आंध्र के पोलावरम प्रोजेक्ट के खिलाफ तेलंगाना की याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की अनुमति दी

Praveen Mishra

12 Jan 2026 5:37 PM IST

  • आंध्र के पोलावरम प्रोजेक्ट के खिलाफ तेलंगाना की याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सूट दायर करने की अनुमति दी

    सुप्रीम कोर्ट ने आज तेलंगाना सरकार को पोलावरम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के विस्तार को चुनौती देने वाली अपनी रिट याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और उसे अनुच्छेद 131 के तहत सिविल सूट के रूप में चुनौती उठाने की स्वतंत्रता प्रदान की।

    यह मामला चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष था। तेलंगाना सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ दायर की थी, जिसमें पोलावरम–बनकाचेरला लिंक परियोजना के विस्तार के लिए दी गई वित्तीय सहायता को चुनौती दी गई थी।

    इससे पहले ही कोर्ट ने इस याचिका की पोषणीयता (maintainability) पर सवाल उठाया था।

    सुनवाई के दौरान, तेलंगाना की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट ए.एम. सिंहवी ने कहा कि इस परियोजना का विस्तार गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अवार्ड का उल्लंघन करते हुए बाढ़ के पानी को निर्धारित सीमा से अधिक मोड़ देगा। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि गोदावरी जल विवाद अवार्ड के पक्षकार केवल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और कर्नाटक भी हैं, जिन्होंने कथित उल्लंघनों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जबकि मौजूदा रिट याचिका में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया है।

    जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अनुच्छेद 131 के तहत सिविल सूट अधिक उपयुक्त मंच होगा। इसके बाद सिंहवी ने याचिका वापस लेने और सिविल सूट दायर करने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा,

    “मैं याचिका वापस लेता हूं और अनुच्छेद 131 के तहत लगभग तैयार सूट दाखिल करूंगा… मैं कहीं भी निरुपाय नहीं रह सकता।”

    खंडपीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए आदेश दिया—

    “रिट याचिका प्रथम दृष्टया पोषणीय न होने के कारण निस्तारित की जाती है, तथापि राज्य याचिकाकर्ता को उपयुक्त उपाय अपनाने और इस याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों को आगे उठाने की स्वतंत्रता दी जाती है।”

    तेलंगाना की याचिका में परियोजना को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को भी चुनौती दी गई थी, यह आरोप लगाते हुए कि यह केंद्रीय जल आयोग (CWC) की सिफारिशों का उल्लंघन करती है।

    याचिका में बताया गया कि गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अवार्ड और CWC के अनुसार कृष्णा नदी में मोड़े जाने वाले पानी की स्वीकृत मात्रा 80 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) थी, जबकि परियोजना के विस्तार के तहत इसे बढ़ाकर 200 TMC करने का प्रस्ताव है, जो आवश्यक अनुमोदनों के बिना किया जा रहा है।

    तेलंगाना ने यह भी आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने CWC की सैद्धांतिक मंजूरी (In-principle approval) लिए बिना ही DPR तैयार करना, टेंडर जारी करना और कार्य आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जबकि CWC ने 4 दिसंबर 2025 को स्पष्ट निर्देश दिया था कि बिना पूर्व मंजूरी DPR पर काम नहीं किया जाए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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