मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मानहानि मामले में अभिषेक बनर्जी को राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर लगाई रोक

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को मानहानि मामले में बड़ी राहत देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल पर रोक लगा दी। साथ ही अदालत ने उनकी याचिका को पुनः बहाल कर मामले की मेरिट पर सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर बहाली आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी याचिका जिसे पहले अनुपस्थिति के कारण खारिज कर दिया गया था, अब मूल क्रमांक पर बहाल की जाती है और उसके गुण-दोष के आधार पर सुनवाई...

पुराने सरकारी अभिलेख गायब होने भर से किसी को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल इस आधार पर किसी नागरिक को उसकी संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि पुराने सरकारी अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं या खो गए।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था का नाम दशकों से सरकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, तो उसे अवैध बताने का भार राज्य पर है और इसे ठोस तथा विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होगा। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा,“केवल सरकारी अभिलेखों का गायब होना या उपलब्ध न होना किसी नागरिक को उसके संपत्ति...

सरकारी ज़मीन मामले में 12 साल तक कोई कार्रवाई न करने का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेवेन्यू अधिकारियों के खिलाफ़ क्रिमिनल और डिपार्टमेंटल कार्रवाई की मंज़ूरी दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को उन लापरवाह रेवेन्यू अधिकारियों के खिलाफ़ डिपार्टमेंटल और क्रिमिनल कार्रवाई करने की मंज़ूरी दी, जिन्हें सरकारी ज़मीन से जुड़े सिविल विवाद की जानकारी होने के बावजूद मामले की ठीक से पैरवी नहीं की और 12 साल बाद अपील दायर की। [2026 LiveLaw (MP) 231]जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने अपीलीय कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें राज्य की अपील में हुई देरी को माफ़ किया गया था। बेंच ने 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' (जनता के विश्वास का सिद्धांत) पर ज़ोर देते हुए कहा कि राज्य...

SC/ST Act के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं: हाईकोर्ट ने मारपीट के मामले में नर्मदापुरम बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को अग्रिम ज़मानत दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को मारपीट के मामले में अग्रिम ज़मानत दी। इस मामले में उनके बेटे और चुने हुए कोषाध्यक्ष (जो अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय से है) शामिल है। कोर्ट ने पाया कि अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। [2026 LiveLaw (MP) 232]चूंकि दोनों पक्ष ज़िला बार एसोसिएशन के चुने हुए सदस्य हैं, इसलिए जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की...

नाबालिग की गैर-कानूनी हिरासत का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी का डिमोशन सही ठहराया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) का डिमोशन सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह सज़ा गंभीर गलत व्यवहार को देखते हुए सही है। इस गलत व्यवहार में जूनियर कर्मचारियों द्वारा रात में 16 साल के एक लड़के को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखना और उसे छोड़ने के लिए गैर-कानूनी पैसे की मांग करना शामिल है। [2026 LiveLaw (MP) 230]अधिकारी की इस दलील को खारिज करते हुए कि उसकी सज़ा उसके साथ दोषी पाए गए जूनियर अधिकारियों की सज़ा की तुलना में बहुत ज़्यादा है, जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने ज़ोर दिया कि...

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला: CRPF जवान को जमानत, 15 लाख रुपये जमा कराने का आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलने के आरोप में गिरफ्तार CRPF जवान और उसके कथित सहयोगी को जमानत दी।अदालत ने जमानत देते हुए CRPF जवान को ट्रायल कोर्ट में 15 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश भी दिया। जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की पीठ ने कहा कि आरोपियों के न्याय से भागने की संभावना नहीं है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी सामने नहीं आया है। ऐसे में उन्हें लगातार जेल में रखने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“न्याय से फरार होने की...

पेंशन कर्मचारी का वैधानिक अधिकार, गंभीर कदाचार साबित हुए बिना नहीं रोकी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पेंशन किसी सरकारी कर्मचारी का वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकार है, जिसे विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना छीना या रोका नहीं जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन में कटौती या उसे रोके जाने जैसी कठोर सजा तभी दी जा सकती है जब कर्मचारी के खिलाफ गंभीर कदाचार का स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज हो और यह भी स्थापित हो कि यदि वह सेवा में होता तो उसके कृत्य के कारण उसे बर्खास्त किया जा सकता था। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने यह टिप्पणी...

BJP MLA संजय पाठक के खिलाफ मानहानि शिकायत पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का नोटिस, राज्य सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ दायर मानहानि शिकायत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका कटनी के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता नाजिम खान ने दायर की, जिसमें उनकी शिकायत पर विचार कर निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगने की प्रार्थना स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।याचिका के अनुसार वर्ष 2024...

प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने के लिए मांगी गई स्पष्टीकरण की पुनर्विचार याचिका पर विचार किया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर समीक्षा याचिका, जिसमें प्रक्रिया से जुड़ी उलझन या भविष्य में बेकार के मुकदमों को रोकने के लिए स्पष्टीकरण मांगा गया हो, उस पर विचार किया जा सकता है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा:"भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत समीक्षा अधिकार क्षेत्र का दायरा स्वाभाविक रूप से सीमित है। न्यायिक अनुशासन का यह स्थापित सिद्धांत है कि समीक्षा असल में अपील नहीं होती है। हालांकि, जब कोई पक्ष प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने और यह...

एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला को उस राज्य में आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जहां उसकी शादी हुई है, बशर्ते वह उस राज्य के सक्षम अधिकारी से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करे और उसे प्राप्त करे। [2026 LiveLaw (MP) 223]जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने आगे स्पष्ट किया कि महिला को उसके मूल राज्य द्वारा मूल रूप से जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किसी अन्य राज्य में आरक्षण पाने के लिए नहीं किया जा सकता है।बेंच ने कहा:"यदि किसी लड़की की जाति को दोनों राज्यों में आरक्षण का लाभ पाने के लिए अधिसूचित किया...

बरी होने के बाद जब्ती आदेश नहीं रह सकता प्रभावी, संपत्ति की जब्ती नागरिक अधिकारों पर गंभीर असर डालती है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जब किसी आरोपी को सक्षम अदालत आपराधिक मामले में बरी कर देती है तो मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 47ए के तहत कलेक्टर द्वारा पारित जब्ती आदेश स्वतंत्र रूप से प्रभावी नहीं रह सकता। अदालत ने कहा कि संपत्ति की जब्ती नागरिक के संवैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डालती है, इसलिए आरोप सिद्ध न होने की स्थिति में ऐसे आदेश को जारी रखना कानूनसम्मत नहीं है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने भिंड कलेक्टर द्वारा 22 जनवरी 2025...

खाद्य नमूने की केंद्रीय प्रयोगशाला से जांच के अधिकार की जानकारी न देना अभियोजन को अवैध बनाता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की धारा 13(2) के तहत उपलब्ध उसके वैधानिक अधिकार की जानकारी नहीं दी जाती, तो पूरा अभियोजन ही प्रभावित हो जाता है। अदालत ने कहा कि आरोपी को यह बताना अनिवार्य है कि वह खाद्य नमूने की जांच केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला से कराने का आवेदन कर सकता है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वकील की कलंकपूर्ण बर्खास्तगी रद्द की, कहा - सही प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवपुरी ज़िला अदालत के एडिशनल सरकारी वकील/एडवोकेट की बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि न तो कोई नियमित विभागीय जांच की गई और न ही कोई चार्जशीट जारी की गई; बल्कि सीधे बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया, जो कलंकपूर्ण, अस्पष्ट, बिना कारण बताए और बिना तर्क के था। [2026 LiveLaw (MP) 221]जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा:"ऊपर की गई चर्चा से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता को कोई चार्जशीट जारी नहीं की गई और न ही कोई नियमित विभागीय जांच की गई। विवादित आदेश...

हाईकोर्ट जज के तौर पर मिली ग्रेच्युटी, लोकायुक्त के तौर पर सेवा के लिए अलग ग्रेच्युटी पाने में रुकावट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अपनी सेवाओं के लिए ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं और यह हाईकोर्ट जज के तौर पर मिलने वाले फायदों से अलग है। [2026 LiveLaw (MP) 218]तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की डिवीजन बेंच ने कहा,"...याचिकाकर्ता क्रमशः लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त के तौर पर दी गई सेवा के लिए 'डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी' (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी) का लाभ पाने के हकदार हैं, भले ही उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज का पद संभालने के कारण...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को सही ठहराया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर की एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को चुनौती देने वाली दो रिट याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने पाया कि फिजिकल (हाथ से) स्वतंत्र मूल्यांकन से मिले अंकों में कोई खास अंतर नहीं था। [2026 LiveLaw (MP) 217]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और टेक्नोलॉजी पार्टनर 'माइंड लॉजिक्स इन्फ्रा' (Mindlogicx Infra) को सिस्टम की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कुछ उपाय सुझाए:"सिंबल (चिह्न),...

अभिषेक बनर्जी की गिरफ़्तारी को हरी झंड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP नेता के मानहानि केस में गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (17 जून) को मानहानि के मामले में TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल पर लगी अंतरिम रोक हटाई, क्योंकि इस मामले में उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। [2026 LiveLaw (MP) 215]बनर्जी ने BJP नेता आकाश विजयवर्गीय द्वारा दायर मानहानि के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में भोपाल के MP/MLA स्पेशल जज द्वारा जारी...

हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता।जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।...