राज�थान हाईकोट

बिना लाइसेंस के या दो सवारी के साथ बाइक चलाने पर तब तक सहयोगी लापरवाही नहीं मानी जाएगी, जब तक उसका सीधा संबंध दुर्घटना से न हो: राजस्थान हाईकोर्ट
बिना लाइसेंस के या दो सवारी के साथ बाइक चलाने पर तब तक 'सहयोगी लापरवाही' नहीं मानी जाएगी, जब तक उसका सीधा संबंध दुर्घटना से न हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना वैध लाइसेंस के और दो सवारी (पिलियन राइडर्स) के साथ मोटरसाइकिल चलाना भले ही मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो, लेकिन ये काम अपने आप में दुर्घटना में मृतक की 'सहयोगी लापरवाही' (Contributory Negligence) मानने का आधार नहीं हो सकते, जब तक कि इस बारे में कोई खास निष्कर्ष न हो।जस्टिस संदीप तनेजा ने आगे कहा कि चूंकि मृतक एक नाई था, इसलिए उसकी मासिक आय की गणना 'कुशल श्रमिक' (Skilled Worker) के न्यूनतम वेतन के आधार पर की जानी चाहिए, न कि एक 'अकुशल श्रमिक' (Unskilled...

झूठे दावे पर फटकार: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की खारिज, लगाया 5 हजार का जुर्माना
झूठे दावे पर फटकार: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की खारिज, लगाया 5 हजार का जुर्माना

राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रामक और गलत जानकारी के आधार पर दायर की गई अवमानना याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रवि चिरानिया ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अदालत के पूर्व आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।याचिकाकर्ता का दावा था कि समन्वय पीठ ने राजस्व मंडल के पंजीयक को उसे शिक्षा विभाग से राजस्व विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश...

खाप पंचायतों पर सख्त रुख: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को दिया नीति बनाने का निर्देश, कहा- सामाजिक बहिष्कार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
खाप पंचायतों पर सख्त रुख: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को दिया नीति बनाने का निर्देश, कहा- सामाजिक बहिष्कार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

राजस्थान हाईकोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा जारी फरमानों और सामाजिक बहिष्कार की प्रथा पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को व्यापक नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि खाप पंचायतें किसी भी प्रकार की वैधानिक संस्था नहीं हैं। फिर भी वे खुद को समानांतर सत्ता केंद्र के रूप में स्थापित कर चुकी हैं और लोगों के निजी जीवन में दखल देकर गैरकानूनी आदेश जारी करती...

वकील की गैरहाजिरी में अधूरी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गवाह को दोबारा बुलाने की दी अनुमति
वकील की गैरहाजिरी में अधूरी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गवाह को दोबारा बुलाने की दी अनुमति

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आरोपी को प्रभावी जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता खासकर तब जब उसके वकील की अनुपस्थिति के कारण जिरह ठीक से नहीं हो पाई हो।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने एक हत्या के आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें प्रत्यक्षदर्शी गवाह को दोबारा बुलाने की मांग खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अत्यधिक तकनीकी करार दिया।अदालत ने कहा,“किसी सामान्य व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह एक प्रशिक्षित...

बराबरी वालों में ही हो प्रतिस्पर्धा: राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती पर दिया अहम फैसला
बराबरी वालों में ही हो प्रतिस्पर्धा: राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती पर दिया अहम फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा समान स्तर के उम्मीदवारों के बीच ही होनी चाहिए न कि अनुभवी और नए उम्मीदवारों को एक साथ खड़ा किया जाए।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें होमगार्ड विभाग के स्वयंसेवकों ने अपनी कथित मौखिक सेवामुक्ति को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले से होमगार्ड विभाग में स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्हें नए भर्ती प्रक्रिया में...

चौंकाने वाला: राजस्थान हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर नाबालिग रेप पीड़िता के मुआवज़े का दावा खारिज करने पर लगाई कड़ी फटकार
'चौंकाने वाला': राजस्थान हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर नाबालिग रेप पीड़िता के मुआवज़े का दावा खारिज करने पर लगाई कड़ी फटकार

आश्चर्य और हैरानी जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) का आदेश रद्द किया, जिसमें नाबालिग रेप पीड़िता के अंतरिम मुआवज़े का आवेदन खारिज कर दिया गया था, और उससे SHO/मजिस्ट्रेट से ज़रूरी सर्टिफिकेट लाने को कहा गया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने माना कि राजस्थान पीड़ित मुआवज़ा योजना 2011 (योजना) का पालन प्रतिवादी द्वारा उसकी मूल भावना और अक्षरशः नहीं किया गया। कोर्ट ने राय दी कि आवेदन खारिज करने के बजाय DLSA को संबंधित अधिकारी से ज़रूरी सर्टिफिकेट भेजने के लिए कहना...

स्पष्ट त्रुटि: सेशंस कोर्ट ने पलटा चोरी के आरोपी को तर्कसंगत रूप से बरी करने का फैसला, राजस्थान हाईकोर्ट ने आलोचना की
'स्पष्ट त्रुटि': सेशंस कोर्ट ने पलटा चोरी के आरोपी को 'तर्कसंगत' रूप से बरी करने का फैसला, राजस्थान हाईकोर्ट ने आलोचना की

चोरी के मामले में आरोपी को बरी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने यह दोहराया कि भले ही आरोप तय करने के चरण में विस्तृत आदेश देना अनिवार्य न हो, फिर भी आदेश में न्यायिक विवेक का सचेत प्रयोग झलकना चाहिए; यह आदेश न तो अस्पष्ट हो सकता है और न ही यांत्रिक।ऐसा करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सेशंस कोर्ट का वह आदेश, जिसने याचिकाकर्ताओं को बरी करने का फैसला रद्द किया था, स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण था; क्योंकि उसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्षों में किसी भी प्रकार की विकृति, अवैधता या कोई बड़ी...

6 मामलों में गंभीर आरोप: राजस्थान के ज्यूडिशियल ऑफिसर सस्पेंशन ऑर्डर के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट
6 मामलों में 'गंभीर आरोप': राजस्थान के ज्यूडिशियल ऑफिसर सस्पेंशन ऑर्डर के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट

एक ज्यूडिशियल ऑफिसर ने अपने हालिया सस्पेंशन को चुनौती देने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जो उनके खिलाफ छह अलग-अलग मामलों में "गंभीर आरोपों" की शुरुआती जांच के बाद शुरू किया गया।ज्यूडिशियल ऑफिसर राजेंद्र साहू जालोर जिले के भीनमाल में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (ADJ) के तौर पर काम कर रहे थे। उनको पिछले महीने हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के आदेश पर सस्पेंड कर दिया गया।ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक, यह एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन फेयर जांच सुनिश्चित करने और ऑफिसर को चल...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर एक्टर सलमान खान के खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर एक्टर सलमान खान के खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक्टर सलमान खान के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, जयपुर II में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई। यह मामला राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें एक्टर ने अभिनय किया था।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने DCDRC के 6 जनवरी के अंतरिम आदेश पर भी रोक लगाई। इस आदेश में उत्पाद बेचने वाली कंपनी और एक्टर को किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार में शामिल होने से रोका गया था।कोर्ट ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC) के 16 मार्च के आदेश पर भी रोक लगाई। इस आदेश में राज्य...

NEET-PG: राजस्थान हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव पर मौजूद डॉक्टर को अंतरिम राहत दी, जॉइनिंग की डेडलाइन को लेकर होने वाली कार्रवाई पर लगाई रोक
NEET-PG: राजस्थान हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव पर मौजूद डॉक्टर को अंतरिम राहत दी, जॉइनिंग की डेडलाइन को लेकर होने वाली कार्रवाई पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने डॉक्टर को अंतरिम राहत दी। इस डॉक्टर को NEET PG पास करने के बाद कॉलेज अलॉट किया गया था, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद पोस्ट-पार्टम (प्रसव के बाद की स्थिति) में होने के कारण कॉलेज में जॉइन करने की तारीख बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को दिया गया उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ़्ते का समय देते हुए जस्टिस अनूरूप सिंघी की बेंच ने याचिकाकर्ता को उनकी आधिकारिक तौर पर अलॉट की गई मैटरनिटी लीव जारी रखने की अनुमति दी, और राज्य सरकार को उनके खिलाफ कोई भी...

न्याय में देरी स्वीकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपीलों को रिट याचिका में बदला
न्याय में देरी स्वीकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपीलों को रिट याचिका में बदला

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पारित आदेशों के खिलाफ लंबित अपीलों को रिट याचिकाओं में परिवर्तित कर दिया। अदालत ने कहा कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए और तकनीकी बाधाओं के कारण मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकता।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय उस समय लिया, जब इन अपीलों की ग्राह्यता को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी।मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा धारा 24 के तहत दिए गए आदेशों के खिलाफ कई अपीलें दायर की गईं।...

समन जारी करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला होना ज़रूरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु FIR में ससुराल वालों के खिलाफ संज्ञान लेने का आदेश सही ठहराया
'समन जारी करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला होना ज़रूरी': राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु FIR में ससुराल वालों के खिलाफ संज्ञान लेने का आदेश सही ठहराया

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज की, जिसमें एक महिला के ससुराल वालों के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत संज्ञान लिया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि समन जारी करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया संतुष्टि होनी चाहिए और दहेज की मांग तथा ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोप उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त थे।स्वीकृत तथ्यों के अनुसार, मृतका ने याचिकाकर्ताओं के बेटे से 08.02.2015 को शादी की थी और 24.03.2015 को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर...

नाबालिग की अश्लील तस्वीरें हटाने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- निजता पर गंभीर हमला”
नाबालिग की अश्लील तस्वीरें हटाने का आदेश: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- निजता पर गंभीर हमला”

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मेटा प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम से एक नाबालिग की अश्लील और निजी तस्वीरों को तुरंत हटवाए। अदालत ने कहा कि बिना सहमति इस तरह की सामग्री का प्रसार निजता और गरिमा पर गंभीर हमला है, जिसके दूरगामी और अपरिवर्तनीय परिणाम होते हैं।जस्टिस फरजंद अली ने अपने फैसले में कहा कि डिजिटल युग में ऐसी सामग्री का प्रसार डिजिटल दाग बन जाता है, जो समय के साथ खत्म नहीं होता बल्कि पीड़ित को लगातार नुकसान पहुंचाता...

APO के जरिए अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार
APO के जरिए अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी पर लगे कदाचार के आरोपों से निपटने के लिए एवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर (APO) का सहारा नहीं लिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में विधिसम्मत अनुशासनात्मक प्रक्रिया ही अपनाई जानी चाहिए।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने इस मामले को कानून के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए कहा कि राज्य ने प्रशासनिक अधिकारों का प्रयोग गलत उद्देश्य से किया जो विधि के विरुद्ध है।अदालत ने कहा,“नियम 25ए का उपयोग दिखावे के लिए प्रशासनिक कारणों से किया...

जज की कुर्सी पर बैठकर गाना बजाते हुए दिया पोज़: राजस्थान हाईकोर्ट ने वायरल वीडियो पर भेजा अवमानना ​​का नोटिस, कहा- कोर्टरूम या क्लब?
जज की कुर्सी पर बैठकर गाना बजाते हुए दिया पोज़: राजस्थान हाईकोर्ट ने वायरल वीडियो पर भेजा अवमानना ​​का नोटिस, कहा- कोर्टरूम या क्लब?

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का कड़ा संज्ञान लिया। इस वीडियो में बीकानेर के एक ग्राम न्यायालय के अंदर दो लोग जज की कुर्सी पर बैठे हुए और गाने बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं।जस्टिस संदीप शाह की बेंच ने तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने के लिए नोटिस जारी किया।यह मामला तब सामने आया, जब बीकानेर के ग्राम न्यायालय के जज ने हाईकोर्ट को औपचारिक पत्र (10 मार्च, 2026 का) भेजा।इस पत्र में हाईकोर्ट को बताया गया कि जब स्थानीय अदालत बंद थी, तब दो लोग तीसरे...

बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के स्वतंत्र और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट
बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के 'स्वतंत्र' और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि तलाकशुदा पत्नी का स्थायी गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार एक 'स्वतंत्र' और 'अलग' अधिकार है, जिसे सिर्फ़ इसलिए कम या खत्म नहीं किया जा सकता कि उसके बेटे बालीग हैं और कमाते हैं।यह साफ़ करते हुए कि ये बातें ज़्यादा से ज़्यादा गुज़ारा भत्ते की रकम पर असर डाल सकती हैं, लेकिन पत्नी के बुनियादी अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं, कोर्ट ने कहा:"...बेटों का बालीग होना और उनकी कमाने की क्षमता, भले ही कानूनी तौर पर मायने रखती हो, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25...

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर बिल पर की गई टिप्पणियां हटाईं, जारी किया संशोधित आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर बिल पर की गई टिप्पणियां हटाईं, जारी किया संशोधित आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से जुड़े संशोधन कानून पर पहले की गई अपनी टिप्पणियों को हटाते हुए आदेश का संशोधित संस्करण जारी किया।जस्टिस अरुण मोंगा ने 30 मार्च के आदेश में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान के अधिकार को सीमित कर सकता है। हालांकि अब अदालत ने उन टिप्पणियों को हटाकर नया स्पष्टीकरण जारी किया।संशोधित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मूल फैसला उस समय लागू कानूनी स्थिति को...

आंशिक समझौते पर पूरी FIR रद्द करना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश वापस लेकर जारी किए नए दिशा-निर्देश
आंशिक समझौते पर पूरी FIR रद्द करना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश वापस लेकर जारी किए नए दिशा-निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आंशिक समझौते के आधार पर पूरी FIR रद्द करना न्यायिक त्रुटि थी। अदालत ने अपने पहले के आदेश को आंशिक रूप से वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि जांच बाकी आरोपियों के खिलाफ जारी रहेगी।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की गलती को सुधारना रिव्यू (पुनर्विचार) नहीं बल्कि रिकॉल (आदेश वापस लेना) की श्रेणी में आता है।मामले में कुल 15 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने केवल दो आरोपियों के साथ समझौता किया। उन दो आरोपियों में से एक ने समझौते के...

83 वर्षीय महिला से 80 लाख की ठगी: डिजिटल अरेस्ट मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई
83 वर्षीय महिला से 80 लाख की ठगी: डिजिटल अरेस्ट मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बड़े साइबर ठगी मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कथित मुख्य साजिशकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। मामला 83 वर्षीय महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 80 लाख रुपये की ठगी से जुड़ा है।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कहा कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है और इसका समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है इसलिए ऐसे मामलों में समझौते के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत समझौता स्वयं उसके द्वारा हस्ताक्षरित नहीं था बल्कि उसके पिता ने उस पर हस्ताक्षर किए,...

100 से अधिक मामलों में आरोपी को हर बार पेशी के लिए लाना बोझिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की दी अनुमति
100 से अधिक मामलों में आरोपी को हर बार पेशी के लिए लाना बोझिल: राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की दी अनुमति

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जिन मामलों में किसी आरोपी के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हों, वहां हर बार शारीरिक रूप से अदालत में पेश करना न केवल पुलिस व्यवस्था पर बोझ डालता है बल्कि सरकारी खर्च भी बढ़ाता है। ऐसे मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी एक व्यवहारिक और प्रभावी विकल्प है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने 100 से अधिक FIR का सामना कर रहे आरोपियों को सभी मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि जब आरोपी की पहचान विवादित...