राज�थान हाईकोट
उम्मीदवार को पात्रता प्रमाण पत्र पेश न करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिसे हासिल करना विभाग की ज़िम्मेदारी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जहां किसी उम्मीदवार की राष्ट्रीयता से जुड़ा पात्रता प्रमाण पत्र हासिल करने की ज़िम्मेदारी नियुक्त करने वाले सरकारी विभाग की होती है, वहां उम्मीदवार के ख़िलाफ़ इस आधार पर कोई भी प्रतिकूल कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती कि उसने वह प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क नहीं किया।जस्टिस नूपुर भाटी की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसके ख़िलाफ़ जारी की गई चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई। इस चार्जशीट में आरोप...
बच्चे कहां खेलेंगे: राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के इकलौते मैदान में पानी की टंकी निर्माण पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने गायक कैट स्टीवंस के मशहूर गीत की पंक्ति “वेयर डू द चिल्ड्रेन प्ले?” का उल्लेख करते हुए हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा कस्बे के इकलौते खेल मैदान में ओवरहेड पानी की टंकी के निर्माण पर रोक लगाई।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने टंकी निर्माण के लिए किसी वैकल्पिक स्थान की तलाश करने का गंभीर प्रयास नहीं किया।अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि सक्षम अधिकारी शपथपत्र दाखिल कर बताए कि क्या वास्तव में खेल मैदान ही इस परियोजना...
समझौते के आधार पर साइबर क्राइम खत्म नहीं किए जा सकते, ये समाज पर व्यापक असर डालते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी विवाद नहीं होते बल्कि ये पूरे डिजिटल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में लोगों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों को केवल समझौते के आधार पर खत्म करना साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए बनाए गए कानूनों के उद्देश्य को कमजोर करेगा।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में आरोपी ने पक्षों के बीच समझौता होने का हवाला देते हुए FIR रद्द करने की मांग की थी।मामले में आरोप था कि आरोपी ने...
राजस्थान हाई कोर्ट ने NDPS मामलों में बिना सोचे-समझे की जाने वाली कानूनी कार्रवाई पर उठाए सवाल
NDPS Act के तहत आरोपी को ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आरोपी को बिना किसी बरामदगी के सिर्फ़ मुख्य आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर फंसाया गया। मुख्य आरोपी से ही नशीले पदार्थ बरामद हुए।जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने "किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ चार्जशीट की सिफ़ारिश करने से पहले अभियोजन पक्ष की सलाह देने वाली प्रक्रिया में हुई कमी" को उजागर किया।कोर्ट ने राय दी कि किसी भी व्यक्ति को ट्रायल के लिए आगे भेजने हेतु सबूतों में कमी या अपर्याप्तता हो सकती है> इसलिए...
गिरफ्तार लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालना कानून से बाहर की सजा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार लोगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि यह कानून से बाहर की सजा देने जैसा है और इससे निर्दोष माने जाने के मूल सिद्धांत का उल्लंघन होता है।जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि पुलिस जांच के नाम पर किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती। अदालत ने इसे पुलिस द्वारा मीडिया ट्रायल बताते हुए कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस, तस्वीरों का प्रसार और गिरफ्तारी के प्रदर्शन जैसी कार्रवाइयों के...
चार्जशीट के बाद अदालत में पेश होना गिरफ्तारी नहीं, CrPC की धारा 170 का गलत अर्थ नहीं निकाला जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने जालसाजी के मामले में आरोपियों के खिलाफ जारी जमानती वारंट रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 170 के तहत आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने का अर्थ उसकी गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत नहीं होता।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने कहा कि यदि जांच एजेंसी ने जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार करना आवश्यक नहीं समझा, तो केवल चार्जशीट दाखिल होने के बाद औपचारिक रूप से जमानत विचार के लिए आरोपी को हिरासत में नहीं भेजा जा सकता।अदालत ने कहा,“CrPC...
23 आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद पासपोर्ट नवीनीकरण का अधिकार, विदेश यात्रा मौलिक अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने 23 लंबित आपराधिक मामलों का सामना कर रहे 66 वर्षीय व्यक्ति को राहत देते हुए पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देने से इनकार करने वाले कोटा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया।जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की पीठ ने कहा कि केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को पासपोर्ट नवीनीकरण से वंचित कर विदेश यात्रा से रोकना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी सहित विभिन्न...
सांभर झील के पास सौर परियोजना को हाईकोर्ट की मंजूरी, प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए लगाए कड़े निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में सांभर झील के निकट प्रस्तावित 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना को अनुमति दी। साथ ही प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई शर्तें भी लगाईं।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि जिस भूमि पर परियोजना स्थापित की जानी है। वह सांभर झील अथवा किसी अधिसूचित आर्द्रभूमि का हिस्सा नहीं है, हालांकि यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल है।अदालत ने कहा कि शीतकाल में इस क्षेत्र में...
योजना का क्रियान्वयन मॉडल बदलने पर आउटसोर्स लैब तकनीशियनों को बनाए रखना सरकार की बाध्यता नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी सरकारी योजना को नई योजना से प्रतिस्थापित कर उसके क्रियान्वयन का तरीका बदल दिया जाए तो राज्य सरकार को यह बाध्य नहीं किया जा सकता कि वह आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखे।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की पीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व के कई मामलों में अदालत ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा की, लेकिन वह संरक्षण केवल उन परिस्थितियों में दिया गया था जब मात्र एजेंसी बदलने के कारण एक समूह के...
गर्भपात की दवा कूरियर से भेजना अपने आप में अपराध नहीं, जबरन देकर गर्भपात कराने का इरादा हो तभी बनेगा मामला: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल किसी महिला को कूरियर के माध्यम से गर्भपात की दवा भेज देना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 312 और 313 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि दवा महिला को जबरन दी गई हो और उसका उद्देश्य गर्भपात कराना हो। इसी आधार पर अदालत ने महिला के खिलाफ दर्ज FIR रद्द किया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि मामले में याचिकाकर्ता महिला के खिलाफ ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उसने पीड़िता का गर्भपात कराया हो।अदालत ने स्पष्ट कहा, "केवल गर्भपात की...
आरोप साबित न हों तो संदेह का लाभ नहीं, सम्मानपूर्वक बरी' कहा जाए: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहे और अदालत स्वयं मान ले कि आरोपी के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है तब उसे केवल संदेह का लाभ देकर बरी करना उचित नहीं बल्कि सम्मानपूर्वक बरी माना जाना चाहिए।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी वैवाहिक क्रूरता मामले में दो महिलाओं की याचिका स्वीकार करते हुए की।दोनों याचिकाकर्ता अपने भाई के खिलाफ दर्ज वैवाहिक मुकदमे में सह-आरोपी थीं और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी तो किया लेकिन आदेश में संदेह का लाभ शब्द का प्रयोग किया था।बाद...
नई साजिश या नए तथ्य सामने आने पर दूसरी FIR दर्ज हो सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बाद की जांच में नए तथ्य सामने आएं या किसी बड़े षड्यंत्र का खुलासा हो तो उसी घटनाक्रम से जुड़े मामले में दूसरी FIR दर्ज की जा सकती है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरी प्राथमिकी कानूनन वैध होगी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि वह उसी मामले में दर्ज दूसरी FIR है और इसलिए अवैध है।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद...
पिछली FIR में नहीं उठाए गए, देर से लगाए गए आरोप प्रक्रिया का दुरुपयोग दर्शाते हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि किसी गंभीर अपराध का उचित समय के भीतर, या उस प्रासंगिक समय पर खुलासा न करना, जब उसी शिकायतकर्ता द्वारा उसी आरोपी के खिलाफ पहले ही अपराध दर्ज किया गया, आरोपों को झूठा साबित कर देगा और बाद की शिकायत/FIR/आरोपों को कानून का दुरुपयोग बना देगा।याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली FIR रद्द करते हुए जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने टिप्पणी की कि FIR कथित घटना की तारीख से दो महीने से अधिक की देरी के बाद दर्ज की गई, और वह भी संबंधित परिवार के सदस्यों के बीच पहले से...
S.125 CrPC | कानूनी कमियों के कारण महिलाओं का शोषण जारी रहने से प्रावधान का उद्देश्य विफल: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के लिए महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज करते हुए इस स्थिति को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया और याचिकाकर्ता के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। बता दें, उक्त महिला का विवाह इसलिए अमान्य है, क्योंकि उसके और उसके पति, दोनों के पहले के विवाह अभी भी कायम हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने उन कानूनी कमियों को उजागर किया, जिनके कारण इस प्रावधान का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है। साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता को उपलब्ध अन्य संभावित उपायों का भी सुझाव दिया, जैसे कि...
PC Act के तहत कार्रवाई के लिए रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करना ही काफी: राजस्थान हाईकोर्ट
भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 (PC Act) के तहत दर्ज FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस प्रावधान के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि संबंधित सरकारी कर्मचारी वास्तव में वह सरकारी काम करने की स्थिति में हो।जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की बेंच ने टिप्पणी की कि इस अपराध के मामले में यह काफी है कि सरकारी कर्मचारी ने यह विश्वास दिलाकर रिश्वत स्वीकार की हो कि वह रिश्वत देने वाले की मदद किसी अन्य सरकारी कर्मचारी के माध्यम से करवा देगा, और रिश्वत देने वाले ने...
बालिग होने में केवल 4 दिन बाकी थे: सहमति से संबंध का हवाला देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में दी जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO Act से जुड़े मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि कथित घटना के समय पीड़िता बालिग होने से केवल चार दिन दूर थी और परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि दोनों के बीच सहमति से संबंध था।जस्टिस संजीत पुरोहित ने आदेश में कहा कि कथित घटना के समय पीड़िता वयस्कता की दहलीज पर थी, इसलिए उसकी समझ को एक परिपक्व युवती के समान माना जा सकता है।अदालत ने यह भी नोट किया कि बालिग होने के तुरंत बाद पीड़िता ने अपने परिवार से सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत का रुख किया और तब से वह आरोपी के परिवार...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के रेप केस में आसाराम की अंतरिम ज़मानत 25 मई तक बढ़ाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल) को आसाराम की अंतरिम ज़मानत 25 मई तक या उस तारीख तक बढ़ाई, जिस तारीख को कोर्ट रेप केस में उनकी सज़ा को चुनौती देने वाली उनकी क्रिमिनल अपील पर फ़ैसला सुनाएगा - इन दोनों में से जो भी तारीख पहले हो।बता दें, जोधपुर सेशंस कोर्ट ने अप्रैल 2018 में आसाराम को 2013 में अपने आश्रम में एक नाबालिग से रेप करने के आरोप में उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।एक्टिंग चीफ़ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीज़न बेंच ने अपने आदेश में कहा कि आसाराम की क्रिमिनल अपील...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पति पर क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप रद्द किए, कहा - सुसाइड नोट से पता चलता है कि पत्नी उसके साथ खुश थी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने पाया कि मृतक पत्नी द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट से यह संकेत मिलता है कि उसका आरोपी पति के साथ रिश्ता खुशहाल था। उसे न तो प्रताड़ित किया गया था और न ही कोई नुकसान पहुंचाया गया था। इसके अलावा, पति ने न तो उससे दहेज की मांग की थी और न ही उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया था।इसके विपरीत, कोर्ट ने यह भी पाया कि सबूतों के अनुसार, मृतक का अपनी बेटी के साथ रिश्ता तनावपूर्ण था,...
लिखित पावर ऑफ अटॉर्नी को मौखिक रूप से रद्द या संशोधित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि लिखित रूप में दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) को मौखिक बयान के आधार पर न तो रद्द किया जा सकता है और न ही उसमें कोई बदलाव किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी परिवर्तन, संशोधन या निरस्तीकरण के लिए लिखित दस्तावेज आवश्यक है।जस्टिस रेखा बोरणा ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई अनुबंध या दस्तावेज कानूनन लिखित रूप में आवश्यक है और उसे लिखित रूप में निष्पादित किया गया है तो उसके प्रावधानों को मौखिक रूप से बदला नहीं जा सकता। अदालत ने...
राजस्थान हाईकोर्ट ने लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी को दोषी की बेटी के इलाज का इंतज़ाम करने का निर्देश दिया, बार-बार पैरोल देने से किया इनकार
AIIMS में अपनी बेटी के इलाज के लिए दोषी की इमरजेंसी पैरोल की अर्ज़ी खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, सिरोही को निर्देश दिया कि वह सिरोही या किसी उचित सेंटर पर उसकी बेटी के इलाज के लिए सही इंतज़ाम करे।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने पाया कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता की बेटी मानसिक बीमारी से पीड़ित है, उसे नियमित इलाज की ज़रूरत होगी। हालाँकि, याचिकाकर्ता को नियमित अंतराल पर इमरजेंसी पैरोल देने की इजाज़त नहीं...
















