दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मिराज को जमानत: विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी पर सहमति के बाद हाईकोर्ट ने दी राहत

Amir Ahmad

20 Feb 2026 3:50 PM IST

  • दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मिराज को जमानत: विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी पर सहमति के बाद हाईकोर्ट ने दी राहत

    इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दुष्कर्म, मारपीट, अप्राकृतिक कृत्य और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे यूट्यूबर और कॉमेडियन मनी मिराज उर्फ रमदी मिराज आलम को जमानत दी।

    यह आदेश जस्टिस गौतम चौधरी की पीठ ने पारित किया।

    सुनवाई के दौरान सूचनाकर्ता/पीड़िता स्वयं अदालत में उपस्थित हुईं और हस्तलिखित बयान प्रस्तुत कर दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते की पुष्टि की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि आरोपी ने उनसे गुप्त रूप से विवाह किया, लेकिन सार्वजनिक रूप से विवाह करने से इनकार किया। अब दोनों ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत एक से दो सप्ताह के भीतर विवाह करने पर सहमति जताई है।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जमानत पर रिहा होने के दो सप्ताह के भीतर विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह नहीं करता है तो पीड़िता को जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन देने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

    पूर्व में पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया था कि काम के दौरान दोनों की मित्रता हुई जिसके बाद आरोपी ने जबरन दुष्कर्म किया न्यायालय में विवाह करने का वादा किया और गर्भपात भी कराया। आरोपी को पिछले वर्ष अक्तूबर में गिरफ्तार किया गया।

    आरोपी की ओर से पेश एडवोकेट ने दलील दी कि उनका मुवक्किल रिहाई के दो सप्ताह के भीतर विवाह करने को तैयार है और उसके परिवार के सदस्य भी इस संबंध के लिए सहमत हैं। इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।

    पीड़िता की ओर से भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि आरोपी को जमानत दिए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

    हालांकि एडिशनल शासकीय एडवोकेट ने तर्क दिया कि आरोपी पर लगे अपराध गंभीर और संज्ञेय प्रकृति के हैं इसलिए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

    दोनों पक्षकारों की दलीलों उपलब्ध साक्ष्यों की प्रकृति किसी ठोस विरोधाभासी सामग्री के अभाव तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना न होने को ध्यान में रखते हुए जस्टिस चौधरी ने माना कि आरोपी को जमानत देने के लिए उपयुक्त आधार बनता है।

    अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को व्यक्तिगत मुचलका और दो स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि यदि रिहाई के बाद दो सप्ताह के भीतर विवाह नहीं किया जाता है तो पीड़िता जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन दे सकती है।

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