सगी बहन की हत्या में सजा निलंबित करने से इनकार, कोर्ट ने कहा- ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृति, राज्य बनाए मानसिक स्वास्थ्य नीति

Amir Ahmad

23 Feb 2026 3:24 PM IST

  • सगी बहन की हत्या में सजा निलंबित करने से इनकार, कोर्ट ने कहा- ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृति, राज्य बनाए मानसिक स्वास्थ्य नीति

    मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने सगी बहन की कथित हत्या के मामले में दोषियों की सजा निलंबित करने से इंकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला भाई-बहन की ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृति का प्रतीत होता है।

    अदालत ने राज्य सरकार को व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति बनाने और स्कूल–कॉलेजों व जिला अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया।

    जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को दी जाए ताकि नागरिकों विशेषकर युवाओं और बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर नीति बनाई जा सके।

    अदालत ने निर्देश दिया कि संसाधनों के भीतर समयबद्ध तरीके से स्कूलों, कॉलेजों और कम से कम प्रत्येक जिले के अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किए जाएं तथा 90 दिनों में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

    मामले में अपीलकर्ताओं ने सेशन कोर्ट द्वारा हत्या (धारा 302), साक्ष्य मिटाने (धारा 201) और आपराधिक साजिश (धारा 120बी) में दी गई सजा के खिलाफ अपील दायर करते हुए सजा निलंबन और जमानत की मांग की थी। अपीलकर्ता संख्या 1 मृतका की सगी बहन है।

    अभियोजन के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में मृतका के सिर और गर्दन पर चाकू से वार के निशान पाए गए और उसकी मृत्यु अत्यधिक रक्तस्राव व आघात से हुई। जबकि बहन का दावा था कि मृतका बाथरूम में फिसलकर गिर गई थी।

    अपीलकर्ताओं के एडवोकेट ने तर्क दिया कि बहन और मां के कथन पर संदेह करने का कोई ठोस कारण नहीं है और प्रत्यक्ष साक्ष्य का अभाव है।

    वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि मृतका को परिवार में अधिक महत्व दिए जाने से बहन के मन में हीनभावना और ईर्ष्या उत्पन्न हुई जो शत्रुता में बदल गई।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि चाकू बहन के घर से बरामद हुआ। इन परिस्थितियों में खंडपीठ ने सजा निलंबन का लाभ देने से इंकार किया हालांकि अपीलकर्ताओं को आवेदन वापस लेने की स्वतंत्रता दी।

    मामले का निस्तारण करते हुए खंडपीठ ने कहा,

    “ऐसा प्रतीत होता है कि यह भाई-बहन की ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृति का मामला है जिसे समाज में विकराल रूप लेने से पहले संबोधित किया जाना आवश्यक है।”

    अदालत ने राज्य को स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियुक्त करने तथा कम से कम जिला स्तर के अस्पतालों में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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