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वादा किया गया फाइबर कनेक्शन न देने पर चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने रिलायंस जियो को दोषी ठहराया
शिकायतकर्ता, सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 मार्च 2024 को जियो से ऑप्टिक-फाइबर वायर्ड ब्रॉडबैंड लिया और पूरे साल के लिए ₹12,729 पहले ही दे दिए। अगले दिन कनेक्शन लगा दिया गया, लेकिन पता चला कि यह वायर्ड नहीं बल्कि वायरलेस है।जब उन्होंने आपत्ति की, तो जियो वालों ने कहा कि यह वायरलेस कनेक्शन भी वायर्ड जैसा ही अनलिमिटेड डेटा देगा। लेकिन करीब 18 दिन बाद ही उन्हें मैसेज आने लगे कि उनका डेटा खत्म हो गया है और अब दोबारा रिचार्ज करना होगा।ग्राहक ने क्या किया?उन्होंने 3 अप्रैल 2024 को कनेक्शन बंद कराने और पैसे...
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...
समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि एक बार जमानत दिए जाने के बाद केवल समझौते की शर्तों का पालन न करना या भुगतान करने के वादे को पूरा न कर पाना, अपने आप में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस और कानूनी आधार आवश्यक होता है।यह टिप्पणी जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने उस मामले में की, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक आयुक्त, रांची द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। उक्त आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को पहले से मिली अग्रिम...
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...
समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच स्थानांतरण पदोन्नति नहीं, मैकप लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच किया गया स्थानांतरण पदोन्नति नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे पार्श्व नियुक्ति माना जाएगा। ऐसे स्थानांतरण को संशोधित आश्वस्त कैरियर प्रगति योजना के तहत मिलने वाले सीमित वित्तीय उन्नयन के विरुद्ध नहीं गिना जा सकता।जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने यह फैसला केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए दिया। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का आदेश बरकरार रखा, जिसमें रेलवे कर्मचारियों को मैकप योजना के तहत अतिरिक्त...
अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए...
CrPC | समन मामले में संज्ञान लेने के बाद धारा 251 के स्तर पर आरोपी को बरी नहीं कर सकता मजिस्ट्रेट: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन वाद में एक बार जब मजिस्ट्रेट संज्ञान ले लेता है और आरोपी को समन जारी कर देता है तो उसके बाद दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 251 के चरण पर आरोपी को कार्यवाही से मुक्त करने अथवा बरी करने का अधिकार मजिस्ट्रेट को नहीं है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि CrPC की धारा 251 का उद्देश्य केवल इतना है कि आरोपी को उस अपराध का विवरण बताया जाए, जिसका उस पर आरोप है। उससे यह पूछा जाए कि वह दोष स्वीकार करता है या अपना बचाव प्रस्तुत करना चाहता है। यह प्रावधान मजिस्ट्रेट को न...
Motor Vehicle Act | फैक्ट्रियों के अंदर इस्तेमाल होने वाले एक्सकेवेटर, डंपर वगैरह मोटर वाहन नहीं, इसलिए उन पर रोड टैक्स नहीं लगेगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट जैसे एक्सकेवेटर, डंपर, लोडर और डोजर, जिनका इस्तेमाल सिर्फ़ फैक्ट्री या बंद जगह के अंदर होता है, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2(28) के तहत "मोटर वाहन" नहीं हैं और इसलिए उन पर रोड टैक्स नहीं लगेगा।अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की याचिका को मंज़ूर करते हुए जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने गुजरात हाईकोर्टा का फैसला रद्द कर दिया, जिसने ऐसी मशीनरी पर करोड़ों रुपये के रोड टैक्स की राज्य की मांग...
मद्रास हाईकोर्ट ने विजय की फिल्म 'जना नायकन' को CBFC को U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को पहले दिए गए सिंगल जज के आदेश पर अस्थायी रोक लगाई, जिसमें CBFC को विजय अभिनीत तमिल फिल्म 'जना नायकन' को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था।चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा:"प्रतिवादी यूनियन ऑफ इंडिया को पर्याप्त समय नहीं दिया गया... UoI की एक मुख्य शिकायत यह थी कि उन्हें जवाब देने का समय नहीं दिया गया। दूसरी शिकायत यह है कि 6 जनवरी के पत्र को चुनौती नहीं दी गई, लेकिन कोर्ट (सिंगल...
रेलवे की 'नो-रिफंड' पॉलिसी को चुनौती: बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट रिफंड नीति के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें रेलवे की 'नो-रिफंड' नीति को 'मनमाना' और 'असंवैधानिक' करार दिया। याचिका विशेष रूप से कंफर्म तत्काल टिकटों के रद्दीकरण (Cancellation) पर एक भी रुपया वापस न देने के रेलवे के नियमों को चुनौती दी।प्रमुख आरोप: जनता की जेब पर डाका और 'अन्यायपूर्ण लाभ' (Unjust Enrichment)याचिकाकर्ता और वकील सचिन तिवारी ने तर्क दिया कि जब कोई यात्री अपना कंफर्म तत्काल टिकट रद्द करता है तो रेलवे उस सीट को तुरंत वेटिंग लिस्ट...
सुप्रीम कोर्ट ने 'विजिलेंट' द्वारा उत्पीड़न और हमले का आरोप लगाने वाली महिला डॉग फीडर्स से FIR दर्ज कराने और हाईकोर्ट जाने को कहा
आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज मौखिक रूप से उन महिला डॉग फीडर्स से, जो "एंटी-फीडर विजिलेंट" द्वारा उत्पीड़न और हमले का आरोप लगा रही है, FIR दर्ज कराने और राहत के लिए संबंधित हाई कोर्ट जाने को कहा।बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये हरकतें आपराधिक अपराध हैं और पीड़ित व्यक्तियों से FIR दर्ज कराने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने को कहा। उसने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट सभी व्यक्तिगत मामलों पर सुनवाई नहीं कर सकता।जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा,"अगर कोई महिलाओं को परेशान कर रहा...
धारा 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज धारा 498-A आईपीसी का मामला रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि“कानून असंगति (incompatibility) या अपूर्ण विवाह को अपराध नहीं बनाता। धारा 498-A वैवाहिक समस्याओं का सार्वभौमिक इलाज नहीं है।”जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि धारा 498-A एक विशिष्ट और सीमित प्रावधान है, जो केवल गंभीर और जानलेवा स्तर की क्रूरता या दहेज से जुड़ी प्रताड़ना को दंडित करने के लिए बनाया गया है।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता अबुज़र अहमद और उनकी पत्नी की शादी...
पिता द्वारा बलात्कार 'साधारण अपराध से परे', पीड़िता बेटी की गवाही ही पर्याप्त: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले में बलात्कार की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता स्वयं, जो कि अभियुक्त की बेटी है, घटना की सबसे विश्वसनीय और सर्वोत्तम साक्षी है, क्योंकि अपने ही पिता को झूठा फँसाने का उसके पास कोई कारण नहीं हो सकता।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को सामाजिक बदनामी, पारिवारिक परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता के मद्देनज़र संतोषजनक रूप से समझाया गया है और केवल देरी के आधार पर अभियोजन की...
POSH कानून के तहत सुलह के बाद भी नियोक्ता को विभागीय कार्रवाई का अधिकार बना रहता है: गौहाटी हाईकोर्ट
गौहाटी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी शामिल थे, ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि POSH अधिनियम, 2013 की धारा 10(4) के तहत सुलह (conciliation) हो जाने के बाद केवल आंतरिक शिकायत समिति (ICC) द्वारा आगे की जांच पर रोक लगती है, लेकिन इससे नियोक्ता को सेवा नियमों के तहत स्वतंत्र विभागीय कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोका जा सकता, खासकर जब बाद में नया साक्ष्य सामने आए और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक हो।मामले की पृष्ठभूमिमामले में...
धोखाधड़ी और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन चुनावों के परिणामों पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के चुनाव परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी है। यह आदेश बीसीसीआई (BCCI) की उप-समिति के सदस्यों पर मतदाता सूची में हेरफेर और धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनज़र पारित किया गया।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने 25 में से 19 क्रिकेट क्लबों द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि चुनाव तय तारीख पर हो सकते हैं, लेकिन अगले आदेश तक परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।इससे पहले 27 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट...
चिकित्सकीय लापरवाही से महिला हुई स्थायी रूप से बांझ, दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर और नर्सिंग होम पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाया
दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (सेंट्रल) ने एक चिकित्सक और नर्सिंग होम को चिकित्सकीय लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए कहा है कि उनकी लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला को स्थायी बांझपन (Permanent Infertility) का सामना करना पड़ा। आयोग ने माना कि गलत व देरी से इलाज और चिकित्सकीय योग्यता को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के कारण महिला की प्रजनन क्षमता हमेशा के लिए समाप्त हो गई।यह आदेश आयोग की अध्यक्ष दिव्या ज्योति जैपुरीयर और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने पारित किया।पुरा...
I-PAC रेड के दौरान CM ममता बनर्जी द्वारा कथित दखलअंदाजी के खिलाफ ED की याचिका पर 14 जनवरी को होगी सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को 2020 के कोयला घोटाले में चल रही जांच में रुकावट और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दखलअंदाजी के आरोप वाली ED की याचिका पर सुनवाई टाल दी, जिसके बाद कोर्टरूम में हंगामा हुआ।यह मामला जस्टिस सुव्रा घोष के सामने लिस्टेड है, अब इस पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी।हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में केंद्रीय एजेंसी ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट...
Leave In The Time Of Red: बायोलॉजी बदल रही है, कानून को भी इसके साथ तालमेल बिठाना होगा
वह नीतिगत क्षण जिसने बहस को ट्रिगर कियामासिक धर्म अवकाश पर भारत के सार्वजनिक प्रवचन ने सतह को तोड़ दिया जब कर्नाटक ने अपना 2025 का सरकारी आदेश जारी किया जिसमें 18 से 52 वर्ष की आयु की महिला कर्मचारियों को प्रति माह एक भुगतान अवकाश दिवस प्रदान किया गया था। राज्य के भीतर सार्वजनिक और निजी दोनों प्रतिष्ठानों में स्थायी कर्मचारियों, अनुबंध श्रमिकों, आउटसोर्स कर्मियों और दैनिक मजदूरी कमाने वालों की पहुंच - भारत में किसी भी पूर्व क्षेत्रीय कार्यकारी हस्तक्षेप से बेजोड़ है।आदेश की सबसे विशिष्ट विशेषता...
सरकारी संस्थान में पढ़ाई से सरकारी नौकरी का ऑटोमैटिक अधिकार नहीं मिलता: सुप्रीम कोर्ट ने 'वैध उम्मीद' का दावा खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी संस्थान में सिर्फ़ एडमिशन लेने और कोर्स पूरा करने से सरकारी पद पर ऑटोमैटिक नियुक्ति की कोई वैध उम्मीद नहीं बनती, खासकर जब पॉलिसी और भर्ती के ढांचे में बदलाव हो।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें याचिकाकर्ताओं को सिर्फ इसलिए नियुक्ति दी गई, क्योंकि उन्हें ट्रेनिंग कोर्स में एडमिशन के बाद नौकरी मिलने की वैध उम्मीद थी। असल में कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी...




















