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यदि दोनों पक्ष हिंदू विवाह अधिनियम के अधीन न हों तो विवाह वैध नहीं: तेलंगाना हाइकोर्ट
यदि दोनों पक्ष हिंदू विवाह अधिनियम के अधीन न हों तो विवाह वैध नहीं: तेलंगाना हाइकोर्ट

तेलंगाना हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में अनुसूचित जनजाति की महिला और अनुसूचित जाति के पुरुष के बीच हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत पंजीकृत विवाह को शून्य घोषित किया।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विवाह के किसी एक पक्ष पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता तो उस अधिनियम के अंतर्गत किया गया विवाह कानूनन टिकाऊ नहीं हो सकता।जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस वाकिटी रामकृष्ण रेड्डी की खंडपीठ ने अनुसूचित जनजाति की महिला द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें विवाह को...

संवैधानिक शासन में राजशाही मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट ने पुष्टि की गई नीलामी रद्द करने को मनमाना करार दिया
संवैधानिक शासन में 'राजशाही मानसिकता' के लिए कोई स्थान नहीं: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट ने पुष्टि की गई नीलामी रद्द करने को मनमाना करार दिया

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पुष्टि की गई सार्वजनिक नीलामी को बिना कारण, नोटिस और सुनवाई के केवल एक शब्द में रद्द किए जाने को मनमाना, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 का उल्लंघन करार दिया है। हाइकोर्ट ने इस मामले में पंजाब सरकार द्वारा दायर दूसरी अपील को खारिज कर दिया।जस्टिस विरिंदर अग्रवाल ने अपने निर्णय में कहा कि बिना कारण बताए पारित किए गए संक्षिप्त आदेश आज भी राजशाही मानसिकता की शेष प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं, जो संवैधानिक शासन व्यवस्था के अनुकूल नहीं हैं।उन्होंने कहा कि...

POCSO Act में किशोर स्वायत्तता की अनदेखी: राजस्थान हाइकोर्ट ने सहमति वाले युवा संबंधों को छूट देने पर सरकार से विचार करने को कहा
POCSO Act में 'किशोर स्वायत्तता' की अनदेखी: राजस्थान हाइकोर्ट ने सहमति वाले युवा संबंधों को छूट देने पर सरकार से विचार करने को कहा

राजस्थान हाइकोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण से जुड़े POCSO कानून के मौजूदा प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इस कानून की व्यापक समीक्षा करने को कहा।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था लेकिन सहमति से बने किशोर और युवा संबंधों में इसका कठोर और यांत्रिक प्रयोग कानून को संरक्षण के बजाय दंड का माध्यम बना रहा है।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने सुझाव दिया कि POCSO Act में ऐसा प्रावधान जोड़ा जाना चाहिए, जिसके अंतर्गत लगभग समान...

दिल्ली हाईकोर्ट ने धर्मशाला में जन्मी तिब्बती मूल की महिला को भारतीय नागरिक घोषित किया, पासपोर्ट जारी करने का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने धर्मशाला में जन्मी तिब्बती मूल की महिला को भारतीय नागरिक घोषित किया, पासपोर्ट जारी करने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में 1966 में जन्मी तिब्बती मूल की महिला को जन्म से भारतीय नागरिक घोषित करते हुए उसे भारतीय पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया।जस्टिस सचिन दत्ता ने यांगचेन ड्राकमारग्यापोन द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वह नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3(1)(a) के तहत जन्म से भारतीय नागरिक हैं।याचिकाकर्ता तिब्बती शरणार्थी वंश की हैं और 1997 में अपने पति से मिलने स्विट्ज़रलैंड गई थीं। वहां उन्हें और उनके परिवार को फॉरेनर्स पासपोर्ट जारी किए गए,...

MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश
MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश

राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही दुर्घटना के लिए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MV Act) और वर्कमैन मुआवजा अधिनियम, 1923 (Workman Act) — दोनों के तहत मुआवजा दावा करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। हाइकोर्ट ने कहा कि एक अधिनियम के तहत मुआवजा प्राप्त करने के बाद दूसरे अधिनियम के तहत दावा करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मंच पर मिले मुआवजे को दूसरे मंच द्वारा समायोजित करने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अदालतों को...

प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट ने NCLT को नया फैसला लेने को कहा
प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट ने NCLT को नया फैसला लेने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम के कथित उल्लंघन की जांच के लिए 2020 में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) द्वारा पारित आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया। अदालत ने यह मामला नए सिरे से विचार के लिए एनसीएलएटी को वापस भेज दिया है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश उस दलील के बाद पारित किया, जिसमें फ्लिपकार्ट ने कहा कि एनसीएलएटी का आदेश आयकर कार्यवाही में असेसिंग ऑफिसर की टिप्पणियों पर आधारित था, जिन्हें बाद में...

पंजाब और हरियाणा दोनों में हायर ज्यूडिशियरी एग्जाम टॉप करने वाले वकील ने की LiveLaw की तारीफ़, कहा- यह मंच मेरा ज़रूरी साथी
पंजाब और हरियाणा दोनों में हायर ज्यूडिशियरी एग्जाम टॉप करने वाले वकील ने की 'LiveLaw' की तारीफ़, कहा- यह मंच मेरा ज़रूरी साथी'

एक असाधारण उपलब्धि में लुधियाना के वकील प्रभजोत सिंह सचदेवा ने पंजाब और हरियाणा दोनों हायर ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षाओं में टॉप रैंक हासिल की, जिससे उनका चयन एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज के रूप में हुआ।अपनी तैयारी की यात्रा के बारे में बात करते हुए सचदेवा ने अपनी कड़ी तैयारी के दौरान LiveLaw को "लगातार साथी" बताया। साथ ही समकालीन कानूनी विकास से जुड़े रहने के महत्व पर ज़ोर दिया।उन्होंने कहा,“LiveLaw ने मुझे लेटेस्ट फैसलों और कानूनी विकास से अपडेट रहने में मदद की। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के...

पिछली छोटी सज़ाएं लगातार उत्कृष्ट सर्विस रिकॉर्ड पर भारी नहीं पड़ सकतीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनिवार्य रिटायरमेंट रद्द किया
पिछली छोटी सज़ाएं लगातार 'उत्कृष्ट' सर्विस रिकॉर्ड पर भारी नहीं पड़ सकतीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनिवार्य रिटायरमेंट रद्द किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने "अक्षमता" के आधार पर पुलिस इंस्पेक्टर का अनिवार्य रिटायरमेंट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने इसे मनमाना और छोटी सज़ाओं पर चुनिंदा रूप से निर्भर बताया, जबकि उसके लगातार उत्कृष्ट सर्विस रिकॉर्ड को नज़रअंदाज़ किया गया, जिसमें "अच्छा" और "बहुत अच्छा" प्रदर्शन दिखाया गया।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि राज्य राजस्थान सिविल सर्विसेज (पेंशन) नियम, 1996 ("नियम") के नियम 53(1) और कार्मिक विभाग (DoP) द्वारा 21 अप्रैल, 2000 को जारी सर्कुलर के तहत बाध्यकारी दिशानिर्देशों का पालन करने...

2026 CLAT-UG | सवाल एक, सही जवाब दो: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काउंसलिंग के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव का आदेश क्यों दिया?
2026 CLAT-UG | सवाल एक, सही जवाब दो: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काउंसलिंग के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव का आदेश क्यों दिया?

मंगलवार को दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम को CLAT-UG-2026 के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव करने का निर्देश दिया।यह आदेश तब दिया गया, जब सिंगल जज ने पाया कि हाई-पावर्ड 'ओवरसाइट कमेटी' ने बिना कोई कारण बताए, एक विवादित सवाल के बारे में सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स के फैसले को मनमाने ढंग से पलट दिया।जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने कंसोर्टियम को आदेश दिया कि विवादित सवाल नंबर 9 (बुकलेट-C में) और CLAT-2026 एंट्रेंस एग्जाम की अलग-अलग बुकलेट में उसी से जुड़े सभी...

यूपी पुलिस ने 2024 से 1.08 लाख गुमशुदा लोगों की शिकायतों में से 9% से भी कम पर की कार्रवाई: हैरान हाईकोर्ट ने PIL दर्ज की
यूपी पुलिस ने 2024 से 1.08 लाख गुमशुदा लोगों की शिकायतों में से 9% से भी कम पर की कार्रवाई: 'हैरान' हाईकोर्ट ने PIL दर्ज की

उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार के इस कबूलनामे पर कड़ी निराशा जताते हुए कि जनवरी, 2024 और जनवरी, 2026 के बीच लगभग 1,08,300 गुमशुदा लोगों की शिकायतें दर्ज की गईं और इनमें से केवल 9,700 मामलों में ही राज्य पुलिस ने लोगों को ढूंढने के लिए कार्रवाई की, इलाहाबादहाई कोर्ट ने 'राज्य में गुमशुदा व्यक्ति' शीर्षक से एक PIL (जनहित याचिका) दर्ज की।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने यह आदेश दिया, जिसमें गुमशुदा लोगों को ढूंढने में अधिकारियों के शुरुआती तौर पर लापरवाह रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई...

दिल्ली हाईकोर्ट ने AIPA को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के तौर पर मान्यता देने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने AIPA को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के तौर पर मान्यता देने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया पिकलबॉल एसोसिएशन (AIPA) की याचिका खारिज की, जिसमें उसने केंद्र सरकार के इंडियन पिकलबॉल एसोसिएशन (IPA) को देश में इस खेल के लिए नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) के तौर पर मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी थी।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि IPA को मान्यता देना सीधे तौर पर मनमाना था या उसमें कोई साफ तौर पर गैर-वाजिब बात थी।AIPA 2008 से मौजूद है। उसने अक्टूबर, 2024 में पिकलबॉल के लिए NSF के तौर पर मान्यता के लिए आवेदन किया था। हालांकि, पिछले साल अप्रैल...

BREAKING| एससी कॉलेजियम ने आर्टिकल 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति को मंज़ूरी दी
BREAKING| एससी कॉलेजियम ने आर्टिकल 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति को मंज़ूरी दी

एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने संविधान के आर्टिकल 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिटायर्ड जजों को एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्त करने को मंज़ूरी दी, यह एक ऐसा प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल बहुत कम होता है।यह मंज़ूरी दो साल की अवधि के लिए दी गई।ये वे रिटायर्ड जज हैं, जिनके नामों की एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई:1. जस्टिस मोहम्मद फैज़ आलम खान।2. जस्टिस मोहम्मद असलम।3. जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिज़वी।4. जस्टिस रेनू अग्रवाल।5. जस्टिस ज्योत्सना शर्मा।इलाहाबाद हाईकोर्ट...

यूपी सरकार का राजनीतिक जाति रैलियों पर बैन प्रभावी होना चाहिए, बच्चों में सही संस्कार ही स्थायी समाधान: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी सरकार का राजनीतिक जाति रैलियों पर बैन प्रभावी होना चाहिए, बच्चों में सही संस्कार ही स्थायी समाधान: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में 2013 में दायर जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया, जिसमें सभी जाति-आधारित राजनीतिक रैलियों पर बैन लगाने और भारत के चुनाव आयोग (ECI) को ऐसी रैलियां आयोजित करने वाली राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई।यह देखते हुए कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले ही ऐसी सभाओं पर पूरी तरह से रोक लगाR, जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने सरकारी आदेश को सख्ती और प्रभावी ढंग से लागू करने की...

पत्नी ने पति की USA में तलाक की कार्यवाही रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की
पत्नी ने पति की USA में तलाक की कार्यवाही रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की

एक भारतीय महिला ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें उसने संयुक्त राज्य अमेरिका के रोड आइलैंड राज्य में फैमिली कोर्ट में अपने पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही को चुनौती दी। महिला का आरोप है कि विदेशी कार्यवाही अधिकार क्षेत्र से बाहर है और अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।याचिका में कहा गया,"विदेशी तलाक की कार्यवाही साफ तौर पर अधिकार क्षेत्र से बाहर, दमनकारी और संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है। इनका इस्तेमाल जबरदस्ती, उगाही और...

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 10 मार्च तक एसिड अटैक पीड़ितों को बकाया मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 10 मार्च तक एसिड अटैक पीड़ितों को बकाया मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए फंड जारी करने का निर्देश दिया, जिनके आवेदन पहले ही मंजूर हो चुके हैं। कोर्ट को बताया गया कि सरकारों द्वारा फंड जारी न करने के कारण मुआवजे की अनुमति देने वाले कोर्ट के आदेश अप्रभावी बने हुए।कोर्ट ने आदेश दिया,"जहां भी एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजा देने की मंजूरी दी गई और जिला/राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण या केंद्र शासित प्रदेश कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा राज्य सरकार के संबंधित विभागों को सूचना दी गई, वहां...

इसे ठीक करना होगा: CJI सूर्यकांत ने फैसले सुनाने में देरी पर कहा, हाईकोर्ट चीफ जस्टिस कॉन्फ्रेंस में उठाएंगे मुद्दा
'इसे ठीक करना होगा': CJI सूर्यकांत ने फैसले सुनाने में देरी पर कहा, हाईकोर्ट चीफ जस्टिस कॉन्फ्रेंस में उठाएंगे मुद्दा

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने मंगलवार को कुछ हाईकोर्ट जजों द्वारा कई महीनों तक फैसले सुरक्षित रखने के बाद सुनाने में हो रही देरी पर अपनी चिंता दोहराई।CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह 7-8 फरवरी को होने वाली हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की आगामी कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को उठाएंगे।CJI सूर्यकांत ने कहा,"यह भी एजेंडा में से एक है जिसे हमने पहले ही उठाया है और इस पर चर्चा करना चाहेंगे।" CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच चार दोषियों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो...

क्या चश्मदीदों को चोटों को मापना होता है?: हत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट
'क्या चश्मदीदों को चोटों को मापना होता है?': हत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना की, जिसमें ज़मीन विवाद को लेकर अनुसूचित जाति के सदस्य पर हमला करने और उसकी मौत का कारण बनने के आरोपी 2 लोगों को जमानत दी गई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच मृतक की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को दी गई जमानत को चुनौती दी गई। दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की,"हाईकोर्ट ने क्या कारण बताया? कोई खास आरोप नहीं हैं? ऐसे मामले में जमानत...