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मानसिक पुनर्वास केंद्र के निवासी भी वोट डाल सकते हैं, जब तक किसी सक्षम अदालत ने अयोग्य घोषित न किया हो: केरल हाईकोर्ट
मानसिक पुनर्वास केंद्र के निवासी भी वोट डाल सकते हैं, जब तक किसी सक्षम अदालत ने अयोग्य घोषित न किया हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने आगामी 2025 लोकसभा चुनावों में एक मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्र के निवासियों को मतदान का अधिकार देने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने कहा कि बिना किसी प्रमाण के यह मान लेना कि ऐसे केंद्र के सभी निवासी मानसिक रूप से अक्षम हैं और अपनी इच्छा से वोट नहीं डाल सकते, पूरी तरह गलत है।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन की पीठ ने एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पुनर्वास केंद्र में रहने वाले करीब 60 लोग मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त हैं और वे स्वतंत्र इच्छा से मतदान नहीं कर...

डॉक्टरों को मुफ़्त उपहार | सुप्रीम कोर्ट ने फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस कोड को वैधानिक बल देने का आह्वान किया
डॉक्टरों को मुफ़्त उपहार | सुप्रीम कोर्ट ने फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस कोड को वैधानिक बल देने का आह्वान किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (18 नवंबर) को केंद्र सरकार पर दबाव डाला कि क्या वह यूनिफ़ॉर्म कोड ऑफ़ फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस (UCPMP), 2024 को वैधानिक समर्थन देने का इरादा रखती है। कोर्ट ने कहा कि स्वैच्छिक व्यवस्था उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाती है और दवा कंपनियों के कदाचार के खिलाफ कोई प्रभावी प्रवर्तन तंत्र प्रदान नहीं करती है।एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि 2024 का UCPMP पूरी तरह से स्वैच्छिक 2015 UCPMP से अनिवार्य व्यवस्था में बदलाव है, वहीं जस्टिस मेहता ने कहा कि 2024 की...

पैरोल के लिए एक साल की सजा की शर्त अनिवार्य नहीं, SLP दाखिल करने पर मिल सकती है छूट: दिल्ली हाईकोर्ट
पैरोल के लिए एक साल की सजा की शर्त अनिवार्य नहीं, SLP दाखिल करने पर मिल सकती है छूट: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली जेल नियमावली के तहत पैरोल के लिए निर्धारित न्यूनतम एक वर्ष की कैद की शर्त बिल्कुल कठोर नहीं है और विशेष परिस्थितियों में इसे ढीला किया जा सकता है। ऐसे मामलों में, जब नियमों का सख़्त पालन किसी कैदी के मौलिक या वैधानिक अधिकारों को बाधित कर दे, यह शर्त लागू नहीं होगी।जस्टिस रविंद्र दुदेजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दोषसिद्धि के खिलाफ SLP (विशेष अनुमति याचिका) दायर करना ऐसी ही एक 'विशेष परिस्थिति' है, जिसके लिए नियमों में लचीलेपन की आवश्यकता है। यह आदेश उस...

ज़मानत याचिका से बचें: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पेशल स्टेट्स ट्रायल 6 महीने के भीतर पूरा करने के लिए सिस्टम बनाने का अनुरोध किया
'ज़मानत याचिका से बचें': सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पेशल स्टेट्स ट्रायल 6 महीने के भीतर पूरा करने के लिए सिस्टम बनाने का अनुरोध किया

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से पूरे भारत में समर्पित अदालतें स्थापित करके विशेष मामलों के मुक़दमों के 6 महीने के भीतर शीघ्र निपटारे के लिए अखिल भारतीय तंत्र विकसित करने का आह्वान किया।जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र/NIA की ओर से पेश वकीलों से कहा,"आप कृपया उच्चतम स्तर के अधिकारियों से बात करें। हम चाहते हैं कि एक प्रतिबद्ध व्यवस्था तुरंत लागू की जाए, जिसमें इन सभी मामलों में सभी पहलुओं से मुक़दमे 6 महीने के भीतर पूरे हो जाएं...ताकि ज़मानत आदि पर विचार करने जैसे मुद्दों से बचा जा सके। इस तरफ़...

अपराध जघन्य लेकिन पूर्वनियोजित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 महीने की चचेरी बहन के बलात्कार-हत्या मामले में मृत्युदंड आजीवन कारावास में बदला
अपराध जघन्य लेकिन पूर्वनियोजित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 महीने की चचेरी बहन के बलात्कार-हत्या मामले में मृत्युदंड आजीवन कारावास में बदला

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने मंगलवार को 5 महीने की चचेरी बहन के बलात्कार और हत्या के मामले में 27 वर्षीय आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी।हालांकि, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की पुष्टि करने से इनकार किया और उसे बिना किसी छूट के शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस राजीव सिंह की खंडपीठ ने अपने 65-पृष्ठीय फैसले में निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितियों की एक श्रृंखला के माध्यम से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 364, 376 (क)(ख)...

उपलब्ध क्रेडिट से अधिक राशि पर खाता-बही को ब्लॉक नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
उपलब्ध क्रेडिट से अधिक राशि पर खाता-बही को ब्लॉक नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें करदाताओं के इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेज़र से उक्त आदेश पारित होने के समय उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से अधिक राशि डेबिट करने की अनुमति नहीं दी गई थी।जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस मीनाक्षी आई. मेहता की खंडपीठ ने नियम 86-A के तहत इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेज़र को ब्लॉक करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट द्वारा समय एलॉयज के मामले में और उसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बेस्ट कॉर्प साइंस, किंग्स सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज, करुणा राजेंद्र रिंगशिया और...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने विवाह के बहाने बलात्कार करने के आरोप में दर्ज FIR खारिज की, कहा- यह वैवाहिक संस्था की अवहेलना
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने विवाह के बहाने बलात्कार करने के आरोप में दर्ज FIR खारिज की, कहा- यह वैवाहिक संस्था की अवहेलना

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने विवाह के बहाने बलात्कार करने के आरोप में दर्ज FIR खारिज करते हुआ कहा, "यह अकल्पनीय है कि एक कानूनी रूप से विवाहित महिला को विवाह के वादे पर यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।"जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने कहा,"जब एक पूर्णतः परिपक्व, विवाहित महिला विवाह के वादे पर यौन संबंध बनाने के लिए सहमति देती है। ऐसा करना जारी रखती है तो यह केवल विवाह संस्था की अवहेलना है, न कि तथ्यों की गलत धारणा द्वारा प्रलोभन का कार्य। ऐसे मामले में याचिकाकर्ता पर आपराधिक दायित्व...

माँ की पेंशन पर निर्भर नहीं रह सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बेदखली की अनुमति दी, कहा- मकान मालिक अपनी दुकान का उपयोग आजीविका के लिए कर सकता है
माँ की पेंशन पर निर्भर नहीं रह सकते: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बेदखली की अनुमति दी, कहा- मकान मालिक अपनी दुकान का उपयोग आजीविका के लिए कर सकता है

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब मकान मालिक के पास अपनी दुकान उपलब्ध हो और उसकी ज़रूरत वास्तविक हो तो उसे किराए की दुकान से अपना व्यवसाय जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने टिप्पणी की कि मकान मालिक की माँ की पेंशन आजीविका का स्थायी स्रोत नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि मकान मालिक का कहीं और किरायेदार होना उसकी दुकान चलाने के लिए अपनी संपत्ति वापस लेने की वास्तविक आवश्यकता को स्थापित करता है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर ने टिप्पणी की:"याचिकाकर्ता अपनी माँ के वेतन या पेंशन पर निर्भर नहीं...

दिल्ली हाईकोर्ट ने DMRC द्वारा ठेकेदार को सेवा में विफलता के कारण बर्खास्त करने के खिलाफ अपील खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने DMRC द्वारा ठेकेदार को सेवा में विफलता के कारण बर्खास्त करने के खिलाफ अपील खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक कंपनी द्वारा दायर अपील खारिज की, जिसे शुरू में दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन के लिए मोबाइल और नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान करने का काम सौंपा गया। कंपनी ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा इसे बदलने के खिलाफ अपील दायर की थी।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के इस निष्कर्ष को बरकरार रखा कि अपीलकर्ता कंपनी द्वारा 5G सेवाएं शुरू न करने से यात्रियों और मेट्रो नेटवर्क, दोनों पर असर पड़ा और इसलिए यह उससे अनुबंध वापस लेने का आधार...

राजनीतिक आकांक्षाओं के कारण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने से समझौता नहीं किया जा सकता: पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शन पर हाईकोर्ट
राजनीतिक आकांक्षाओं के कारण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने से समझौता नहीं किया जा सकता: पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शन पर हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट के चुनाव कराने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए, जो वर्तमान में स्टूडेंट्स के विरोध का विषय है, इस बात पर ज़ोर दिया कि "सभी स्टूडेंट्स का मुख्य ध्यान ज्ञान अर्जन पर ही रहना चाहिए। चुनावी या राजनीतिक आकांक्षाओं की बलिवेदी पर शैक्षणिक गतिविधियों से समझौता या बलिदान नहीं किया जा सकता।"पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 के अनुसार, सीनेट यूनिवर्सिटी के सभी मामलों, चिंताओं और संपत्ति के प्रबंधन और अधीक्षण के लिए अधिकृत है।चीफ...

पक्षकार की ओर से हलफनामे पर हस्ताक्षर करने पर वकील के क्लर्क की हाईकोर्ट ने की कड़ी आलोचना, कहा- यह धोखाधड़ी के समान
पक्षकार की ओर से हलफनामे पर हस्ताक्षर करने पर वकील के क्लर्क की हाईकोर्ट ने की कड़ी आलोचना, कहा- यह धोखाधड़ी के समान

राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना इन दस्तावेजों की विषय-वस्तु को जाने वकीलों या उनके क्लर्कों द्वारा अपने मुवक्किलों की ओर से आवेदनों/याचिकाओं/प्रति-हलफनामों आदि के हलफनामों पर हस्ताक्षर करने की घटना की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही कहा कि ऐसा आचरण धोखाधड़ी के समान है और अस्वीकार्य है।कोर्ट ने कहा:“न्याय को अक्सर लाक्षणिक रूप से अंधा कहा जाता है, लेकिन न्यायालयों के अधिकारियों को जजों को दृष्टिहीन समझकर पीठ के विश्वास को तोड़ने का साहस नहीं करना चाहिए... वकीलों या उनके क्लर्कों द्वारा बिना उचित प्रतिनिधित्व...

ऐतिहासिक तथ्यों से कथित छेड़छाड़ के आरोप में फिल्म 120 बहादुर के खिलाफ़ हाईकोर्ट में याचिका, कल होगी सुनवाई
ऐतिहासिक तथ्यों से कथित छेड़छाड़ के आरोप में फिल्म '120 बहादुर' के खिलाफ़ हाईकोर्ट में याचिका, कल होगी सुनवाई

फरहान अख्तर अभिनीत फिल्म "120 बहादुर" को ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ के आरोपों के चलते केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।इस मामले की सुनवाई बुधवार को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ द्वारा की जाएगी।फिल्म में मेजर शैतान सिंह भाटी का किरदार निभाया गया, जिन्हें 1962 में रेजांग ला की लड़ाई में उनकी बहादुरी के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। फिल्म 21 नवंबर को...

Delhi Riots UAPA Case | उमर खालिद ज़मानत पाने वाले अन्य आरोपियों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट में बोली दिल्ली पुलिस
Delhi Riots UAPA Case | उमर खालिद ज़मानत पाने वाले अन्य आरोपियों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट में बोली दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने सोमवार (18 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उमर खालिद, दिल्ली दंगों की व्यापक साजिश मामले में सह-आरोपी देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उन्हें ज़मानत देने का 2021 का आदेश गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की गलत व्याख्या पर आधारित था।पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि तीनों के पक्ष में दिल्ली हाईकोर्ट के 2021 के ज़मानत फैसले में यह गलत धारणा दी गई कि...

न्याय के पहियों में घर्षण: 38 साल पुराने वसीयत विवाद का निपटारा करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई निराशा, जारी किए प्रशासन पत्र
न्याय के पहियों में घर्षण: 38 साल पुराने वसीयत विवाद का निपटारा करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई निराशा, जारी किए प्रशासन पत्र

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में 38 साल पुराने वसीयत विवाद का निपटारा करते हुए टिप्पणी की कि यह मामला न्याय के पहियों में उस घर्षण का उदाहरण है, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने यशपाल जैन बनाम सुशीला देवी और अन्य मामले में चेतावनी दी थी।जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि इस विवाद का फैसला करने में 38 साल लंबा समय लगा। इस बीच अधिकांश मूल पक्षकारों की मृत्यु हो गई और अनगिनत वकीलों को बदला गया।जज ने टिप्पणी की,"न्याय वितरण प्रणाली बार, पीठ और पक्षकारों के बीच आपसी विश्वास पर कार्य करती है। प्रत्येक...

सामान्य श्रेणी के यात्रियों को प्रीमियम श्रेणी में यात्रा करने वालों के समान सुरक्षा मानकों का अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे से कहा
सामान्य श्रेणी के यात्रियों को प्रीमियम श्रेणी में यात्रा करने वालों के समान सुरक्षा मानकों का अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे से कहा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रत्येक यात्री, चाहे वह किसी भी श्रेणी में यात्रा कर रहा हो, रेल प्रशासन से सुरक्षा, देखभाल और सतर्कता के समान मानकों का हकदार है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने एक यात्री के भीड़भाड़ वाली ट्रेन से गिरने के कारण अपने दोनों पैर गंवाने के बाद सुरक्षित यात्रा की स्थिति सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए रेलवे को उत्तरदायी ठहराया।पीठ ने कहा,"यह न्यायालय यह टिप्पणी करने के लिए बाध्य है कि रेल प्रशासन को सामान्य श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों के...

जाली डिग्री सर्टिफिकेट के आधार पर नियुक्ति पाना अक्षम्य: सुप्रीम कोर्ट
जाली डिग्री सर्टिफिकेट के आधार पर नियुक्ति पाना अक्षम्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति जाली शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर होती है तो यह कृत्य "अक्षम्य" है और केवल इसलिए बर्खास्तगी को अमान्य नहीं माना जाएगा, क्योंकि पूरी विभागीय जांच नहीं की गई।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बहाल करते हुए कहा कि जब जालसाजी के मूल आरोप का खंडन नहीं किया जाता है तो औपचारिक जांच का अभाव बर्खास्तगी आदेश को अमान्य नहीं करता।कोर्ट ने कहा,"यह भी स्वीकार किया जाता है कि...

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी का घर अवैध रूप से गिराने का आरोप लगाने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश के अधिकारियों से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी का घर अवैध रूप से गिराने का आरोप लगाने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश के अधिकारियों से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के अधिकारियों से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए याचिकाकर्ता के घर को कथित रूप से अवैध रूप से गिराने के लिए अवमानना ​​कार्यवाही की मांग की गई।सीहोर जिले के निवासी इमरोज़ खान नामक याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने से इनकार करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके खिलाफ गैरकानूनी धर्म परिवर्तन का आरोप लगाकर झूठा मामला दर्ज करने के बाद उनका घर गिरा...

1996 गाज़ियाबाद बस धमाका: पुलिस के बयान मान्य नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को भारी मन से बरी किया
1996 गाज़ियाबाद बस धमाका: पुलिस के बयान मान्य नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को 'भारी मन से' बरी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1996 के मोदीनगर–गाज़ियाबाद बस बम धमाका मामले में दोषी ठहराए गए मोहम्मद इलियास को बरी कर दिया है। 51 पन्नों के विस्तृत फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किया गया इलियास का कथित इक़बाल-ए-जुर्म भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 के चलते कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस के समक्ष दिया गया कथित बयान एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा टेप पर...

दिल्ली के स्मॉग का हवाला देते हुए जस्टिस भूइयां ने चेताया: बाद में दी जाने वाली पर्यावरण मंजूरी स्वीकार नहीं, कोर्ट पीछे नहीं हट सकती
दिल्ली के स्मॉग का हवाला देते हुए जस्टिस भूइयां ने चेताया: बाद में दी जाने वाली पर्यावरण मंजूरी स्वीकार नहीं, कोर्ट पीछे नहीं हट सकती

पर्यावरण नियमों में ढील का विरोध: जस्टिस भूइयाँ ने वैनाशक्ति फैसले की समीक्षा पर कड़ा असहमति मत जतायासुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भूइयाँ ने वैनाशक्ति फैसले की समीक्षा के खिलाफ कड़े शब्दों में असहमति जताते हुए कहा कि दिल्ली का खतरनाक स्मॉग याद दिलाता है कि पर्यावरण कानूनों को कमजोर नहीं किया जा सकता। उनका मत था कि पर्यावरण मंजूरी (EC) हमेशा पहले लेनी चाहिए, और बाद में दी गई मंजूरी (post-facto EC) पूरी तरह अवैध है। बहुमत ने कुछ स्थितियों में बाद में मंजूरी की अनुमति देने का रास्ता खोला है, लेकिन...