॉलेजों में अराजकता फैलेगी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते यह टिप्पणी की कि किसी ऐसे लॉ स्टूडेंट को परीक्षा देने की इजाज़त देना, जो अटेंडेंस के न्यूनतम स्टैंडर्ड को पूरा करने में नाकाम रहता है, 'नुकसानदेह' होगा।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की बेंच ने आगे कहा कि इससे शिक्षण संस्थानों में 'अराजकता' फैलेगी और शिक्षा का स्टैंडर्ड 'गिर जाएगा'।इसलिए बेंच ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट की याचिका में दखल देने से इनकार किया; यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कम अटेंडेंस के चलते उसे 8वें सेमेस्टर की आखिरी परीक्षा में बैठने से रोक दिया...

हस्तक्षेप करने वाले द्वारा उठाई गई आपत्तियां, डिक्री धारक के निष्पादन कार्यवाही वापस लेने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
'हस्तक्षेप करने वाले द्वारा उठाई गई आपत्तियां, डिक्री धारक के निष्पादन कार्यवाही वापस लेने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं': उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी हस्तक्षेप करने वाले (Intervener) द्वारा उठाई गई आपत्तियां, डिक्री धारक के निष्पादन कार्यवाही वापस लेने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं; खासकर तब, जब मूल कार्यवाही में हस्तक्षेप करने वाले के खिलाफ कोई ठोस फैसला (Substantive Adjudication) कभी नहीं दिया गया हो। कोर्ट ने टिप्पणी की कि निष्पादन कार्यवाही को किसी तीसरे पक्ष के अधिकारों पर फैसला देने के लिए एक स्वतंत्र मंच में नहीं बदला जा सकता, जो मूल मामले में कभी पक्षकार नहीं था।जस्टिस आलोक मेहरा 'घरेलू हिंसा...

सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 5 साल पुराना निलंबन रद्द किया
सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 5 साल पुराना निलंबन रद्द किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने करीब पांच वर्षों से निलंबित चल रहे कर्मचारी का निलंबन आदेश रद्द किया।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जुलाई 2021 में जारी निलंबन आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही थी। उस पर ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति और फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र के आधार...

ज़मानत पर विचार करते समय अपीलीय अदालत केवल BNSS की धारा 430 की व्याख्या निर्देशात्मक के रूप में नहीं कर सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट
ज़मानत पर विचार करते समय अपीलीय अदालत केवल BNSS की धारा 430 की व्याख्या निर्देशात्मक के रूप में नहीं कर सकती: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि वैधानिक आपराधिक अपील में सज़ा के निलंबन और ज़मानत के आवेदन पर विचार करते समय अपीलीय अदालत को केवल इस बात की व्याख्या करने के बजाय कि BNSS की धारा 430(1) निर्देशात्मक है या अनिवार्य, दोषसिद्धि के गुण-दोष की जांच करना आवश्यक है।अदालत ने टिप्पणी की कि एक बार जब दोषसिद्धि के खिलाफ अपील स्वीकार की जाती है तो अपीलीय अदालत को यह जांच करनी चाहिए थी कि दोषसिद्धि गलत थी या नहीं, और ऐसा न कर पाना न्यायिक विवेक का उपयोग न करने को दर्शाता है।जस्टिस राकेश थपलियाल, रुड़की...

FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर होना गंभीर संदेह पैदा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NDPS मामले में दी जमानत
FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी मेमो पर केस नंबर होना गंभीर संदेह पैदा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने NDPS मामले में दी जमानत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि गिरफ्तारी मेमो और जब्ती सूची पर FIR दर्ज होने से पहले ही FIR नंबर अंकित हो तो इससे पूरी कार्रवाई संदिग्ध हो जाती है और गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया अवैध मानी जा सकती है।जस्टिस आशीष नैथानी ने NDPS Act की धाराओं 8, 21 और 60 के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।अभियोजन के अनुसार पुलिस टीम नियमित जांच और अपराध नियंत्रण ड्यूटी के दौरान मोटरसाइकिल...

उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की वर्ष 2022 और 2023 की पदोन्नति समीक्षा प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई। यह रोक विशेष रूप से ओन मेरिट सिद्धांत के आधार पर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति देने से जुड़े मामले में लगाई गई।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश नर्सिंग अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के 7 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अंतरिम राहत...

अगर CrPC की धारा 313 के तहत पूछताछ के दौरान आरोपी को DNA रिपोर्ट नहीं दिखाई गई तो उसे दोषी ठहराने के लिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
अगर CrPC की धारा 313 के तहत पूछताछ के दौरान आरोपी को DNA रिपोर्ट नहीं दिखाई गई तो उसे दोषी ठहराने के लिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि अगर FSL/DNA रिपोर्ट के निष्कर्षों को CrPC की धारा 313 के तहत आरोपी से पूछताछ के दौरान उसके सामने नहीं रखा गया तो किसी को दोषी ठहराने के लिए उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को सफाई देने के लिए जो भी सबूत नहीं दिखाए गए, उन्हें उसके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।जस्टिस रविंद्र मैठानी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की डिवीज़न बेंच देहरादून के स्पेशल जज (POCSO) के फैसले के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस फैसले में अपीलकर्ता...

उत्तराखंड ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम: गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी को ज़मीन हस्तांतरित करने हेतु पूर्व अनुमति अनिवार्य - हाईकोर्ट
उत्तराखंड ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम: गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी को ज़मीन हस्तांतरित करने हेतु पूर्व अनुमति अनिवार्य - हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि उत्तराखंड में लागू 'उत्तर प्रदेश ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950' की धारा 154 के तहत, गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए किसी सोसाइटी के पक्ष में ज़मीन का हस्तांतरण करने हेतु राज्य सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है; भले ही यह हस्तांतरण 'उपहार विलेख' (Gift Deed) के माध्यम से किया गया हो। कोर्ट ने टिप्पणी की कि धारा 154 के तहत वैधानिक प्रतिबंध केवल 'बिक्री' के माध्यम से होने वाले हस्तांतरण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि हस्तांतरण के सभी मान्यता प्राप्त...

लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर सांप रखने वाले व्यक्ति को जमानत, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- केवल तकनीकी चूक पर जेल उचित नहीं
लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर सांप रखने वाले व्यक्ति को जमानत, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- केवल तकनीकी चूक पर जेल उचित नहीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सांपों के कथित अवैध कब्जे के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि केवल लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाने और समय पर उसका नवीनीकरण न हो पाने के आधार पर किसी को लगातार जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।जस्टिस आशीष नैथानी आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि आरोपी पहले वैध लाइसेंस के तहत कार्य कर रहा था और...