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रिलायंस को विकास हेतु दी गई मुंबई कोस्टल रोड की भूमि सामान्यतः जनता के लिए खुली रहेगी : सुप्रीम कोर्ट
रिलायंस को विकास हेतु दी गई मुंबई कोस्टल रोड की भूमि सामान्यतः जनता के लिए खुली रहेगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुंबई कोस्टल रोड (साउथ) के पास स्थित वह रीक्लेम्ड भूमि, जिसे रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को लैंडस्केपिंग और विकास कार्यों के लिए सौंपा गया है, सामान्य रूप से आम जनता के लिए खुली रहनी चाहिए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत निजी एजेंसियों को कोस्टल रोड के किनारे की रीक्लेम्ड भूमि पर लैंडस्केपिंग और मेंटेनेंस का काम दिया जाना...

रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी
रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के 'लापरवाह' रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी

इलाहाबाद हाइकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने शुक्रवार को ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिस पर बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य कथित राष्ट्रविरोधी तत्वों को अवैध एवं अनधिकृत सहायता देकर भारत में बसाने तथा अशांति और वैमनस्य फैलाने के लिए सिंडिकेट का “मुख्य सरगना” होने का आरोप है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक कदम न उठाने पर जांच एजेंसी, विशेषकर जांच अधिकारी (आईओ), के लापरवाह और...

सोनम वांगचुक की हिरासत: जिला मजिस्ट्रेट ने स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया, SSP की रिपोर्ट कॉपी-पेस्ट की — सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
सोनम वांगचुक की हिरासत: जिला मजिस्ट्रेट ने स्वतंत्र रूप से विचार नहीं किया, SSP की रिपोर्ट कॉपी-पेस्ट की — सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने आज (12 जनवरी) लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत की गई गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखी। यह याचिका उनकी पत्नी डॉ. गीताांजली आंग्मो ने दाखिल की है, जिसमें वांगचुक की हिरासत को अवैध बताया गया है। वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में राज्यhood आंदोलन के हिंसक होने के बाद हिरासत में लिया गया था।इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी. बी. वराले की खंडपीठ कर रही है।आज याचिकाकर्ता की ओर से पेश...

आंध्र के पोलावरम प्रोजेक्ट के खिलाफ तेलंगाना की याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की अनुमति दी
आंध्र के पोलावरम प्रोजेक्ट के खिलाफ तेलंगाना की याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने आज तेलंगाना सरकार को पोलावरम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के विस्तार को चुनौती देने वाली अपनी रिट याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और उसे अनुच्छेद 131 के तहत सिविल सूट के रूप में चुनौती उठाने की स्वतंत्रता प्रदान की।यह मामला चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष था। तेलंगाना सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ दायर की थी, जिसमें पोलावरम–बनकाचेरला लिंक परियोजना के विस्तार के लिए दी गई वित्तीय...

कोर्ट परिसर गरिमामय और पवित्र स्थल हैं, उन्हें प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
कोर्ट परिसर गरिमामय और पवित्र स्थल हैं, उन्हें प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में अदालत कक्ष के भीतर नारेबाजी करने, एक आरोपी को धमकाने, पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने और उनके वैधानिक कर्तव्यों में बाधा डालने के आरोप में दो व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने वाली किसी भी अवैध गतिविधि को हल्के में नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने कहा—“न्यायालय परिसर, जिसमें अदालत कक्ष और उसके आसपास का क्षेत्र शामिल है, न्याय के...

पीड़िता के सहमति से वयस्क होने पर MP हाईकोर्ट ने POCSO सजा रद्द की, जज व अभियोजक से जवाब तलब
पीड़िता के सहमति से वयस्क होने पर MP हाईकोर्ट ने POCSO सजा रद्द की, जज व अभियोजक से जवाब तलब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO अधिनियम के तहत एक व्यक्ति की सजा को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया कि पीड़िता एक सहमति से संबंध में रहने वाली वयस्क (कंसेंटिंग एडल्ट) थी। इस मामले में न्यायालय ने यह भी पाया कि विशेष न्यायाधीश द्वारा की गई गंभीर चूक के कारण अभियुक्त को तीन वर्षों से अधिक समय तक जेल में रखा गया, जो न्याय के साथ अन्याय है।यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की खंडपीठ के समक्ष आया। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश और लोक...

NCLT चेयरमैन के अंतरराज्यीय मामलों के स्थानांतरण की शक्ति पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
NCLT चेयरमैन के अंतरराज्यीय मामलों के स्थानांतरण की शक्ति पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट यह जांच करेगा कि क्या राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के चेयरमैन के पास प्रशासनिक आदेश के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में मामलों को स्थानांतरित करने की शक्ति है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने हाल ही में उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें गुजरात हाइकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई जिसमें कहा गया कि NCLT अध्यक्ष को प्रशासनिक आदेश द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में मामलों को स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है।नोटिस जारी करते...

ट्रेन के कोच में पेशाब करने और हंगामा करने के आरोपी न्यायिक अधिकारी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पुनर्बहाली पर रोक
ट्रेन के कोच में पेशाब करने और हंगामा करने के आरोपी न्यायिक अधिकारी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पुनर्बहाली पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द करते हुए उसकी पुनर्बहाली का निर्देश दिया गया था। उक्त न्यायिक अधिकारी पर ट्रेन यात्रा के दौरान उपद्रव मचाने महिला यात्री के सामने अश्लील हरकत करने और कोच में पेशाब करने के गंभीर आरोप हैं।सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित न्यायिक अधिकारी का आचरण सबसे गंभीर किस्म का घोर कदाचार है और उसे सेवा से बर्खास्त ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले को चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि यह...

ठेकेदार के माध्यम से रखे गए कर्मचारी नियमित कर्मियों के समान दर्जा नहीं मांग सकते: सुप्रीम कोर्ट
ठेकेदार के माध्यम से रखे गए कर्मचारी नियमित कर्मियों के समान दर्जा नहीं मांग सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार या तीसरे पक्ष की एजेंसियों के जरिए नियुक्त किए गए कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सेवा लाभ और दर्जे का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के बराबर माना गया तो इससे सार्वजनिक नियुक्ति की पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया की बुनियाद ही कमजोर हो जाएगी।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने कहा कि राज्य संस्थाओं में नियमित नियुक्ति एक सार्वजनिक संपत्ति के समान है, जिसे ठेकेदारों के...

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ TMC सांसदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ TMC सांसदों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जवाब मांगा। इस मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ कर रही है। यह आवेदन टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दाखिल किए गए हैं।डेरेक ओ'ब्रायन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित निर्देश...

BREAKING | विजय अभिनीत जना नायकन फिल्म पर हाइकोर्ट की रोक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
BREAKING | विजय अभिनीत जना नायकन फिल्म पर हाइकोर्ट की रोक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

तमिल एक्टर विजय की फिल्म 'जना नायकन' के निर्माता ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश पर मद्रास हाइकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने शुक्रवार को मद्रास हाइकोर्ट की खंडपीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की। खंडपीठ ने एकल पीठ द्वारा CBFC को फिल्म को तत्काल प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश पर रोक लगा दी थी।यह फिल्म एक्टर विजय की बतौर एक्टर आखिरी फिल्म बताई...

धुरंधर फ़िल्म-निर्माताओं को राहत, बलोच समुदाय पर आपत्तिजनक शब्द म्यूट करने पर हाईकोर्ट ने याचिका की बंद
'धुरंधर' फ़िल्म-निर्माताओं को राहत, बलोच समुदाय पर आपत्तिजनक शब्द म्यूट करने पर हाईकोर्ट ने याचिका की बंद

गुजरात हाइकोर्ट ने फिल्म 'धुरंधर' में बलोच समुदाय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक संवाद हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका को बंद कर दिया। फिल्म निर्माताओं की ओर से अदालत को यह जानकारी दिए जाने के बाद कि संबंधित शब्द को पहले ही म्यूट कर दिया गया, कोर्ट ने माना कि अब कोई विवाद शेष नहीं रह गया।यह मामला बलोच समुदाय से जुड़े दो व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिनमें उत्तर गुजरात बलोच समाज ट्रस्ट, पाटन के उपाध्यक्ष भी शामिल थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में बलोच समुदाय को लेकर कुछ संवाद...

गलत गिरफ्तारी और 54 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए NRI को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश
गलत गिरफ्तारी और 54 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए NRI को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश

केरल हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक NRI व्यक्ति और उसके परिवार को गलत गिरफ्तारी और अवैध हिरासत के लिए कुल 14 लाख रुपये मुआवजा अदा करे। कोर्ट ने माना कि पुलिस की कार्रवाई के कारण याचिकाकर्ताओं को मानसिक पीड़ा, सामाजिक अपमान, उत्पीड़न और गंभीर नुकसान उठाना पड़ा।जस्टिस पी.एम. मनोज ने NRI व्यक्ति वी.के. ताजुद्दीन को 10 लाख रुपये तथा उनकी पत्नी, पुत्र, पुत्री और नाबालिग पुत्र को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता वी.के. ताजुद्दीन...

जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज़ (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत पिछली तारीख से नियमितीकरण नहीं: हाइकोर्ट
जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज़ (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत पिछली तारीख से नियमितीकरण नहीं: हाइकोर्ट

जम्मू–कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने सेवा मामलों में बार-बार उठने वाले एक अहम सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि केवल निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर लेने मात्र से किसी कर्मचारी को पिछली तारीख से नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिल जाता। हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू एंड कश्मीर सिविल सर्विसेज़ (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2010 के तहत नियमितीकरण केवल भविष्य प्रभाव से ही किया जा सकता है, भले ही कर्मचारी ने निर्धारित योग्यता अवधि पहले ही पूरी कर ली हो।जस्टिस संजय धर ने जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट...

जमानत को मशीनी तरीके से मना नहीं किया जाना चाहिए, इसे अप्रासंगिक बातों पर नहीं दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
जमानत को मशीनी तरीके से मना नहीं किया जाना चाहिए, इसे अप्रासंगिक बातों पर नहीं दिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट (POCSO Act) के तहत एक मामले में जमानत दी गई, जिसमें उस पर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि जमानत का आदेश गलत, अनुचित है और उसने संबंधित सबूतों को नज़रअंदाज़ किया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने शिकायतकर्ता/पीड़ित की जमानत आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार करते हुए कहा,“यह तय कानून है कि सिर्फ चार्जशीट...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना लोकस स्टैंडी के लगाए गए अवैध खनन के आरोपों पर सुनवाई करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना लोकस स्टैंडी के लगाए गए अवैध खनन के आरोपों पर सुनवाई करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रेत खनन और खनन लीज के आवंटन का आरोप लगाने वाली याचिका यह देखते हुए खारिज की कि याचिका एक ऐसे याचिकाकर्ता ने दायर की थी, जिसने अपना लोकस नहीं बताया। ऐसा लग रहा था कि यह याचिका किसी एक व्यक्ति से निजी दुश्मनी निकालने के लिए दायर की गई।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा;"याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी नंबर 3 से 5 अवैध रेत खनन में लगी फर्में हैं और कथित तौर पर प्रतिवादी नंबर 6 और 7, जो सरकारी अधिकारी हैं, उसके साथ मिलकर काम कर रही हैं। यह...