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बार निकायों में 30% महिला प्रतिनिधित्व आदेश का पालन न करने के कारण रीवा जिला बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक
बार निकायों में 30% महिला प्रतिनिधित्व आदेश का पालन न करने के कारण रीवा जिला बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 मार्च) को अंतरिम आदेश में रीवा जिला बार एसोसिएशन को अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के उस फैसले का पालन न करने का हवाला दिया, जिसमें बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में 30% महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:"उक्त चुनाव के लिए मतदान 25/3/2026 को होना निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अनिवार्य निर्देशों को ध्यान में रखते हुए - यह सुनिश्चित करने...

BREAKING| हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING| हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और सक्रिय रूप से उसका पालन करता है तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता।कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने आगे कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने गौर किया कि संविधान...

सुप्रीम कोर्ट ने CAA के तहत सुरक्षित शरणार्थियों की नागरिकता पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को समय-सीमा तय करने में हिचकिचाहट दिखाई
सुप्रीम कोर्ट ने CAA के तहत सुरक्षित शरणार्थियों की नागरिकता पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को समय-सीमा तय करने में हिचकिचाहट दिखाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के लिए उन आवेदनों पर फैसला लेने की समय-सीमा तय करने में हिचकिचाहट दिखाई, जिनमें नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता मांगी गई। कोर्ट ने कहा कि यह एक कार्यकारी फैसला है, जिसमें "कम से कम न्यायिक दखल" ही उचित है।कोर्ट पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए उन शरणार्थियों के लिए नागरिकता मांगने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो CAA के लाभ के हकदार हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह आशंका जताई कि SIR प्रक्रिया में उन्हें मताधिकार से वंचित किया जा सकता है,...

IBC | मोरेटोरियम के बाद लेनदार कॉर्पोरेट देनदार द्वारा पहले जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉज़िट से CIRP से पहले के बकाया को नहीं काट सकता: सुप्रीम कोर्ट
IBC | मोरेटोरियम के बाद लेनदार कॉर्पोरेट देनदार द्वारा पहले जमा की गई सिक्योरिटी डिपॉज़िट से CIRP से पहले के बकाया को नहीं काट सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार मोरेटोरियम लागू हो जाने के बाद कॉर्पोरेट देनदार के CIRP से पहले के बकाया को लेनदार के पास जमा राशि से समायोजित (Set Off) नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब तक ऐसी जमा राशि को कानूनी रूप से समायोजित नहीं किया जाता, तब तक वह कॉर्पोरेट देनदार की संपत्ति बनी रहती है और मोरेटोरियम के बाद किया गया कोई भी समायोजन कानूनन अस्वीकार्य होगा।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा,"भले ही जमा राशि को बकाया भुगतान में चूक के लिए गारंटी माना जाए।...

सोशल मीडिया फ़ोटो पर आधारित Arms Act का केस टिकने लायक नहीं, कब्ज़े का कोई सबूत नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
सोशल मीडिया फ़ोटो पर आधारित Arms Act का केस टिकने लायक नहीं, कब्ज़े का कोई सबूत नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि Arms Act की धारा 25(1-B)(a) और 29(B) के तहत मुक़दमा तब तक नहीं चलाया जा सकता, जब तक कि गैर-कानूनी कब्ज़ा, हथियारों की सुपुर्दगी, या ज़रूरी अपराधिक इरादा जैसे ज़रूरी तत्व मौजूद न हों। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि यह मुक़दमा राजनीतिक रंजिश की पृष्ठभूमि में शुरू किया गया, क्योंकि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक हस्ती हैं और विपक्षी राजनीतिक दल के सदस्य हैं।जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह बजरंग दास और एक अन्य व्यक्ति द्वारा CrPC की धारा 482 के तहत दायर एक...

CBI ने मणिपुर हिंसा मामले में दो आरोपियों की ज़मानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया
CBI ने मणिपुर हिंसा मामले में दो आरोपियों की ज़मानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल कर उन दो लोगों की ज़मानत रद्द करने की मांग की, जिन पर 2023 में मणिपुर में हुए जातीय संघर्ष के दौरान गैंगरेप और महिलाओं को नग्न अवस्था में घुमाने का आरोप है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और CBI की अर्ज़ी पर नोटिस जारी करते हुए आरोपियों से जवाब मांगा। बेंच ने पीड़ितों को मुफ़्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।इस मामले की सुनवाई एक तीसरे आरोपी...

पश्चिम बंगाल को छोड़ अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रही: सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल को छोड़ अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रही: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में यह प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई है, जबकि पश्चिम बंगाल में कुछ समस्याएं सामने आई हैं।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें SIR प्रक्रिया और “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” सूची में मतदाताओं के वर्गीकरण को चुनौती दी गई...

बिजली चोरी के मामलों में आदेश पारित करने से पहले अथॉरिटी को आरोपी के साथ प्रतिकूल सामग्री साझा करनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
बिजली चोरी के मामलों में आदेश पारित करने से पहले अथॉरिटी को आरोपी के साथ प्रतिकूल सामग्री साझा करनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिजली अधिनियम की धारा 135 के तहत बिजली की कथित चोरी के मामलों में मूल्यांकन करने वाली अथॉरिटी का यह कर्तव्य है कि वह मूल्यांकन आदेश पारित करने से पहले उपभोक्ता को प्रतिकूल सामग्री से अवगत कराए और सुनवाई का अवसर प्रदान करे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी नागरिक दायित्व का निर्धारण भले ही वह धारा 135 के तहत हो, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए किया जाना चाहिए और इसे किसी यांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से नहीं किया जा सकता।जस्टिस जगमोहन बंसल...

बकाया न चुकाने पर सिविल जेल भेजने से पति की मासिक भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बकाया न चुकाने पर सिविल जेल भेजने से पति की मासिक भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण (Maintenance) न देने के कारण सिविल जेल भेजने से उसकी आगे का मासिक भरण-पोषण का बकाया चुकाने की कानूनी ज़िम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने साफ किया कि CrPC की धारा 300 के तहत 'डबल जिओपार्डी' (दोहरी सज़ा) का सिद्धांत, 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' के तहत भरण-पोषण के आदेशों को लागू करने के मामले में बिल्कुल भी लागू नहीं होता।बेंच ने आगे कहा कि भरण-पोषण से जुड़ी...

माफ़ी का हलफ़नामा दायर करेंगे: कांतारा फ़िल्म की मिमिक्री मामले में रणवीर सिंह ने हाईकोर्ट में कहा
माफ़ी का हलफ़नामा दायर करेंगे: 'कांतारा' फ़िल्म की मिमिक्री मामले में रणवीर सिंह ने हाईकोर्ट में कहा

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने मंगलवार (24 मार्च) को कर्नाटक हाईकोर्ट में बताया कि वह कोर्ट में हलफ़नामा दायर करेंगे, जिसमें वह 'कांतारा: चैप्टर 1' फ़िल्म के एक किरदार की मिमिक्री करने के लिए माफ़ी मांगेंगे।कोर्ट एक्टर की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपने ख़िलाफ़ दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी। यह FIR पिछले साल गोवा सरकार द्वारा आयोजित 56वें ​​IFFI फ़ेस्टिवल ऑफ़ इंडिया के दौरान 'कांतारा: चैप्टर 1' फ़िल्म के एक किरदार की मिमिक्री करने के मामले में दर्ज की गई। इस कार्यक्रम में...

सीएम पर ही आरोप हो तो क्या ED राज्य पुलिस के पास जाए? सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से पूछा
सीएम पर ही आरोप हो तो क्या ED राज्य पुलिस के पास जाए? सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब आरोप स्वयं राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर हों, तो क्या जांच एजेंसी को राहत के लिए उसी राज्य सरकार के पास जाना उचित होगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह याचिका ED और उसके अधिकारियों द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, जिसमें I-PAC कार्यालय पर की गई छापेमारी के दौरान...

निमिषा प्रिया की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए टली
निमिषा प्रिया की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए टली

सुप्रीम कोर्ट ने यमन में मौत की सजा का सामना कर रहीं केरल की नर्स निमिषा प्रिया से जुड़े मामले में दायर याचिका पर सुनवाई अनिश्चितकाल (साइन डाई) के लिए स्थगित की।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को बताया गया कि निमिषा प्रिया को बचाने के लिए बातचीत और प्रयास जारी हैं।इस पर अदालत ने कहा कि फिलहाल सुनवाई टाली जाती है, लेकिन यदि परिस्थितियों में बदलाव होता है तो पक्षकार नई अर्जी देकर मामले को फिर सूचीबद्ध करा सकते हैं।इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत...

ग्राम पंचायतों पर अंतरिम व्यवस्था: सरपंच रहेंगे प्रशासक, पर बड़े फैसलों पर रोक- बॉम्बे हाईकोर्ट
ग्राम पंचायतों पर अंतरिम व्यवस्था: सरपंच रहेंगे प्रशासक, पर बड़े फैसलों पर रोक- बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ग्राम पंचायतों से जुड़े एक अहम मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि कार्यकाल पूरा कर चुके सरपंच फिलहाल प्रशासक के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन वे कोई नीतिगत या बड़े वित्तीय फैसले नहीं ले सकेंगे।जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ ने 18 मार्च को यह आदेश देते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय पर रोक नहीं लगाई, जिसके तहत करीब 14,500 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने तक मौजूदा या पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया।अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों...