घर के पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाइकोर्ट

Amir Ahmad

20 Feb 2026 4:09 PM IST

  • घर के पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाइकोर्ट

    दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के घर के ठीक पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान होना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है।

    जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि स्वस्थ जीवन का अभिन्न पहलू स्वच्छ और स्वच्छतापूर्ण वातावरण है। इसके अभाव में व्यक्ति के गरिमा के साथ जीने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

    अदालत एडवोकेट रचित गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनके घर की पूर्वी दीवार के साथ कथित रूप से अवैध रूप से बनाए गए कूड़ादान और सार्वजनिक मूत्रालय को हटाने की मांग की गई।

    याचिकाकर्ता का कहना था कि आसपास के लगभग 150 निवासी वहां कचरा फेंकते थे और मूत्रालय का उपयोग करते थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया कि खुले कूड़ादान और मूत्रालय के आसपास स्वच्छता की उचित व्यवस्था की जाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि खुले कूड़ादान और सार्वजनिक मूत्रालय की मौजूदगी क्षेत्र के निवासियों विशेष रूप से याचिकाकर्ता जिनके घर के बाहर यह स्थित था, के लिए स्पष्ट रूप से असुविधा और उत्पीड़न का कारण है।

    अदालत ने कहा,

    “यह न्यायालय याचिकाकर्ता और अन्य निवासियों की स्थिति को समझता है, क्योंकि सार्वजनिक मूत्रालय और खुले कूड़ादान की मौजूदगी से आसपास दुर्गंध फैलती है। स्थानीय निवासी ऐसी दयनीय स्थिति में रहने को विवश हैं। याचिका के साथ संलग्न तस्वीरें वर्तमान स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।”

    अदालत ने आगे कहा,

    “याचिकाकर्ता के घर के ठीक बगल में सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान होना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त उसके जीवन के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमा के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है।”

    इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर एडवोकेट के घर के पास स्थित खुले कूड़ादान और मूत्रालय को हटाएं।

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