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'सरकार सबसे बड़ी वादी, पेंडेंसी बढ़ा रही'—CISF मामले में अनावश्यक अपील पर फटकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार (Union of India) पर ₹25,000 का जुर्माना लगाते हुए उसकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। यह याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें CISF के एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी रद्द करते हुए उसे 25% बैक वेजेस देने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की इस अपील पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह समझ से परे है कि हाईकोर्ट के सुविचारित आदेश को क्यों चुनौती दी गई।अदालत...
गोवा नाइटक्लब आग कांड में लूथरा बंधुओं को जमानत, NOC जालसाजी मामले में अभी जेल में रहेंगे
गोवा के चर्चित नाइटक्लब आग हादसे में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मेरसेस स्थित सेशन कोर्ट ने बुधवार को बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा को जमानत दी। बता दें, इस भीषण हादसे में 25 लोगों की मौत हुई थी।लूथरा बंधुओं की ओर से पेश एडवोकेट तुषाण रावल ने जानकारी देते हुए कहा,“सेशन कोर्ट ने नाइटक्लब आग मामले में नियमित जमानत दी लेकिन फिलहाल उनकी रिहाई नहीं होगी, क्योंकि मापुसा पुलिस ने उन्हें NOC जालसाजी मामले में हिरासत में लिया हुआ है।” गौरतलब है कि उत्तरी गोवा के अर्पोरा...
अनीता आडवाणी का दावा खारिज, राजेश खन्ना संग संबंध को 'विवाह' मानने से इनकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने संबंध को विवाह का दर्जा देने की मांग की थी।जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने अनीता आडवाणी द्वारा दायर प्रथम अपील को खारिज करते हुए 2017 में मुंबई के डिंडोशी सिविल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सिविल कोर्ट ने उनके मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।अनीता आडवाणी का दावा था कि वह राजेश खन्ना के साथ लगभग एक दशक तक लिव-इन संबंध में रहीं और वर्ष 2012 में उनके निधन तक...
मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को भी मिलेगा इलाज खर्च का हक: हाईकोर्ट ने नियम में किया बदलाव
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा उपस्थिति) नियम 2011 के नियम 16 की व्याख्या को व्यापक बनाते हुए कहा कि अब मृत या असमर्थ कर्मचारी के कानूनी वारिस भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) का दावा कर सकेंगे।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नियम 16 को रीड डाउन करते हुए इस तरह पढ़ा जाना चाहिए कि यदि लाभार्थी (बेनेफिशियरी) की मृत्यु हो जाए या वह दावा करने में असमर्थ हो, तो उसके कानूनी वारिस भी दावा प्रस्तुत कर...
'शराब व्यक्तिगत पसंद, लेकिन सार्वजनिक असुविधा नहीं'—रिक्रिएशन क्लब का लाइसेंस रद्द: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मनोरंजन क्लब को दिए गए शराब लाइसेंस (FL2) को रद्द करते हुए कहा है कि शराब पीना भले ही व्यक्तिगत पसंद हो, लेकिन इससे किसी इलाके के निवासियों को असुविधा या खतरा नहीं होना चाहिए।जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस एम. जोतिरामन की खंडपीठ मदुरै के थंडलाई गांव स्थित PONS Recreation Club को दिए गए लाइसेंस के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह इलाका जल्लिकट्टू जैसी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है और स्थानीय लोग...
समन न मानने पर केजरीवाल की बरी पर ED की चुनौती, आबकारी नीति मामले में नोटिस जारी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन का पालन न करने के मामलों में बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने पारित किया। अदालत ने केजरीवाल से जवाब मांगा है और मामले को 29 अप्रैल को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही, ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड (TCR) भी तलब किया गया है।मामला कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा है, जिसमें ED ने...
घर में प्रार्थना सभा पर रोक नहीं, अनुमति की जरूरत नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है। इसके लिए किसी भी प्राधिकरण से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है बशर्ते इससे कानून-व्यवस्था या अन्य नियमों का उल्लंघन न हो।जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पुलिस द्वारा जारी नोटिसों को रद्द किया, जिनमें याचिकाकर्ताओं को अपने घर में ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभा आयोजित करने से रोका गया था।अदालत ने कहा,“किसी व्यक्ति को अपने निवास स्थान...
दस्तावेज के अभाव में एडमिशन से इनकार गलत, हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को दिलाया दाखिला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में NEET-PG 2025 की अभ्यर्थी को राहत देते हुए उसे कॉलेज में एडमिशन देने का निर्देश दिया। अभ्यर्थी को स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र (परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) न होने के आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया गया।डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देश या सूचना पुस्तिका (इन्फॉर्मेशन बुलेटिन) किसी वैधानिक नियम को कमजोर या निरस्त नहीं कर सकती।मामले में याचिकाकर्ता ने MBBS के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अस्थायी पंजीकरण प्राप्त किया और...
वैवाहिक विवादों में शिकायत दर्ज करने में देरी घातक हो सकती है: सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल वालों के खिलाफ 498A और दहेज उत्पीड़न मामला रद्द किया
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि वैवाहिक विवादों में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने में बिना किसी स्पष्टीकरण के देरी घातक हो सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला के ससुराल वालों (माता-पिता और ननद) के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि लगभग सात साल की देरी, जिसके लिए कोई पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, अभियोजन पक्ष के मामले पर गंभीर संदेह पैदा करती है।कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसने FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना किसी पुख्ता...
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उनके सोशल मीडिया पोस्ट के लिए फटकारा
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में पत्रकार, एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उनके सोशल मीडिया पोस्ट के लिए फटकारा। इन पोस्ट में एक व्यक्ति पर फ़्लाइट के अंदर हुई घटना के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए उसे "छेड़छाड़ करने वाला" (Molester) बताया गया।जस्टिस विकास महाजन ने कहा कि मीडिया हाउस और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म द्वारा बनाई गई कहानियों ने साफ़ तौर पर FIR की सीमाओं का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि इन प्रकाशनों ने न केवल FIR में लगाए गए आरोपों की रिपोर्ट की, बल्कि मामले पर समय से पहले...
बच्चे के भरण-पोषण के दावे में पिता के खिलाफ कमाने वाली माँ को पक्षकार बनाना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी बच्चे द्वारा अपने पिता के खिलाफ दायर भरण-पोषण की याचिका में कमाने वाली माँ को औपचारिक रूप से एक पक्षकार के तौर पर शामिल करना ज़रूरी नहीं है।हालांकि, जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट को 'साझी माता-पिता की ज़िम्मेदारी' के सिद्धांत के आधार पर भरण-पोषण की अंतिम राशि तय करते समय, कमाने वाले दोनों माता-पिता की आर्थिक क्षमता पर विचार करना चाहिए।सिंगल जज ने यह आदेश तब पारित किया, जब वह पिता द्वारा दायर एक आपराधिक...
मालिकाना हक के विवाद के कारण किसी कब्जेदार को बिजली की सप्लाई से मना नहीं किया जा सकता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली एक बुनियादी ज़रूरत है, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ कोई सिविल केस पेंडिंग होने के आधार पर किसी उपभोक्ता की बिजली सप्लाई बंद नहीं की जा सकती, जब तक कि बिजली सप्लाई रोकने का कोई साफ़-साफ़ आदेश न हो।जस्टिस निनाला जयसूर्या 62 साल की एक महिला की दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस महिला ने साल 2000 में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी और वह उस जगह पर खुद रहते हुए (घरेलू इस्तेमाल के लिए) एक होटल (व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए) चला रही थी। हालांकि, तब एक विवाद...
तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन उसका ऐलान किया जाता है; कोर्ट का बाद का आदेश सिर्फ़ ऐलानिया होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि मोहम्मदिया कानून के तहत, तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में कोर्ट का जो आदेश इसकी पुष्टि करता है, वह सिर्फ़ ऐलानिया प्रकृति का होता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने यह साफ़ किया कि कोर्ट का ऐसा आदेश फ़ैसले की तारीख से कोई नया तलाक नहीं बनाता, बल्कि यह तलाक के ऐलान की मूल तारीख से ही जुड़ा माना जाता है।बेंच ने साफ़ किया,"यह भी तय है कि जहाँ कोई पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में उसी के संबंध में आदेश लेने के लिए कोर्ट...
भरण-पोषण तय करते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि भरण-पोषण देते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और उसकी कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने पत्नी की पेशेवर योग्यताओं और रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर उसके पिछले काम को ध्यान में रखते हुए CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को दिए जाने वाले मासिक भरण-पोषण की रकम कम की।सिंगल जज ने फैमिली कोर्ट के आदेश में बदलाव करते हुए भरण-पोषण की रकम 18,000 रुपये से घटाकर 12,000 रुपये प्रति माह की थी।संक्षेप में कहें तो यह क्रिमिनल रिवीजन याचिका...
कोर्ट मार्शल प्रक्रिया में फाइनल ऑर्डर से पहले रिट याचिका स्वीकार्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि अनुशासनात्मक और कोर्ट मार्शल की कार्यवाही को चुनौती देने वाली रिट याचिका, अंतिम आदेश पारित होने से पहले स्वीकार्य नहीं है।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की एक डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की,“यह कानून की एक स्थापित स्थिति है कि जब तक इस तरह की कार्यवाही में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक हाई कोर्ट द्वारा रिट याचिका में कार्यवाही पर अंतिम निर्णय का इंतज़ार किए बिना कोई भी हस्तक्षेप अनुचित है।”इसके लिए 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम...
दिल्ली कोर्ट ने याचिका के AI जैसे 'बेमतलब' ड्राफ़्ट पर कड़ी फटकार लगाई, शिकायतकर्ता पर ₹20 हज़ार का जुर्माना लगाया
दिल्ली कोर्ट ने हाल ही में शिकायतकर्ता को FIR दर्ज करने की मांग वाली अर्जी दाखिल करने पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिका का ड्राफ़्ट देखकर ऐसा लगता है कि इसमें "इंसानी दिमाग के योगदान से ज़्यादा तकनीकी दखल" है। इससे कोर्ट का कीमती समय भी बर्बाद हुआ।राउज़ एवेन्यू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की ACJM नेहा मित्तल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत दायर अर्जी खारिज की। इस अर्जी में सैयद शाहनवाज़ हुसैन और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश देने की...
ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ इसलिए नकली नहीं माना जा सकता कि उसे स्मार्ट कार्ड में नहीं बदला गया: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी ड्राइविंग लाइसेंस को सिर्फ इसलिए नकली नहीं माना जा सकता कि वह बुकलेट के रूप में था और उसे स्मार्ट कार्ड में नहीं बदला गया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस तरह बीमित व्यक्ति के पक्ष में दिए गए एक फैसले के खिलाफ एक बीमा कंपनी द्वारा दायर अपील खारिज की।बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें 'द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' को निर्देश दिया गया कि वह M/s कपूर डीजल्स गैराज प्राइवेट लिमिटेड को एक दुर्घटना में नष्ट हुए ट्रक के नुकसान की भरपाई के...
हिरासत में बंद आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से पहले कानूनी सहायता या कम से कम सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब आरोपी न्यायिक हिरासत में हो तो ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे डिस्चार्ज अर्जी दाखिल करने के लिए एक कानूनी वकील मुहैया कराया जाना चाहिए। वहीं, यदि आरोपी ऐसे वकील को लेने से इनकार करता है तो आरोपों को तय करने के मुद्दे पर एक कानूनी वकील की सहायता से सुनवाई का अवसर अवश्य दिया जाना चाहिए।BNSS की धारा 262 और 263 का हवाला देते हुए, जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने कहा:“यह बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि एक ओर, कानून आरोपी को दस्तावेजों की प्रतियां मिलने के 60...
DoE की पहले से मंज़ूरी के बिना प्राइवेट स्कूल को बंद नहीं माना जा सकता, स्टाफ़ सैलरी का हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि किसी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल को सिर्फ़ इसलिए "कानूनी तौर पर बंद" नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसने शिक्षा निदेशालय (DoE) से पहले से मंज़ूरी लिए बिना काम करना बंद कर दिया> इस तरह एकतरफ़ा तौर पर काम बंद कर देने से कर्मचारियों की सैलरी और सर्विस के अधिकार खत्म नहीं हो जाते।जस्टिस संजीव नरूला यहां के एक प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले स्कूल - दयानंद आदर्श विद्यालय - से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।ये याचिकाएं टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ ने अपनी बकाया...
बिना क्रॉस एक्जामिनेशन के प्रारंभिक जांच के सबूत विभागीय निष्कर्षों का आधार नहीं बन सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी के खिलाफ पारित बर्खास्तगी आदेश रद्द किया। कोर्ट ने माना कि अनुशासनात्मक कार्यवाही दोषपूर्ण थी, क्योंकि जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों पर भरोसा किया, जबकि दोषी कर्मचारी को गवाहों से जिरह करने का अवसर नहीं दिया गया।कोर्ट ने दोहराया कि प्रारंभिक जांच से मिले सबूतों का इस्तेमाल नियमित विभागीय जांच में नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा।कोर्ट एक...



















