तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामला: आंध्र प्रदेश सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Praveen Mishra

23 Feb 2026 2:07 PM IST

  • तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामला: आंध्र प्रदेश सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 फरवरी) को आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा तिरुपति मंदिर के लड्डू में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट से जुड़े मामले में गठित एक सदस्यीय जांच समिति की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि राज्य की समानांतर जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की आपराधिक जांच को प्रभावित करेगी।

    याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने तर्क दिया कि SIT की जांच के बाद राज्य सरकार ने एक सदस्यीय समिति गठित कर दी है, जिससे SIT की जांच कमजोर पड़ेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री को जांच लंबित रहने के दौरान सार्वजनिक बयान देने पर फटकार लगाई थी।

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि SIT अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। उन्होंने कहा कि CBI मैनुअल के अनुसार यदि जांच के दौरान ऐसे प्रशासनिक दोष सामने आते हैं जो आपराधिक मामले से सीधे जुड़े नहीं हैं, तो उनकी जानकारी राज्य सरकार को दी जाती है। SIT को कुछ प्रशासनिक कमियां मिली थीं, जिनकी जांच राज्य की समिति कर रही है।

    राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट सिधार्थ लूथरा ने कहा कि याचिकाकर्ता दुर्भावना (mala fide) से अदालत पहुंचे हैं और विभागीय कार्रवाई को पटरी से उतारना चाहते हैं। वहीं, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह केवल विभागीय जांच है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि अदालत की चेतावनी के बावजूद मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों से बयान दे रहे हैं, जो चिंताजनक है।

    खंडपीठ ने यह देखते हुए कि SIT जांच पूरी हो चुकी है, कहा कि राज्य की प्रशासनिक जांच आपराधिक कार्यवाही से टकराव नहीं पैदा करेगी। अदालत ने कहा कि यह जांच उस आपराधिक प्रक्रिया से अलग है, जो चार्जशीट दाखिल होने के साथ समाप्त हो चुकी है, इसलिए किसी प्रकार का हितों का टकराव या ओवरलैप नहीं है। अदालत ने दोनों प्रक्रियाओं को कानून के अनुसार जारी रखने का निर्देश दिया।

    गौरतलब है कि 2024 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में इस्तेमाल घी में पशु वसा की मिलावट की गई थी, जिससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया। अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए SIT गठित की थी और सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की आलोचना भी की थी, क्योंकि लैब रिपोर्ट में पशु वसा की मौजूदगी का प्रथम दृष्टया संकेत नहीं मिला था।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SIT ने जनवरी में अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें पशु वसा की मिलावट से इनकार किया गया, लेकिन घी की खरीद प्रक्रिया में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिसके कारण नकली घी की आपूर्ति हुई। इसके बाद राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित की, जो SIT की रिपोर्ट का अध्ययन कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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