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'गृहणी परिवार को कई तरह की सेवाएं देती है, वह अकुशल मज़दूर नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में महिला की मौत के बाद मुआवज़ा बढ़ाया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को दिए गए मुआवज़े की राशि बढ़ाई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि गृहणी के योगदान को किसी अकुशल मज़दूर के काम के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह बिना किसी तय समय या छुट्टी के परिवार के लिए कई तरह की सेवाएं करती है।कोर्ट ने कहा कि उचित मुआवज़ा तय करते समय इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने मुआवज़े की राशि बढ़ाकर 12 लाख रुपये से ज़्यादा कर दी।जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह फ़ैसला सुनाया:"आय के आकलन के संबंध...
'गंभीर चिंता का विषय': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ओवरलोडेड गाड़ियों में अवैध रेत परिवहन में बढ़ोतरी पर चिंता जताई, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, जिसमें अवैध रूप से रेत ले जा रही एक गाड़ी की अंतरिम कस्टडी (अस्थायी हिरासत) देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेत अक्सर ओवरलोडेड और खराब हालत वाली गाड़ियों में ले जाई जाती है, जिन्हें अधिकारी से बचने के लिए अक्सर तेज़ी से चलाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और जान-माल का नुकसान हो रहा है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने हाल के दिनों में 'रेत माफिया' के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और इसे सार्वजनिक चिंता का एक...
भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालय में स्थानांतरित करना वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 की धारा 16 के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालयों में ट्रांसफर करने का फैसला सही ठहराया।यह देखते हुए कि जिन प्रावधानों के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश पारित किया गया, उन्हें चुनौती नहीं दी गई, जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपामा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया:“यह स्थापित सिद्धांत लागू करते हुए कि असंगति की स्थिति में बाद में बना कानून पहले बने कानून पर प्रभावी...
झारखंड हाईकोर्ट ने 12 साल की बच्ची के रेप-मर्डर का स्वतः संज्ञान लिया, पुलिस के "सुस्त रवैये" पर फटकार लगाई
झारखंड हाईकोर्ट ने हज़ारीबाग़ में 12 साल की बच्ची के रेप और मर्डर का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले में पुलिस के "सुस्त रवैये" पर गहरी चिंता जताई।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की डिवीज़न बेंच ने इस घटना का संज्ञान तब लिया, जब सुबह 10:30 बजे कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने पर वकील हेमंत शिकारवार ने कोर्ट का ध्यान 29 मार्च, 2026 को हिंदी दैनिक 'हिंदुस्तान' में छपी एक ख़बर की ओर दिलाया।कोर्ट के सामने रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 24 मार्च, 2026 को हज़ारीबाग़ ज़िले के...
वकीलों के साथ नौकरों की तरह नहीं किया जा सकता व्यवहार, मनमाने तरीके से हटाना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वकीलों की अपनी गरिमा होती है और उन्हें नौकरों की तरह नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया तय शर्तों और नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए न कि मनमाने ढंग से।जस्टिस गणेश राम मीणा की पीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा सहायक वकीलों को हटाने के आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि प्राधिकरण ने खुद बनाए गए नियमों और शर्तों की अनदेखी की है।अदालत ने कहा,“वकीलों की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्हें...
स्त्रीधन पर पत्नी का पूर्ण अधिकार, इसे लेने पर नहीं बनता आपराधिक मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि 'स्त्रीधन' पर महिला का पूर्ण अधिकार होता है और उसे लेने के लिए पत्नी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात (धारा 406 आईपीसी) का मामला नहीं चलाया जा सकता।जस्टिस चावन प्रकाश ने कहा कि विवाह से पहले, विवाह के समय या उसके बाद महिला को जो भी संपत्ति दी जाती है, वह उसका 'स्त्रीधन' होती है और उस पर केवल उसी का अधिकार रहता है।अदालत ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का उपयोग या निपटान अपनी इच्छा से करने का पूरा अधिकार है।अदालत ने स्पष्ट किया,“पति आवश्यकता...
12 अकाउंट्स ब्लॉक करने का आदेश 'अत्यधिक' और असंतुलित: X ने केंद्र सरकार से की पुनर्विचार की मांग
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने केंद्र सरकार से 12 यूजर्स अकाउंट्स ब्लॉक करने के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की।कंपनी ने सरकार के इस आदेश को असंगत और अनुपातहीन बताते हुए कहा कि यह कानून के अनुरूप नहीं है।यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव के समक्ष दायर हलफनामे में एक्स ने बताया कि उसने 19 मार्च को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को आपत्ति पत्र भेजा था।कंपनी के अनुसार 18 मार्च को जारी...
आय निर्धारण के लिए पति के ITR तलब, DV मामले में ट्रायल कोर्ट को पुनः निर्णय का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम से जुड़े एक मामले में पति की आय का सही आकलन करने के लिए उसके आयकर रिटर्न (ITR) तलब किए और ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए।मामला तब सामने आया जब पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति ने अपनी वास्तविक आय छुपाने के लिए खुद को मजदूर बताया, जबकि वह पेशे से आर्किटेक्ट है। पत्नी ने CrPC की धारा 91 के तहत आवेदन दाखिल कर पति के आयकर रिटर्न मंगाने की मांग की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि ऐसे दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं है।इस आदेश को पत्नी...
क्या 50 साल से अधिक उम्र की महिलाएं ART सेवाएं ले सकती हैं? कोर्ट करेगा फैसला: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट यह तय करने जा रहा है कि क्या 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं सहायक प्रजनन तकनीक (ART) के माध्यम से गर्भधारण कर बच्चे को जन्म देने के लिए चिकित्सकीय रूप से सक्षम मानी जा सकती हैं।यह मुद्दा जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ के समक्ष दो याचिकाओं के माध्यम से उठा, जिन्हें 55 वर्ष और 53 वर्ष की महिलाओं ने दायर किया है। दोनों याचिकाओं में Assisted Reproductive Technology Act, 2021 की धारा 21(g) की वैधता को चुनौती दी गई है।उक्त प्रावधान के तहत महिलाओं के लिए ART सेवाओं...
बंगाल को निशाना नहीं बना रहा ECI, चुनाव वाले दूसरे राज्यों में ज़्यादा अधिकारियों का तबादला हुआ: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकील अर्का कुमार नाग की दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की। इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के बाद IAS और IPS अधिकारियों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने माना कि यह चुनौती मूल रूप से ही गलत है, क्योंकि याचिका में खुद इस बात पर कभी विवाद नहीं उठाया गया कि "स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद अधिकारियों का तबादला/स्थानांतरण करने की शक्ति ECI के पास है।"बेंच की ओर से...
सिर्फ एक ही पूर्वज होना पर्याप्त नहीं, संपत्ति को संयुक्त परिवार की नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि केवल यह तथ्य कि सभी पक्ष एक ही पूर्वज से संबंधित हैं, अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि संपत्ति संयुक्त परिवार की है।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि संयुक्त पारिवारिक संपत्ति होने का दावा करने वाले पक्ष पर यह जिम्मेदारी है कि वह इसका प्रथम दृष्टया प्रमाण प्रस्तुत करे।अदालत ने कहा,“केवल इसलिए कि मूल पूर्वज महादेव थे, यह नहीं माना जा सकता कि उनके वंशजों के नाम दर्ज कोई भी भूमि संयुक्त परिवार की...
COVID ड्यूटी के दौरान मौत पर मिलेगा 1 करोड़ मुआवजा, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में COVID-19 के दौरान राहत कार्य करते हुए जान गंवाने वाले सरकारी स्कूल के उप-प्रधानाचार्य के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा मुआवजा देने से इनकार करने का फैसला रद्द किया।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने दिवंगत डॉ. राजा राम सिंह की पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली सरकार की कोविड राहत योजना के तहत मुआवजा मिलना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि छह सप्ताह के भीतर 1 करोड़ रुपये की राशि जारी की...
ऑनलाइन विरोध को किस तरह कुचल रहा है IT Act?
हाल ही में, एक कॉमेडियन द्वारा इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया एक वीडियो, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशी नेताओं के बीच बातचीत का मज़ाक उड़ाया गया, कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर तेज़ी से वायरल हो गया। वीडियो को कुछ ही समय में लाखों व्यूज़ मिलने के बाद मेटा ने भारत सरकार की "कानूनी माँग के जवाब में" इसे हटा दिया।लगभग उसी समय X (पहले ट्विटर) पर कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और गुमनाम व्यंग्यकारों के अकाउंट, जो सरकार और सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करने वाला कंटेंट पोस्ट करते uwx, बिना किसी...
गरीबी के कारण जेल नहीं भेजा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को रिहा किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि केवल आर्थिक असमर्थता के कारण किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनी नहीं जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि गरीबी को जेल भेजने का आधार नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली ने यह टिप्पणी करते हुए उस आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया, जिसे केवल इसलिए जेल में रखा गया, क्योंकि वह अदालत द्वारा लगाए गए खर्च (कॉस्ट) का भुगतान नहीं कर सका था जबकि पक्षकारों के बीच विवाद पहले ही सुलझ चुका था।मामला चेक बाउंस से जुड़ा था, जिसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया। बाद में जब मामला उच्च...
नहीं भेजा जाएगा प्राइवेट हॉस्पिटल, इलाज में कमी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने PFI नेता ई. अबूबकर को दी सीमित राहत
दिल्ली हाईकोर्ट ने PFI के पूर्व प्रमुख ई. अबूबकर को उनकी पसंद के प्राइवेट हॉस्पिटल में ट्रांसफर करने की मांग खारिज की। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उन्हें दिए जा रहे इलाज में कोई कमी या लापरवाही है।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि अबूबकर UAPA मामले में आरोपी हैं लेकिन उनकी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उन्हें उचित मेडिकल सुविधा मिलनी चाहिए।अदालत ने हालांकि एक सीमित राहत देते हुए निर्देश दिया कि उन्हें इस सप्ताह निर्धारित तिथि पर अपोलो अस्पताल...
पति की मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती भरण-पोषण की जिम्मेदारी, विधवा ससुर से मांग सकती है गुजारा भत्ता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि पति की अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसकी मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती। ऐसे में विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने कहा,“यह स्थापित सिद्धांत है कि पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए बाध्य है। यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी जारी रहता है और कानून विधवा को ससुर से भरण-पोषण मांगने की अनुमति देता है।”अदालत यह टिप्पणी एक अपील पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें पति...
COVID मुआवजे के लिए जरूरी है टेस्ट रिपोर्ट या मृत्यु प्रमाण पत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि COVID-19 से मृत्यु के आधार पर मुआवजा पाने के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि मृतक वास्तव में कोविड संक्रमित था।इसके लिए या तो कोविड पॉजिटिव टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी या ऐसा मृत्यु प्रमाण पत्र, जिसमें मौत का कारण COVID-19 दर्ज हो।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज की, जिसमें कोविड से कथित मौत पर मुआवजे की मांग की गई।मामला सहायक अध्यापिका की मृत्यु से जुड़ा था, जो अप्रैल 2021 में चुनाव ड्यूटी पर तैनात...
प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक पोस्ट के आरोप में एक्स अकाउंट ब्लॉक, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने जानकारी दी कि डॉ. निमो यादव के नाम से चल रहे पैरोडी अकाउंट को केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश पर ब्लॉक किया गया।यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में की गई।कंपनी द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया कि संबंधित अकाउंट पर फोटो, वीडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री का उपयोग कर विवादित पोस्ट किए गए, जिनमें प्रधानमंत्री...
जज बनने के लिए सुझाए गए उम्मीदवारों के नामों को सरकार का मंज़ूरी न देना बड़ी समस्या: जस्टिस अभय ओक
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओक ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जज बनने के लिए सुझाए गए वकीलों के नामों को केंद्र सरकार द्वारा जल्दी मंज़ूरी न देना, हमारी व्यवस्था की एक बड़ी समस्या है। इसी वजह से 'न्यायपालिका' नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रही है।जज ने बताया कि उम्मीदवारों के नाम महीनों तक मंज़ूरी के लिए अटके रहते हैं, जिसका उनके पेशे पर बुरा असर पड़ता है और उनकी निजता को भी नुकसान पहुंचता है।जस्टिस ओक ने कहा,"एक और अहम मुद्दा हाईकोर्ट में जजों की...
सरकार को जनहित में उद्योगों को दी गई टैक्स छूट वापस लेने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई टैक्स छूट से पाने वाले का कोई ऐसा पक्का अधिकार नहीं बन जाता कि वह हमेशा के लिए उस छूट का दावा करता रहे, और सरकार जनहित में ऐसी छूट वापस ले सकती है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार की अपील को मंज़ूर करते हुए यह बात कही। यह अपील कैप्टिव पावर जेनरेटरों के खिलाफ थी। बेंच ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें उसने कैप्टिव पावर (वह बिजली जो उद्योग अपनी ज़रूरत के लिए खुद बनाते हैं, बिना ग्रिड सप्लाई पर निर्भर रहे)...



















