राज�थान हाईकोट
'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था ढह जाएगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर-पुलिस गठजोड़ पर जताई चिंता, DGP को दिए निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में पुलिस पर गैंगस्टर को संरक्षण देने के आरोपों को चिंताजनक संस्थागत विफलता करार दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही उसे तोड़ने लगें तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी के इशारे पर गैंगस्टर उन्हें और उनके परिवार को धमका रहा है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो व्यवस्था के पूरी तरह ढहने...
समय पर पहली अर्जी के बावजूद देरी का बहाना नहीं चलेगा, राजस्थान हाइकोर्ट ने दी राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने करुणामूलक नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पहली अर्जी समय पर दी गई हो तो बाद में देरी का हवाला देकर दूसरी अर्जी खारिज नहीं की जा सकती।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज करने का आदेश रद्द कर दिया और राज्य को निर्देश दिया कि 90 दिनों के भीतर मामले पर दोबारा विचार कर उचित पद पर नियुक्ति दी जाए।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने पिता के निधन के बाद वर्ष 2015 में करुणामूलक नियुक्ति के लिए आवेदन...
ड्यूटी के दौरान हादसे में 5 साल से कोमा में सिपाही, राजस्थान हाइकोर्ट ने दिलाई वेतन की राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण मानवीय फैसले में उस महिला को राहत दी, जिसके पति एक सिपाही ड्यूटी के दौरान हुए हादसे के बाद पिछले कई वर्षों से कोमा में हैं और उनका वेतन रोका गया था।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सिपाही को विशेष दिव्यांग अवकाश (स्पेशल डिसएबिलिटी लीव) प्रदान किया जाए, 2021 से बकाया वेतन जारी किया जाए और आगे भी नियमित वेतन का भुगतान जारी रखा जाए।मामले के अनुसार सिपाही 2021 में ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गया था, जिसके बाद से वह कोमा में है।...
₹20,000 करोड़ की ज़रूरत के मुकाबले ₹1,000 करोड़ का आवंटन 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा: राजस्थान हाईकोर्ट का सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल
सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में स्कूल की इमारतों/कमरों के निर्माण/मरम्मत का पूरा रोडमैप और स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की डिवीज़न बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव की इस दलील पर विचार किया कि सरकारी स्कूलों में निर्माण/मरम्मत के काम के लिए...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत के नियंत्रण वाले तालाबों को मत्स्य विभाग को सौंपने पर रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने 17 मार्च के अपने आदेश से पंचायती राज विभाग द्वारा 27 अगस्त, 2025 को पारित आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई। इस आदेश में संबंधित पंचायत के नियंत्रण वाले कुछ तालाबों को वापस राज्य के मत्स्य विभाग को सौंप दिया गया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, ग्राम पंचायत सोरसन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में ऊपर बताए गए आदेश को चुनौती देते हुए यह आरोप लगाया गया कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 243G और 11वीं अनुसूची...
RJS सिविल जज 2024 प्रारंभिक परीक्षा की आंसर की को चुनौती देने वाली याचिका खारिज: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा 2024 की आंसर की को रद्द कर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक मूल्यांकन या प्रतियोगी परीक्षा में सही उत्तर निर्धारित करने के मामलों में न्यायालय, विशेषज्ञ समिति के निर्णय पर अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य नहीं कर सकता।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा कि विशेषज्ञ समिति संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से बनी होती है और उसकी शैक्षणिक राय को उचित सम्मान दिया जाना...
11 साल बाद भी चार्जशीट नहीं 'चौंकाने वाला': त्वरित जांच के लिए पुलिस के जांच और कानून-व्यवस्था विंग अलग करने के निर्देश—राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले में गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 11 वर्ष बाद भी चार्जशीट दाखिल न होना अत्यंत चिंताजनक है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कई मामलों में जांच लंबित रहने का एक प्रमुख कारण यह है कि एक ही जांच अधिकारी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जांच—दोनों जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं।जस्टिस अनूप कुमार धंध की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2006) मामले का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को पुलिस के जांच विंग और...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 37 साल बाद आपराधिक मामले में अमान्य समझौते के बावजूद दोबारा सुनवाई से इनकार किया, कार्यवाही रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट द्वारा एक व्यक्ति को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया। यह फैसला एक समझौते के आधार पर दिया गया, भले ही वह समझौता अमान्य था।ऐसा करते हुए कोर्ट ने दोबारा सुनवाई का आदेश देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि 37 साल बीत जाने के बाद मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजना न्याय के हित में नहीं होगा।भले ही बरी किए जाने का फैसला कानून के पूरी तरह से अनुरूप नहीं था। फिर भी कोर्ट ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आरोपी के खिलाफ चल रही कार्यवाही...
पीड़ित और दोषी एक ही गांव के हों, यह अकेले पैरोल से इनकार का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि दोषी और पीड़ित एक ही गांव में रहते हैं, पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसी आशंका सिर्फ अनुमान (conjecture) पर आधारित है और इससे पैरोल के सुधारात्मक उद्देश्य पर असर पड़ता है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी को परिवार से जोड़कर उसमें आत्ममंथन और सुधार की भावना विकसित करना है।मामला क्या था?याचिकाकर्ता की पैरोल अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि वह और पीड़ित एक...
आपराधिक मामलों में अस्पष्ट मेडिकल राय निष्पक्ष सुनवाई को कमज़ोर करती है: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को मेडिको-लीगल गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे व्यापक और एक समान मेडिको-लीगल गाइडलाइंस तैयार करने और उन्हें लागू करने के निर्देश जारी करें। इन गाइडलाइंस का पालन सभी सरकारी मेडिकल अधिकारियों को करना होगा, जब वे आपराधिक मामलों में मेडिकल राय देंगे, ताकि उनकी स्पष्टता, पठनीयता, पूर्णता और असंदिग्धता सुनिश्चित हो सके।जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की बेंच ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को आगे निर्देश दिया कि वे पुलिस विभागों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें। साथ...
नार्को टेस्ट से पहले या दौरान भी आरोपी वापस ले सकता है सहमति: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि कोई भी आरोपी नार्को विश्लेषण (नार्को टेस्ट) के लिए दी गई अपनी सहमति को परीक्षण से पहले या उसके दौरान भी वापस ले सकता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार दी गई सहमति अंतिम (अपरिवर्तनीय) नहीं मानी जा सकती।जस्टिस अनूप कुमार धांध की पीठ ने कहा कि यदि आरोपी की इच्छा के विरुद्ध नार्को टेस्ट किया जाता है, तो यह उसके मौलिक अधिकारों जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) तथा आत्मदोषारोपण के खिलाफ अधिकार (अनुच्छेद 20(3)) का उल्लंघन होगा।अदालत ने कहा,“नार्को...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
राजस्थान हाई कोर्ट ने upGrad के डायरेक्टरों और अन्य कर्मचारियों/सहयोगियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई। upGrad एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन उच्च शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। यह रोक उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वास भंग के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में लगाई गई।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह मामला एक छात्र ने दर्ज कराया। इस छात्र ने प्लेटफॉर्म पर एक कोर्स चुना था। इसके लिए 5.25 लाख रुपये की फीस जमा की थी।...
गैंगरेप के दोषी भी असाधारण परिस्थितियों में ओपन एयर कैंप के पात्र हो सकते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि नाबालिग से गैंगरेप के दोषी व्यक्ति को सामान्यतः ओपन एयर कैंप भेजने के लिए अयोग्य माना जाता है, लेकिन यदि असाधारण परिस्थितियां मौजूद हों, तो उसे इस राहत के लिए विचार किया जा सकता है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैंप नियम, 1972 के नियम 3(डी) में “ordinarily be not eligible” शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ यह नहीं है कि यह पूर्ण (absolute) प्रतिबंध है।अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल...
इलेक्ट्रॉनिक सबूत की प्रमाणित कॉपी न देना निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि आरोपी को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रमाणित क्लोन कॉपी न देना उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी की याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अप्रमाणित कॉपी देना या प्रमाणित क्लोन कॉपी देने से इनकार करना न केवल निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हनन है, बल्कि आरोपी के लिए डिस्चार्ज (मुक्ति) का अधिकार प्रभावी ढंग से उपयोग करने में...
निजी स्वार्थ छिपाकर दायर की जनहित याचिका: राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, भविष्य में PIL पर रोक, 25 लाख जुर्माने पर विचार
राजस्थान हाइकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को भविष्य में कोई भी PIL दायर करने से रोक दिया। अदालत ने यह भी पूछा है कि उसके खिलाफ कार्यवाही क्यों न की जाए और 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना क्यों न लगाया जाए।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह आदेश उस समय दिया, जब सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता का मामले में निजी हित जुड़ा हुआ है।याचिका में राज्यभर में राष्ट्रीय राजमार्गों, रिंग रोड और अन्य सड़कों पर कथित अवैध धर्मकांटे और...
दोषी को प्रोबेशन मिलने के खिलाफ पीड़ित की अपील स्वीकार नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी दोषी को अदालत द्वारा प्रोबेशन का लाभ दिया गया तो उसके खिलाफ पीड़ित द्वारा दायर अपील दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 372 के तहत सुनवाई योग्य नहीं होती।अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को अपील का सीमित अधिकार दिया गया और वह सजा बढ़ाने की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने कहा कि आपराधिक मामलों में अपील का अधिकार पूरी तरह कानून से प्राप्त होता है और उसे दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार ही समझा जाना...
बीमार कर्मचारी के प्रति संवेदनशील रहें बैंक, ट्रांसफर नियमों को कठोरता से लागू न करें: हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बैंकों को अपने कर्मचारियों की मेडिकल स्थिति को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए। केवल प्रशासनिक सर्कुलर का कठोर पालन करते हुए कर्मचारियों का तबादला करना उचित नहीं है।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने भारतीय स्टेट बैंक के एक कर्मचारी का तबादला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।कर्मचारी का तबादला जयपुर से हैदराबाद कर दिया गया, जबकि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित था।याचिकाकर्ता...
रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी या निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव IPC की धारा 498A के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
एक शादीशुदा व्यक्ति के परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ IPC की धारा 498-A के तहत जारी समन रद्द करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी के आधार पर आपराधिक दायित्व नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब क्रूरता के आरोपों में उन परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट आरोप न हो।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने राय दी कि अपराध का संबंध जानबूझकर किए गए आचरण से होता है, न कि निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव से। IPC की धारा 498-A के तहत आने वाले अपराधों में पति...
फर्जी दावों को रोकने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया, जिनमें राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पिछले पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से दिव्यांग (PwD) कोटे में नियुक्त कर्मचारियों की 'बेंचमार्क डिसेबिलिटी' का अनिवार्य पुनर्मूल्यांकन (reassessment) कराने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने कहा कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह आरक्षण नीतियों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से लागू करे, ताकि समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। अदालत ने कहा कि व्यवस्था समावेशी...
नाबालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय यदि उसका आश्रित निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है तो वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस आधार पर अनिश्चित समय तक इंतजार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि नाबालिग आश्रित बाद में वयस्क हो जाएगा।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने सरकारी कर्मचारी के बेटे द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी...
















