लगभग शून्य कट-ऑफ पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- भर्ती में न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी
Amir Ahmad
6 March 2026 12:05 PM IST

राजस्थान हाइकोर्ट ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बेहद कम कट-ऑफ अंक को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार में चयन के लिए राज्य को न्यूनतम मानक सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि चयनित उम्मीदवार बुनियादी जिम्मेदारियों को संतोषजनक ढंग से निभा सकें।
जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ एक अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने चतुर्थ श्रेणी शिक्षक भर्ती में अपनी उम्मीदवारी खारिज किए जाने को चुनौती दी। याचिकाकर्ता को परीक्षा में नकारात्मक अंक मिलने के कारण अयोग्य ठहराया गया, जबकि राज्य सरकार ने परीक्षा के लिए कोई न्यूनतम उत्तीर्ण अंक निर्धारित नहीं किए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि भर्ती प्रक्रिया में कुछ आरक्षित वर्गों के लिए कट-ऑफ अंक लगभग शून्य के बराबर यानी 0.0033 तक पहुंच गए। इस पर अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि लगभग शून्य या नकारात्मक अंक पाने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“यह स्थिति दर्शाती है कि या तो परीक्षा को इस स्तर की नौकरी के लिए अनावश्यक रूप से कठिन बनाया गया या फिर भर्ती प्रक्रिया में उचित मानक बनाए नहीं रखे गए। दोनों ही परिस्थितियां स्वीकार्य नहीं हैं।”
हाइकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्राधिकारी होने के नाते राज्य की जिम्मेदारी है कि वह आरक्षित वर्गों के लिए भी न्यूनतम योग्यता मानक तय करे ताकि चयनित उम्मीदवार बुनियादी कार्य करने में सक्षम हों।
अदालत ने यह भी नोट किया कि राज्य सरकार की ओर से न्यूनतम उत्तीर्ण अंक निर्धारित न करने के पीछे कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
इस पर अदालत ने एडिशनल एडवोकेट जनरल को निर्देश दिया कि संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से हलफनामा दाखिल किया जाए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि न्यूनतम अंक निर्धारित क्यों नहीं किए गए, इस गंभीर चूक के पीछे क्या कारण थे और भविष्य में ऐसी “आपत्तिजनक स्थिति” से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च, 2026 को होगी।

