2जी मामला: लाइसेंस रद्द होने की तारीख से स्पेक्ट्रम शुल्क चुकाए टेलीकॉम कंपनी- सुप्रीम कोर्ट का आदेश
Amir Ahmad
23 Feb 2026 3:28 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए टेलीकॉम कंपनी सिस्तेमा श्याम टेलीसर्विसेज लिमिटेड को लाइसेंस रद्द होने की तारीख 2 फरवरी, 2012 से स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क चुकाने का आदेश दिया।
अदालत ने दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय अधिकरण के उस निर्णय को निरस्त किया, जिसमें देनदारी 15 फरवरी, 2013 से मानी गई।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए 10 मई, 2018 के अधिकरण के आदेश को इस बिंदु पर गलत ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी टेलीकॉम कंपनी का लाइसेंस रद्द हो चुका हो और वह उसके बाद भी सेवाएं जारी रखे तो उसे स्पेक्ट्रम उपयोग का शुल्क लाइसेंस रद्द होने की तारीख से ही देना होगा न कि उस बाद की तारीख से जब अदालत ने औपचारिक रूप से भुगतान का निर्देश दिया।
यह विवाद 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2012 में 122 लाइसेंस रद्द कर दिए।
अदालत ने आवंटन प्रक्रिया को अवैध और मनमाना करार दिया। हालांकि आम जनता की सेवाएं बाधित न हों इस कारण कंपनियों को सीमित अवधि तक सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी गई थी जब तक कि नई नीलामी न हो जाए।
दूरसंचार विभाग द्वारा नीलामी में देरी के कारण यह अस्थायी व्यवस्था कई बार बढ़ाई गई और कंपनियां बिना वैध लाइसेंस के भी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखती रहीं।
15 फरवरी, 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जो कंपनियां 2 फरवरी, 2012 के बाद भी संचालन करती रहीं उन्हें नवंबर 2012 की नीलामी में तय आरक्षित मूल्य का भुगतान करना होगा।
इसके आधार पर दूरसंचार विभाग ने कंपनी पर लगभग 636 करोड़ रुपये तथा ब्याज की मांग उठाई, जिसकी गणना 2 फरवरी, 2012 से की गई।
कंपनी ने इस मांग को अधिकरण में चुनौती दी। अधिकरण ने आंशिक राहत देते हुए कहा कि देनदारी 15 फरवरी, 2013 से मानी जाएगी, न कि 2 फरवरी, 2012 से।
सुप्रीम कोर्ट ने इस व्याख्या से असहमति जताई।
जस्टिस संजय कुमार द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि जब कंपनी लाइसेंस रद्द होने के बाद भी स्पेक्ट्रम का उपयोग कर राजस्व अर्जित करती रही तो वह पूरे अवैध संचालन काल के लिए आरक्षित मूल्य चुकाने की जिम्मेदार है।
अदालत ने कहा,
“इस न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि वे लाइसेंसधारी, जिन्होंने 02.02.2012 के बाद भी संचालन जारी रखा, उन्हें नवंबर 2012 की नीलामी में तय आरक्षित मूल्य का भुगतान करना होगा। इससे यह साफ है कि देनदारी की शुरुआत 02.02.2012 से ही मानी जाएगी।”
खंडपीठ ने यह भी कहा कि अधिकरण को इस तिथि की अलग व्याख्या करने का अधिकार नहीं था। यदि अदालत का आशय 15 फरवरी, 2013 से देनदारी शुरू करने का होता तो आदेश में वही कहा जाता।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि कंपनी 2 फरवरी, 2012 से 30 अप्रैल, 2013 तक उन आठ सर्किलों के लिए आरक्षित मूल्य चुकाए, जिनमें मार्च 2013 में उसकी बोली स्वीकार हुई। शेष 13 सर्किलों के लिए 2 फरवरी, 2012 से 23 मार्च, 2013 तक की अवधि का भुगतान करना होगा।
इसके साथ ही केंद्र सरकार की अपील स्वीकार की गई।

