ताज़ा खबरे
लंबे समय से लंबित मामला मूल मुद्दों पर फैसला न होने की कमी पूरी नहीं कर सकता: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि किसी दीवानी मुकदमे का लंबे समय से लंबित होना इस आधार पर मामले को पुनः निचली अदालत को भेजने से बचने का कारण नहीं बन सकता, यदि ट्रायल कोर्ट ने मूल और निर्णायक मुद्दों पर गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला ही नहीं किया हो।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने एक संपत्ति विवाद से जुड़े दो नियमित द्वितीय अपीलों को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। यह विवाद एक निजी पक्ष और दिल्ली विकास प्राधिकरण के बीच था, जो तीन दशकों से अधिक समय से लंबित था। अपीलें प्रथम अपीलीय अदालत द्वारा पारित उस आदेश को...
HP Rent Control Act। किरायेदार की मृत्यु पर केवल पत्नी को ही किरायेदारी का अधिकार, आगे उत्तराधिकार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूल किरायेदार की मृत्यु के बाद किरायेदारी का उत्तराधिकार हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण कानून के तहत निर्धारित वैधानिक क्रम के अनुसार ही होगा। अदालत ने कहा कि यदि किरायेदार की पत्नी उसकी मृत्यु के समय जीवित थी और उसके साथ निवास कर रही थी तो वही अकेली वैध उत्तराधिकारी होगी। उसके बाद किरायेदारी का अधिकार किसी अन्य कानूनी वारिस को हस्तांतरित नहीं हो सकता।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि जवाला देवी अपने पति की मृत्यु तक जीवित थीं और...
जिले से बाहर विवाह करने पर स्थानीय निवासी आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार विवाह के बाद संबंधित जिले से बाहर निवास करता है, वह सार्वजनिक भर्ती में स्थानीय निवासी के आधार पर वरीयता का दावा नहीं कर सकता, जब तक कि वह ठोस और विश्वसनीय दस्तावेजों के माध्यम से अपने स्थानीय निवास को सिद्ध न करे।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने यह निर्णय एक महिला अभ्यर्थी की याचिका पर सुनाया, जिसमें उसने दावा किया कि विवाह के बावजूद वह अपने मायके के गांव में ही निवास कर रही है। इसलिए उसे स्थानीय निवासी के रूप...
पत्नी के निजी फोटो तक अनधिकृत पहुंच और उन्हें वायरल करने की धमकी क्रूरता: झारखंड हाइकोर्ट
झारखंड हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति द्वारा पत्नी के निजी और आपत्तिजनक फोटो तक अनधिकृत रूप से पहुंच बनाना, उन्हें अपने पास सुरक्षित करना और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना क्रूरता की श्रेणी में आता है।हाइकोर्ट ने इसे पति द्वारा पत्नी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन का गंभीर मामला बताया।यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनाया, जिसमें पत्नी द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद की याचिका...
एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक अपील को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि अभियुक्त की ओर से वकील उपस्थित नहीं हुआ। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अभियुक्त के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करे और अपील का निर्णय मामले के गुण-दोष के आधार पर करे, न कि अनुपस्थिति के कारण।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्त के वकील की गैर-हाजिरी के कारण आपराधिक अपील को डिफॉल्ट में खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा...
भूला हुआ अधिकार
भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में, गिरफ्तारी एक प्रक्रियात्मक तंत्र है जिसका उद्देश्य जांच के उद्देश्यों के लिए एक अभियुक्त की उपस्थिति को सुरक्षित करना है। निर्णयों के एक समूह में, माननीय सुप्रीम कोर्ट और देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों ने लगातार यह माना है कि जहां इस उद्देश्य को कम घुसपैठ के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, जांच एजेंसी को ऐसे विकल्पों को अपनाना चाहिए और अनावश्यक गिरफ्तारियों से बचना चाहिए। इन स्पष्ट न्यायिक घोषणाओं के बावजूद, गिरफ्तारी तेजी से एक प्रक्रियात्मक कदम के बजाय...
CrPC की धारा 125 के बदलते आयाम – हाल के न्यायिक फैसलों के माध्यम से एक विश्लेषण
यह निर्विवाद है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 का आवेदन तब उत्पन्न होगा जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या बच्चों या अपने माता-पिता के प्रति वित्तीय सहायता के मामले में अपने कर्तव्य को पूरा करने की उपेक्षा करता है या उससे बचता है। समय के साथ, इस प्रावधान ने निरंतर न्यायिक व्याख्या के माध्यम से एक विशिष्ट सामाजिक कल्याण चरित्र हासिल किया है, इसे मूल न्याय को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में स्थापित किया है, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों सहित समाज में कमजोर...
जमानत को रोकने के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, 'पब्लिक ऑर्डर' को खतरा साबित करना होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना 'गुंडा एक्ट' के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन रद्द की। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिर्फ़ हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 'आदतन ड्रग अपराधी' घोषित करना प्रिवेंटिव डिटेंशन के लिए काफ़ी नहीं है, जब तक यह न दिखाया जाए कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के कामों से पब्लिक ऑर्डर को कैसे खतरा था।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए यह बात कही, जिसने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के हिरासत आदेश को सही ठहराया था। इस आदेश में...
आपसी सहमति से बने किशोरों के रिश्तों को मुकदमों से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने POCSO Act में 'रोमियो-जूलियट' क्लॉज़ लाने का आग्रह किया
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार POCSO Act में एक "रोमियो-जूलियट" क्लॉज़ लाने पर विचार करे ताकि उन किशोरों को आपराधिक मुकदमों से छूट दी जा सके, जो आपसी सहमति से रिश्ते बनाते हैं, भले ही वे सहमति की उम्र (18 साल) से कम हों और उनके बीच उम्र का मामूली अंतर हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले से जुड़े मामले में दिए गए फैसले में पोस्ट-स्क्रिप्ट के तौर पर आदेश दिया,"इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इन कानूनों के...
'चौंकाने वाली बात' कि नाबालिग लड़कियां 10 से ज़्यादा सालों से लापता हैं, फिर भी पुलिस को कोई सुराग नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी) को पुलिस अधिकारियों को पिछले दस सालों में लापता हुई नाबालिग लड़कियों की संख्या बताते हुए एक डिटेल में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी बताने का निर्देश दिया कि पुलिस की कोशिशों से कितनी लड़कियों का पता चला और कितनी लड़कियां खुद वापस लौटीं।ये निर्देश इंसानी तस्करी की शिकार महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिए गए, जिसने ऐसी नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए न्यायिक दखल की मांग की थी, जो इसी तरह के शोषण का शिकार हो सकती...
पति द्वारा जबरदस्ती अप्राकृतिक सेक्स करना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता, मगर वैवाहिक अपवाद के कारण बलात्कार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पति द्वारा अपनी बालिग पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने को धारा 376 के तहत बलात्कार के रूप में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता माना जाएगा।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा,"हालांकि, इस कोर्ट की भी राय है कि पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता है। साथ ही IPC की धारा 376 के तहत...
Companies Act | धोखाधड़ी के खिलाफ प्राइवेट शिकायत मान्य नहीं, सिर्फ़ SFIO ही फाइल कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को कहा कि कंपनी एक्ट, 2013 के तहत धोखाधड़ी के आरोपों वाली शिकायतें प्राइवेट शिकायतों के ज़रिए शुरू नहीं की जा सकतीं, क्योंकि स्पेशल कोर्ट सिर्फ़ सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के डायरेक्टर या एक्ट की धारा 212(6) के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा दायर शिकायत पर ही संज्ञान ले सकता है।हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि कोई भी व्यक्ति बिना उपाय के नहीं है। शिकायत दर्ज करने की पात्रता पूरी करने पर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए एक्ट की धारा 213...
ACR में बिना बताई गई प्रतिकूल प्रविष्टियों पर अनिवार्य रिटायरमेंट का आदेश पारित करने के लिए विचार किया जा सकता है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाया कि कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बिना बताई गई प्रतिकूल प्रविष्टियों पर अनिवार्य रिटायरमेंट का आदेश पारित करने के लिए विचार किया जा सकता है।पृष्ठभूमि के तथ्यकर्मचारी को 1995 में जगदलपुर में जिला कोर्ट प्रतिष्ठान में प्रोसेस राइटर के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें पदोन्नति मिली और 2018 में बीजापुर में सहायक ग्रेड-II के रूप में तैनात किया गया। एक स्क्रीनिंग कमेटी का पुनर्गठन किया गया और...
'व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की 'हेरफेर' के लिए FIR का आदेश दिया
एक व्यक्ति द्वारा जन्मतिथि में हेरफेर से जुड़े कथित जालसाजी और धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति और संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करें।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस स्थिति को 'चौंकाने वाला' बताया और टिप्पणी की कि दस्तावेजों में हेरफेर की हद "व्यापक भ्रष्टाचार" का सीधा नतीजा है।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (शिव शंकर पाल) ने पासपोर्ट अथॉरिटी को अपने...
'अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया': झारखंड हाईकोर्ट ने ज़मीन घोटाले के मामले में निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी) को हज़ारीबाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की ज़मानत याचिका खारिज की। चौबे पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने कथित ज़मीन घोटाले के मामले में केस दर्ज किया था।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी याचिकाकर्ता की रेगुलर ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 467, 468, 471, 420, और 120B के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(c) और (d) के तहत दर्ज FIR में आरोपी बनाया...
वादा किया गया फाइबर कनेक्शन न देने पर चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने रिलायंस जियो को दोषी ठहराया
शिकायतकर्ता, सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 मार्च 2024 को जियो से ऑप्टिक-फाइबर वायर्ड ब्रॉडबैंड लिया और पूरे साल के लिए ₹12,729 पहले ही दे दिए। अगले दिन कनेक्शन लगा दिया गया, लेकिन पता चला कि यह वायर्ड नहीं बल्कि वायरलेस है।जब उन्होंने आपत्ति की, तो जियो वालों ने कहा कि यह वायरलेस कनेक्शन भी वायर्ड जैसा ही अनलिमिटेड डेटा देगा। लेकिन करीब 18 दिन बाद ही उन्हें मैसेज आने लगे कि उनका डेटा खत्म हो गया है और अब दोबारा रिचार्ज करना होगा।ग्राहक ने क्या किया?उन्होंने 3 अप्रैल 2024 को कनेक्शन बंद कराने और पैसे...
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...
समझौते की शर्तों के उल्लंघन मात्र से जमानत रद्द नहीं की जा सकती: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि एक बार जमानत दिए जाने के बाद केवल समझौते की शर्तों का पालन न करना या भुगतान करने के वादे को पूरा न कर पाना, अपने आप में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करने के लिए इससे कहीं अधिक ठोस और कानूनी आधार आवश्यक होता है।यह टिप्पणी जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच ने उस मामले में की, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक आयुक्त, रांची द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। उक्त आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को पहले से मिली अग्रिम...
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...




















