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झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जेलों में बंद कैदियों की HIV जांच और इलाज के लिए दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को HIV और एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के वैधानिक ढांचे के अनुरूप जेलों में HIV जांच और उपचार के लिए उचित दिशानिर्देश और नियम बनाने और उन्हें लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही छह सप्ताह के भीतर अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने दोषी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसने जेल में प्रवेश के बाद "एचआईवी जाँच कराने से इनकार कर दिया था"।अदालत ने अपने आदेश...
GST दरों में कटौती के बाद समान का दाम कम करना ज़रूरी, सिर्फ़ मात्रा बढ़ाकर वही दाम रखना सही नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब GST परिषद किसी उत्पाद पर लागू GST दरों में कमी करती है तो इसका लाभ ऐसे उत्पादों की कीमतों में कमी के माध्यम से अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचना चाहिए।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने कहा कि निर्माताओं को समान दाम वसूलते हुए उत्पाद की मात्रा बढ़ाने की अनुमति देने से दरों में कटौती का उद्देश्य विफल हो जाएगा।अदालत ने कहा,"उपभोक्ता को मिलने वाले लाभ भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। GST में कमी का उद्देश्य उत्पादों और सेवाओं को उपभोक्ताओं के लिए अधिक लागत...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिल्म में 'जानकी और रघुराम' शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोटिस जारी कर छत्तीसगढ़ की फिल्म 'जानकी' के निर्माताओं द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने को कहा। इस फिल्म पर इसके शीर्षक और फिल्म के मुख्य कलाकारों के नामों को लेकर आपत्ति जताई गई।निर्माताओं के अनुसार, CBFC ने फिल्म के शीर्षक 'जानकी' पर आपत्ति जताई, क्योंकि यह देवी सीता का नाम है। केंद्रीय एजेंसी ने फिल्म में मुख्य पुरुष पात्र 'रघुराम' के नाम पर भी आपत्ति जताई। यह फिल्म मुख्य किरदारों रघुराम और जानकी और उनके रिश्ते के इर्द-गिर्द...
राज्य संविधान का उल्लंघन करते हुए कर्मचारियों को वैध लाभ देने से इनकार करने के लिए वचनबद्धता की मांग नहीं कर सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि कर्मचारियों से वचनबद्धता मांगना - जिसमें उन्हें उनके वैध सेवा लाभों से वंचित किया जाता है - न केवल शोषणकारी है, बल्कि असंवैधानिक भी है।यह याचिका राज्य प्राधिकारियों द्वारा एक नगरपालिका कर्मचारी को सेवा लाभ देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देते हुए इस आधार पर दायर की गई कि उसने थकाऊ मुकदमेबाजी के बाद अपनी बहाली के बाद बकाया वेतन के किसी भी दावे को त्यागने के लिए एक वचनबद्धता पर हस्ताक्षर किए।यह देखते हुए कि इस तरह के शोषणकारी वचनबद्धताएं शुरू से ही अमान्य...
'सांप्रदायिक' डिबेट्स प्रसारित करने वाले न्यूज चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें केंद्र सरकार और नियामक प्राधिकरणों को कथित तौर पर सांप्रदायिक रंग देने वाली बहसें प्रसारित करने वाले न्यूज़ चैनलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा,"जब यही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो हमें इस याचिका पर विचार क्यों करना चाहिए?"अदालत ने कहा कि उसने हाल ही में एक ऐसी ही याचिका पर विचार करने से इनकार...
उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि उप-किरायेदार मकान मालिक या हित-पूर्ववर्ती के अधीन प्रत्यक्ष किरायेदारी स्थापित करने में विफल रहता है तो किरायेदार के विरुद्ध पारित बेदखली आदेश उस पर भी बाध्यकारी होगा।जस्टिस सत्येन वैद्य ने टिप्पणी की:"उप-किरायेदार उप-किराएदारी के आधार पर बेदखली याचिका में आवश्यक पक्ष नहीं है। हालांकि, चूंकि इस मामले में मकान मालिक ने स्वयं उप-किरायेदार को पक्षकार बनाया है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उप-किरायेदार पीड़ित पक्ष नहीं है।"यह विवाद तब उत्पन्न हुआ, जब मकान मालिक...
DMRC द्वारा भूमि अधिग्रहण पर दुकानदार पुनर्वास की मांग नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली मेट्रो की 'परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के संबंध में पुनर्वास नीति' उन दुकानदारों के पुनर्वास की परिकल्पना नहीं करती, जिनकी दुकानें किसी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गईं, जब तक कि वे उक्त दुकान से 'व्यवसाय' न कर रहे हों।जस्टिस अमित शर्मा ने कहा,"उपरोक्त नीति/दिशानिर्देश के तहत वैकल्पिक दुकान दिए जाने का लाभ उठाने के लिए याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि वह उक्त दुकान से व्यवसाय कर रहा था। उक्त दुकान का मालिक होने के नाते याचिकाकर्ता को उक्त...
जस्टिस चंद्रचूड़ का बयान अयोध्या फैसले के खिलाफ क्यूरेटिव याचिका दायर करने का आधार बन सकता है: प्रोफ़ेसर मोहन गोपाल
प्रोफ़ेसर डॉ. मोहन जी गोपाल ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ की हालिया टिप्पणियां इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर करने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान कर सकती हैं।प्रोफ़ेसर गोपाल ने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की कि बाबरी मस्जिद का निर्माण ही "अपवित्रीकरण का एक मौलिक कृत्य" था। उनकी यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट 2019 के फैसले के विपरीत है, जिसमें मस्जिद के निर्माण के लिए मंदिर को नष्ट करने...
कुशल कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए MGNREGA निधि का उपयोग नियमितीकरण से इनकार को उचित नहीं ठहरा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि MGNREGA केवल अकुशल शारीरिक श्रम के लिए बनाया गया है। इसका उपयोग कंप्यूटर ऑपरेटरों जैसी कुशल भूमिकाओं को नियमितीकरण से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।अदालत ने पाया कि राज्य ने स्वीकृत पदों के बावजूद कुशल सेवाओं के भुगतान के लिए मनरेगा निधि का गलत उपयोग किया।राज्य के तर्क को खारिज करते हुए जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:"अकुशल शारीरिक श्रम का अर्थ है कोई भी शारीरिक कार्य, जिसे कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना विशेष प्रशिक्षण के कर सकता है। याचिकाकर्ता कुशल कंप्यूटर...
सुप्रीम कोर्ट ने गुम बच्चों के लिए गृह मंत्रालय में समर्पित पोर्टल बनाने की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गृह मंत्रालय को यह सुझाव दिया है कि वह अपहृत या तस्करी किए गए बच्चों का पता लगाने के लिए एक साझा समर्पित पोर्टल (Common Dedicated Portal) स्थापित करे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे बच्चों का पता लगाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होती है, जो उक्त पोर्टल के माध्यम से संभव हो सकते हैं, जिसमें एक समर्पित अधिकारी जिम्मेदार होगा। इसके मद्देनजर, कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, ऐश्वर्या भाटी को सरकार से इस सुझाव पर निर्देश लेने की अनुमति दी।एक बेंच, जिसमें जस्टिस बी.वी. नगरथना...
हाईकोर्ट सीधे अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार न करें, पहले सेशन कोर्ट जाएं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर हाई कोर्ट को आगाह किया है कि वह सीधे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी पर सुनवाई करने से बचें और सामान्यतः पक्षकारों को पहले सेशन कोर्ट में जाने का निर्देश दिया जाना चाहिए, इसके बाद ही हाई कोर्ट की समवर्ती न्यायक्षेत्र (Concurrent Jurisdiction) का उपयोग करना चाहिए।यह मामला पटना में एक स्वास्थ्यकर्मी की हत्या से जुड़ा था, जिसे कथित रूप से पैसे उधार देने वालों (Moneylenders) के कहने पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि मृतक से...
प्रतिबंधित पदार्थ की प्रकृति की जानकारी न होना NDPS Act के तहत बचाव का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित मादक पदार्थ तस्करी सिंडिकेट मामले में दो लोगों को जमानत देने से इनकार किया। न्यायालय ने कहा कि प्रतिबंधित पदार्थ की प्रकृति की जानकारी न होना स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत बचाव का आधार नहीं है।जस्टिस अजय दिगपॉल ने NDPS Act की धारा 8, 21, 23 और 29 के तहत दर्ज मामले में नाइजीरियाई नागरिक एकोह कॉलिन्स चिदुबेम और प्रदीप कुमार झा को जमानत देने से इनकार किया।एनसीबी का कहना था कि दिल्ली स्थित डीएचएल एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय पर छापेमारी के...
ड्रग ओवरडोज़ मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को दी ज़मानत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने युवक की कथित तौर पर ड्रग ओवरडोज़ से हुई मौत के मामले में आरोपी व्यक्ति को ज़मानत देते हुए कहा कि शुद्ध दवाएं अक्सर मिलावटी पदार्थों से ज़्यादा घातक हो सकती हैं।याचिकाओं का अध्ययन करते हुए अदालत ने पाया कि मौत का कारण ड्रग ओवरडोज़ था। इस स्तर पर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि अभियुक्त-याचिकाकर्ता ने मृतक को ज़बरदस्ती ड्रग का ओवरडोज़ दिया या मृतक ने ख़ुद ही इसे लिया।अदालत ने कहा,"इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मृतक ने बिना मिलावट वाली या कम मिलावट वाली दवा...
लोक अदालत किसे कहते है?
अदालतों में चलने वाले मुक़दमों को राजीनामा से ख़त्म करवाने के लिए लोक अदालत की व्यवस्था शुरू हुई है। यह निर्विवाद है कि आज विचारण में अत्यधिक एवं अनावश्यक विलम्ब होता है। लोगों को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कई बार तो स्थिति यह बन जाती है कि पक्षकार मर जाता है लेकिन कार्यवाही जीवित रहती है।इस स्थिति से निपटने के लिए हालांकि समय-समय पर प्रयास किये जाते रहे हैं। फास्ट ट्रेक कोर्ट भी स्थापित किये गये तो दूसरी तरफ लोक अदालत व्यवस्था पर भी विचार रखे गए। भारत में किसी समय पंचायतों से...
ARREST WARRANT जारी किये जाने के कारण
गिरफ्तारी का वारंट सदैव किसी अदालत या फिर सेमी ज्यूडिशियल कोर्ट जैसे कलेक्टर, एसडीएम इत्यादि द्वारा जारी किया जाता है। इन लोगों के अलावा किसी भी व्यक्ति के पास गिरफ्तारी वारंट जारी करने की शक्ति नहीं है।गिरफ्तारी वारंट जारी करने की शक्ति अदालत के पास होती है। यह शक्ति अदालत को इसलिए दी गई है क्योंकि अदालत जिस व्यक्ति को किसी मुकदमे में बुलाना चाहती है उसे पुलिस के मार्फ़त बुला सकें। जैसे किसी प्रकरण में यदि अदालत को किसी व्यक्ति के बयान लेने है तब भी वह उस संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तारी का वारंट...
ट्रायल कोर्ट केवल निजी गवाह के हलफनामे के आधार पर चार्जशीट में न उल्लिखित अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी ट्रायल कोर्ट को केवल निजी गवाहों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों (अफिडेविट्स) के आधार पर चार्जशीट में न उल्लिखित अतिरिक्त अपराधों का संज्ञान नहीं लेना चाहिए, बिना जांच रिकॉर्ड पर भरोसा किए या आगे की जांच के आदेश दिए।एक बेंच, जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एससी शर्मा शामिल थे, ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के असामान्य आदेश को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को मंजूरी दी थी, जिसमें शिकायतकर्ता के गवाहों द्वारा प्रस्तुत हलफनामों के...
सुप्रीम कोर्ट ने मुहम्मद ग़ौस-तानसेन मकबरे परिसर में उर्स और नमाज़ की अनुमति के लिए केंद्र और ASI से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ विशेष अवकाश याचिका (SLP) में नोटिस जारी किया है, जिसमें ग्वालियर स्थित हज़रत शेख़ मुहम्मद ग़ौस के मकबरे के पास धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे उर्स और नमाज़ करने की अनुमति को अस्वीकार किया गया था। इस दरगाह में मुगल सम्राट अकबर के नौ रत्नों में से एक, महान संगीतकार तानसेन का मकबरा भी मौजूद है।जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने SLP के साथ-साथ अंतरिम याचिका पर भी नोटिस जारी किया। हज़रत मुहम्मद ग़ौस का...
रोस्टर बदलने का हवाला देकर जमानत याचिका पहले जज को न भेजना हाईकोर्ट जज के लिए अनुचित: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक हाईकोर्ट जज की आलोचना की, जिन्होंने एक सामान्य जमानत याचिका को पहले की बेंच को भेजने से इनकार कर दिया था, जिसने उसी FIR से संबंधित अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला किया था। जज ने इसका कारण यह बताया कि पहले जज का रोस्टर बदल गया है।कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट जज द्वारा अपनाया गया यह कारण उचित नहीं है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस SVN भाटी की खंडपीठ ने उस याचिका की सुनवाई की, जिसमें दो आरोपियों को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने नोट किया कि दिल्ली...
झूठे मामलों से प्रतिष्ठा खराब होती है: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेना अधिकारी के खिलाफ बलात्कार का मामला खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 70 वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी के खिलाफ दर्ज बलात्कार और यौन उत्पीड़न का मामला खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “स्वभाव से ही बेतुके” हैं।जस्टिस अमित महाजन ने कहा— “आरोप इतने बेतुके हैं और उनके समर्थन में कोई विश्वसनीय सबूत भी नहीं है। ऐसे में कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।” कोर्ट ने माना कि इस उम्रदराज व्यक्ति को मुकदमे की कठिनाइयों से गुजरने के लिए मजबूर करना न्याय का मखौल होगा और न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है। ...
नाबालिग के खिलाफ भरण-पोषण का दावा मान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 और 128 के तहत नाबालिग के खिलाफ भरण-पोषण का दावा किया जा सकता है।जस्टिस मदन पाल सिंह ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया, जिसमें बाल विवाह और नाबालिग पति से भरण-पोषण की मांग शामिल थी। कोर्ट ने कहा- “धारा 125 और 128 CrPC के तहत नाबालिग के खिलाफ दाखिल आवेदन पर सुनवाई करने में कोई रोक नहीं है।” मामले में, पुनरीक्षणकर्ता-पति की ओर से कहा गया कि उसकी शादी मात्र 13 साल की उम्र में विपक्षी संख्या-2 से हुई थी और दो साल बाद...




















