राज�थान हाईकोट
अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना: राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल विभाग को फटकारा, प्रमुख सचिव को तलब किया
राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना और पूर्ण उपेक्षा व अनादर करार दिया। अदालत ने विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर देरी के संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ कॉलेज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने फिजियोथेरेपी संस्थान स्थापित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया, लेकिन...
कानूनी वारिस संयुक्त किरायेदार होते हैं, सह-किरायेदार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने बेदखली डिक्री बरकरार रखी
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिस अलग-अलग या स्वतंत्र किरायेदारी अधिकार प्राप्त नहीं करते, बल्कि वे संयुक्त किरायेदार के रूप में उसके स्थान पर आते हैं। ऐसे मामलों में एक संयुक्त किरायेदार के विरुद्ध की गई कार्यवाही सभी पर बाध्यकारी होती है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए सह-किरायेदार के उत्तराधिकारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में बेदखली डिक्री के क्रियान्वयन को चुनौती दी गई...
युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत: राजस्थान हाइकोर्ट ने बनाया जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड, कानून की किताबों के लिए मिलेगी सहायता
राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रथम पीढ़ी के युवा वकीलों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक अहम पहल की।हाइकोर्ट ने जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड के गठन का निर्देश दिया, जिसके माध्यम से कम आयु और सीमित अनुभव वाले वकीलों को कानून की पुस्तकें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।यह आदेश जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने पारित किया।अदालत ने कहा कि पहली पीढ़ी के युवा वकीलों के सामने अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने में गंभीर आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियाँ हैं। उनके पास न तो पारिवारिक पृष्ठभूमि का सहारा होता है और न...
'जीवन के अधिकार में सुरक्षित हाईवे शामिल': राजस्थान हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर धार्मिक अतिक्रमण समेत सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया
पूरे राजस्थान में नेशनल हाईवे के राइट ऑफ़ वे (ROW) के अंदर धार्मिक ढांचों समेत बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का न्यायिक संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने 2 महीने के अंदर उन्हें हटाने या सही जगह पर दूसरी जगह ले जाने का निर्देश दिया।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने कहा कि हाईवे कंट्रोल लाइन, बिल्डिंग लाइन, सड़क की ज़मीन की बाउंड्री वगैरह का ज़िक्र किए बिना अलग-अलग परमिशन, लाइसेंस और यूटिलिटी कनेक्शन देते समय इंटर-डिपार्टमेंट कोऑर्डिनेशन की कमी के कारण खतरनाक एक्सेस पॉइंट...
चालाकी से ड्राफ्टिंग करके दूसरी रिवीजन पिटीशन पर रोक को टाला नहीं जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने NI Act के तहत याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया कि दूसरी रिवीजन पिटीशन सुनवाई योग्य नहीं है। सिर्फ चालाकी से ड्राफ्टिंग या फाइल करते समय नाम बदलने से कानून को नहीं टाला जा सकता।जस्टिस फरजंद अली ने कहा,"प्रोसिजरल तरीके में बदलाव से प्रोसिडिंग्स का ज्यूरिडिकल कैरेक्टर नहीं बदल सकता। किसी प्रोसिडिंग का असली नेचर क्लेम की गई राहत के सार से तय होता है, न कि लिटिगेंट द्वारा अपनाए गए नाम के तरीके से।"संदर्भ के लिए कोर्ट एक सेशंस कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ एक क्रिमिनल पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें चेक बाउंस केस में...
फूड सेफ्टी ऑफिसर पद के लिए BDS डिग्री 'मेडिसिन' के समकक्ष नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) पद के लिए आवेदन करने वाले एक अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) डिग्री को “मेडिसिन” की डिग्री के समकक्ष मानने का प्रश्न पहले ही विशेषज्ञ समिति द्वारा नकारात्मक रूप से तय किया जा चुका है, ऐसे में न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय को किसी पद के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों में संशोधन या विस्तार करने का अधिकार नहीं है,...
राजस्थान हाइकोर्ट का निर्देश: वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैध बकाये नहीं रोके जा सकते
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम की वित्तीय कठिनाइयां किसी कर्मचारी के वैध बकाये को रोकने का आधार नहीं बन सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी श्रमिक के वैधानिक अधिकारों से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि निगम के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ रिटायर कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने लगभग 13 वर्षों तक साप्ताहिक अवकाश के बदले देय राशि का भुगतान न होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।अदालत ने कहा कि यदि...
93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश, संपत्ति विवाद में बेटी की मातृत्व जांच जरूरी: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक बेहद असाधारण और भावनात्मक मामले में 93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश दिया ताकि यह तय किया जा सके कि संपत्ति में हिस्सा मांगने वाली याचिकाकर्ता वास्तव में उसकी बेटी है या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून में पितृत्व को लेकर तो अनुमान की व्यवस्था है लेकिन मातृत्व को लेकर कोई वैधानिक अनुमान नहीं है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की पीठ ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर बताते हुए कहा कि यह शायद दुर्लभतम मामलों में से एक है, जहां कोई मां किसी बच्चे को अपना मानने से इनकार कर रही...
गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त
राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उस कर्मचारी को अनिवार्य रिटायरमेंट की अवधि का पूरा वेतन और भत्ते देने का आदेश दिया, जिसे बिना ठोस आधार के सेवा से बाहर कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि जब कर्मचारी को काम करने से ही रोका गया हो तो उस पर नो वर्क, नो पे का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी ने वेतन न दिए जाने को चुनौती दी थी। कर्मचारी को वर्ष 2006 में अनिवार्य रिटायरमेंट दी गई थी। बाद...
सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक RAS अधिकारी की याचिका खारिज की, जिसमें राज्य द्वारा उसका इस्तीफ़ा खारिज किए जाने और नौकरी से निकालने की सज़ा लगाने के आदेश को चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के व्यवहार को देखते हुए, राज्य के कामों में कोई कानूनी कमी नहीं थी।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इस्तीफ़ा देने से कर्मचारी के पक्ष में कोई निहित या ऑटोमैटिक अधिकार नहीं बन जाता, खासकर तब जब राज्य कर्मचारी के ख़िलाफ़ डिपार्टमेंटल कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रहा हो।कहा गया,“किसी सरकारी...
दैनिक मज़दूरों की हकीकत पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख़्त टिप्पणी, 26 दिन के वेतन फ़ॉर्मूले को बताया अव्यावहारिक
दैनिक मज़दूरी पर काम करने वाले श्रमिकों की ज़मीनी स्थिति को स्वीकार करते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि यह मान लेना पूरी तरह गलत है कि हर दैनिक मज़दूर को सप्ताह में एक दिन का सवेतन अवकाश मिलता है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि ऐसे मज़दूर बिना वेतन छुट्टी लेने की स्थिति में नहीं होते। इसलिए उनकी मज़दूरी की गणना 26 दिन के बजाय 30 दिन के आधार पर होनी चाहिए।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि दैनिक मज़दूरों की वास्तविक परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ कर बनाए गए सरकारी फ़ॉर्मूले में सुधार...
रेलवे एक्सीडेंट क्लेम में प्रिजम्पशन क्लेम करने वाले के पक्ष में, टिकट न मिलना जानलेवा नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल का ऑर्डर रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने बेटे की मौत के संबंध में फाइल किया गया क्लेम खारिज किया था। कोर्ट ने कहा कि जब भी रेलवे परिसर या किसी रेलवे ट्रैक के अंदर कोई अनहोनी होती है तो प्रिजम्पशन रेलवे अधिकारियों के खिलाफ होता है, जब तक कि कोई सबूत जमा न किया जाए, जो कुछ और बताता हो।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच एक मां की पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपने बेटे की मौत के संबंध में फाइल किए गए क्लेम को खारिज करने को चुनौती दी थी, जो...
'पीड़िता का बलात्कारी के साथ जाना असामान्य व्यवहार': राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO केस में पूर्व सरपंच को बरी किया
एक पूर्व सरपंच के खिलाफ POCSO मामले में सज़ा रद्द करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही असंभव है कि एक नाबालिग लड़की के साथ रेप होने के बाद वह अपनी मर्ज़ी से आरोपी के साथ दूसरी जगह जाए।इसके अलावा, पीड़िता की उम्र पर शक जताते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि स्कूल सर्टिफिकेट भले ही ज़रूरी हो, लेकिन जब सरकारी दस्तावेज़ों में विरोधाभासी जानकारी हो, तो सबसे पहले एडमिशन रिकॉर्ड को ही निर्णायक माना जाएगा।कोर्ट 17 साल की लड़की के साथ कथित यौन...
अंतरिम भरण-पोषण से केवल तात्कालिक राहत, अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाइकोर्ट ने 40 हजार की अंतरिम राशि बढ़ाने से किया इनकार
राजस्थान हाइकोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य कार्यवाही के दौरान पीड़ित पक्ष को आर्थिक तंगी से बचाना होता है न कि पत्नी के अधिकार या भरण-पोषण की अंतिम राशि का निर्धारण करना।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण एक अस्थायी और विवेकाधीन राहत है, जिसे बिना विस्तृत सुनवाई या साक्ष्य के आधार पर दिया जाता है। यह न तो पत्नी के अधिकारों का अंतिम फैसला है और न ही पति की आय में उसके किसी हिस्से को मान्यता देता है।अदालत ने...
क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट
पिछले हफ्ते दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 (ICM Act) के अनुसार हुई सभी ईसाई शादियों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करें, रिकॉर्ड करें और रजिस्टर करें, जिनके संबंध में एक्ट के तहत सर्टिफिकेट जारी किया गया।अपने विस्तृत आदेश में जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने ICM Act 1872 और राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2009 (RCMR Act) के बीच संबंधों को लेकर राज्य में फैली मौजूदा...
सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा न सिर्फ़ याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी, बल्कि एक दूसरे अधिकारी के खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की राहत दी, जो राहत के लिए कोर्ट नहीं आया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि दूसरा अधिकारी कोर्ट नहीं आया, यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां सही थीं। समानता के सिद्धांत के आधार पर यह माना गया कि जब कोई खास कार्रवाई कानूनी रूप से गलत पाई जाती है तो एक पक्ष को दिया गया फ़ायदा उसी तरह की स्थिति वाले दूसरे...
गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट का फॉर्म भले ही उसके सब्सटेंस पर भारी पड़ता हो, लेकिन जब उसकी नींव ही गलत आरोप पर आधारित हो तो राज्य बाद में जांच के नतीजे के हिसाब से आरोप को हल्का या दोबारा इंटरप्रेट नहीं कर सकता।याचिकाकर्ता-कांस्टेबल का सस्पेंशन रद्द करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी को सज़ा देने से पहले दुर्व्यवहार को सही ढंग से क्लासिफाई करना होगा, नहीं तो पूरी कार्रवाई मनमानी हो जाएगी।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता के सस्पेंशन के...
समन की कथित अस्वीकृति पर एकतरफा कार्यवाही से पहले प्रोसेस सर्वर की जांच अनिवार्य: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन की तामील रिपोर्ट को स्वीकार करना कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गंभीर न्यायिक कार्य है। यदि समन की सेवा से संबंधित रिपोर्ट शपथ-पत्र पर नहीं है तो अदालत का दायित्व है कि वह प्रोसेस सर्वर की जांच करे। यहां तक कि यदि रिपोर्ट शपथ-पत्र पर भी हो, तब भी उसकी सत्यता परखने के लिए प्रोसेस सर्वर से पूछताछ करना अदालत के विवेकाधिकार में है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि समन जारी करने का उद्देश्य संबंधित पक्ष को उसके विरुद्ध चल रही कार्यवाही की जानकारी...
POCSO Act में 'किशोर स्वायत्तता' की अनदेखी: राजस्थान हाइकोर्ट ने सहमति वाले युवा संबंधों को छूट देने पर सरकार से विचार करने को कहा
राजस्थान हाइकोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण से जुड़े POCSO कानून के मौजूदा प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इस कानून की व्यापक समीक्षा करने को कहा।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था लेकिन सहमति से बने किशोर और युवा संबंधों में इसका कठोर और यांत्रिक प्रयोग कानून को संरक्षण के बजाय दंड का माध्यम बना रहा है।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने सुझाव दिया कि POCSO Act में ऐसा प्रावधान जोड़ा जाना चाहिए, जिसके अंतर्गत लगभग समान...
MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश
राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही दुर्घटना के लिए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MV Act) और वर्कमैन मुआवजा अधिनियम, 1923 (Workman Act) — दोनों के तहत मुआवजा दावा करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। हाइकोर्ट ने कहा कि एक अधिनियम के तहत मुआवजा प्राप्त करने के बाद दूसरे अधिनियम के तहत दावा करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मंच पर मिले मुआवजे को दूसरे मंच द्वारा समायोजित करने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अदालतों को...


















