उत्तर-पूर्व के लोगों से जुड़े मुद्दों पर हर तीन माह में बैठक करे MHA समिति: सुप्रीम कोर्ट

Amir Ahmad

23 Feb 2026 11:44 AM IST

  • उत्तर-पूर्व के लोगों से जुड़े मुद्दों पर हर तीन माह में बैठक करे MHA समिति: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव और हिंसा से जुड़े मामलों पर गंभीरता दिखाते हुए गृह मंत्रालय द्वारा गठित निगरानी समिति को निर्देश दिया कि वह कम से कम हर तीन महीने में एक बार बैठक करे।

    अदालत ने यह भी कहा कि समिति किसी भी समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान ले और आवश्यकता होने पर तुरंत बैठक बुलाकर सुधारात्मक कदम उठाए।

    जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 17 फरवरी को वर्ष 2015 में दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया।

    इस याचिका में देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे उत्तर-पूर्व के लोगों पर हो रहे नस्लीय हमलों और अपमान की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई।

    अदालत ने कहा,

    “समिति को किसी भी समाचार पत्र में प्रकाशित किसी भी घटना का संज्ञान लेना चाहिए। यदि समिति का कोई सदस्य भी किसी मामले को अध्यक्ष के संज्ञान में लाता है तो उस पर विचार के लिए तुरंत बैठक बुलाई जानी चाहिए और आवश्यक होने पर सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।”

    खंडपीठ ने समिति को 15 मार्च को बैठक करने का निर्देश दिया और कहा कि बैठक में उठाए गए विचारित और निस्तारित मुद्दों की स्टेट्स रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

    गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव से संबंधित शिकायतों की निगरानी और समाधान के लिए एक निगरानी समिति गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव निराज कुमार बंसोड कर रहे हैं और इसमें अन्य सदस्य भी शामिल हैं।

    यह समिति वर्ष 2014 में दायर कर्मा दोरजी बनाम भारत संघ याचिका के संदर्भ में गठित एम.पी. बेजबरुआ समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए बनाई गई।

    एम.पी. बेजबरुआ उत्तर-पूर्व परिषद के सदस्य रहे हैं। उनकी अध्यक्षता में गठित समिति ने महानगरों सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले उत्तर-पूर्व के लोगों की समस्याओं का अध्ययन किया और निगरानी तंत्र की आवश्यकता बताई।

    निगरानी समिति का दायित्व बेजबरुआ समिति की 11 जुलाई, 2014 की रिपोर्ट के क्रियान्वयन की समीक्षा करना, नस्लीय हिंसा और भेदभाव की घटनाओं पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की निगरानी करना शिकायतें प्राप्त कर उन्हें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अथवा संबंधित राज्य मानवाधिकार आयोग या पुलिस थाने को भेजना तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रिपोर्ट तलब करना है।

    हाल ही में प्रधान जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर-पूर्व के लोगों के विरुद्ध नस्लीय हिंसा से संबंधित एक अन्य याचिका पर भी अटॉर्नी जनरल से विचार करने को कहा, जो एंजेल चकमा की हत्या की पृष्ठभूमि में दायर की गई।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश से यह स्पष्ट संकेत गया कि उत्तर-पूर्व के लोगों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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