ताज़ा खबरे

चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित गोहत्या के मामले में NSA हिरासत क्यों रद्द की?
चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित गोहत्या के मामले में NSA हिरासत क्यों रद्द की?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी, न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ ​​इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना,...

NI Act | कारोबार चलाने में सक्रिय भूमिका साबित न होने तक सोसायटी के पदाधिकारी पर चेक बाउंस होने की ज़िम्मेदारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
NI Act | कारोबार चलाने में सक्रिय भूमिका साबित न होने तक सोसायटी के पदाधिकारी पर चेक बाउंस होने की ज़िम्मेदारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी सोसायटी में मैनेजर के पद पर बैठे किसी व्यक्ति का सिर्फ़ पदनाम ही, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 141 के तहत उसकी ज़िम्मेदारी तय करने के लिए काफ़ी नहीं होगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कंपनी के एग्जीक्यूटिव सदस्य के ख़िलाफ़ चेक बाउंस का मामला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। इस सदस्य के ख़िलाफ़ धारा 141 के तहत ज़िम्मेदारी तय करने के लिए लेन-देन में उसकी भागीदारी या सोसायटी के मामलों के लिए उसकी...

पुलिस को आगे की जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
पुलिस को आगे की जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि मजिस्ट्रेट से स्पष्ट अनुमति के बिना, क्लोजर रिपोर्ट (जांच बंद करने की रिपोर्ट) दाखिल करने के बाद पुलिस आगे की जांच नहीं कर सकती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"भले ही कानून में स्पष्ट अनुमति की ज़रूरत न हो, लेकिन कानून जिस तरह से विकसित हुआ है, उससे यह बिल्कुल साफ हो गया है कि संबंधित मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अब एक ज़रूरी शर्त बन गया है।" बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता के खिलाफ आगे की जांच जारी...

पुलिस स्टेशनों का दौरा करने वाली महिला वकीलों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देशों की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस
पुलिस स्टेशनों का दौरा करने वाली महिला वकीलों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देशों की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें पूरे देश में एक समान दिशानिर्देश बनाने और लागू करने की मांग की गई, ताकि पुलिस स्टेशनों का दौरा करते समय, विशेष रूप से देर शाम और रात के समय महिला वकीलों की सुरक्षा, गरिमा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।याचिका में कहा गया,"अदालत के अधिकारी होने के नाते वकील न्याय वितरण प्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं। उन्हें अक्सर अपने मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करने और उनकी सहायता करने के लिए पुलिस स्टेशनों का दौरा करना पड़ता है। हालांकि, राज्य-नियंत्रित ऐसे वातावरण में...

ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया
'ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा': सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया

यह मानते हुए कि नागरिकों की ट्रॉमा केयर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें पूरे देश में इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक साझा हेल्पलाइन नंबर '112' को चालू करना भी शामिल है।कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूरे देश में एक समान और मज़बूत ट्रॉमा केयर सिस्टम बनाने के लिए कई अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ना, PM RAHAT कैशलेस इलाज योजना को चालू करना और Good...

क्या IBC मोरेटोरियम कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ चेक बाउंस केस को पूरी तरह से रोकता है? सुप्रीम कोर्ट ने बड़े बेंच को भेजा मामला
क्या IBC मोरेटोरियम कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ चेक बाउंस केस को पूरी तरह से रोकता है? सुप्रीम कोर्ट ने बड़े बेंच को भेजा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े बेंच को यह सवाल भेजा कि क्या नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की कार्यवाही को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के भाग III के तहत मोरेटोरियम अवधि के दौरान रोका जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसी कार्यवाही मुख्य रूप से आपराधिक प्रकृति की होती है, न कि केवल कर्ज वसूली की कार्रवाई।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने टिप्पणी की कि NI Act की धारा 138 के तहत कार्यवाही को केवल पैसे की वसूली के लिए कानूनी...

बस ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री उतर गए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही से हुई मौत के मामले में सज़ा रद्द की
बस ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री उतर गए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही से हुई मौत के मामले में सज़ा रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के एक बस ड्राइवर को बरी किया। इस ड्राइवर को एक यात्री की मौत का दोषी ठहराया गया था, जो बस से उतरते समय गिर गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कंडक्टर के इशारे पर गाड़ी आगे बढ़ाने वाले ड्राइवर को अपने आप आपराधिक रूप से लापरवाह नहीं माना जा सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 279 और 304A के तहत अपील करने वाले ड्राइवर की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि...

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए हैश वैल्यू बताना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए 'हैश वैल्यू' बताना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 63(4) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। कोर्ट ने पुणे बार एसोसिएशन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को स्वीकार करने के लिए बनाए गए सख्त नियमों के खिलाफ दायर चुनौती खारिज की। इस प्रावधान में दखल देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मद्रास हाईकोर्ट का यह विचार कि ऐसे रिकॉर्ड को सिर्फ़ सरकार द्वारा नोटिफ़ाई किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के जांचकर्ता ही सर्टिफ़ाई कर सकते हैं, उसे एक बाध्यकारी मिसाल (binding precedent) के तौर पर नहीं माना...

Amazon-Future डील की मंज़ूरी वापस लेने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा - निवेश बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी निष्पक्षता ज़रूरी
Amazon-Future डील की मंज़ूरी वापस लेने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा - निवेश बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी निष्पक्षता ज़रूरी

भारत के रेगुलेटरी माहौल और विदेशी निवेश के नज़रिए पर असर डालने वाले अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2019 की Amazon-Future Coupons निवेश डील की मंज़ूरी रद्द करके अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि मर्जर से जुड़े नियम सख़्त तो होने चाहिए, लेकिन साथ ही वे पहले से पता चलने वाले, निष्पक्ष और कानून के दायरे में होने चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने NCLAT के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ Amazon की अपील मंज़ूर...

राज्य सड़क मरम्मत कार्य के लिए अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में मारे गए युवक के लिए मुआवज़ा सही ठहराया
राज्य सड़क मरम्मत कार्य के लिए अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में मारे गए युवक के लिए मुआवज़ा सही ठहराया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 साल के युवक की माँ को दिए गए मुआवज़े को सही ठहराया। इस युवक की मौत नेशनल हाईवे-20 पर असुरक्षित सड़क मरम्मत कार्य के कारण हुई मोटरसाइकिल दुर्घटना में हुई थी। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों और ठेकेदार को लापरवाही का दोषी ठहराया, क्योंकि उन्होंने घटनास्थल पर चेतावनी वाले साइनबोर्ड और सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए।कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों का यह फ़र्ज़ था कि वे सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक से बैरिकेड करें, वहां रोशनी का इंतज़ाम करें और सड़क इस्तेमाल करने...

ज़मानत नियम है: राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में एक साल जेल में बिताने वाले आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी राहत
ज़मानत नियम है: राष्ट्रीय ध्वज का 'अपमान' करने के आरोप में एक साल जेल में बिताने वाले आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते ऐसे व्यक्ति की दूसरी ज़मानत याचिका मंज़ूर की, जिस पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज पर एक कुत्ते को बिठाकर उसका अपमान करने वाली तस्वीर अपलोड करने और अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर कथित तौर पर 'पाकिस्तान-समर्थक' सामग्री पोस्ट करने का आरोप था।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने आरोपी वासिक त्यागी को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसले सैयद इफ़्तिख़ार अंद्राबी बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी, जम्मू 2026 LiveLaw (SC) 512 का हवाला दिया, जिसमें 'ज़मानत नियम है और जेल अपवाद' के...

यह नहीं कह सकते कि मीडिया की निगेटिव कवरेज से ट्रायल खराब हुआ: राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के रेप केस में आसाराम की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी
'यह नहीं कह सकते कि मीडिया की निगेटिव कवरेज से ट्रायल खराब हुआ': राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के रेप केस में आसाराम की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी

राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार (27 मई) को आदेश बरकरार रखते हुए आसाराम को 2013 में जोधपुर आश्रम में नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न और रेप करने के मामले में दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई। हालांकि, कोर्ट ने गैंग रेप और गंभीर यौन हमले के आरोपों में उसे दोषी ठहराने वाला फैसला रद्द कर दिया।ऐसा करते हुएकोर्ट ने आसाराम की इस दलील को खारिज किया कि मीडिया के दुष्प्रचार के कारण ट्रायल खराब हो गया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि वह आसाराम को उसकी उम्र के आधार पर कोई रियायत नहीं दे सकता, क्योंकि वह...

राहुल गांधी के खिलाफ केस लड़ रहे BJP कार्यकर्ता को Z+ सुरक्षा देने का मामला: केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा- जल्द होगा फैसला
राहुल गांधी के खिलाफ केस लड़ रहे BJP कार्यकर्ता को Z+ सुरक्षा देने का मामला: केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा- जल्द होगा फैसला

केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि गृह मंत्रालय (MHA) BJP सदस्य एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर 'Z+' श्रेणी की सुरक्षा कवर की अर्जी पर "फिर से विचार कर रहा है और उसकी नए सिरे से जांच कर रहा है।" शिशिर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की हैं।केंद्र सरकार की बात पर ध्यान देते हुए जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस ज़फीर अहमद की बेंच ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि "किसी नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पूरी तरह से...

क्या प्यार को नियंत्रित किया जा सकता है? असम का UCC और लिव-इन संबंधों पर राज्य के नियंत्रण की संवैधानिक सीमाएं
क्या प्यार को नियंत्रित किया जा सकता है? असम का UCC और लिव-इन संबंधों पर राज्य के नियंत्रण की संवैधानिक सीमाएं

असम सरकार के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के फ़ैसले ने एक बार फिर समकालीन भारत की सबसे जटिल संवैधानिक बहसों में से एक को ज़िंदा कर दिया: वह सीमा जहां तक राज्य कानूनी एकरूपता और सामाजिक सुधार के नाम पर निजी संबंधों को नियंत्रित कर सकता है। जहां UCC से जुड़ी चर्चाएं पारंपरिक रूप से शादी, तलाक़, उत्तराधिकार और विरासत पर केंद्रित रही हैं, वहीं यह संकेत कि असम का प्रस्तावित ढाँचा लिव-इन संबंधों को भी नियंत्रित कर सकता है, एक महत्वपूर्ण संवैधानिक घटनाक्रम है। यह पारंपरिक नागरिक संस्थाओं से हटकर...

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को मद्रास हाईकोर्ट ने किया स्वीकार, कहा- जजों को पवित्र गाय की तरह नहीं माना जाना चाहिए
'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को मद्रास हाईकोर्ट ने किया स्वीकार, कहा- जजों को 'पवित्र गाय' की तरह नहीं माना जाना चाहिए

तमिल फ़िल्म "करुप्पु" पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए, जिसमें आरोप लगाया गया कि फ़िल्म में न्यायपालिका को गलत रोशनी में दिखाया गया, मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है और जजों को 'पवित्र गाय' की तरह नहीं माना जाना चाहिए।अपने आदेश में जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने कहा कि उन्हें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिले हैं। ऐसे "काली भेड़ें" (भ्रष्ट लोग) मद्रास हाईकोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा नियमित रूप से बाहर का रास्ता दिखा...