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राज्यपालों के लिए समयसीमा तय हो, 'वन नेशन, वन लैंग्वेज' नीति छोड़ी जाए: कुरियन जोसेफ समिति ने सुझाए संघीय सुधार
तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने संघ–राज्य संबंधों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में राज्यों की स्वायत्तता में लगातार हो रहे क्षरण को रोकने के लिए व्यापक संवैधानिक और संस्थागत सुधारों का प्रस्ताव किया गया है। समिति का गठन अप्रैल 2025 में राज्य स्वायत्तता से जुड़े सिद्धांतों का अध्ययन करने के लिए किया गया था। समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी एम. अशोक वर्धन शेट्टी और पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष प्रो. एम. नागनाथन भी सदस्य थे। जस्टिस...
सुप्रीम कोर्ट में CAA को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई 5 मई 2026 से
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 5 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। चीफ़ जस्टिस, जस्टीस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने आज प्रक्रियात्मक निर्देशों के लिए मामले पर विचार किया। यह मामला लगभग दो वर्ष बाद सूचीबद्ध हुआ है; इससे पहले 19 मार्च 2024 को सुनवाई हुई थी।सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने आग्रह किया कि असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से संबंधित याचिकाओं को अलग से सुना जाए, क्योंकि...
I-PAC छापे के दौरान ममता बनर्जी केवल TMC की गोपनीय फाइलें ही ले गईं, यह नहीं कहा जा सकता : सुप्रीम कोर्ट में ED
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IPAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) कार्यालय में छापे के दौरान पश्चिम बंगाल प्रशासन के हस्तक्षेप के खिलाफ दायर याचिका में एक प्रत्युत्तर हलफनामा (rejoinder affidavit) दाखिल किया है। इसमें राज्य सरकार के उस दावे का कड़ा विरोध किया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तलाशी स्थल से सामग्री ED की सहमति से ली थी।ED ने कहा कि जब सामग्री तलाशी स्थल से ले जाई गई, तब यह तय करना संभव नहीं रहा कि वह केवल तृणमूल कांग्रेस से संबंधित गोपनीय दस्तावेज थे या जांच से जुड़े आपत्तिजनक सबूत...
पालन की तिथि निर्धारित न हो तो अनिवार्य निषेधाज्ञा के क्रियान्वयन की सीमा अवधि डिक्री की तारीख से 3 वर्ष: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि अनिवार्य निषेधाज्ञा (mandatory injunction) संबंधी डिक्री में कार्य निष्पादन के लिए कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई हो, तो उसके क्रियान्वयन के लिए सीमा अवधि डिक्री की तारीख से तीन वर्ष होगी।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ उस मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें प्रथम अपीलीय न्यायालय ने 06.01.2005 को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अनिवार्य निषेधाज्ञा की डिक्री पारित की थी, लेकिन उसमें आदेश के पालन की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई थी।याचिकाकर्ताओं ने 12.08.2010...
सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भरण-पोषण न्यायाधिकरण बच्चों को बेदखल करने का आदेश नहीं दे सकता: कलकत्ता हाइकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरण को धारा 4 और 5 की कार्यवाही में बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण की शक्तियां केवल मासिक भरण-पोषण तय करने तक सीमित हैं, उन्हें परिसर खाली कराने तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।जस्टिस कृष्णा राव ने उप-मंडल पदाधिकारी (जो भरण-पोषण न्यायाधिकरण के रूप में कार्य कर रहे थे) द्वारा पारित आदेशों में आंशिक...
जेल में बंद आरोपी पर भी लगाया जा सकता है रासुका, यदि रिहाई पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका हो: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी को यह संतोष हो कि जेल में बंद आरोपी के जमानत पर रिहा होने की वास्तविक संभावना है और रिहाई के बाद वह सार्वजनिक व्यवस्था के प्रतिकूल गतिविधियों में संलग्न हो सकता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत निरोधात्मक आदेश पारित किया जा सकता है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की खंडपीठ ने सुनील कुमार गुप्ता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका)...
फिल्म 'घूसखोर पंडित' विवाद: नाम बदलने की सहमति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निस्तारित की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स पर प्रस्तावित फिल्म 'घूसखोर पंडित' के खिलाफ दायर याचिका का गुरुवार को निस्तारण किया। यह निर्णय तब आया जब फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने शपथपत्र के माध्यम से अदालत को सूचित किया कि फिल्म का विवादित टाइटल बदला जाएगा।निर्देशक ने यह भी कहा कि नए टाइटल को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया। याचिका इस आधार पर दायर की गई कि फिल्म का नाम पूरे ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक है।इससे पहले सुनवाई के दौरान पीठ ने भी टाइटल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि समाज के किसी वर्ग को क्यों नीचा...
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड पर हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 फरवरी) को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु राज्य वक्फ बोर्ड के कामकाज पर रोक लगा दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि बोर्ड का गठन कानून के अनुसार नहीं हुआ है, क्योंकि इसमें दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना, बार काउंसिल के एक सदस्य को नामित करना और एक पेशेवर अनुभव वाले व्यक्ति को नियुक्त करना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड द्वारा...
अनुशासनात्मक दंड अपराध के अनुरूप होना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने रिटायर के बाद दी गई सजा में किया संशोधन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई में लगाया गया दंड सिद्ध कदाचार की गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने रिटायरमेंट के बाद वेतनमान में 21 चरणों की कटौती के दंड को अत्यधिक मानते हुए उसमें संशोधन किया।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,“अनुशासनात्मक कार्यवाही में हस्तक्षेप का दायरा अत्यंत सीमित है। यह स्थापित विधि है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह हाइकोर्ट तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब निष्कर्ष मनमाने, असंगत, प्रक्रियात्मक त्रुटि से ग्रस्त या स्पष्ट पूर्वाग्रह से प्रभावित...
एकल मां को पूर्ण अभिभावक मानना दान नहीं, संवैधानिक निष्ठा: बॉम्बे हाइकोर्ट ने दिया बच्ची के स्कूल अभिलेख से पिता का नाम हटाने का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी एकल मां को बच्चे की नागरिक पहचान के लिए पूर्ण अभिभावक के रूप में मान्यता देना कोई दान नहीं, बल्कि संविधान के प्रति निष्ठा है। अदालत ने नाबालिग बच्ची के स्कूल रिकॉर्ड से उसके पिता का नाम हटाने और उसकी जाति मराठा के स्थान पर मां की जाति महार (अनुसूचित जाति) दर्ज करने का आदेश दिया।जस्टिस विभा कंकणवाडी और जस्टिस हितेन वेणगावकर की खंडपीठ ने कहा कि जो मां अपने बच्चे का अकेले पालन-पोषण कर रही है, उसके अधिकारों को विधिवत मान्यता मिलनी...
डेटा संरक्षण कानून की वैधता को चुनौती, दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को डिजिटल निजी डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की विभिन्न धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। याचिका में कहा गया कि संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(क) और 21 का उल्लंघन करते हैं।चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने एडवोकेट डॉ. चंद्रेश जैन द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया।याचिका में डिजिटल निजी डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की धाराएं 17 से 21, 23, 29, 33, 34, 36, 37, 39, 40, 44 और अनुसूची के...
हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
झारखंड हाइकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 176(1-क) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196) के तहत पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच अनिवार्य है। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी, क्योंकि राज्य ने खुलासा किया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 लोगों की हिरासत में मौत हुई।चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग...
बायोपिक विवाद में फिल्मकार विक्रम भट्ट और पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को जमानत, सुप्रीम कोर्ट का पक्षकारों को मध्यस्थता का निर्देश
विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वतम्बरी भट्ट को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कथित बहु-करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में नियमित जमानत दे दी। साथ ही अदालत ने दोनों पक्षों को भुगतान विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाने की सलाह दी।यह मामला अजय मुरदिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। मुरदिया इनिद्रा IVF के मालिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भट्ट दंपति ने उनकी दिवंगत पत्नी की बायोपिक बनाने के नाम पर उनसे 30 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया और ऊंचे मुनाफे का भरोसा...
मोटर दुर्घटना मामला: मालवाहक वाहन में नि:शुल्क यात्री होने पर भी बीमाकर्ता पहले भुगतान कर वसूली कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी मालवाहक वाहन में यात्रा कर रहा व्यक्ति 'नि:शुल्क यात्री' माना जाए और बीमा कंपनी प्रत्यक्ष रूप से मुआवजा देने की जिम्मेदार न हो तब भी अदालत बीमाकर्ता को पहले मुआवजा अदा करने और बाद में वाहन स्वामी से राशि वसूलने का निर्देश दे सकती है, बशर्ते वाहन मुख्य रूप से सामान ढोने के लिए किराये पर लिया गया हो और यात्रा केवल सहायक उद्देश्य रही हो।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का आदेश बहाल...
IPC की धारा 498A जैसे वैवाहिक मामलों में यांत्रिक तरीके से LOC जारी नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए (भारतीय न्याय संहिता की धारा 85) के तहत दर्ज वैवाहिक क्रूरता के मामलों में लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एलओसी केवल अपवाद स्वरूप और विशेष परिस्थितियों में ही जारी की जा सकती है न कि यांत्रिक तरीके से।जस्टिस के. श्रीनिवास रेड्डी की एकलपीठ ने आरोपी के खिलाफ जारी LOC को निरस्त करते हुए कहा कि पुलिस को यह देखना आवश्यक है कि क्या आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है या गिरफ्तारी...
S.7 IBC | दिवाला याचिका स्वीकार करने से पहले ऋण चुकाने की कॉरपोरेट देनदार की क्षमता पर विचार नहीं किया जाएगाः सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 फरवरी) को पुष्टि की कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने के लिए दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) की धारा 7 के तहत उपाय विवेकाधीन नहीं है, बल्कि अनिवार्य है, जिससे निर्णय लेने वाले प्राधिकरण के पास ऋण का अस्तित्व और चूक स्थापित होने के बाद आवेदन को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।"निर्णय प्राधिकरण को अपने ऋण का भुगतान करने के लिए एक कॉरपोरेट देनदार की अक्षमता में जाने की आवश्यकता नहीं है। यह पूर्ववर्ती कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 433 (ई) के...
अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना: राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल विभाग को फटकारा, प्रमुख सचिव को तलब किया
राजस्थान हाइकोर्ट ने मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना और पूर्ण उपेक्षा व अनादर करार दिया। अदालत ने विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर देरी के संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ कॉलेज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने फिजियोथेरेपी संस्थान स्थापित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया, लेकिन...
आप यहां क्यों आए हैं: दिल्ली हाइकोर्ट ने गायक जुबिन नौटियाल की याचिका पर क्षेत्राधिकार पर उठाए सवाल
दिल्ली हाइकोर्ट ने गायक जुबिन नौटियाल द्वारा अपने पर्सैनलिटी राइट्स की सुरक्षा को लेकर दायर वाद में क्षेत्राधिकार को लेकर गंभीर सवाल उठाए । अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही यह पूछा कि जब गायक उत्तराखंड में रहते हैं तो उन्होंने वहां की अदालत का रुख क्यों नहीं किया?जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सुनवाई की शुरुआत में ही याचिकाकर्ता के वकील से कहा,“आप यहां क्यों आए हैं, जो यहां उपलब्ध है, वह वहां भी उपलब्ध है। वहां की अदालतें अभी समाप्त नहीं हुई हैं।”याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि...
प्रतिकूल टिप्पणियों से बचें: अवध बार एसोसिएशन ने CJI से जस्टिस पंकज भाटिया पर टिप्पणी हटाने की मांग की
अवध बार एसोसिएशन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को औपचारिक प्रतिवेदन भेजकर इलाहाबाद हाइकोर्ट के जजों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही प्रतिकूल टिप्पणियों पर गंभीर चिंता जताई। एसोसिएशन ने विशेष रूप से जस्टिस पंकज भाटिया के खिलाफ हाल में की गई टिप्पणी को वापस लेने और अभिलेख से हटाने की मांग की।चार पृष्ठ के प्रतिवेदन में कहा गया कि हाइकोर्ट के जज पहले से ही लंबित मामलों के बढ़ते बोझ के कारण भारी दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे वातावरण में यदि अपीलीय अधिकार क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट की ओर से...
UPI धोखाधड़ी रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
डिजिटल भुगतान प्रणाली में बढ़ती धोखाधड़ी के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम से जवाब तलब किया। अदालत ने UPI के माध्यम से हो रहे वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने और पीड़ितों को शीघ्र धनवापसी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की मांग पर नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने वित्त मंत्रालय के माध्यम से केंद्र सरकार RBI तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम से...




















