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राजस्व न्यायालयों और नियंत्रण प्रणाली की संरचना: राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएँ 20-A से 23
राजस्व न्यायालयों और नियंत्रण प्रणाली की संरचना: राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएँ 20-A से 23

राज्य में भूमि से जुड़े विवादों की संख्या बहुत अधिक होती है, और इनमें निर्णय लेने के लिए एक न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता होती है। राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 में पहले ही राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति और उनके अधिकारों का वर्णन किया गया है।अब Sections 20-A से 23 में राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, पद के अनुसार की गई नियुक्तियाँ, उनकी अधिसूचना, और न्यायिक तथा गैर-न्यायिक कार्यों पर नियंत्रण से संबंधित प्रावधानों को दर्शाया गया है। Section 20-A – राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (Revenue...

धारा 432 BNSS 2023 : अपीलीय न्यायालय द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य लेना या उसे लेने का निर्देश देना
धारा 432 BNSS 2023 : अपीलीय न्यायालय द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य लेना या उसे लेने का निर्देश देना

अदालतों द्वारा दिए गए निर्णय अंतिम माने जाते हैं, लेकिन हमारे देश की न्यायिक व्यवस्था में अपील का अधिकार एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जिससे किसी भी व्यक्ति को न्याय पाने का दूसरा मौका मिलता है। जब कोई मामला अपीलीय अदालत में पहुँचता है, तब वहाँ सिर्फ रिकॉर्ड देख कर ही निर्णय नहीं लिया जाता, बल्कि यदि आवश्यक हो, तो अदालत खुद से या अन्य किसी सक्षम अदालत को यह आदेश दे सकती है कि अतिरिक्त साक्ष्य (Additional Evidence) लिया जाए। यही प्रावधान धारा 432 में किया गया है।अपीलीय न्यायालय द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य...

राजस्थान न्यायालय शुल्क मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 38– डिक्री अथवा अन्य दस्तावेज को रद्द करने के लिए वादों में कोर्ट फीस की गणना
राजस्थान न्यायालय शुल्क मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 38– डिक्री अथवा अन्य दस्तावेज को रद्द करने के लिए वादों में कोर्ट फीस की गणना

संपत्ति के अधिकारों और आर्थिक विवादों में अक्सर कुछ ऐसे दस्तावेज या डिक्री सामने आते हैं जिनसे किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों, संपत्ति के स्वामित्व, दावे या हक को नुकसान पहुंचता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति अदालत की शरण में जाकर उस डिक्री या दस्तावेज को रद्द करने की मांग करता है। Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961 की धारा 38 इन्हीं वादों में देय न्याय शुल्क (Court Fee) की गणना की विधि को निर्धारित करती है।धारा 38 विशेष रूप से उन मामलों को कवर करती है जिनमें वादी (Plaintiff) किसी...

राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 11 से 14– प्रश्नों के संदर्भ, हाईकोर्ट से मत, भिन्न मतों का एवं अभिलेखों का संधारण
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 11 से 14– प्रश्नों के संदर्भ, हाईकोर्ट से मत, भिन्न मतों का एवं अभिलेखों का संधारण

प्रस्तावनाराजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 राज्य के भीतर भूमि राजस्व प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था को नियंत्रित करने वाला एक प्रमुख अधिनियम है। इसकी प्रारंभिक धाराओं में राजस्व बोर्ड की स्थापना, उसकी शक्तियों और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। जैसे कि हमने पहले देखा, धारा 9 में अधीनस्थ न्यायालयों पर बोर्ड का सामान्य पर्यवेक्षण निर्धारित है, जबकि धारा 10 में बोर्ड द्वारा मामलों को एकल सदस्य या पीठ के माध्यम से कैसे सुना जाएगा, यह स्पष्ट किया गया है। अब हम उन धाराओं को समझते...