NCDRC ने 10 साल बाद दायर उपभोक्ता शिकायत को समय-सीमा से बाहर बताते हुए खारिज किया

Praveen Mishra

6 March 2026 1:30 PM IST

  • NCDRC ने 10 साल बाद दायर उपभोक्ता शिकायत को समय-सीमा से बाहर बताते हुए खारिज किया

    राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने डेवलपर और हाउसिंग सोसायटी के खिलाफ दायर एक उपभोक्ता शिकायत को सीमा अवधि (Limitation) से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने फ्लैट का कब्जा वर्ष 2016 में लिया था, इसलिए उसी समय से कारण-ए-कार्रवाई (Cause of Action) उत्पन्न हो गया था। बाद में कथित कमियां सामने आने के आधार पर इसे निरंतर कारण-ए-कार्रवाई (Continuing Cause of Action) नहीं माना जा सकता।

    आयोग की पीठ, जिसमें जस्टिस ए.पी. साहि (अध्यक्ष) और सदस्य भारतकुमार पंड्या शामिल थे, ने कहा कि वर्ष 2026 में दायर की गई शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 69 के तहत निर्धारित दो वर्ष की सीमा अवधि से काफी अधिक देर से दाखिल की गई है, इसलिए यह विचारणीय नहीं है।

    पुरा मामला

    शिकायतकर्ता प्रदीप सोनावणे और उनकी पत्नी ने डेवलपर DSSD Infrastructure Pvt. Ltd., उसके प्रतिनिधियों और श्री नंदादीप भवन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड के खिलाफ सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए शिकायत दाखिल की थी।

    शिकायतकर्ताओं ने 20 दिसंबर 2013 को “श्री नंदादीप भवन” पुनर्विकास परियोजना में 989 वर्ग फुट कार्पेट एरिया वाले फ्लैट नंबर 701 को लगभग ₹2.89 करोड़ में खरीदने के लिए एग्रीमेंट किया था। उन्हें 14 अप्रैल 2016 को पार्किंग स्लॉट आवंटित किया गया और 31 अगस्त 2016 को फ्लैट का कब्जा दे दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उस समय वे फ्लैट में नहीं रहते थे और उसे किराए पर दे दिया था क्योंकि उनमें से एक विदेश में रह रहा था। वे स्वयं 2024 के बाद वहां रहने लगे।

    बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि पार्किंग स्थान में खुला मैनहोल और सीमित जगह होने के कारण वह असुविधाजनक है। इसके अलावा उन्होंने 28 अगस्त 2025 की एक निजी आर्किटेक्ट की रिपोर्ट के आधार पर कार्पेट एरिया और निर्माण में कथित विसंगतियों का दावा किया। इन्हीं आधारों पर उन्होंने 2026 में आयोग का रुख किया।

    विपक्षी पक्ष के तर्क

    डेवलपर और सोसायटी ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि फ्लैट का कब्जा अगस्त 2016 में दे दिया गया था, जबकि शिकायत लगभग 10 साल बाद दायर की गई। उनका कहना था कि यदि कोई कमी होती तो वह कब्जा लेते समय ही स्पष्ट हो जाती और इसलिए शिकायत समय-सीमा से बाहर है।

    उन्होंने सेवा में किसी भी प्रकार की कमी से इनकार करते हुए पार्किंग और कार्पेट एरिया से जुड़े आरोपों को भी गलत बताया।

    आयोग की टिप्पणियां

    आयोग ने सबसे पहले सीमा अवधि के मुद्दे पर विचार किया। आयोग ने पाया कि:

    बिक्री समझौता 2013 में हुआ था।

    शिकायतकर्ताओं ने 2016 में फ्लैट का कब्जा ले लिया था।

    उस समय पार्किंग या कार्पेट एरिया को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई।

    आयोग ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि 2025 में आर्किटेक्ट की रिपोर्ट आने के बाद कारण-ए-कार्रवाई उत्पन्न हुआ। आयोग ने कहा कि केवल बाद में कमियां पता चलने से सीमा अवधि को बढ़ाया नहीं जा सकता और इसे निरंतर कारण-ए-कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

    आयोग ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें SBI बनाम B.S. Agriculture Industries, HUDA बनाम B.K. Sood, Union of India बनाम British India Corporation Ltd., Gannmani Anasuya बनाम Parvatini Amarendra Chowdhary और Samruddhi Co-operative Housing Society Ltd. बनाम Mumbai Mahalaxmi Construction Pvt. Ltd. शामिल हैं।

    इन फैसलों में कहा गया है कि सीमा अवधि के प्रश्न की जांच प्रारंभिक चरण में ही की जानी चाहिए।

    फैसला

    आयोग ने कहा कि शिकायत स्पष्ट रूप से सीमा अवधि से बाहर है और देरी के लिए कोई पर्याप्त कारण भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए आयोग ने मामले के मेरिट पर विचार किए बिना ही शिकायत को खारिज कर दिया।

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