राज�थान हाईकोट
विचाराधीन कैदी भी बेच सकता है अपनी संपत्ति, जेल से पावर ऑफ अटॉर्नी करना वैध: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विचाराधीन कैदी को जेल में रहने मात्र से अपनी संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं छिन जाता।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा व्यक्ति जेल से विधिवत पंजीकृत सामान्य या विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर सकता है और उसके अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से संपत्ति की बिक्री भी कानूनी रूप से की जा सकती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ की एकलपीठ ने कहा,"कानून पूरी तरह स्पष्ट है कि विचाराधीन कैदी अपनी संपत्ति के हस्तांतरण के अधिकार से वंचित नहीं होता। वह जेल अधीक्षक के...
रिवीजन कोर्ट ट्रायल कोर्ट को संज्ञान लेने का निर्देश नहीं दे सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुनर्विचार अधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत ट्रायल कोर्ट को किसी आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने का निर्देश नहीं दे सकती। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 398 केवल आगे की जांच या आगे की न्यायिक पड़ताल का आदेश देने का अधिकार देती है संज्ञान लेने का निर्देश देने का नहीं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने एडिशनल सेशन जज का आदेश रद्द किया जिसमें ट्रायल कोर्ट को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने का निर्देश दिया गया...
इस्तीफे के बाद जारी चेक बाउंस होने पर पूर्व प्राचार्य पर नहीं चल सकता मुकदमा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक स्कूल के पूर्व प्राचार्य के खिलाफ चेक अनादरण (चेक बाउंस) मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति ने चेक जारी होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया हो, उसके खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) के तहत आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि इस्तीफा देने के साथ ही याचिकाकर्ता और स्कूल के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध समाप्त हो गया था। इसलिए उनके इस्तीफे के बाद जारी किए गए चेक के लिए उन्हें आपराधिक रूप से...
परिवार के दबाव में दर्ज हुई थी दुष्कर्म की FIR: पीड़िता के बयान के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द की कार्यवाही
राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में दर्ज FIR से उपजी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने यह फैसला उस समय दिया, जब पीड़िता ने स्वयं कहा कि FIR परिवार के दबाव में दर्ज कराई गई। साथ ही, उसने बताया कि वह आरोपी से विवाह कर चुकी है और दोनों अब पति-पत्नी के रूप में सुखद वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं। जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि दोनों पक्षों ने वर्ष 2020 में विवाह किया था और आपराधिक मुकदमा लंबित रहने के बावजूद उनका रिश्ता लगभग छह वर्षों तक कायम रहा। ऐसे में मुकदमे को जारी रखने से दोनों...
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंदिर के रेनोवेशन के लिए पुलिस सुरक्षा का आदेश दिया, कहा- न्यायिक आदेश सिर्फ़ कागज़ी आदेश बनकर नहीं रह सकते
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें भगवान महादेव मंदिर के रेनोवेशन से जुड़े विवाद में याचिकाकर्ता के पक्ष में जारी अंतरिम रोक (इंजंक्शन) को लागू करने के लिए पुलिस सहायता की मांग वाली अर्ज़ी खारिज की गई थी। [2026 LiveLaw (Raj) 298]जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के ऑर्डर XXXIX नियम 2-A के तहत कार्यवाही (जो सज़ा देने वाली प्रकृति की होती है) और मौजूदा रोक आदेश को लागू करने के लिए पुलिस सहायता की मांग करने वाली अर्ज़ी के बीच स्पष्ट अंतर है।कोर्ट...
सिर्फ निजी जांचकर्ता की रिपोर्ट से ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी नहीं माना जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल किसी निजी जांचकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी यह दावा नहीं कर सकती कि दुर्घटना करने वाले वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी था। यदि बीमा कंपनी इस आधार पर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है तो उसे संबंधित लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण के अधिकारी को गवाह के रूप में पेश कर यह साबित करना होगा कि लाइसेंस वास्तव में उसी कार्यालय से जारी नहीं हुआ।जस्टिस आशुतोष कुमार ने यह फैसला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर दो अपीलों को खारिज करते हुए...
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया: कोर्ट भर्ती के लिए योग्यता की शर्तें तय या बढ़ा नहीं सकते
राजस्थान हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर (व्याकरण), असिस्टेंट प्रोफेसर (साहित्य) और असिस्टेंट प्रोफेसर (सामान्य संस्कृत) के पदों पर नियुक्ति चाहने वाले उम्मीदवारों की कई रिट याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों के तहत तय की गई योग्यता शर्तों को कोर्ट बढ़ा नहीं सकता।जस्टिस गणेश राम मीना ने कहा कि एक नियोक्ता (Employer) के तौर पर राज्य ही भर्ती के लिए ज़रूरी योग्यताओं को तय करने के लिए सबसे सही है और कोर्ट नियमों में ऐसी योग्यताएं नहीं जोड़ सकता जो तय नहीं की गईं।ये याचिकाएं उन...
क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए गवाह को दोबारा बुलाने से इनकार करने वाला आदेश अंतरिम, उसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए गवाह को दोबारा तलब करने संबंधी आवेदन खारिज करने का आदेश अंतरिम प्रकृति का होता है। ऐसे आदेश के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 397 के तहत पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह फैसला सुनाते हुए पुनरीक्षण अदालत के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें चेक अनादरण के एक मामले में आरोपी को शिकायतकर्ता से दोबारा क्रॉस एग्जामिनेशन करने की अनुमति दी गई।मामले में याचिकाकर्ता ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की...
NI कोर्ट और कमर्शियल कोर्टकी कार्यवाही समान स्तर पर बचाव के लिए मूल दस्तावेज पाने का आरोपी को अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) के तहत गठित अदालत और कॉमर्शियल कोर्ट की कार्यवाही समान स्तर पर होती है। केवल इस आधार पर कि मूल दस्तावेज किसी अन्य अदालत ने तलब कर रखे हैं, आरोपी को अपने बचाव के लिए उन दस्तावेजों तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की सिंगल बेंच ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार में प्रभावी जिरह और बचाव के लिए आवश्यक मूल अभिलेखों तक पहुंच भी शामिल है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें मूल रिकॉर्ड तलब करने...
मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट घोषित भूमि का उपयोग नहीं बदला जा सकता, विपरीत कार्रवाई अवैध: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी भूमि को मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट के रूप में अधिसूचित किया गया है, तो उसके भूमि उपयोग परिवर्तन, नियमितीकरण या पट्टा जारी करने जैसी सभी प्रशासनिक कार्रवाइयों को मास्टर प्लान के अनुरूप ही होना होगा। इसके विपरीत की गई कोई भी कार्रवाई अवैध होगी और रद्द की जा सकती है।जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह फैसला उस याचिका पर सुनाया, जिसमें धारा 90A, राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम के तहत ग्रीन बेल्ट की भूमि का उपयोग बदलकर पट्टे जारी किए गए थे। बाद में प्राधिकरण ने इन...
35 साल बाद मिला इंसाफ: करंट से महिला की मौत पर मुआवजा तीन गुना बढ़ाया, राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को ठहराया जिम्मेदार
राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 35 वर्ष पुराने करंट लगने से मौत के मामले में पीड़ित परिवार को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि लगभग 40 हजार रुपये से बढ़ाकर करीब 1.20 लाख रुपये की।अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिजली जैसी खतरनाक वस्तु के प्रसारण से यदि किसी व्यक्ति की जान जाती है तो बिजली विभाग की पूर्ण जिम्मेदारी (सख्त दायित्व) बनती है और ऐसे मामलों में लापरवाही साबित करना भी आवश्यक नहीं है।जस्टिस संदीप तनेजा की पीठ ने माना कि दुर्घटना वाले स्थान की बिजली लाइन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में खराब थी। साथ ही...
चार्जशीट दाखिल करने से पहले SHO स्वतंत्र विवेक का करें इस्तेमाल, महज 'पोस्ट ऑफिस' नहीं हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) केवल जांच अधिकारी (IO) द्वारा तैयार की गई चार्जशीट अदालत भेजने वाले "पोस्ट ऑफिस" नहीं हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप हुई है।जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा SHO के खिलाफ लिए गए संज्ञान को बरकरार रखते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल करना महज औपचारिकता नहीं है। SHO को रिकॉर्ड और साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करना अनिवार्य है।मामला क्या था?याचिकाकर्ता एक सड़क दुर्घटना में...
'आर्टिकल 21 के तहत शादी का अधिकार': राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को ओपन एयर जेल में शादी करने की इजाज़त दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में ओपन एयर कैंप में बंद हत्या के एक दोषी को ज़मानत पर रिहा हुई महिला दोषी के साथ शादी करने की इजाज़त दी। कोर्ट ने कहा कि शादी का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी के अधिकार का एक अहम हिस्सा है।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"दो सहमत बालिगों के बीच शादी करना भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी के अधिकार का एक अहम हिस्सा है। शादी की संस्था को सभी प्रमुख धर्मों और...
राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के लिए मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, जांच में कमियां बताईं
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में पत्नी की हत्या के आरोप में ट्रायल कोर्ट से मौत की सज़ा पाए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसी परिस्थितियां साबित करने में नाकाम रहा, जो सिर्फ़ उसी के दोषी होने की ओर इशारा करती हों और जांच में गंभीर कमियां हैं।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की बेंच ने दोहराया कि शक कितना भी मज़बूत क्यों न हो, वह कानूनी सबूत की जगह नहीं ले सकता और जहां सबूतों के आधार पर दो राय मुमकिन हों, वहां आरोपी के पक्ष वाली राय को ही माना जाता...
अंतरिम आदेश के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट से किसी पक्ष के अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 39 नियम 7 के तहत नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर का उद्देश्य किसी पक्ष के लिए साक्ष्य जुटाना नहीं, बल्कि अदालत को विवादित संपत्ति की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन उपलब्ध कराना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कमिश्नर की रिपोर्ट से किसी भी पक्ष का कोई मौलिक (Substantive) अधिकार न तो बनता है और न ही समाप्त होता है।जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आदेश 39 नियम 7 CPC के तहत स्थानीय निरीक्षण...
नियमों में शामिल दिव्यांगता पर ही मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, अदालत नई श्रेणी नहीं जोड़ सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने 75 प्रतिशत दिव्यांगता से ग्रस्त एक सरकारी कर्मचारी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति केवल उन्हीं दिव्यांगताओं के मामलों में दी जा सकती है, जिन्हें नियमों में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया। अदालत कानून में नई श्रेणी नहीं जोड़ सकती।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि कल्याणकारी कानूनों की उदार व्याख्या की जा सकती है, लेकिन अदालत विधायिका द्वारा जानबूझकर बाहर रखी गई श्रेणियों को...
वन विभाग की असंवेदनशीलता निंदनीय': हाथी गांव में हाथियों के कल्याण पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, मुख्य वन संरक्षक को किया तलब
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के आमेर स्थित हाथी गांव में पालतू हाथियों के कल्याण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान वन विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने संबंधित मुख्य वन संरक्षक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने वन विभाग के वकील द्वारा यह कहे जाने पर आश्चर्य जताया कि उन्हें मामले के तथ्यों की जानकारी नहीं है और उनके पास केस की फाइल भी उपलब्ध नहीं है।कोर्ट ने कहा कि यह याचिका वर्ष...
राजस्थान हाईकोर्ट ने ऊंटों की आबादी में भारी गिरावट पर चिंता जताई, पशुपालन विभाग के डायरेक्टर को तलब किया
राजस्थान में ऊंटों की आबादी में आई भारी गिरावट—लगभग 15 लाख से घटकर 1.5 लाख रह जाने—पर चिंता जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग के डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने और राज्य के इस पशु के संरक्षण, प्रजनन और स्वास्थ्य देखभाल के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताने का आदेश दिया।राजस्थान हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि पारंपरिक रूप से ऊंट पालने वाले समुदायों के धीरे-धीरे दूसरे कामों की ओर बढ़ने से बढ़ती...
'राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला': राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाक सीमा पर मस्जिदों और दरगाहों को जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ याचिकाएं खारिज कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी 'कारण बताओ' (show-cause) और बेदखली नोटिस को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसमें धार्मिक भेदभाव का कोई पहलू नहीं है। [2026 LiveLaw (Raj) 279]कोर्ट कई मदरसों, मस्जिदों और दरगाहों की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें राज्य अधिकारियों द्वारा जारी बेदखली/खाली करने और 'कारण बताओ' नोटिस की वैधता को चुनौती दी गई। ये...
कोर्ट स्कूल रिकॉर्ड में जन्म तिथि बदलने के लिए एजुकेशन बोर्ड को निर्देश नहीं दे सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट एजुकेशन बोर्ड को स्कूल सर्टिफिकेट में दर्ज जन्म तिथि बदलने का निर्देश नहीं दे सकता; कोर्ट ने माना कि ऐसी रिक्वेस्ट पर सबसे पहले संबंधित बोर्ड को ही विचार करना चाहिए। [2026 LiveLaw (Raj) 278]राजस्थान बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन को एक छात्रा की 10वीं क्लास की मार्कशीट में उसकी जन्म तिथि बदलने का निर्देश देने वाले सिंगल जज का आदेश रद्द करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की डिवीज़न बेंच ने साफ़ किया कि अगर कोई व्यक्ति बोर्ड के फ़ैसले...



















