SC के ताज़ा फैसले
नाबालिग के गुप्तांगों को छूना बलात्कार नहीं, POCSO Act के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 12 वर्ष से कम आयु की नाबालिग लड़की के गुप्तांगों को छूना मात्र भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375/376एबी के तहत बलात्कार या यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 6 के तहत प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न का अपराध नहीं माना जाएगा।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा आचरण POCSO Act की धारा 9(एम) के तहत परिभाषित "गंभीर यौन उत्पीड़न" के अपराध के साथ-साथ IPC की धारा 354 के तहत "महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने" के अपराध के समान होगा।बिना किसी प्रवेशात्मक कृत्य के नाबालिग...
मांग नोटिस में चेक की सही राशि का उल्लेख नहीं है तो NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत किसी शिकायत को सुनवाई योग्य बनाने के लिए मांग के वैधानिक नोटिस में चेक की राशि का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यदि मांग नोटिस में उल्लिखित राशि चेक की राशि से भिन्न है, तो शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है।अदालत ने कहा,"NI Act की धारा 138 के प्रावधान (बी) के तहत जारी किए जाने वाले नोटिस में उसी राशि का उल्लेख होना चाहिए, जिसके लिए चेक जारी किया गया। यह अनिवार्य है कि वैधानिक नोटिस में मांग चेक की राशि के बराबर ही हो।"चीफ...
हाईकोर्ट प्रारंभिक खारिज आदेश वापस लेकर अग्रिम ज़मानत नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस असामान्य आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अग्रिम ज़मानत याचिका, जिसे शुरू में खारिज कर दिया गया था, बाद में वापस ले ली गई और अग्रिम ज़मानत दे दी गई।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ के समक्ष शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि एक बार अग्रिम ज़मानत की याचिका खारिज करने वाला विस्तृत आदेश पारित हो जाने के बाद कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो गई और उसे वापस बुलाकर पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता था, बहाल करना तो दूर की बात है।याचिकाकर्ता...
S. 482 CrPC/S. 528 BNSS | कुछ FIR रद्द करने वाली याचिकाओं में हाईकोर्ट को मामला दायर करने की पृष्ठभूमि भी समझना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को हाईकोर्ट को केवल FIR की विषय-वस्तु के आधार पर याचिकाओं को यंत्रवत् खारिज करने के प्रति आगाह किया। इस बात पर ज़ोर दिया कि कुछ मामलों में FIR दायर करने के परिवेश और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। न्यायालय ने आगे कहा कि हाईकोर्ट को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि क्या FIR किसी जवाबी हमले का परिणाम थी या वादी को परेशान करने के किसी अप्रत्यक्ष उद्देश्य से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में दर्ज की गई।अदालत ने कहा,“हालांकि यह सच है कि इस स्तर पर...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य-यूटी को 4 महीने में नियम बनाकर सिख विवाह दर्ज करने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में 17 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आनंद विवाह अधिनियम, 1909 (Anand Marriage Act) के तहत सिख विवाहों (आनंद कारज) के पंजीकरण के लिए नियम चार माह में बनाएँ। कोर्ट ने कहा कि नियम न बनाने से सिख नागरिकों के साथ असमान व्यवहार हो रहा है और यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि जब कानून आनंद कारज को मान्यता देता है तो पंजीकरण की व्यवस्था भी होनी चाहिए। जब तक राज्य अपने नियम नहीं बनाते, तब...
साझा उद्देश्य के लिए दान की गई मगर अप्रयुक्त भूमि मालिकों को लौटाई जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा
हरियाणा के भूस्वामियों को राहत प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को कहा कि पंचायतों में साझा उद्देश्यों के लिए निर्धारित भूमि के उपयोग के बाद बची हुई 'बचत भूमि' या अप्रयुक्त भूमि को मालिकों के बीच उस हिस्से के अनुसार पुनर्वितरित किया जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने साझा उद्देश्यों के लिए अपनी भूमि दान की थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के भूस्वामियों-स्वामियों के पक्ष में...
NDPS Act | जब्ती और सैंपल-ड्राविंग धारा 52ए के अनुसार विधिवत दर्ज हो तो ट्रायल में प्रतिबंधित पदार्थ का न होना घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामलों में अभियोजन पक्ष का मामला केवल इसलिए विफल नहीं हो जाता, क्योंकि जब्त प्रतिबंधित पदार्थ अदालत में पेश नहीं किया गया, बशर्ते कि सूची और सैंपल-ड्राविंग रिकॉर्ड विधिवत तैयार किए गए हों और NDPS Act की धारा 52ए के अनुपालन में रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हों।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें NDPS मामले में केवल...
'राजनीतिक दल में शामिल होना कोई नौकरी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को POSH Act से बाहर रखने का आदेश बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें कहा गया था कि POSH Act 2013 के अनुसार यौन उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान के लिए राजनीतिक दलों के लिए आंतरिक शिकायत समिति गठित करना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि किसी राजनीतिक दल में शामिल होने वाले लोग उसके अधीन नहीं होते।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई...
BREAKING| Waqf Amendment Act 2025 : सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों का नामांकन बरकरार रखा, इन प्रावधानों पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने (14 सितंबर) वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने निम्नलिखित प्रावधानों में हस्तक्षेप किया-1. धारा 3(1)(आर) के प्रावधान, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने के लिए 5 साल तक इस्लाम का पालन करना आवश्यक है, उसको राज्य सरकारों द्वारा इस शर्त के निर्धारण के संबंध में नियम बनाने तक के लिए स्थगित कर दिया गया।2. सरकार के नामित अधिकारी को यह तय करने की अनुमति देने वाले प्रावधान पर रोक लगा दी गई...
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम | अदालत से प्रमाणित वसीयत को राज्य चुनौती नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह फैसला दिया कि यदि किसी हिंदू पुरुष ने वसीयत (Will) बनाई है, जो अदालत द्वारा वैध घोषित की जा चुकी है और जिसे प्रोबेट (Probate) भी मिल चुका है, तो राज्य सरकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 29 के तहत एस्कीट (Escheat) के सिद्धांत का उपयोग नहीं कर सकती।यह फैसला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने दिया। मामला खेतीड़ी (राजस्थान) के राजा बहादुर सरदार सिंह की वसीयत से जुड़ा है, जिनका निधन 1987 में हुआ था। वसीयत (दिनांक 30 अक्टूबर, 1985) के...
बिना मूल्य चुकाए सेल डीड अमान्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यदि बिक्री विलेख (Sale Deed) बिना किसी प्रतिफल (Consideration) के निष्पादित किया जाता है, तो उसे स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम, 1882 (Transfer of Property Act), की धारा 54 के तहत मान्य "बिक्री" नहीं माना जाएगा। ऐसा विलेख शून्य (Void) और अमान्य होगा।अदालत ने कवल कृष्ण बनाम राजेश कुमार व अन्य, (2022) 18 SCC 489 मामले का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि मूल्य का भुगतान बिक्री का आवश्यक हिस्सा है। यदि किसी अचल संपत्ति का बिक्री विलेख बिना मूल्य चुकाए निष्पादित...
प्रत्येक नई आवासीय प्रोजेक्ट को खरीदार द्वारा लागत का 20% भुगतान करने पर स्थानीय राजस्व प्राधिकरण के पास रजिस्टर्ड होना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि नई आवासीय प्रोजेक्ट के लिए प्रत्येक आवासीय अचल संपत्ति लेनदेन को खरीदार/आवंटी द्वारा संपत्ति की लागत का कम से कम 20% भुगतान करने पर स्थानीय राजस्व प्राधिकरण के पास रजिस्टर्ड किया जाएगा।अदालत ने आगे निर्देश दिया कि ऐसे अनुबंध जो मॉडल रेरा विक्रय समझौते से महत्वपूर्ण रूप से भिन्न हों, या जिनमें रिटर्न/बायबैक खंड शामिल हों, जहां आवंटी की आयु 50 वर्ष से अधिक हो, उन्हें सक्षम राजस्व प्राधिकरण के समक्ष शपथ पत्र द्वारा समर्थित होना...
सेल डीड शून्य हो तो कब्जे का मुकदमा अनुच्छेद 59 के बजाय अनुच्छेद 65 के तहत 12 वर्ष की परिसीमा अवधि द्वारा शासित होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी के सेल डीड के शून्य होने के आधार पर अचल संपत्ति पर कब्जे के लिए दायर किया गया मुकदमा, परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 65 के तहत 12 वर्ष की सीमा अवधि द्वारा शासित होगा, न कि अधिनियम के अनुच्छेद 59 के तहत 3 वर्ष की छोटी अवधि द्वारा।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जहां प्रतिवादी द्वारा जाली और शून्य सेल डीड के आधार पर संपत्ति पर कब्जे का दावा किया जाता है, वहां मुकदमा 12 वर्ष के भीतर दायर किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा...
'आवास का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार': सुप्रीम कोर्ट
घर खरीदारों की सुरक्षा के उद्देश्य से महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की कि आवास का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिवालियापन की कार्यवाही से गुजर रही संकटग्रस्त रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए वित्तपोषण प्रदान करने हेतु एक पुनरुद्धार कोष बनाने का आग्रह किया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि इसका उद्देश्य अन्यथा व्यवहार्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के परिसमापन को रोकना और वास्तविक घर खरीदारों के हितों की रक्षा...
पुलिस को FIR दर्ज करने के लिए सूचना की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि पुलिस को FIR दर्ज करते समय शिकायत की सत्यता या विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है; यदि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो पुलिस FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।अदालत ने कहा,"यदि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है तो FIR दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है, पुलिस को उक्त सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है।"अदालत ने कहा कि रमेश कुमारी बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) (2006) 2 एससीसी 677 में यह निर्धारित...
केवल दस्तावेज़ी प्रमाण के अभाव में नकद लोन रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि धन का एक हिस्सा बैंक हस्तांतरण के बजाय नकद के माध्यम से किया गया, इसका मतलब यह नहीं है कि केवल बैंकिंग माध्यम से हस्तांतरित राशि को ही प्रमाणित माना जा सकता है, खासकर जब वचन पत्र में पूरे लेनदेन का उल्लेख हो।न्यायालय ने आगे कहा कि दस्तावेज़ी प्रमाण का अभाव अपने आप में नकद लेनदेन रद्द नहीं कर देता। न्यायालय ने स्वीकार किया कि ऐसी स्थितियां होंगी, जहां लेनदेन करना होगा, जिसके लिए कोई प्रमाण नहीं होगा।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम पंचोली की...
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार क्षेत्राधिकार के सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया, बेटी को सहदायिक अधिकार दिया
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 (HSA) के तहत बेटी के सहदायिक हिस्से का वैधानिक अधिकार बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को मद्रास हाईकोर्ट का पुनर्विचार आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में तथ्यों की पुनर्व्याख्या की थी और उसके अधिकार पर सवाल उठाया था। न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रयास हाईकोर्ट के पुनर्विचार क्षेत्राधिकार के दायरे से बाहर है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जहां विवाद एक विभाजन मुकदमे...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट का ECI को निर्देश: आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करें
बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह आधार कार्ड को "12वें दस्तावेज़" के रूप में माने, जिसे बिहार की संशोधित मतदाता सूची में शामिल होने के लिए पहचान के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।इसका अर्थ है कि आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल होने के लिए स्वतंत्र दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे कि चुनाव आयोग द्वारा मूल रूप से स्वीकार्य अन्य ग्यारह दस्तावेज़ों में से किसी एक को...
S.100 CPC | द्वितीय अपीलों में अतिरिक्त विधि प्रश्न तैयार करने के लिए हाईकोर्ट को कारण बताना होगा: सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांत निर्धारित किए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी दीवानी मामले में द्वितीय अपील में मूल रूप से न उठाए गए अतिरिक्त विधि प्रश्न को तैयार करते समय कारण दर्ज करें।धारा 100(5) का प्रावधान हाईकोर्ट को अतिरिक्त विधि प्रश्न तैयार करने की शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि इस शक्ति का प्रयोग नियमित रूप से नहीं किया जा सकता, बल्कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जिसके लिए हाईकोर्ट द्वारा कारण दर्ज करना आवश्यक हो।अदालत ने कहा,"हाईकोर्ट सक्षम है और उसे...
प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध न होने पर ही SC/ST Act के तहत अग्रिम ज़मानत जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC/ST Act के तहत अग्रिम ज़मानत तब तक मान्य नहीं है, जब तक कि प्रथम दृष्टया यह सिद्ध न हो जाए कि अधिनियम के तहत कोई अपराध सिद्ध नहीं होता।अदालत ने कहा,"जहां प्रथम दृष्टया यह पाया जाता है कि अधिनियम की धारा 3 के तहत अपराध सिद्ध नहीं हुआ है। ऐसे अपराध से संबंधित आरोप प्रथम दृष्टया निराधार हैं, वहां न्यायालय को धारा 438 के तहत अभियुक्त को अग्रिम ज़मानत देने के लिए अपने विवेक का प्रयोग करने का अधिकार है।"चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस...


















