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गैर-कानूनी हिरासत का दावा करने वाले एक्टिविस्ट को FIR की कॉपी नहीं दे सकते: दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा
दिल्ली पुलिस ने रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वे उन अलग-अलग एक्टिविस्ट के खिलाफ दर्ज FIR की कॉपी नहीं दे सकते, जिन्होंने दावा किया कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने रविवार को एक स्पेशल सुनवाई की और एहसानुल हक, राजबीर और सागरिका राजोरा द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता एहसानुल हक की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि स्थिति "चिंताजनक" है।...
दिल्ली हाईकोर्ट चीफ़ जस्टिस ने CBI के एक्साइज़ पॉलिसी केस को जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा से हटाने अर्ज़ी खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल की अर्ज़ी खारिज की, जिसमें उन्होंने CBI के एक्साइज़ पॉलिसी केस को जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा से हटाकर किसी दूसरी बेंच को सौंपने की गुज़ारिश की थी।चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि मौजूदा रोस्टर के मुताबिक, CBI की अर्ज़ी जस्टिस शर्मा को ही सौंपी गई है और अगर कोई जज खुद को केस से अलग करना चाहता है तो यह फ़ैसला उसे खुद ही लेना होगा।कोर्ट ने कहा,"हालांकि, मुझे ऐसा कोई कारण नज़र नहीं आता कि मैं प्रशासनिक तौर पर कोई आदेश जारी करके...
दिल्ली पुलिस ने कहा- 10 एक्टिविस्ट रिहा कर दिए गए, हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत के कारणों पर मांगा स्पष्टीकरण
दिल्ली पुलिस ने रविवार को हाईकोर्ट को बताया कि कथित तौर पर गैर-कानूनी हिरासत में रखे गए सभी 10 एक्टिविस्ट को रिहा कर दिया गया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने रविवार को हुई विशेष सुनवाई में पुलिस से उन परिस्थितियों और कानूनी अधिकार के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, जिनके तहत उन्हें हिरासत में लिया गया था।कोर्ट ने एहसानुल हक, राजबीर और सागरिका राजोरा द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।हक की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस,...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (09 मार्च, 2026 से 11 मार्च, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।नीलामी बिक्री की पुष्टि आरक्षित मूल्य के मूल्यांकन की न्यायिक जांच में बाधा नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को यह टिप्पणी की कि नीलामी बिक्री पूरी हो जाने के बाद भी नीलामी वाली संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन में कोई बाधा नहीं आएगी; खासकर तब, जब मूल्यांकन की पर्याप्तता या...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (09 मार्च, 2026 से 13 मार्च, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।CrPC की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन की तारीख से ही दिया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्टदिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से दोहराया कि CrPC की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन दाखिल करने की तारीख से ही दिया जाना चाहिए, न कि किसी बाद की तारीख से; सिवाय इसके कि कोर्ट इस सामान्य नियम से...
एक्टिविस्टों की अवैध पुलिस हिरासत का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट रविवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर करेगा सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट में कई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों पर 10 कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप लगाया गया।इस मामले का ज़िक्र वकील शाहरुख आलम ने चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्सटिस तेजस कारिया की खंडपीठ के सामने किया, जिसने कहा कि इन याचिकाओं पर कल सुनवाई होगी।बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं में से एक वकील दीक्षा द्विवेदी ने सागरिका राजोरा की ओर से दायर की। इसमें राज्य और पुलिस अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई कि वे...
जस्टिस विक्रम नाथ ने तेलंगाना स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी की मोबाइल लोक अदालत वैन का उद्घाटन किया
तेलंगाना राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (TSLSA), हैदराबाद ने तेलंगाना के सभी ज़िलों के दूर-दराज के इलाकों तक कानूनी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से दो मोबाइल लोक अदालत वैन/ मल्टी-यूटिलिटी वाहन खरीदे हैं।अभी TSLSA के पास 34 ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) के लिए केवल चार मोबाइल वैन हैं, जिनका इस्तेमाल पूरे राज्य में कानूनी साक्षरता शिविर लगाने, कानूनी सेवाओं की गतिविधियों का प्रचार करने, जेलों का दौरा करने और अन्य आउटरीच कार्यक्रमों के लिए मासिक रोटेशन के आधार पर किया जाता है।गांवों में आम...
2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.84 करोड़ मामलों का निपटारा, ₹10,920 करोड़ से अधिक की राशि का समझौता
नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की पहल के तहत 14 मार्च 2026 को आयोजित वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें देशभर में 2,84,14,329 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में 2,57,82,254 प्री-लिटिगेशन (पूर्व मुकदमेबाजी) मामले तथा 26,32,075 लंबित मामले शामिल थे। इन समझौतों के परिणामस्वरूप कुल ₹10,920.47 करोड़ की राशि का निस्तारण हुआ।यह राष्ट्रीय लोक अदालत भारत के मुख्य न्यायाधीश और नालसा के संरक्षक-प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और नालसा के...
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 225 मामलों का निपटारा
नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की देशव्यापी पहल के तहत शनिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के समन्वय से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।इस लोक अदालत का आयोजन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के पैट्रन-इन-चीफ जस्टिस शील नागू तथा कमेटी के चेयरमैन जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु के समग्र मार्गदर्शन में किया गया।मामलों के सौहार्दपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पांच लोक अदालत पीठों का गठन किया गया। इन पीठों की अध्यक्षता...
बांग्लादेशी मानव तस्करी पीड़िता का बयान अब तक क्यों नहीं दर्ज हुआ? बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई सेशन कोर्ट से यह स्पष्टीकरण मांगा कि मानव तस्करी की शिकार एक बांग्लादेशी महिला का बयान अब तक दर्ज क्यों नहीं किया गया, जबकि कोर्ट ने पहले ही ऐसा करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि पीड़िता को जल्द से जल्द बयान दर्ज कराने के बाद अपने देश बांग्लादेश वापस भेजा जाना है और फिलहाल वह भारत में एक एनजीओ की देखरेख में रह रही है।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने सेशन कोर्ट को निर्देश दिया कि 24 मार्च 2026 तक पीड़िता का बयान और साक्ष्य दर्ज...
सोनम वांगचुक की हिरासत मामले को सुप्रीम कोर्ट ने कैसे संभाला: सुनवाई के दौरान पूछे गए सवालों पर एक नज़र
केंद्र सरकार ने 14 मार्च को लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत रद्द किया। उस समय उनकी पत्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका, जिसमें उनकी हिरासत को चुनौती दी गई थी, जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने केंद्र सरकार से वांगचुक की निवारक हिरासत (Preventive Detention) से जुड़े हालात के बारे में कई सवाल पूछे।वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को लेह के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने हिरासत में लिया। यह कार्रवाई लद्दाख में...
गंगा के किनारों पर अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर पूरे देश से व्यापक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट पटना (बिहार) में गंगा के फ्लडप्लेन पर अवैध निर्माण से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने केंद्र सरकार, बिहार सरकार और उन सभी राज्यों को निर्देश दिया जिनसे होकर गंगा नदी गुजरती है कि वे नदी के किनारों पर अतिक्रमण की मौजूदा स्थिति और उन्हें हटाने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण कोर्ट के सामने...
विवाद सुलझाने की कोशिश पुलिस को अपराध का संज्ञान लेने से नहीं रोक सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपस में झगड़ रहे गुटों के बीच विवाद सुलझाने की पुलिस की कोशिश उन्हें आपराधिक कृत्यों के लिए FIR दर्ज करने से नहीं रोक सकती।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"सिर्फ़ सुलह की कोशिश पुलिस को आपराधिक कृत्यों का संज्ञान लेने से नहीं रोक सकती।" यह मामला पंजाब के एक इलाके में दो गुटों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। अपीलकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, जबकि प्रतिवादी उच्च जाति के गुट से है। बताया जाता है कि यह विवाद इस आरोप पर शुरू हुआ कि नाली का पानी...
'उद्योग' की परिभाषा पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गठित की 9 जजों की बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने 9 जजों की संविधान पीठ के गठन की सूचना दी। यह पीठ 1978 के 'बैंगलोर वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा' मामले में दिए गए फैसले में 'उद्योग' शब्द की विस्तृत व्याख्या की सही होने की जांच करेगी।इस पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत करेंगे। इसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल होंगे।9 जजों की यह...
BREAKING| केंद्र सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द की
केंद्र सरकार ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत रद्द की। सरकार ने कहा कि यह फ़ैसला लद्दाख में शांति बहाल करने और बातचीत के लिए माहौल बनाने के मकसद से लिया गया।एक बयान में सरकार ने कहा कि 24 सितंबर, 2025 को लेह में क़ानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा होने के बाद 26 सितंबर, 2025 को वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। हिरासत का यह आदेश लेह के ज़िला मजिस्ट्रेट ने इस इलाक़े में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से जारी किया था।सरकार ने बताया...
14 वर्ष के बाद भी आठवीं पास करना अवैध नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों को छह से चौदह वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 14 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति स्कूल में पढ़ाई जारी नहीं रख सकता। अदालत ने इसी आधार पर एक याचिका खारिज की, जिसमें एक पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर की नियुक्ति को चुनौती दी गई।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 का उद्देश्य छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध...
नमाज़ियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता प्रशासन, कानून-व्यवस्था संभालना राज्य का कर्तव्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रमज़ान के दौरान एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके नाम पर लोगों के धार्मिक अधिकारों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने 27 फरवरी को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि संभल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में कठिनाई महसूस होती है तो उन्हें या तो...
सुप्रीम कोर्ट ने 35 साल पुराने रिश्वत मामले में एक्साइज इंस्पेक्टर की सज़ा बरकरार रखी, दोषी की उम्र 75 साल होने के कारण सज़ा कम की
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के एक पूर्व एक्साइज कांस्टेबल की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत रिश्वत के जाल वाले मामले में सज़ा बरकरार रखा। हालांकि, उनकी ज़्यादा उम्र और हिरासत में पहले ही बिताए गए समय को देखते हुए उनकी सज़ा कम की।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने राज बहादुर सिंह द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर अपील खारिज की। हाईकोर्ट ने राज बहादुर सिंह को अवैध रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में दोषी ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने ट्रायल...
30% महिला आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला जजों को बार एसोसिएशनों की ECs में सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के ज़िला जजों को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले बार एसोसिएशनों की एग्जीक्यूटिव कमेटियों/गवर्निंग बॉडीज़ में महिला सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया, ताकि उनमें 30 प्रतिशत महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मानदंड पूरा हो सके।कोर्ट ने ज़िला जजों को यह अधिकार दिया कि यदि किसी विशेष अधिकार क्षेत्र में पर्याप्त महिला सदस्य उपलब्ध हैं, लेकिन वे किसी कारणवश एग्जीक्यूटिव कमेटी/गवर्निंग बॉडी के चुनाव नहीं लड़ सकीं, तो वे उन्हें नॉमिनेट कर सकते हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI)...
नीलामी बिक्री की पुष्टि आरक्षित मूल्य के मूल्यांकन की न्यायिक जांच में बाधा नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को यह टिप्पणी की कि नीलामी बिक्री पूरी हो जाने के बाद भी नीलामी वाली संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन में कोई बाधा नहीं आएगी; खासकर तब, जब मूल्यांकन की पर्याप्तता या आरक्षित मूल्य तय करने के संबंध में कोई सवाल उठता हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की,"हालांकि इस स्थापित सिद्धांत पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि एक 'बोना फाइड' (नेक-नीयत) नीलामी खरीदार के अधिकारों को उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए और कोर्ट द्वारा पुष्टि की गई बिक्री में...




















