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सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट जजों ने अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर व्यक्त किया शोक
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों ने रजिस्ट्री अधिकारियों के साथ मिलकर आज यानी गुरुवार को अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।सीजेआई ने बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल के मरीजों के लिए भी चिंता व्यक्त की, जिनके लिए लंदन जाने वाला विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया।सीजेआई ने कहा,"इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। उन्हें...
जब तक अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं कर देता, तब तक लास्ट-सीन-थ्योरी लागू नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को बरी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को खारिज करते हुए तथा 4 बच्चों सहित 6 लोगों के परिवार की हत्या के आरोपी अपीलकर्ताओं को बरी करते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमे में अंतिम बार साथ देखे जाने के साक्ष्य के महत्व को "अत्यधिक महत्व" नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह अपने आप में किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के क्रियान्वयन द्वारा आरोपी पर दायित्व स्थानांतरित किए जाने से पहले, यह माना जाना...
कैदियों की समयपूर्व रिहाई: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड की संरचना, निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (11 जून) को सजा समीक्षा बोर्ड (SRB) के सदस्यों द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता में नियुक्त किए जाने के बाद SRB की बैठकों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न होने और इसके बजाय अपने प्रतिनिधियों को भेजने की प्रथा पर आपत्ति जताई।SRB का गठन कैदियों को दी गई सजा की समीक्षा करने और उचित मामलों में समयपूर्व रिहाई की सिफारिश करने के लिए किया जाता है।जस्टिस गिरीश कथपाली आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी के मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसकी समयपूर्व रिहाई के लिए लगातार आवेदन SRB द्वारा...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 15| जवाब के साथ हलफनामा/दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं, निर्देशात्मक प्रकृति का: हाईकोर्ट ने दोहराया
राजस्थान हाईकोर्ट ने रमेश कुमार बनाम चंदू लाल व अन्य मामले में डिवीजन बेंच के निर्णय पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 15 अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (Directory) प्रकृति की है।अधिनियम की धारा 15 के अनुसार पक्षकार को अपने जवाब के साथ हलफनामे और दस्तावेज़ दाखिल करने होते हैं।जस्टिस अनूप कुमार धंड की एकल पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता का...
भड़काऊ भाषण न देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 जून) को कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को जमानत देने से इनकार किया। अपनी याचिका में शाह ने आतंकी फंडिंग के कथित मामले में जमानत देने से इनकार करने वाले NIA कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने NIA कोर्ट का फैसले बरकरार रखते हुए कहा कि भड़काऊ भाषणों या गैरकानूनी गतिविधियों को भड़काने को सही ठहराने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।खंडपीठ ने कहा,"इस अधिकार (अभिव्यक्ति की...
सीनियर सिटीजन भरण-पोषण ट्रिब्यूनल में पक्षकारों की ओर से पैरवी करने का अधिकार वकीलों को : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जब भी कोई वकील भरण-पोषण ट्रिब्यूनल के समक्ष किसी पक्षकार की ओर से उपस्थित होता है तो उसे माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत उक्त न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई और पैरवी करने का अधिकार होगा।जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस की एकल पीठ ने पाया कि मापुसा में एक भरण-पोषण ट्रिब्यूनल ने बेटे के खिलाफ उसकी बूढ़ी मां को 10,000 रुपये प्रति माह देने का आदेश पारित किया था, जबकि माता-पिता और सीनियर सिटीजन के...
पूर्व प्रेमिका की 45 बार चाकू घोंपकर हत्या करने वाले व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा हुई कम, हाईकोर्ट ने कहा- 'दुर्लभतम में से दुर्लभतम' मामला नहीं
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा कम की, जिस पर अपनी पूर्व प्रेमिका की 45 बार चाकू घोंपकर हत्या करने का आरोप था। इसके बजाय दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने माना कि यह अपराध मृत्युदंड के लिए दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है और दोषी को सुधारा नहीं जा सकता।खंडपीठ ने कहा:मृत्युदंड और बिना किसी छूट के आजीवन कारावास की सजा से संबंधित अधिकारियों के अनुपात सहित वर्तमान मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में...
बेंगलुरु भगदड़ मामले में RCB मार्केटिंग हेड को मिली अंतरिम रिहाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 जून) को RCB मार्केटिंग हेड निखिल सोसले को अंतरिम रिहाई का आदेश दिया, जिन्होंने बेंगलुरु में चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हुई भगदड़ के सिलसिले में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी। यह घटना IPC टीम के IPL 2025 विजय समारोह से पहले 4 जून को हुई थी।अदालत ने कार्यक्रम आयोजक कंपनी मेसर्स डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के सुनील मैथ्यू, किरण कुमार एस और शामंत एन पी माविनाकेरे को अंतरिम रिहाई का आदेश देकर अंतरिम राहत भी प्रदान की।जस्टिस एसआर...
लंबे समय तक शादी का झांका देकर यौन संबंध बनाने के आरोपी को हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा करके महिला का यौन शोषण करने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी सामग्री है, जो दर्शाती है कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता से संबंध बनाए।अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाए और फिर अपना वादा पूरा करने में विफल रहा।जस्टिस संजय धर की पीठ ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि FIR प्रेरित या निराधार है, जबकि यह देखते हुए कि जांच के चरण में जमानत देने से...
पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, वास्तविक जेल अवधि से नहीं: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार का फॉर्मूले अमान्य घोषित किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने समय से पहले रिहाई के मामले में सजा अवधि की गणना करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा जारी फॉर्मूले को अमान्य घोषित करते हुए कहा कि पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, न कि जेल में बिताए गए वास्तविक समय से।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"यह निर्देश दिया जाता है कि पैरोल अवधि को केवल कुल सजा से घटाया जाना चाहिए, न कि वास्तविक सजा से। वास्तविक सजा का मतलब केवल कैदी द्वारा जेल परिसर में बिताया गया वास्तविक समय होगा।"न्यायालय दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था,...
कॉलेजियम सिस्टम अपूर्ण, मगर कार्यपालिका के हस्तक्षेप को सीमित करती है और जजों को बाहरी दबावों से बचाती है: जस्टिस सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम अपनी अपूर्णताओं के बावजूद, कार्यपालिका और विधायिका के हस्तक्षेप के खिलाफ न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।पिछले सप्ताह अमेरिका के सिएटल यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस कांत ने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम न्यायपालिका की स्वायत्तता को सुरक्षित रखती है।अपने संबोधन में जस्टिस कांत ने कहा कि भारत में विकसित कॉलेजियम सिस्टम शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के मूल अनुप्रयोग का एक सम्मोहक मॉडल है, जो यह सुनिश्चित...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धाराएँ 513 से 515 : आपराधिक मामलों में वाद की सीमा
भूमिका (Introduction)भारतीय न्याय व्यवस्था में केवल अपराध के घटित होने मात्र से आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही (Legal Proceedings) अनिश्चित काल तक नहीं चलाई जा सकती। कुछ मामलों में कानून ने एक निश्चित समय सीमा (Limitation Period) निर्धारित की है, जिसके भीतर संबंधित अदालत को अपराध के संज्ञान (Cognizance) में लेना होता है। यह समय सीमा इसलिए निर्धारित की जाती है ताकि न्याय में अनावश्यक देरी न हो, साक्ष्य समय रहते उपलब्ध हों, और आरोपी को अनिश्चित काल तक कानूनी अनिश्चितता में न रहना पड़े। ...
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 178 से 186 : अलवियन द्वारा भूमि का जुड़ना और किराया संशोधन
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 राज्य के भूमि प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण अधिनियम है, जो बंदोबस्त, किराया निर्धारण, भू-प्रबन्ध, और सह-स्वामित्व (co-ownership) जैसी विषयवस्तुओं को विस्तार से नियंत्रित करता है। इस लेख में हम धाराओं 178 से 186 का सरल और क्रमबद्ध विश्लेषण करेंगे, जिसमें हर धारा का उद्देश्य, प्रक्रिया और उदाहरणों सहित विवेचन किया गया है।धारा 178 — अल्पकालिक बंदोबस्त (Short Term Settlement) जब किसी क्षेत्र के लिए धारा 175 के दूसरे अपवाद के तहत संक्षिप्त अवधि के लिए बंदोबस्त किया...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 68 और 69: निगरानी, नियंत्रण और सूचना तक पहुँच की सरकारी शक्ति
आज के डिजिटल युग में इंटरनेट और कंप्यूटर संसाधन हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। सरकारी विभागों, निजी कंपनियों और आम नागरिकों का बड़ा हिस्सा किसी न किसी रूप में डिजिटल साधनों पर निर्भर है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि इंटरनेट और डिजिटल डेटा से जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए एक संतुलित और प्रभावी कानूनी ढांचा मौजूद हो। भारत सरकार ने इसी उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) को लागू किया था। इस अधिनियम में कई ऐसे प्रावधान हैं जो...
IPC | महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की मानसिक स्थिति धारा 354 के तहत मामला दर्ज करने के लिए जरूरी, सिर्फ आपराधिक बल काफी नहीं: जेएंडके हाईकोर्ट
श्रीनगर स्थित जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 447 के तहत दर्ज एक एफआईआर को खारिज करते हुए कहा कि किसी महिला पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग, जो ऐसी महिला की शील भंग करने की मनःस्थिति में न हो, उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध नहीं कहा जा सकता। जस्टिस संजय धर की पीठ ने जोर देकर कहा,“.. पीड़ित महिला की शील भंग करने की मंशा या यह जानना कि आरोपी द्वारा किए गए इस कृत्य से पीड़ित महिला की शील भंग होगी, भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध...
क्या IBC के अंतर्गत अपील की समय-सीमा में प्रमाणित प्रति प्राप्त करने का समय जोड़ा जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट ने Sanket Kumar Agarwal बनाम APG Logistics Pvt. Ltd. मामले में 1 मई 2023 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें यह तय किया गया कि क्या NCLT (National Company Law Tribunal) द्वारा दिए गए आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) प्राप्त करने में लगा समय IBC (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) के अंतर्गत अपील की समय-सीमा (Limitation Period) की गणना में से बाहर (Excluded) किया जाना चाहिए।यह फैसला केवल समय-सीमा की तकनीकी व्याख्या तक सीमित नहीं था, बल्कि ई-फाइलिंग (E-Filing) को बढ़ावा...
पति की शारीरिक दुर्बलता का उपहास करना, उसे 'केम्पा' और 'निखट्टू' कहना मानसिक क्रूरता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी का अपने पति की शारीरिक अक्षमता/दुर्बलता का उपहास करना और उस पर अपमानजनक टिप्पणी करना, उसके लिए 'निखट्टू' या 'केम्पा' जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना मानसिक क्रूरता का एक रूप है, यह तलाक दिए जाने के लिए पर्याप्त आधार है। फैमिली कोर्ट की ओर से पारित तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए जस्टिस बिभु प्रसाद राउत्रे और जस्टिस चित्तरंजन दाश की खंडपीठ ने कहा -“एक व्यक्ति से सामान्य रूप से दूसरे व्यक्ति को सम्मान देने की अपेक्षा की जाती है और जहां पति और पत्नी के रिश्ते...
दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 जून) को कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की अपील खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने आतंकी फंडिंग के कथित मामले में जमानत देने से इनकार करने वाले NIA अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा,"वर्तमान अपील खारिज की जाती है।”शाह ने विशेष NIA अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज करने के 7 जुलाई 2023 के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।इससे पहले शाह की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कॉलिन...
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश मेगा DSC शिक्षक भर्ती परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश मेगा डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमिटी परीक्षा, 2025 (AP DSC-2025) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह परीक्षा प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह 16 जून को ग्रीष्मावकाश के बाद पुनः खुल रहे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का रुख करें।सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस मनमोहन ने टिप्पणी की,"परीक्षा शुरू हो चुकी है और हम इसे बीच में नहीं रोक सकते। परीक्षा आयोजित करने की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को उम्रकैद भुगत रहे कैदी की समयपूर्व रिहाई पर विचार करने का निर्देश दिया, कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला देते हुए, जिसमें सजा सुनाने की सुधारात्मक नीति के तत्व का उल्लेख किया गया है, सरकार को निर्देश दिया कि वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी की समयपूर्व रिहाई के आवेदन पर नए सिरे से विचार करे, जिसने पैरोल की अवधि पार कर ली थी। जस्टिस गिरीश काठपाली ने दिल्ली टोपरा के पंचम स्तंभ के शिलालेख का भी संदर्भ दिया, जिसमें सम्राट अशोक के कथन का उल्लेख है कि उन्होंने 26 वर्षों की अवधि में 25 बार कैदियों को छोड़ा था। पीठ ने कहा, "प्राचीन विचारकों के...



















