सुप्रीम कोर्ट
वादी ने जब ऐसी कोई मांग नहीं की हो तो कोर्ट उसे 'इंजंक्शन' के बदले मुआवज़ा लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलीय कोर्ट के लिए कानूनी तौर पर यह सही नहीं है कि वह ऐसी राहत दे, जिसके लिए याचिका में कोई मांग नहीं की गई हो। साथ ही अपीलीय कोर्ट डिक्री रद्द करने के बाद मामले को एग्जीक्यूटिंग कोर्ट (फैसला लागू करने वाली अदालत) के पास ऐसे मुद्दों पर फैसले के लिए नहीं भेज सकता जो किसी मौजूदा डिक्री से पैदा नहीं हुए हों।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया। हाईकोर्ट ने कथित अतिक्रमण हटाने के आदेश वाली डिक्री को बदलकर...
'हाईकोर्ट कॉलेजियम को निर्देश नहीं दिया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन की मांग करने वाले न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 जून) को हिमाचल प्रदेश के न्यायिक अधिकारी की रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया। अधिकारी ने हाईकोर्ट में प्रमोशन के लिए अपने नाम पर विचार करने की मांग की थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि हाई कोर्ट कॉलेजियम को कोई न्यायिक निर्देश नहीं दिया जा सकता।याचिकाकर्ता अरविंद मल्होत्रा अभी धर्मशाला में फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज हैं। उनकी शिकायत थी कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनके जूनियर्स के नाम आगे बढ़ाए, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंज़ूरी दी।याचिकाकर्ता की...
पता बदलने की जानकारी न देने वाला कर्मचारी 'शो-कॉज़ नोटिस' न मिलने का तर्क नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें एक कर्मचारी को बकाया वेतन के साथ नौकरी पर वापस रखने (Reinstatement) को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि जो कर्मचारी बिना इजाज़त के अनुपस्थित रहा और ड्यूटी पर वापस लौटने से रोके जाने के अपने दावों को साबित नहीं कर पाया, वह बिना पुष्टि वाले बयानों के आधार पर राहत नहीं मांग सकता।कर्मचारी का तर्क था कि नोटिस उसे कभी नहीं मिला क्योंकि इसे गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में उसके रहने की जगह के बजाय बिहार में उसके स्थायी पते पर भेजा गया। उसने दावा किया...
बीमा कराने वाले मालिक द्वारा सौंपे गए वाहन की चोरी के लिए फाइनेंसर इंश्योरेंस का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीमा वाले वाहन को उसके मालिक द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति (जिसने वाहन खरीदने के लिए फाइनेंस किया था) को सौंप देना ही फाइनेंसर के लिए वाहन के नुकसान या चोरी होने पर मुआवज़े का दावा करने के लिए काफ़ी नहीं होगा।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के फ़ैसले में दखल देने से इनकार किया। कमीशन ने बीमा कंपनियों के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए माना था कि अपीलकर्ता (वाहन फाइनेंसर) और प्रतिवादी (बीमा कंपनी) के बीच कोई...
आर्बिट्रेशन क्लॉज़ होने से कंज्यूमर फोरम का अधिकार क्षेत्र खत्म नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी एग्रीमेंट में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ (मध्यस्थता खंड) होने मात्र से कंज्यूमर फोरम को मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करने से नहीं रोका जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा,"...आर्बिट्रेशन क्लॉज़ अपने आप में कंज्यूमर फोरम के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करता है।" बेंच ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन (NCDRC), स्टेट कमीशन और डिस्ट्रिक्ट फोरम के उन फैसलों को रद्द किया, जिनमें रेजिडेंशियल फ्लैट का कब्ज़ा सौंपने में देरी से जुड़े...
फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, इसके लिए कानून बनाने पर विचार करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फुटपाथ पर चलना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और यह अधिकार मोटर वाहनों के अधिकार से पहले आता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस अधिकार की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार करने को कहा है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना मामले में की, जिसमें स्कूल जाते समय 5 वर्षीय बच्चे की टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। कोर्ट ने बच्चे के परिवार को दिया गया मुआवजा बढ़ाकर 11.44 लाख...
पश्चिम बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट ने 75 वर्षीय वकील की अपील पर जल्द सुनवाई का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 75 वर्षीय अधिवक्ता की अपील पर त्वरित सुनवाई का निर्देश दिया है। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने अपीलीय ट्रिब्यूनल को मामले की “आउट-ऑफ-टर्न” सुनवाई कर जल्द फैसला लेने को कहा।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट शकील शेख ने बताया कि उनकी अपील 27 मार्च 2026 से लंबित है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले 50 वर्षों से वकालत कर रहे हैं और पांच दशक से मतदान करते आ रहे हैं।सुनवाई के...
महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार से जुड़ीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालत परिसरों में महिला अधिवक्ताओं के लिए स्वच्छ शौचालय, लेडीज़ बार रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार से सीधे जुड़ी हुई है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ महिला अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर की अदालतों में लेडीज़ बार रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया गया है।अदालत ने कहा कि जब महिला वकील अपने दिन का बड़ा हिस्सा अदालत परिसरों...
NEET-UG पुनर्परीक्षा से पहले तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- सभी मामले जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की पीठ के समक्ष
सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून को प्रस्तावित NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा से जुड़े मामलों पर तत्काल सुनवाई की मांग खारिज की। अदालत ने कहा कि परीक्षा से संबंधित सभी याचिकाएं पहले से ही जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित हैं और वही उन पर विचार करेगी।मामले का उल्लेख चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के समक्ष नीट अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने किया था।जब पुनर्परीक्षा से संबंधित एक याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया, तो चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा,"NEET से जुड़े सभी...
BREAKING| पैदल चलने वालों का फुटपाथ पाने का मौलिक अधिकार; मोटर चलाने वाले पैदल चलने के अधिकार को नकार नहीं सकते: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के आर्टिकल 19(1)(d) के तहत मौलिक अधिकार है, जिसमें सुरक्षित और सही ढंग से बने फुटपाथ तक पहुंचने का अधिकार भी शामिल है। मोटर वाले वाहनों की आवाजाही की तुलना में इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी।इसे मौलिक अधिकार इसलिए माना गया, क्योंकि पैदल चलने का अधिकार हमेशा से हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से "अटूट" रूप से जुड़ा रहा है।कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए अन्य बुनियादी ढांचे को तय करने, बनाने, उनकी देखभाल...
मृत कर्मचारी की हत्या के आरोपियों को अनुकंपा नौकरी पर रोक का नियम नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को खामी दूर करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से अनुकंपा नियुक्ति संबंधी नियमों में मौजूद एक महत्वपूर्ण विसंगति को दूर करने पर विचार करने को कहा।अदालत ने कहा कि वर्तमान नियमों के तहत यदि किसी सरकारी कर्मचारी की हत्या के मामले में उसके परिवार का कोई सदस्य आरोपी हो, तो उसे अनुकंपा वित्तीय सहायता से वंचित किया जा सकता है, लेकिन उसी व्यक्ति को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिलने से रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी एक अपील पर सुनवाई के दौरान...
SC ने जनजातीय आयकर छूट में 'क्रीमी लेयर' लागू करने की मांग पर सुनवाई से किया इनकार, संसद से संपर्क करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जनजातियों (ST) को आयकर अधिनियम, 2025 के तहत मिलने वाली आयकर छूट में "क्रीमी लेयर" व्यवस्था लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा विधायी और नीतिगत निर्णयों से जुड़ा है, इसलिए इसके लिए संसद और संबंधित संसदीय समिति से संपर्क किया जाना चाहिए।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उन्हें संसदीय याचिका समिति और केंद्र सरकार के समक्ष...
सरकारी कर्मचारी की हत्या के आरोपी परिजन को मिलने वाली 'दया के आधार पर आर्थिक सहायता' पर रोक: सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया नियम
सुप्रीम कोर्ट ने 'हरियाणा सिविल सेवा (दया के आधार पर आर्थिक सहायता या नियुक्ति) नियम, 2019' के नियम 23(1) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। यह नियम मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार को मिलने वाली दया के आधार पर आर्थिक सहायता को तब रोक देता है, जब परिवार का कोई पात्र सदस्य कर्मचारी की हत्या या हत्या के लिए उकसाने का आरोपी हो। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान दया के आधार पर नियुक्ति के दावों पर लागू नहीं होता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह फैसला अतुल...
लोकायुक्त की एसपीई को RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की एमपी सरकार की अधिसूचना
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन की स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम से छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने राज्य सरकार की वर्ष 2011 की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसके तहत एसपीई को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने कहा कि एसपीई भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करती है और इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत "खुफिया एवं सुरक्षा संगठन" नहीं माना...
आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को नागरिकता, मूल निवास, पता और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।याचिका में कहा गया कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार संख्या किसी व्यक्ति को नागरिकता या मूल निवास का अधिकार प्रदान नहीं करती और न...
RTE Act के तहत EWS बच्चों के लिए 25% आरक्षण लागू न होने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट का पंजाब सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पंजाब सरकार ने बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के महत्वपूर्ण प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है। विशेष रूप से याचिका में कहा गया है कि अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए प्रवेश स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है।चीफ़...
नौकरी से निकालना सबसे कड़ी सज़ा, यह सिर्फ़ गंभीर कदाचार के लिए ही दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि नौकरी से निकालना सज़ा के सबसे कठोर तरीकों में से एक है; इसलिए अनुशासनात्मक अधिकारी को संबंधित बातों—जैसे कदाचार की प्रकृति और गंभीरता, लंबी सेवा, रिकॉर्ड, उम्र, कंपनी को कोई आर्थिक नुकसान न होना आदि—पर ठीक से विचार करने के बाद ही यह सज़ा देनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान सस्पेंशन (निलंबन) की अवधि को नौकरी से निकालने के अलावा दूसरी सज़ा के तौर पर नहीं लगाया जा सकता।इस मामले में अपीलकर्ता सुरेखा डोमाजी बेले 1985 में महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी...
सक्सेशन एक्ट में कोई समय-सीमा न बताए जाने के कारण प्रोबेट रद्द करने का मामला लिमिटेशन एक्ट के आर्टिकल 137 के तहत आएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 में वसीयत के प्रोबेट के लिए या पहले से जारी प्रोबेट को रद्द करने की अर्ज़ी दाखिल करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई, इसलिए ऐसी कार्यवाही लिमिटेशन एक्ट, 1963 के आर्टिकल 137 के तहत आएगी। यह आर्टिकल उन अर्जियों के लिए तीन साल की समय-सीमा तय करता है, जिनके लिए कोई खास समय-सीमा नहीं बताई गई।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने धीरज दत्ता की अपील को मंज़ूरी देते हुए यह बात कही। उन्होंने माना कि 1995 में जारी प्रोबेट रद्द...
पश्चिम एशिया के निजी विद्यार्थियों के परिणाम पर नई नीति बना रहा केंद्र, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम एशिया के उन निजी विद्यार्थियों के लिए एक नीति तैयार की जा रही है, जिनके कक्षा 12 के परिणाम अब तक घोषित नहीं किए जा सके हैं। क्षेत्र में युद्ध और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण परीक्षाएं प्रभावित हुई थीं।मामला सऊदी अरब में रहने वाले एक भारतीय छात्र द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है जिसमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को उसका कक्षा 12 सुधार परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई।इस मामले की अगली सुनवाई अगले शुक्रवार को...
वसीयत के प्रमाणीकरण रद्द कराने की याचिका पर तीन वर्ष की सीमा लागू होगी, उत्तराधिकार कानून में अलग प्रावधान नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 में वसीयत के प्रमाणीकरण (प्रोबेट) रद्द कराने के लिए कोई अलग समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई। ऐसे मामलों में परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 137 के तहत तीन वर्ष की समय-सीमा लागू होगी।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए धीरज दत्ता की अपील स्वीकार की और वर्ष 1995 में दिए गए प्रोबेट को रद्द कराने के लिए वर्ष 2022 में दायर आवेदन को समय-सीमा से परे बताया।अदालत ने कहा,"भारतीय...



















