कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध पेड़ कटान मामले में अभियोजन मंजूरी के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
Praveen Mishra
23 Feb 2026 1:52 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कल उत्तराखंड में तैनात भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी राहुल द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़े मामले में उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति (sanction) को चुनौती दी गई थी। इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई कर रही है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की खंडपीठ ने याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए खारिज कर दिया। अधिकारी के वकील ने तर्क दिया कि राज्य सरकार को मिली कानूनी सलाह के अनुसार अधिकारी के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देने के बजाय केवल विभागीय जांच ही पर्याप्त है।
इस पर जस्टिस बागची ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया है और कथित रूप से फर्जी प्रविष्टियां कर पेड़ों की कटाई को छिपाया गया, जो प्रथम दृष्टया जालसाजी (forgery) और पद के दुरुपयोग का मामला बनता है। उन्होंने कहा कि “पूरे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील टाइगर रिजर्व को वही व्यक्ति नष्ट कर रहा है, जिसे उसकी रक्षा करनी थी—क्या केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त होगी?”
जब वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी ताकि उचित समय पर ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर की जा सके, तो न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि यह देश की आपराधिक न्याय प्रणाली की समस्या है कि हर चीज “उचित समय” पर टाल दी जाती है, जिससे स्पष्ट मामलों में भी देरी होती है।
इससे पहले, पूर्व चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट की आलोचना की थी, जिसने राहुल की याचिका स्वीकार कर अभियोजन स्वीकृति पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह कदम उसकी चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप के समान है, क्योंकि कॉर्बेट में अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई से संबंधित मामले की सुनवाई पहले से ही शीर्ष अदालत में लंबित थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले उत्तराखंड सरकार से पूछा था कि अभियोजन की अनुमति क्यों नहीं दी गई। इसके बाद 16 सितंबर 2025 को राज्य ने एक अधिकारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी। इसके बावजूद राहुल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी, जिसे 14 अक्टूबर 2025 को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने मंजूरी आदेश पर रोक लगा दी थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा था कि अधिकारी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से पूरी तरह अवगत था, फिर भी उसने हाईकोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए राहुल को नोटिस जारी किया था और पूछा था कि उसके खिलाफ अवमानना (Contempt) की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
अंततः, याचिका वापस लेने के साथ मामला फिलहाल समाप्त हो गया।

