जानिए हमारा कानून
एक्सप्लेनरः कैसे मिलती है भारतीय नागरिकता, कैसी होती है खत्म
नागरिकता अधिकारों का गट्ठर है, जो व्यक्ति और राज्य के बीच संबंधों को परिभाषित करती है। भारत में मौलिक अधिकारों और कई वैधानिक अधिकारों का उपभोग भारतीय नागरिकता होने पर निर्भर हैं।जन्म और वंश से नागरिकतादुनिया भर के देश नागरिकता की दो अवधारणाओं का पालन करते हैं: 1-'jus soli' (मिट्टी का अधिकार) या जन्मसिद्ध नागरिकता 2-'jus sanguinis' (रक्त का अधिकार) या वंश द्वारा नागरिकता। पहले मॉडल में, माता-पिता की राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना उन सभी को नागरिकता दी जाती है] जो देश की सीमा के भीतर पैदा...
जानिये क्या है गर्भपात को लेकर भारत में कानून और गर्भावस्था की किस अवधि तक यह होता है वैध?
चिकित्सा शब्दावली के अनुसार, 'गर्भपात' (Abortion), 'गर्भावस्था' (Pregnancy) की समाप्ति है। भारत में गर्भपात के कानून को गर्भ का चिकित्सभकीय समापन अधिनियम, 1971 (Medical Termination of Pregnancy- MTP Act) के तहत नियंत्रित किया जाता है। शब्द 'गर्भपात' जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है, जन्म से पहले गर्भावस्था का समापन है। दूसरे शब्दों में, जब पूर्ण रूप से विकसित होने से रोकने के उद्देश्य से मातृ गर्भाशय से एक विकासशील भ्रूण को समाप्त किया जाता है तो यह गर्भपात (Abortion) कहलाता है। गौरतलब है कि...
बीमा कानून, दुर्घटना मृत्यु और मुआवजा, जानिए अदालत के प्रमुख निर्णय
यद्यपि सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन 'दुर्घटना क्या है'यह हमेशा से दिलचस्प न्यायिक चर्चाओं के केंद्र में रहा है। सामान्य रूप से समझा जाता है कि दुर्घटना एक अप्रत्याशित घटना है, जो सामान्य रूप से घटित नहीं होती, बल्कि जिससे अप्रिय, दुखद या चौंकाने वाले परिणाम सामने आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 'श्रीमती अलका शुक्ला बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम' मामले में अपना फैसला सुनाते हुए इस पहलू पर विस्तार से चर्चा की है। इन दिनों जीवन बीमा पॉलिसियों में 'दुर्घटना मृत्यु लाभ' की शर्त बहुत ही आम बात है।...
क्या अदालत अग्रिम जमानत के लिए नगद राशि जमा कराने का आदेश दे सकती है? जानिए सुप्रीम कोर्ट की राय
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ही याचिकाकर्ता की चार याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 (2) के तहत अग्रिम जमानत देने की शर्त के रूप में नकदी जमा करने की अनुमति है, लेकिन इस तरह के अधिकार का इस्तेमाल पूर्ण संयम से साथ किया जाना चाहिए तथा जमा की जाने वाली राशि अत्यधिक या दुष्कर नहीं होनी चाहिए। मौजूदा मामले में महिला याचिकाकर्ता भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराध की अभियुक्त थी। यह आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने कारोबार के...
क्या कहता है अधिवक्ता अधिनियम 1961, जानिए खास बातें
शादाब सलीमवकीलों की हड़ताल अधिकांश अधिवक्ता अधिनियम (एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट) की मांग को लेकर होती है। एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की अपनी पृथक मांगें है लेकिन भारतीय संसद ने वकीलों से संबंधित एक अधिनियम बना रखा है जिसे अधिवक्ता अधिनियम 1961 के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम का विस्तार संपूर्ण भारत पर है। क्या है अधिवक्ता अधिनियम 1961- यह अधिनियम भारतीय विधि व्यवसायियों के लिए बनाया गया है। यह भारतीय वकीलों के लिए एक संपूर्ण सहिंताबद्ध विधि है जो समस्त भारत के वकीलों का निर्धारण करता है। यह...
जानिए पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश
हैदराबाद में महिला डॉक्टर से बलात्कार के बाद जलाकर हत्या करने के चार आरोपियों की मुठभेड़ को ' फर्जी' बताते हुए जांच की मांग को लेकर दो याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। पहली दो वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जी एस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने अपनी याचिका में मांग की है कि इस मुठभेड़ पर पुलिस टीम के मुखिया समेत सभी अफसरों पर FIR दर्ज कर जांच कराई जानी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ये जांच सीबीआई, SIT, CID या किसी अन्य निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराई जाए जो तेलंगाना...
क्या है उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम और अयोध्या विवाद से इसका क्या सम्बन्ध?
शशांक शेखर मिश्र अयोध्या- रामजन्मभूमि मामला जब सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था तो उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का अक्सर ज़िक्र आया और जब 9 नवंबर 2019 को अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया तो इस अधिनियम का बड़े पैमाने पर ज़िक्र हुआ। उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991 को संसद द्वारा पूजा स्थलों के जबरन परिवर्तन पर रोक लगाने के उद्देश्य से पारित किया गया था। अधिनियम की पृष्ठभूमि स्वतंत्रता के दो वर्ष बाद ही, 1949 में बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रख दी गईं। इससे...
जानिए वकीलों को अपनी सेवाओं का विज्ञापन देने की अनुमति क्यों नहीं है? समझिये प्रतिबंध से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें
भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग, बार काउंसिल में वकील के तौर पर नामांकित होने के लिए आवेदन करते हैं। इसके पश्च्यात, इस पेशे में अपना नाम बनाने की आकांक्षा के साथ वे वकालत शुरू करते हैं। लेकिन न तो कानून पेशा अपनाने वाले लोगों को और न ही लॉ फर्मों को अपने पेशे का विज्ञापन करने का अधिकार प्राप्त है। दरअसल वकीलों को ऐसा कुछ भी करने से प्रतिबंधित किया जाता है, जो भावी मुवक्किलों को प्रभावित कर सकता है। भारत में अधिवक्ताओं को बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए नियमों के तहत उनकी सेवाओं या...
क्या वकील क्लाइंट द्वारा फीस न दिए जाने की स्थिति में उसके कागज़ात वापस करने से मना कर सकते हैं?
जैसा कि हम जानते हैं कि वकालत एक पेशा है, यह कोई व्यवसाय नहीं और इस पेशे का उद्देश्य, लोगों की सेवा करना है। एक पेशे की अहमियत को समझाते हुए, रोस्को पाउंड ने कहा था: "ऐतिहासिक रूप से, पेशे में 3 विचार शामिल हैं: संगठन (Organisation), सीखने और सार्वजनिक सेवा की भावना। ये आवश्यक हैं। इसके अलावा, आजीविका प्राप्त करने का विचार, इसके साथ है (पर अधिक महत्वपूर्ण नहीं)।" कानूनी पेशा अपनाने वाले व्यक्तियों पर, समाज में कानून के शासन को बनाए रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ...
फ्लोर टेस्ट क्या होता है एवं क्या है इसकी उपयोगिता: जानिए सरकार कैसे साबित करती है बहुमत
महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन एवं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (MAV) सरकार, आज राज्य के विधानसभा में एक फ्लोर टेस्ट (Floor Test) का सामना करेगी। हालांकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल, भगत सिंह कोश्यारी ने बहुमत साबित करने के लिए उद्धव ठाकरे को 3 दिसंबर तक का वक्त दिया था। गौरतलब है कि एनसीपी नेता दिलीप वालसे पाटिल, जिनके नाम की सिफारिश मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल से की, वे इस दौरान सदन के प्रो-टेम स्पीकर होंगे। प्रो-टेम स्पीकर के पद और कार्य के बारे में जानने के...
घरेलू हिंसा कानून पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले [2006-2019]
महिलाओं की सुरक्षा के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005, 26 अक्टूबर 2006 को लागू किया गया था। अधिनियम का उद्देश्य "परिवार के भीतर किसी भी तरह की हिंसा की शिकार महिलाओं को संविधान के तहत प्रत्याभूत अधिकारों को अधिक प्रभावी संरक्षण प्रदान करना" है।
प्रो-टेम स्पीकर कौन होता है और क्या होती हैं उसकी जिम्मेदारियां? जानिए महत्वपूर्ण बातें
'प्रो-टेम स्पीकर' में 'प्रो-टेम' (Pro-tem) शब्द लैटिन भाषा के शब्द 'प्रो टैम्पो र' (Pro Tempore) का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ होता है- 'कुछ समय के लिए'। वास्तव में, राज्य विधानसभाओं या लोकसभा के स्पीकर के पद पर आसीन कार्यचालक/कार्यवाहक (ऑपरेटिव) व्यक्ति, जो अस्थायी रूप से यह पद धारण करता है, उसे ही 'प्रो-टेम स्पीकर' कहा जाता है। एक 'प्रो-टेम स्पीकर' को, आम चुनाव या राज्य विधानसभा चुनावों के बाद, नए स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुने जाने तक सीमित अवधि के लिए कार्य करना होता है। यदि केंद्र में...
वयस्क महिला नाबालिग लड़के से शादी करने पर भी सजा से मुक्त क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने की व्याख्या
बाल विवाह निषेध अनिधियम, 2006 की धारा नौ में बाल विवाह करने वाले बालिग पुरुष के लिए सजा का प्रावधान है। इसके तहत "18 वर्ष से अधिक आयु का बालिग पुरुष बाल विवाह का अनुबंध करता है, उसे अधिकतम दो साल तक सश्रम कारावास की सजा, या एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है या दोनों ही सजा हो सकती है।" सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक फैसले में व्यवस्था दी है कि 2006 के अधिनियम की धारा 9 में लिखित '18 वर्ष से अधिक आयु का बालिग पुरुष बाल विवाह का 'अनुबंध' करता है' को '18 वर्ष से अधिक आयु का बालिग पुरुष बाल...
क्या एक नाबालिग को आवश्यकताओं की आपूर्ति करने वाला व्यक्ति प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है? जानिए क्या कहता है कानून
जैसा कि हमने पिछले लेख अर्ध-संविदा क्या होती है एवं अनुचित सम्पन्नता के सिद्धांत का इससे क्या है संबंध? में जाना है कि 'अर्ध-संविदा' (Quasi Contract) एक ऐसी स्थिति है, जो पक्षों पर कानून के अनुसार दायित्वों या अधिकारों को लागू करती है, न कि पक्षों द्वारा तय संविदा की शर्तों के अनुसार। इसके अंतर्गत अदालत द्वारा एक पक्ष के दूसरे व्यक्ति के प्रति दायित्व का निर्धारण किया जाता है, जहां पक्षों के बीच कोई वास्तविक संविदा मौजूद नहीं है।यह पार्टियों के आचरण, आपसी संबंध और इस संभावना पर आधारित है...
प्रॉक्सी वकील को पैरवी करने का अधिकार है? जानिए क्या कहता है कानून
फाइलिंग काउंसेल (मुकदमा दायर करने वाले वकील) की ओर से प्रॉक्सी काउंसेल (प्रतिनिधि वकील) अक्सर खुद को पहचान के संकट में फंसे पाते हैं, क्योंकि 'प्रॉक्सी काउंसेल' शब्द का अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में कोई उल्लेख नहीं है। अधिवक्ता अधिनियम या न्यायालय का कोई भी नियम किसी वकील को विधिवत वकालतनामा पर हस्ताक्षर किये बगैर किसी पक्ष की ओर से पेश होने का अधिकार नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 2004 में स्पष्ट शब्दों में कहा था कि न तो कोई पक्ष और न ही कोई अधिवक्ता प्रॉक्सी वकील...
क्या कोई ऐसा व्यक्ति जो वक़ील नहीं है, अदालत में किसी मुक़दमे की पैरवी कर सकता है? जानिए क्या कहता है कानून
क्या कोई ग़ैर-वक़ील व्यक्ति किसी मुक़दमादार की पैरवी करने के लिए क़ानून की अदालत में पेश हो सकता है? या क्या कोई मुक़दमादार किसी ऐसे व्यक्ति को अदालत में अपनी पैरवी करने के लिए कह सकता है जो वक़ील नहीं है? इस आलेख में इन्हीं बातों को स्पष्ट किया गया है। क़ानूनी व्यवस्था एडवोकेट्स एक्ट की धारा 30 में कहा गया है कि ऐसा कोई भी वक़ील जिसका नाम राज्य की सूची में शामिल है उसे सुप्रीम कोर्ट सहित किसी भी अदालत में किसी भी ट्रिब्यूनल या व्यक्ति जिसको क़ानूनी तौर पर सबूत लेने को अधिकृत किया गया...












![घरेलू हिंसा कानून पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले [2006-2019] घरेलू हिंसा कानून पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले [2006-2019]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/11/28/500x300_367252-790kbjclxtw2b5ldpmbi7zjefjnzyrlwb1l4529404.jpg)




