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सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के उपशामक देखभाल दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की स्थिति पर केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2017 में जारी उपशामक देखभाल दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन पर तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत असाध्य रूप से बीमार व्यक्तियों को उपशामक देखभाल प्रदान करने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार 2017 के दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आँकड़े...
माता-पिता के बच्चे से मिलने के अधिकार से बच्चे का विकास प्रभावित नहीं होना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि माता-पिता के बच्चे से मिलने के अधिकार पर निर्णय लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे की स्कूली शिक्षा और उसके शारीरिक, नैतिक और भावनात्मक विकास पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।जस्टिस एम. जोतिरमन ने दोहराया कि बच्चे से मिलने के अधिकार से संबंधित मामलों पर विचार करते समय कोर्ट का सर्वोपरि विचार बच्चे के कल्याण पर होना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि यद्यपि माता-पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार है, लेकिन इससे बच्चे के विकास में बाधा नहीं आनी चाहिए।अदालत ने...
'हिंसा, लिंचिंग और गौरक्षकों का चलन आम हो गया है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौहत्या अधिनियम के तहत लापरवाही से दर्ज की गई FIRs की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश गौहत्या निवारण अधिनियम, 1955 के तहत पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले दर्ज करने के 'लापरवाह' तरीके और राज्य में गौरक्षकों की बढ़ती समस्या को गंभीरता से लिया।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अधीन न होने के बावजूद ऐसी FIRs क्यों दर्ज की जा रही हैं।खंडपीठ ने इस मुद्दे पर भी हलफनामा मांगा कि राज्य...
कोई कर्मचारी पात्र होने के बाद मर जाता है तो नियमितीकरण का अधिकार उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी नियमितीकरण के लिए पात्र होने के बाद मर जाता है तो यह लाभ उसके कानूनी उत्तराधिकारियों के माध्यम से निहित माना जाना चाहिए और बना रहेगा।हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि "न्याय, भले ही विलंबित हो, न केवल वैधानिक रूप से बल्कि सैद्धांतिक रूप से भी, जो टूटा है उसे ठीक करता हुआ दिखना चाहिए," कहा कि सेवा के नियमितीकरण का अधिकार एक बार अर्जित हो जाने पर कर्मचारी की मृत्यु पर समाप्त नहीं होता।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"कोर्ट प्रक्रियागत कठोरता के कारण न्याय...
दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों के लिए अनिवार्य गाउन नियम बहाल किया, 27 अक्टूबर से होगा लागू
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नोटिस जारी कर वकीलों के लिए अदालत में पेश होने के दौरान गाउन पहनना अनिवार्य कर दिया। यह नियम 27 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी होगा।10 अक्टूबर, 2025 के नोटिस में रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज ने कहा कि यह नया निर्देश इसी मामले पर अदालत द्वारा 20 फरवरी, 2025 को जारी किए गए पूर्व नोटिस का स्थान लेता है।नोटिस में लिखा था,"इस न्यायालय के दिनांक 20-02-2025 के नोटिस नंबर 543/G-11/General-II/DHC/2025 के स्थान पर यह अधिसूचित किया जाता है कि इस न्यायालय में पेश होने वाले वकीलों को 27...
'स्थायी पदों का सृजन न कर पाना, अस्थायी कर्मचारियों को अनुचित रूप से लंबे समय तक नियोजित करने का कोई आधार नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी पदों का सृजन न कर पाना या वित्तीय सीमाएं, स्थायी और आवश्यक कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों को वर्षों तक अस्थायी आधार पर नियोजित करने का औचित्य नहीं सिद्ध कर सकतीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों को अल्पकालिक या संविदा नियुक्तियों पर बनाए रखना अनुचित श्रम व्यवहार है और रोजगार में समानता एवं सम्मान के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव मालेगांव नगर निगम के ड्राइवरों और दमकलकर्मियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे...
'वसीयत में बेटे का नाम गलत लिखा, पता भी गलत': दिवंगत संजय कपूर के बच्चों ने जालसाजी के आरोपों पर दिल्ली हाईकोर्ट में बताया
एक्ट्रेस करिश्मा कपूर और दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के बच्चों ने सोमवार (13 अक्टूबर) को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उनके दिवंगत पिता की कथित वसीयत जाली है, क्योंकि इसमें उनके बेटे का नाम गलत लिखा है और कई जगहों पर उनकी बेटी का पता भी गलत दिया गया।सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने वसीयत में त्रुटियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये उनके पिता के स्वभाव के विपरीत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वसीयत इतनी लापरवाही से लिखी गई कि यह उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती है।पिछली सुनवाई में बच्चों ने हाईकोर्ट को बताया...
जांच में शिकायतकर्ता की संलिप्तता उजागर होने पर उसे आरोपी बनाया जा सकता है, अलग से FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि यदि जांच में उसकी संलिप्तता या अपराध में उसकी संलिप्तता की ओर इशारा करने वाले किसी भी साक्ष्य का पता चलता है तो FIR दर्ज करने वाले को आरोपी बनाया जा सकता है।जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस चित्तरंजन दाश की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी (IO) को केवल मूल शिकायतकर्ता को आरोपी बनाने या उसके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए अलग से FIR दर्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं है।कोर्ट ने कहा,"हमारा विनम्र मत है कि यदि जांच के दौरान, अपराध में उसकी...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम सभा भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई का दिया आदेश
तालाबों, चरागाहों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिता संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को समाप्त करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण और व्यापक आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि ग्राम सभा भूमि पर अतिक्रमण की सूचना देने या उसे हटाने में प्रधानों, लेखपालों और राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता आपराधिक विश्वासघात के समान है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने अपने 24 पृष्ठों के आदेश में न केवल राज्य भर में सार्वजनिक भूमि या सार्वजनिक...
अगर कोई उड़ान नहीं तो ₹500 करोड़ क्यों खर्च किए? हाईकोर्ट ने जबलपुर हवाई अड्डे की उपेक्षा के लिए राज्य सरकार से सवाल किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अन्य प्रमुख शहरों से जबलपुर की उड़ान कनेक्टिविटी के संबंध में 'दूसरों के साथ किए गए व्यवहार' के लिए फटकार लगाई।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन पर लगभग ₹500 करोड़ खर्च करने के बावजूद, शहर से कई उड़ानें बंद कर दी गईं।जजों ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा,"आपने इतना पैसा क्यों खर्च किया? रीवा से कम...
सर्विस के दौरान दिव्यांगता होती है तो कर्मचारी को सेवामुक्त करने के बजाय उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जहां दिव्यांगता सेवा के दौरान प्राप्त होती है, वहां कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करने के बजाय उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 20 [रोज़गार में भेदभाव न करना] का हवाला देते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन ने कहा,“अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि जहां कोई कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान दिव्यांगता प्राप्त करता है, उसकी सेवाएं समाप्त नहीं की जानी चाहिए, बल्कि नियोक्ता द्वारा उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर करने और उसके...
'बिना सुनवाई और तर्कसंगत आदेश के न्यायिक रिमांड को 60 दिनों से अधिक बढ़ाना अवैध': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 187(3) के तहत निर्धारित 60 दिनों की अवधि से अधिक न्यायिक रिमांड को अभियुक्त को सुनवाई का अवसर दिए बिना और तर्कसंगत आदेश पारित किए बिना बढ़ाना कानून के विरुद्ध है और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।जस्टिस सचिन एस. देशमुख भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 316(2), 318(2), 318(4) सहपठित धारा 3(5) और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम, 1999 की धारा 3 के तहत अपराधों के...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के आदेश के बावजूद निपटाए गए मामले को फिर से उठाने पर जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो प्रतिवादियों को दिया जाना है। 2013 में पहले ही निपटाए जा चुके एक मामले को अदालत के फैसले को लागू करने के बजाय बार-बार चुनौती देने पर प्रतिवादियों को यह जुर्माना देना होगा।जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, 2013 के पूर्व निपटाए गए आदेश के आधार पर 2023 में पारित सिंगल जज के आदेश के विरुद्ध दायर अंतर-न्यायालयीय अपील पर सुनवाई कर रही थी।प्रतिवादी 1985 में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ था,...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में Interim Order दिए जाने में मजिस्ट्रेट का जूरिडिक्शन
इस एक्ट से संबंधित एक मामले में कहा गया है कि चूंकि हिंसा का कृत्य स्वयं द्वारा अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध गठित नहीं करता है और यह केवल अधिनियम की धारा 18 अथवा 23 के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किये गये आदेश का भंग है, जो दण्डनीय बनाया गया है, तारीख, जिस पर घरेलू हिंसा का कृत्य कारित किया गया था, का पूर्ण रूप से मामले के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है। इसी प्रकार यह पूर्ण रूप से अतात्विक है कि क्या 'व्यथित व्यक्ति अपराध कारित करने की तारीख पर प्रत्यर्थी के साथ रह रहा था अथवा नहीं।जब एक बार...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में मजिस्ट्रेट द्वारा Interim Order दिया जाना
इस एक्ट की धारा धारा 23 के अनुसार-अन्तरिम और एकपक्षीय आदेश देने की शक्ति(1) मजिस्ट्रेट, इस अधिनियम के अधीन उसके समक्ष किसी कार्यवाही में, ऐसा अन्तरिम आदेश, जो न्यायसंगत और उपयुक्त हो, पारित कर सकेगा।(2) यदि मजिस्ट्रेट का यह समाधान हो जाता है कि प्रथमदृष्ट्या उसका कोई आवेदन यह प्रकट करता है कि प्रत्यर्थी घरेलू हिंसा का कोई कार्य कर रहा है या उसने किया है, या यह सम्भावना है कि प्रत्यर्थी घरेलू हिंसा का कोई कार्य कर सकता है, तो वह व्यथित व्यक्ति के ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाये, शपथ-पत्र के...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में मुआवजा आदेश
इस अधिनियम की धारा 22 के प्रावधान है कि-अन्य अनुतोष के अतिरिक्त, जो इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त की जायें, मजिस्ट्रेट, व्यथित व्यक्ति द्वारा किये गये आवेदन पर, प्रत्यर्थी को क्षतियों के लिए जिसके अन्तर्गत उस प्रत्यर्थी द्वारा की गई घरेलू हिंसा के कार्यों द्वारा मानसिक यातना और भावनात्मक कष्ट सम्मिलित हैं, प्रतिकर और नुकसानी का संदाय करने के लिए प्रत्यर्थी को निदेश देने का आवेदन पारित कर सकेगा।अधिनियम की धारा 22 प्रतिकर आदेश से सम्बन्धित है जो मजिस्ट्रेट पारित कर सकता है।धारा 22 के अधीन, मजिस्ट्रेट...
घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) में अभिरक्षा आदेश
इस एक्ट में अभिरक्षा के संबंध में धारा 21 के अंतर्गत निम्न प्रावधान किये गए हैं-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मजिस्ट्रेट, इस अधिनियम के अधीन संरक्षण आदेश या किसी अन्य अनुतोष के लिए आवेदन की सुनवाई के किसी प्रक्रम पर व्यथित व्यक्ति को या उसकी ओर से आवेदन करने वाले व्यक्ति को किसी सन्तान की अस्थायी अभिरक्षा दे सकेगा और यदि आवश्यक हो तो प्रत्यर्थी द्वारा ऐसी सन्तान या सन्तानों से भेंट के इन्तजाम को विनिर्दिष्ट कर सकेगा :परन्तु, यदि मजिस्ट्रेट की यह राय है...
दिल्ली दंगे मामला: शर्जील इमाम ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की
शर्जील इमाम ने दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश वाले मामले में अंतरिम जमानत (interim bail) की मांग करते हुए दिल्ली की एक अदालत का रुख किया है, ताकि वे बिहार विधानसभा चुनाव में बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकें।इमाम ने karkardooma कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) समीर बाजपेई के समक्ष आवेदन दायर किया है, जिसमें उन्होंने 15 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक 14 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी है। यह राहत उन्हें नामांकन दाखिल करने और बिहार विधानसभा चुनाव (18वीं विधानसभा)...
जिला उपभोक्ता आयोग ने मेडिकल लापरवाही के चलते उंगलियां कटने पर अस्पताल और डॉक्टरों को 50 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया
चंडीगढ़ की जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II ने हीलिंग हॉस्पिटल, पैरामेडिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट और तीन डॉक्टरों को मेडिकल लापरवाही का दोषी पाया। आयोग ने शिकायतकर्ता को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।मामले की पृष्ठभूमि: 45 साल की महिला को 25 नवंबर 2020 को पेट और पाचन संबंधी समस्या के कारण हीलिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बाईं बांह में कैनुला डाला। इसके बाद हाथ में सूजन और दर्द शुरू हुआ। 28 नवंबर की रात दर्द बढ़ गया, लेकिन डॉक्टरों ने हल्की दवा और ड्रेसिंग...
सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के आदेश पर रोक लगाई, श्रीसंत की चोट पर राजस्थान रॉयल्स को मुआवजा देने का निर्देश स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने आज एनसीडीआरसी के आदेश पर स्थगन प्रदान किया, जिसमें यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को 'राजस्थान रॉयल्स' के मालिक को 2012 के आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान एस. श्रीसंत की चोट के कारण 82 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका में पारित किया, जिसे बीमा कंपनी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के आदेश के खिलाफ दायर किया था। प्रतिकारी (राजस्थान रॉयल्स) की ओर से सीनियर...




















