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राजस्थान कोर्ट फीस और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 48 और 49: उन Suits का मूल्य निर्धारण जिनके लिए कोई विशेष प्रावधान मौजूद नहीं है
राजस्थान कोर्ट फीस और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 48 और 49: उन Suits का मूल्य निर्धारण जिनके लिए कोई विशेष प्रावधान मौजूद नहीं है

धारा 48 का उद्देश्य उन वादों (Suits) की वैल्यू तय करना है जिनके लिए इस अधिनियम (Act) या किसी अन्य कानून (Law) में स्पष्ट रूप से कोई वैल्यू निर्धारण का तरीका नहीं दिया गया है।उपधारा (1) कहती है कि यदि किसी वाद (Suit) की वैल्यू तय करने के लिए अदालत की अधिकारिता (Jurisdiction) के उद्देश्य से कोई विशेष प्रावधान मौजूद नहीं है, तो उस वाद की वैल्यू वही मानी जाएगी जो कोर्ट फीस (Court Fees) निकालने के लिए मानी जाती है। यानी, जिस रकम के आधार पर कोर्ट फीस ली जाती है, वही रकम अदालत की अधिकारिता तय करने के...

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 29 30 और 31 में बताए गए राजस्व अधिकारियों और पटवारियों से जुड़े प्रावधान
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 29 30 और 31 में बताए गए राजस्व अधिकारियों और पटवारियों से जुड़े प्रावधान

धारा 29 – अधिकारियों की अस्थायी अनुपस्थिति में कार्यभार का प्रबंधनधारा 29 एक ऐसी स्थिति के बारे में है जब कोई राजस्व अधिकारी अस्थायी रूप से अपने कार्य से अनुपस्थित हो जाता है। यह अनुपस्थिति किसी भी कारण से हो सकती है, जैसे – अवकाश पर जाना, बीमार होना, या अन्य प्रशासनिक कारणों से कुछ समय के लिए कार्य से दूर रहना। इस धारा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारी की अनुपस्थिति के दौरान उसके कार्यालय का कार्य बाधित न हो और जनता को कोई असुविधा न हो। इस धारा में दो प्रकार की स्थितियाँ बताई गई हैं।...

राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 25: राजस्व न्यायालयों और अधिकारियों की शक्तियाँ और कर्तव्य
राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 25: राजस्व न्यायालयों और अधिकारियों की शक्तियाँ और कर्तव्य

राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 के अंतर्गत, विभिन्न राजस्व अधिकारियों और न्यायालयों को विशिष्ट शक्तियाँ और कर्तव्य सौंपे गए हैं। धारा 25 विशेष रूप से यह निर्धारित करती है कि कौन-सा अधिकारी अपने क्षेत्र में कौन-कौन से कार्य करेगा, उसकी सीमाएँ क्या होंगी और उसके अधिकार कितने व्यापक होंगे। इस लेख में हम धारा 25 के प्रत्येक उपखंड को विस्तार से सरल भाषा में समझेंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके।धारा 25(1) – संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी और तहसीलदार के अधिकार और कर्तव्यधारा...