राज�थान हाईकोट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

राजस्थान हाई कोर्ट ने upGrad के डायरेक्टरों और अन्य कर्मचारियों/सहयोगियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई। upGrad एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन उच्च शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। यह रोक उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वास भंग के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में लगाई गई।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह मामला एक छात्र ने दर्ज कराया। इस छात्र ने प्लेटफॉर्म पर एक कोर्स चुना था। इसके लिए 5.25 लाख रुपये की फीस जमा की थी।...

इलेक्ट्रॉनिक सबूत की प्रमाणित कॉपी न देना निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट
इलेक्ट्रॉनिक सबूत की प्रमाणित कॉपी न देना निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि आरोपी को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रमाणित क्लोन कॉपी न देना उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी की याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अप्रमाणित कॉपी देना या प्रमाणित क्लोन कॉपी देने से इनकार करना न केवल निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हनन है, बल्कि आरोपी के लिए डिस्चार्ज (मुक्ति) का अधिकार प्रभावी ढंग से उपयोग करने में...

निजी स्वार्थ छिपाकर दायर की जनहित याचिका: राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, भविष्य में PIL पर रोक, 25 लाख जुर्माने पर विचार
निजी स्वार्थ छिपाकर दायर की जनहित याचिका: राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, भविष्य में PIL पर रोक, 25 लाख जुर्माने पर विचार

राजस्थान हाइकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को भविष्य में कोई भी PIL दायर करने से रोक दिया। अदालत ने यह भी पूछा है कि उसके खिलाफ कार्यवाही क्यों न की जाए और 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना क्यों न लगाया जाए।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह आदेश उस समय दिया, जब सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता का मामले में निजी हित जुड़ा हुआ है।याचिका में राज्यभर में राष्ट्रीय राजमार्गों, रिंग रोड और अन्य सड़कों पर कथित अवैध धर्मकांटे और...

बीमार कर्मचारी के प्रति संवेदनशील रहें बैंक, ट्रांसफर नियमों को कठोरता से लागू न करें: हाइकोर्ट
बीमार कर्मचारी के प्रति संवेदनशील रहें बैंक, ट्रांसफर नियमों को कठोरता से लागू न करें: हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बैंकों को अपने कर्मचारियों की मेडिकल स्थिति को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए। केवल प्रशासनिक सर्कुलर का कठोर पालन करते हुए कर्मचारियों का तबादला करना उचित नहीं है।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने भारतीय स्टेट बैंक के एक कर्मचारी का तबादला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।कर्मचारी का तबादला जयपुर से हैदराबाद कर दिया गया, जबकि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित था।याचिकाकर्ता...

रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी या निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव IPC की धारा 498A के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी या निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव IPC की धारा 498A के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

एक शादीशुदा व्यक्ति के परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ IPC की धारा 498-A के तहत जारी समन रद्द करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी रिश्तेदार की वैवाहिक घर में महज़ मौजूदगी के आधार पर आपराधिक दायित्व नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब क्रूरता के आरोपों में उन परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट आरोप न हो।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने राय दी कि अपराध का संबंध जानबूझकर किए गए आचरण से होता है, न कि निष्क्रिय पारिवारिक जुड़ाव से। IPC की धारा 498-A के तहत आने वाले अपराधों में पति...

फर्जी दावों को रोकने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट
फर्जी दावों को रोकने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया, जिनमें राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पिछले पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से दिव्यांग (PwD) कोटे में नियुक्त कर्मचारियों की 'बेंचमार्क डिसेबिलिटी' का अनिवार्य पुनर्मूल्यांकन (reassessment) कराने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने कहा कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह आरक्षण नीतियों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से लागू करे, ताकि समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। अदालत ने कहा कि व्यवस्था समावेशी...

नाबालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की
नाबालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय यदि उसका आश्रित निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है तो वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस आधार पर अनिश्चित समय तक इंतजार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि नाबालिग आश्रित बाद में वयस्क हो जाएगा।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने सरकारी कर्मचारी के बेटे द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी...

केवल प्रशासनिक असुविधा बताकर डॉक्टर को उच्च अध्ययन से नहीं रोका जा सकता: राजस्थान हाइकोर्ट
केवल प्रशासनिक असुविधा बताकर डॉक्टर को उच्च अध्ययन से नहीं रोका जा सकता: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक मेडिकल अधिकारी को बड़ी राहत देते हुए कहा कि केवल प्रशासनिक असुविधा का हवाला देकर किसी डॉक्टर को उच्च अध्ययन करने से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि चयनित डॉक्टर को तुरंत सेवा से मुक्त किया जाए ताकि वह सीनियर रेजिडेंसी कोर्स में समय पर शामिल हो सके।जस्टिस नुपुर भाटी की पीठ ने यह अंतरिम आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें राज्य सेवा में कार्यरत एक महिला मेडिकल अधिकारी ने शिकायत की थी कि सीनियर रेजिडेंसी कोर्स में चयनित होने के बावजूद सरकार ने उन्हें पद...

सरकारी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने JDA अधिकारी के खिलाफ अवैध तोड़फोड़ का मामला रद्द किया
सरकारी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने JDA अधिकारी के खिलाफ अवैध तोड़फोड़ का मामला रद्द किया

राजस्थान हाइकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ दर्ज अवैध प्रवेश और तोड़फोड़ का आपराधिक मामला रद्द किया। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है और इसके बिना कार्रवाई जारी नहीं रह सकती।जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई।शिकायतकर्ता का आरोप था कि करीब 50–60 लोग उसके परिसर में जबरन घुस आए...

राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई पर असंतोष जताया, कहा - कचरा ठीक से न फेंकने पर नागरिकों पर जुर्माना लग सकता है
राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई पर असंतोष जताया, कहा - कचरा ठीक से न फेंकने पर नागरिकों पर जुर्माना लग सकता है

राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई के मामले में नगर निगम के काम-काज पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कुछ ऐसे कदम उठाने का सुझाव दिया, जिनमें उन नागरिकों पर जुर्माना लगाना भी शामिल है, जिन्होंने अपने इलाके से कचरा हटवाने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी नहीं की।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की डिवीज़न बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में यह तर्क दिया गया कि नगर निगम द्वारा भर्ती किए गए लगभग 8000 सफ़ाई कर्मचारियों के मुकाबले, ज़मीनी स्तर पर बहुत कम लोग ही काम कर रहे हैं।आरोप...

मामलों की सूचीबद्धता में देरी पर रजिस्ट्री के खिलाफ अवमानना कार्यवाही समाप्त: राजस्थान हाइकोर्ट का फैसला
मामलों की सूचीबद्धता में देरी पर रजिस्ट्री के खिलाफ अवमानना कार्यवाही समाप्त: राजस्थान हाइकोर्ट का फैसला

राजस्थान हाइकोर्ट ने मामलों की सूचीबद्धता को लेकर उठी शिकायतों के आधार पर रजिस्ट्री अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई स्वतः संज्ञान अवमानना कार्यवाही समाप्त की।अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई मामला तय तारीख पर सूचीबद्ध नहीं हुआ, अवमानना कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं है।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।अदालत ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि केवल किसी मामले के सूचीबद्ध न होने के आधार पर अवमानना याचिका दायर...

बिना प्राथमिक साक्ष्य के बैंक अकाउंट फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट
बिना प्राथमिक साक्ष्य के बैंक अकाउंट फ्रीज करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के बैंक अकाउंट बिना ठोस कारण और बिना यह दिखाए कि उसका कथित अपराध से कोई प्राथमिक संबंध है, फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ग) के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों को बैंक अकाउंट फ्रीज करने की शक्ति जरूर है लेकिन इसका प्रयोग अत्यंत सावधानी और कानून के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। बिना कारण बताए और बिना यह स्पष्ट किए कि खाते का कथित अपराध से क्या संबंध है अकाउंट को अनिश्चित काल तक फ्रीज रखना उचित नहीं...

एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन देना गलत: राजस्थान हाइकोर्ट
एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन देना गलत: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि एक ही भर्ती प्रक्रिया में चयनित और नियुक्त कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में केवल ज्वाइनिंग की तारीख के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने इसे सेवा कानून के सिद्धांतों के खिलाफ और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की पीठ स्कूल व्याख्याताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि राज्य सरकार ने एक ही भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त शिक्षकों के वेतनमान तय करने में भेदभाव किया। कुछ...

गुमराह करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट जीवन के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग के बारे में Facebook पोस्ट हटाने का आदेश दिया
गुमराह करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट जीवन के अधिकार का उल्लंघन: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग के बारे में Facebook पोस्ट हटाने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि Facebook या सोशल मीडिया पर कोई भी गुमराह करने वाला मटीरियल जो झूठा, गलत इरादे वाला और किसी व्यक्ति की इज़्ज़त को नुकसान पहुंचाने या प्राइवेसी में दखल देने वाला पाया गया, वह संविधान के आर्टिकल 21 के तहत उस व्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच नाबालिग की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो अपने पिता की मौत के बाद अपनी माँ के साथ अपने मायके में रह रही थी। उसने आरोप लगाया कि उसके दादा-दादी ने Facebook पर गुमराह करने वाला पोस्ट पोस्ट करके उसे...

माता-पिता के तलाक या पिता की दूसरी पत्नी की नियुक्ति से बेटे के करुणा के आधार पर नियुक्ति के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
माता-पिता के तलाक या पिता की दूसरी पत्नी की नियुक्ति से बेटे के करुणा के आधार पर नियुक्ति के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

प्रतिवादी को करुणा के आधार पर नियुक्ति की राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस आधार पर ऐसी नियुक्ति से इनकार करना कि उसके माता-पिता के तलाक के बाद प्रतिवादी मृतक कर्मचारी के साथ नहीं रह रहा था, इसलिए उस पर निर्भर नहीं था, साफ़ तौर पर गलत है।एक्टिंग चीफ़ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर संधू की डिवीज़न बेंच ने राज्य की इस दलील को भी खारिज किया कि मृतक की दूसरी पत्नी को पहले ही नियुक्ति दी गई।यह देखा गया कि दूसरी पत्नी को नियुक्ति तब दी गई, जब प्रतिवादी ने करुणा के आधार...

पिता का नाबालिग बेटी से रेप करना पवित्र रिश्ते के साथ धोखा: राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी
पिता का नाबालिग बेटी से रेप करना पवित्र रिश्ते के साथ धोखा: राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी

अपनी नाबालिग बेटी से बार-बार रेप करने के दोषी एक पिता की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा अपराध न केवल पीड़ित व्यक्ति पर बल्कि परिवार के भरोसे और समाज की नैतिकता के बुनियादी मूल्यों पर भी असर डालता है और यह सम्मान और व्यक्तिगत आज़ादी की संवैधानिक गारंटी का घोर उल्लंघन है।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि 14 साल की लड़की के लिए अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत जुटाना बहुत मुश्किल था, जिस पर वह रहने और गुज़ारे...

पिता के घर लौटने से नाबालिग बेटी का इनकार, राजस्थान हाइकोर्ट ने बालिका गृह में रहने की दी अनुमति
पिता के घर लौटने से नाबालिग बेटी का इनकार, राजस्थान हाइकोर्ट ने बालिका गृह में रहने की दी अनुमति

राजस्थान हाइकोर्ट ने नाबालिग लड़की को बालिग होने तक बालिका गृह में रहने की अनुमति दी। लड़की ने अदालत के सामने अपने माता-पिता के पास लौटने से इनकार करते हुए कहा था कि उसे उनके द्वारा प्रताड़ित किए जाने का डर है और उसके पिता कथित रूप से कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनकी नाबालिग बेटी को प्रतिवादी द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।सुनवाई...

लगभग शून्य कट-ऑफ पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- भर्ती में न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी
लगभग शून्य कट-ऑफ पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- भर्ती में न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी

राजस्थान हाइकोर्ट ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बेहद कम कट-ऑफ अंक को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार में चयन के लिए राज्य को न्यूनतम मानक सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि चयनित उम्मीदवार बुनियादी जिम्मेदारियों को संतोषजनक ढंग से निभा सकें।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ एक अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने चतुर्थ श्रेणी शिक्षक भर्ती में अपनी उम्मीदवारी खारिज किए जाने को चुनौती दी। याचिकाकर्ता को परीक्षा में नकारात्मक अंक मिलने के कारण अयोग्य ठहराया गया, जबकि राज्य...