राज�थान हाईकोट

गैर-जमानती गंभीर धाराएं जुड़ते ही पहले मिली जमानत का लाभ समाप्त होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
गैर-जमानती गंभीर धाराएं जुड़ते ही पहले मिली जमानत का लाभ समाप्त होगा: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को शुरू में केवल जमानती अपराधों में जमानत मिली हो और बाद में जांच के दौरान उससे संबंधित गंभीर गैर-जमानती धाराएं जोड़ दी जाएं, तो पहले दी गई जमानत का लाभ स्वतः जारी नहीं रह सकता। ऐसी स्थिति में जमानत निरस्त की जा सकती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मामलों की विशेष अदालत द्वारा जमानत निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोपी के खिलाफ FIR...

समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार
समय से पहले दायर चेक बाउंस शिकायत वापस लेने के बाद नई शिकायत वैध, कार्यवाही रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में पहले दायर की गई शिकायत समय से पूर्व होने के कारण वापस ले ली गई हो तो उसके बाद दायर की गई नई शिकायत को केवल इस आधार पर समय-सीमा से बाहर नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर एक आरोपी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि समय से पहले दायर शिकायत वापस लेने के बाद प्रस्तुत की गई नई शिकायत को विलंबित नहीं माना जा...

बिना मांग के पक्षकार बनाने का आदेश देना कानून का घोर दुरुपयोग, राजस्व मंडल का आदेश रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट
बिना मांग के पक्षकार बनाने का आदेश देना कानून का घोर दुरुपयोग, राजस्व मंडल का आदेश रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करते हुए उसे कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग और न्यायिक मर्यादा के विपरीत करार दिया।हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले को दोबारा सुनवाई के लिए राजस्व मंडल की किसी अन्य पीठ को सौंपा जाए।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने कहा कि राजस्व मंडल ने जिस प्रकार बिना नोटिस जारी किए, बिना प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए और बिना विलंब माफी आवेदन पर निर्णय किए ही पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की, वह स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है।मामले...

31 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया पूर्व सिपाही को दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश, कहा- सेना ने न तो मेडिकल जांच की और न ही डिस्चार्ज ऑर्डर में बीमारी का ज़िक्र किया
31 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया पूर्व सिपाही को दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश, कहा- सेना ने न तो मेडिकल जांच की और न ही डिस्चार्ज ऑर्डर में बीमारी का ज़िक्र किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने 1995 में सर्विस के दौरान हुई न्यूरोलॉजिकल बीमारी के कारण डिस्चार्ज किए गए पूर्व सिपाही को 31 साल बाद राहत देते हुए कहा कि डिस्चार्ज से पहले कोई मेडिकल जांच नहीं की गई और पूर्व सैनिक के डिस्चार्ज ऑर्डर में उसकी मेडिकल हिस्ट्री/बीमारी का ज़िक्र "जानबूझकर" नहीं किया गया।उन्हें 'आर्मी पेंशन रेगुलेशंस 1961' ("1961 रेगुलेशंस") के तहत दिव्यांगता/अशक्तता पेंशन का लाभ देने से मना कर दिया गया।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस रवि चिरानिया की डिवीजन बेंच ने पाया कि डिस्चार्ज से पहले न तो कोई...

मात्र नाबालिग पीड़िता के केस आगे न बढ़ाने की इच्छा पर ही POCSO केस रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
मात्र नाबालिग पीड़िता के केस आगे न बढ़ाने की इच्छा पर ही POCSO केस रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पुलिस की 'नेगेटिव फ़ाइनल रिपोर्ट' स्वीकार की थी। यह रिपोर्ट नाबालिग पीड़िता की सहमति के आधार पर दी गई, जिसमें उसने कहा कि वह आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाना चाहती।जस्टिस अनूप कुमार ढंड की बेंच ने कहा कि POCSO के तहत आरोपियों पर चल रहे मुक़दमे को सिर्फ़ इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि पीड़िता ने बाद में कार्यवाही आगे न बढ़ाने पर सहमति दी थी।आगे कहा गया,"जब आरोपी के ख़िलाफ़ अपराध बनता है - चाहे पीड़िता की सहमति हो या न...

राजस्थान हाई कोर्ट ने पति के जीवित रहते हुए अलग रह रही पत्नी की फैमिली पेंशन में नॉमिनी के तौर पर नाम शामिल करने की याचिका खारिज की
राजस्थान हाई कोर्ट ने पति के जीवित रहते हुए अलग रह रही पत्नी की फैमिली पेंशन में नॉमिनी के तौर पर नाम शामिल करने की याचिका खारिज की

राजस्थान हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने अपने पति के पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) में नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि चूंकि पति अभी जीवित है, इसलिए यह याचिका समय से पहले दायर की गई।जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने कहा कि जब तक पति जीवित है, तब तक याचिकाकर्ता को पति की मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन पाने के लिए PPO में नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।आगे कहा गया,"याचिकाकर्ता को यह दावा करने का कोई...

विदेश यात्रा करने के इच्छुक आरोपी को ज़मानत मिलने के बाद LOC वापस लेने के लिए SOP बनाने की मांगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
विदेश यात्रा करने के इच्छुक आरोपी को ज़मानत मिलने के बाद LOC वापस लेने के लिए SOP बनाने की मांगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी

राजस्थान हाईकोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एडवोकेट जनरल से मदद मांगी ताकि वे कोर्ट को उन कदमों के बारे में बता सकें, जो उन आरोपियों को ज़मानत मिलने की जानकारी अधिकारियों को समय पर देने के लिए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाने के लिए उठाए गए, जिनके खिलाफ LOC जारी किया गया, ताकि उसे वापस लिया जा सके।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने उस तरीके के बारे में भी स्पष्टता मांगी, जो किसी आरोपी को रेगुलर ज़मानत मिलने पर एविएशन डिपार्टमेंट/एयरपोर्ट अधिकारियों को समय पर जानकारी देने और यह सुनिश्चित...

20 लाख रुपये गुजारा भत्ता और आपसी सहमति से तलाक के बाद भी दहेज मामला जारी रखना कानून का दुरुपयोग: राजस्थान हाईकोर्ट
20 लाख रुपये गुजारा भत्ता और आपसी सहमति से तलाक के बाद भी दहेज मामला जारी रखना कानून का दुरुपयोग: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला द्वारा 20 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता प्राप्त करने और आपसी सहमति से तलाक लेने के बाद भी पूर्व पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस अनुप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि यह मामला एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है जहां समझौता, गुजारा भत्ता और तलाक प्राप्त करने के बावजूद शिकायतकर्ता मुकदमे को जारी रखकर याचिकाकर्ताओं को लंबी कानूनी प्रक्रिया और आर्थिक बोझ झेलने के लिए मजबूर कर रही है।अदालत दहेज...

राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: आसाराम को जेल में पहले के आदेशों के तहत मिल रही मेडिकल सुविधाएं जारी रहेगी
राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश: आसाराम को जेल में पहले के आदेशों के तहत मिल रही मेडिकल सुविधाएं जारी रहेगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि रेप के दोषी आसाराम को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के तहत जो भी सुविधाएं, रहने की व्यवस्था, मंज़ूरियां और मेडिकल इंतज़ाम दिए गए, वे सभी उसकी सज़ा के ख़िलाफ़ अपील खारिज होने के बाद भी उसी तरह जारी रहेंगे।आसाराम ने हाईकोर्ट में कुछ ऐसी सुविधाएं और रहने की व्यवस्थाएं फिर से शुरू करने की मांग की, जो उसे पहले सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के तहत उसकी उम्र और मेडिकल स्थिति को देखते हुए दी गईं। साथ ही उसने कुछ अतिरिक्त सुविधाओं की भी मांग की।...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉज़ लिस्ट में हर केस में हुई सुनवाई टलने की जानकारी दिखाने का आदेश जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने 'कॉज़ लिस्ट' में हर केस में हुई सुनवाई टलने की जानकारी दिखाने का आदेश जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 जून को स्थायी आदेश जारी किया। इसके तहत अब किसी खास मामले में सुनवाई कितनी बार टाली गई, इसकी संख्या केस कोड के साथ 'कॉज़ लिस्ट' में अलग से दिखाई जाएगी।स्थायी आदेश संख्या 06/S.O/2026 में कहा गया कि सुनवाई टलने की इस संख्या का रिकॉर्ड इस काम के लिए बनाए गए सॉफ्टवेयर/एप्लीकेशन के ज़रिए रखा जाएगा। यह जानकारी 'अपीलकर्ता/याचिकाकर्ता/आवेदक' या 'प्रतिवादी' या 'संयुक्त रूप से' - इनमें से हर कैटेगरी के तहत उपलब्ध होगी।आदेश में यह भी साफ़ किया गया कि जिन मामलों में सुनवाई का नंबर...

CrPC की धारा 156(3) के तहत जांच का आदेश देने के बाद कोर्ट फंक्टस ऑफिसियो नहीं हो जाता, उसे प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगनी चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
CrPC की धारा 156(3) के तहत जांच का आदेश देने के बाद कोर्ट 'फंक्टस ऑफिसियो' नहीं हो जाता, उसे प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगनी चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब क्रिमिनल कोर्ट ने CrPC की धारा 156(3) के तहत जांच का आदेश दे दिया तो वह 'फंक्टस ऑफिसियो' (यानी अपना काम पूरा करके अधिकार-मुक्त) नहीं हो जाता। अगर कोर्ट को लगता है कि जांच उचित समय में पूरी नहीं हुई तो उससे प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगना उसकी ज़िम्मेदारी बनी रहती है।जस्टिस रेखा बोराना की बेंच ने देखा कि कोर्ट के सामने ऐसे कई मामले आए, जिनमें ट्रायल कोर्ट के सामने कार्यवाही सालों तक लंबित रहती है, जबकि जांच एजेंसी से प्रभावी स्थिति/प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगने के लिए...

कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की जगह दूसरे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नहीं रखा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने वोकेशनल ट्रेनर्स को राहत दी
कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की जगह दूसरे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नहीं रखा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने वोकेशनल ट्रेनर्स को राहत दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने उन याचिकाकर्ताओं को राहत दी, जो कई सालों से वोकेशनल ट्रेनर के तौर पर काम कर रहे थे और जिन्हें थर्ड-पार्टी एजेंसियों यानी वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स (VTPs) के ज़रिए नियुक्त किया गया। राज्य सरकार द्वारा VTPs के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के बाद याचिकाकर्ताओं की सेवाएं भी खत्म की गईं।जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं को सीधे कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए नियुक्त करें और उन्हें बैंक ट्रांसफर के ज़रिए सीधे मानदेय का भुगतान करें।कोर्ट ने माना...

पुराने विज्ञापन की शर्तें भविष्य की सरकारी भर्ती में उन्हीं शर्तों पर ज़ोर देने का उम्मीदवारों को कोई पक्का अधिकार नहीं देतीं: राजस्थान हाईकोर्ट
पुराने विज्ञापन की शर्तें भविष्य की सरकारी भर्ती में उन्हीं शर्तों पर ज़ोर देने का उम्मीदवारों को कोई पक्का अधिकार नहीं देतीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी भर्ती के लिए पिछले साल के विज्ञापन में किसी खास शर्त को शामिल करने से उम्मीदवारों को भविष्य की भर्तियों में भी वैसी ही शर्तों पर ज़ोर देने का कोई पक्का अधिकार नहीं मिलता।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि हर भर्ती प्रक्रिया एक स्वतंत्र प्रक्रिया होती है और नियोक्ता (employer) प्रशासनिक ज़रूरतों और कानूनी नियमों के अनुसार योग्यता की शर्तों में बदलाव या स्पष्टीकरण करने के लिए सक्षम होता है।कोर्ट ने कहा,"साल 2021 में हुई पिछली भर्ती के बारे में उठाए गए तर्क को भी...

उदयपुर की झीलों पर अतिक्रमण और प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
उदयपुर की झीलों पर अतिक्रमण और प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की झीलों, नहरों और अन्य जलाशयों पर बढ़ते अतिक्रमण, प्रदूषण तथा अनियंत्रित विकास गतिविधियों से जुड़े मामलों का स्वतः संज्ञान लिया।अदालत ने कहा कि उदयपुर की झीलें केवल शहर की पहचान ही नहीं हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जल सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराना की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उदयपुर की प्राकृतिक सुंदरता का उल्लेख किया।अदालत ने कवि एवं विद्वान श्री जयकृष्ण चौधरी 'हबीब' की प्रसिद्ध पंक्तियों...

Workmens Compensation Act | मानवीय आधार पर मृतक को अस्पताल ले जाना रोज़गार का रिश्ता मानने के लिए काफ़ी नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
Workmen's Compensation Act | मानवीय आधार पर मृतक को अस्पताल ले जाना रोज़गार का रिश्ता मानने के लिए काफ़ी नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने 'वर्कमेन कम्पनसेशन एक्ट' (कामगार मुआवज़ा अधिनियम) के तहत मृतक व्यक्ति के परिवार को दिए गए मुआवज़े का दावा रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी दस्तावेज़ के बिना मानवीय आधार पर मृतक को अस्पताल ले जाने से ही मालिक-कर्मचारी का रिश्ता साबित नहीं होता।जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने कहा कि समाज में लोग अक्सर अपने आस-पास ज़रूरतमंदों की मानवीय आधार पर मदद करते हैं, लेकिन ऐसे कामों को मालिक-कर्मचारी का रिश्ता मानने का आधार नहीं बनाया जा सकता।बता दें, कोर्ट 'वर्कमेन कम्पनसेशन कमिश्नर'...

वकील की प्रक्रियात्मक चूक के कारण अपील का अधिकार खत्म नहीं हो सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
वकील की प्रक्रियात्मक चूक के कारण अपील का अधिकार खत्म नहीं हो सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐसी अपील को बहाल कर दिया, जिसे निर्धारित समय में खामियां (defects) दूर नहीं किए जाने के कारण खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि न्याय का प्रशासन तकनीकी आधारों पर विफल नहीं होने दिया जा सकता और किसी पक्षकार को उसके वकील की अनजाने में हुई चूक या प्रक्रियात्मक लापरवाही के कारण अपूरणीय नुकसान नहीं उठाना चाहिए।जस्टिस फरजंद अली की पीठ एक बहाली आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि सरकारी वकील के कार्यालय में प्रशासनिक बदलाव के कारण अदालत का आदेश उनके संज्ञान में...

भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने फॉरेस्ट ऑफिसर के खिलाफ़ बरकरार रखी FIR
भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने फॉरेस्ट ऑफिसर के खिलाफ़ बरकरार रखी FIR

भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट का इस्तेमाल करने की आरोपी फॉरेस्ट ऑफिसर के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही हल्के में नहीं लिया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कार्यरत फॉरेस्ट गार्ड पर आरोप है कि संबंधित परीक्षा में उसकी जगह एक डमी कैंडिडेट शामिल हुआ था। इसी वजह से उस पद पर उसका गैर-कानूनी चयन हुआ।कोर्ट ने कहा,"आरोप एक संवैधानिक भर्ती संस्था द्वारा...

POCSO Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेज़ मंगाने की आरोपी की अर्ज़ी को आंशिक रूप से दी मंज़ूरी
POCSO Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेज़ मंगाने की आरोपी की अर्ज़ी को आंशिक रूप से दी मंज़ूरी

राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले के आरोपी की उस अर्ज़ी को आंशिक रूप से मंज़ूरी दी, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी CrPC की धारा 91 की अर्ज़ी खारिज की गई थती। इस अर्ज़ी में पीड़िता की उम्र तय करने के लिए कम्युनिटी हेल्थ सेंटर द्वारा जारी उसके एडमिशन टिकट को पेश करने की मांग की गई।ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए अर्ज़ी खारिज की थी कि आरोपी द्वारा पीड़िता की उम्र के संबंध में जिरह (Cross-Examination) पहले ही पूरी की जा चुकी है।CrPC की धारा 91 (दस्तावेज़ या अन्य चीज़...

ठोस सबूत के बिना आरोपी को पूरे दिन पुलिस स्टेशन में नहीं बिठाया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया हत्या की जांच की निगरानी का निर्देश
ठोस सबूत के बिना आरोपी को पूरे दिन पुलिस स्टेशन में नहीं बिठाया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया हत्या की जांच की निगरानी का निर्देश

हत्या की FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि वह 5 साल से ज़्यादा समय से लंबित जांच की निगरानी करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आरोपियों को पूछताछ के बहाने बेवजह परेशान न किया जाए, जब तक कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत न हो।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि जांच अधिकारी को आरोपी को पुलिस स्टेशन बुलाने और उन्हें सुबह से शाम तक वहीं रहने के लिए मजबूर करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती, जब तक कि उनके खिलाफ किसी ठोस सबूत की...

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की आर्द्रभूमि के लिए खतरों पर स्वतः संज्ञान लिया, तुरंत सुरक्षा उपाय करने के आदेश दिए
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की आर्द्रभूमि के लिए खतरों पर स्वतः संज्ञान लिया, तुरंत सुरक्षा उपाय करने के आदेश दिए

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य भर में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को प्रदूषण, अतिक्रमण, सीवेज बहाव, पानी के फैलाव में कमी और संरक्षण के अपर्याप्त उपायों आदि से होने वाले खतरों पर स्वतः संज्ञान लिया।संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार, अनुच्छेद 48A और 51(A)(g) के तहत कर्तव्यों और 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' (सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत) पर जोर देते हुए डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराना की डिवीजन बेंच ने कहा कि राजस्थान में वेटलैंड्स के संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन के लिए व्यापक जनहित में...