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सुप्रीम कोर्ट ने जनजातियों के मकान निर्माण पर कानूनों के टकराव पर केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें वन अधिकार अधिनियम, 2006 (“FRA”) के तहत वनवासियों के लिए आवास निर्माण की सीमा, तरीका और प्रक्रिया स्पष्ट की जाए, और यह प्रक्रिया वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (“FCA”) के अनुरूप हो। जबकि FRA वनवासियों को 'पक्का मकान' प्रदान करने की गारंटी देता है, FCA वन क्षेत्रों में स्थायी निर्माण पर प्रतिबंध लगाता है।कोर्ट ने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत वनवासियों के लिए पक्का मकान बनाने पर प्रतिबंध नहीं होना...
मिसिंग व्यक्तियों के मामलों में जांच से असंतुष्ट होने पर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका सामान्य तौर पर नहीं दायर की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि किसी लापता व्यक्ति के मामले में यह याचिका सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती कि जांच की स्थिति जाननी हो या जांच के तरीके से संतुष्ट न हों।न्यायालय ने बताया कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण की शक्ति बढ़ी है, लेकिन इसके लिए कोई सख्त नियम नहीं है। यदि किसी को जांच की निगरानी या प्रभावी जांच के निर्देश चाहिए, तो इसके लिए आपराधिक प्रक्रिया कानून में वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, और ऐसे मामलों को सक्षम अदालत देखेगी। यह याचिका...
पहलगाम पोस्ट केस: डॉ. मेडुसा पर गंभीर आरोप, 'एकता खतरे' की धारा हटाई, 352 और 302 BNS बरकरार
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. मद्री ककोटी (डॉ. मेडुसा) के खिलाफ पहलगाम आतंक हमले के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट पर FIR की जांच पूरी हो गई है और जल्द ही चार्जशीट दायर की जाएगी।राज्य के वकील ने बताया कि पहले FIR में कई धाराएं थीं, जैसे धारा 152 BNS (भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम) लेकिन अब चार्जशीट में केवल धारा 352 (जानबूझकर अपमान और शांति भंग करने के लिए) और 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए) शामिल हैं। इस वजह से...
पुलिस गवाह के बयानों की सच्चाई नहीं परख सकती': MP हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को लगाई फटकार, SP को तलब किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस मामले में पुलिस की निंदा की, जिसमें 3 वर्षीय बच्चे की मौत होने वाले हादसे की जांच करने के बजाय जांच अधिकारी (IO) ने शिकायतकर्ता और गवाहों से इस तरह सवाल किए कि उनकी बातों को खारिज करने की कोशिश की जा रही थी।हाईकोर्ट ने SP को अगले सुनवाई के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया और सुनवाई को 14 नवंबर तक स्थगित कर दिया। चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेव और जस्टिस विनय सारफ की खंडपीठ ने कहा: "हमारे सामने प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता, उनकी पत्नी और...
जानलेवा कफ सिरप मामला: बच्चों को दवा लिखने वाले डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा कोर्ट ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत याचिका खारिज की, जिन पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को जानबूझकर जहरीला Coldrif कफ सिरप लिखने का गंभीर आरोप है। आरोप है कि इस सिरप के कारण बच्चों में गुर्दे की गंभीर समस्याएं हुईं और उनकी मृत्यु हो गई।एडिशनल सेशन जज गौतम कुमार गुजरे ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए अपने अवलोकन में कहा,"मामले में संकलित साक्ष्य से अभियुक्त के विरुद्ध आक्षेपित अपराध के दृढ़ आधार प्रकट हैं।"कोर्ट ने दर्ज FIR का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि प्रथम...
व्यवसाय सीमित हो सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए: ग्रीन पटाखों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी
ग्रीन पटाखों की बिक्री और खरीद पर लगे प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि व्यवसाय को सीमित किया जा सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए।कोर्ट 2017 में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए हाईकोर्ट ने 2017 में निर्देश दिया था कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा राज्य पिछले वर्ष यानी 2016 में जारी किए गए अस्थायी लाइसेंसों की कुल...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगा मामले में पुलिस की याचिका खारिज की, ताहिर हुसैन से जुड़े आगजनी केस में गवाह को दोबारा बुलाने की मांग ठुकराई
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े आगजनी मामले के ट्रायल में अभियोजन गवाह को फिर से बुलाने की मांग करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस मामले के आरोपियों में से एक पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ताहिर हुसैन भी हैं।मामले को कुछ देर सुनने के बाद जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने आदेश में कहा,"दलीलें सुनी गईं, रिकॉर्ड का अवलोकन किया गया। याचिका खारिज की जाती है। कोई मेरिट नहीं है।"पुलिस के वकील ने तर्क...
राजस्थान सरकार ने ट्रांसजेंडर को OBC श्रेणी में रखने के फैसले का हाईकोर्ट में किया बचाव, कहा - आरक्षण नीति कार्यपालिका का विषय
राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाई कोर्ट में अपने उस सर्कुलर का बचाव किया, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया, बजाय इसके कि उन्हें क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) दिया जाए।जनवरी, 2023 के इस सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में सरकार ने कहा कि नीति-निर्माण का क्षेत्र, जिसमें आरक्षण नीति भी शामिल है। इसकी सीमा तथा संरचना कार्यपालिका और विधायी क्षमता का विषय है।सरकार ने तर्क दिया कि वैधानिक ढांचे का उल्लंघन...
वोटर लिस्ट धांधली: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आरोपों की SIT जांच वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बेंगलुरु सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोपों की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। ये आरोप कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लगाए थे।जस्टिस सूर्य कांत और जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को इस मामले को पहले भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष उठाने को कहा।याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि चुनाव आयोग के सामने पहले ही एक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया जा चुका...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आरक्षण न देने पर अधिकारियों को फटकारा
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायालय स्थापना में विभिन्न पदों पर भर्ती से संबंधित सार्वजनिक रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 5 साल की आयु छूट और 5% अर्हक अंकों में छूट प्रदान करने के लिए अधिकारियों को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 के NALSA मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बावजूद अधिकारियों द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। इसमें सार्वजनिक...
सोसायटी पुनर्विकास के लिए डेवलपर नियुक्ति हेतु टेंडर अनिवार्य नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शासकीय प्रस्ताव को निर्देशात्मक बताया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि 4 जुलाई, 2019 को जारी शासकीय प्रस्ताव (Government Resolution - GR) जिसमें सोसायटी के पुनर्विकास के लिए डेवलपर को अंतिम रूप देने हेतु टेंडर जारी करना अनिवार्य किया गया, वह अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक प्रकृति का है।जस्टिस श्याम सुमन और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि डेवलपर नियुक्त करने के लिए केवल टेंडर जारी न करना ही यह मतलब नहीं होगा कि किसी कानून के उद्देश्य का उल्लंघन हुआ है।हाईकोर्ट के इस मुद्दे पर दिए गए विभिन्न फैसलों का...
सेरोगेसी एक्ट उन जोड़ों के निहित अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता, जिन्होंने कानून लागू होने से पहले भ्रूण फ्रीज कराए: जस्टिस विश्वनाथन का समवर्ती निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जिन दंपतियों ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 के 25 जनवरी, 2022 को लागू होने से पहले सरोगेसी के लिए भ्रूण फ्रीज कराए थे, उन्होंने सरोगेसी का निहित अधिकार अर्जित कर लिया था, जिसे यह अधिनियम पूर्वव्यापी रूप से नहीं छीन सकता।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने अपने समवर्ती निर्णय में कहा कि वैधानिक कट-ऑफ तिथि से पहले निषेचन प्रक्रिया पूरी करके दंपतियों ने पहले ही कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त सीमा को पार कर लिया था और अधिनियम की धारा 4(iii)(c)(I) के तहत बाद में शुरू की गई...
सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों को पेशेवर चैंबर/केबिन आवंटित करने के लिए समान नीति तैयार करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के विभिन्न कोर्ट्स और बार एसोसिएशनों में महिला वकीलों को पेशेवर चैंबर/केबिन आवंटित करने के लिए समान और लैंगिक-संवेदनशील नीति तैयार करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी किया।याचिका में भविष्य के आवंटनों में महिला वकीलों के लिए चैंबर या केबिन में आरक्षण या वरीयता देने की मांग की गई। साथ ही यह भी मांग की गई कि सुप्रीम कोर्ट में 25 वर्ष से अधिक का प्रैक्टिस करने वाली और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की प्रतीक्षा सूची में शामिल महिला...
दिल्ली हाईकोर्ट ने PFI की याचिका को विचार योग्य माना, केंद्र को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (13 अक्टूबर) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की उस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें संगठन पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध की पुष्टि करने वाले गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी गई।हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि प्रतिबंध की पुष्टि करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली PFI की याचिका हाईकोर्ट के समक्ष विचार योग्य है।यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने UAPA, 1967 के तहत PFI और...
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 25 पुस्तकों की ज़ब्ती पर अंतरिम राहत देने से किया इनकार
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने सोमवार (13 अक्टूबर) को उन याचिकाओं में अंतरिम राहत देने से इनकार किया, जिनमें कथित तौर पर अलगाववाद को बढ़ावा देने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 98 के तहत 25 पुस्तकों की ज़ब्ती को चुनौती दी गई थी।चीफ जस्टिस अरुण पल्ली, जस्टिस रजनेश ओसवाल और जस्टिस शहज़ाद अज़ीम की तीन जजों की विशेष पीठ ने अंतरिम राहत देने से इनकार किया। हालांकि पीठ ने याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।पीठ ने इस मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी करने से इनकार करते हुए...
पैरोल न देने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को लताड़ा, कहा- लंबे कारावास से जेल में अराजकता फैल सकती है
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली जेल नियम 2018 की अवहेलना करने के लिए राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों में लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पैरोल और फरलो के माध्यम से बिना किसी रुकावट के लंबे समय तक कैद से जेल के अंदर अनुशासनहीनता और अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।कोर्ट ने कहा कि अधिकारी यह महसूस नहीं करते कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पैरोल या फरलो न देने से केवल अशांति फैलती...
दिल्ली हाईकोर्ट ने WIPRO को सुप्रसिद्ध ट्रेडमार्क घोषित किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने उपभोक्ता देखभाल उत्पादों और लाइटिंग व्यवसाय के लिए लोकप्रिय ब्रांड WIPRO को ट्रेड मार्क्स अधिनियम 1999 की धारा 2(1)(zg) के तहत सुप्रसिद्ध ट्रेडमार्क घोषित किया।जस्टिस तेजस करिया ने अपने आदेश में कहा कि वादी विप्रो एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड कम से कम वर्ष 1977 से लगातार और अबाधित रूप से WIPRO चिह्न का उपयोग कर रही है और उसने भारत में पर्याप्त साख और प्रतिष्ठा अर्जित की है।जज ने आगे कहा,“वादी ने वित्तीय वर्ष 1994-95 और 2023-24 के बीच प्रचार पर भी एक बड़ी राशि खर्च की, जो...
कानून को सबसे कमजोर की रक्षा करनी चाहिए: चीफ़ जस्टिस गवई
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.आर. गवई ने शनिवार को कहा कि न्याय वितरण प्रणाली में विविधता और समावेशन (diversity and inclusion) को केंद्र में रखना आवश्यक है, क्योंकि “कानून अपना सच्चा अर्थ तब पाता है जब वह सबसे कमजोर की रक्षा करता है।”हनोई में आयोजित 38वें लॉएसिया (LAWASIA) सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए, उन्होंने अपने जीवन की यात्रा साझा की और बताया कि कैसे संविधान ने उनके जीवन को बदला। उन्होंने कहा, “मैं एक निचली जाति में जन्मा, लेकिन संविधान ने मेरी गरिमा को हर नागरिक के समान माना।” उन्होंने...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (06 अक्टूबर, 2025 से 10 अक्टूबर, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सशस्त्र बल न्यायाधिकरण को कोर्ट-मार्शल दोषसिद्धि को संशोधित करने और कम दंड लगाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 अक्टूबर) को कहा कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 (Armed Forces Tribunal Act) के तहत सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) को कोर्ट मार्शल के निष्कर्षों को...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (06 अक्टूबर, 2025 से 10 अक्टूबर, 2025) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।यूपी राज्य में गोद लेना केवल रजिस्टर्ड डीड द्वारा ही हो सकता है, केवल नोटरीकृत दत्तक ग्रहण विलेख अमान्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17(3) में राज्य संशोधन के आधार पर केवल पंजीकृत दत्तक ग्रहण विलेख यूपी राज्य में मान्य है। न्यायालय ने कहा कि केवल...




















